blogid : 1 postid : 1123163

इस भंयकर श्राप के कारण इन्द्र के पूरे शरीर पर निकल आई थी हजार योनि

Posted On: 16 Dec, 2015 Others में

Pratima Jaiswal

  • SocialTwist Tell-a-Friend

हिन्दू पुराणों और वेदों में मनुष्य को अपनी पांचों इन्द्रियों को नियंत्रण में रखकर कर्म करने  की सलाह दी गई है. इसके पीछे कारण ये है कि इन्द्रियों को नियंत्रित न कर पाने की स्थिति में मनुष्य अपने कर्मो से विमुख होकर पाप की ओर बढ़ जाता है क्योंकि इन्द्रियां केवल तृप्ति चाहती हैं. ऐसा भी माना जाता है कि आज धरती पर जितने भी पाप हो रहे हैं उसका कारण मनुष्यों द्वारा अपनी इन्द्रियों को काबू में न कर पाना है. वहीं काम और क्रोध ऐसे दो संवेग हैं जिनके उत्पन्न होने से कई अन्य बुराईयां जन्म लेती है. काम और क्रोध से जुड़ी हुआ ऐसा ही प्रसंग हमें पद्ममपुराण में मिलता है जिसमें अपनी कामवासना के कारण देवराज इन्द्र गौतम ऋषि के क्रोध के भागी बने थे.


cover


Read : कैसे रावण की मृत्यु की वजह बने ये चार श्राप?


इन्द्र के अधिकतर चित्रों में उनके शरीर पर असंख्य आंखें बनी हुई दिखाई देती है. वास्तव में वो आंखें गौतम ऋषि के श्राप का परिणाम है. इन्द्र को मिले एक भंयकर श्राप से जुड़ी हुई पद्ममपुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार देवराज इन्द्र स्वर्गलोक में अप्सराओं से घिरे रहने के बाद भी कामवासना से घिरे रहते थे. एक दिन वो धरती पर विचरण कर रहे थे. तभी उन्होंने देखा कि एक कुटिया के बाहर गौतम ऋषि की पत्नी देवी अहिल्या दैनिक कार्यों में व्यस्त हैं. अहिल्या इतनी सुंदर और रूपवती थी कि इन्द्र उन्हें देखकर मोहित हो गए. इस तरह इन्द्र रोजाना देवी अहिल्या को देखने के लिए कुटिया के बाहर आने लगे. धीरे-धीरे उन्हें गौतम ऋषि की दिनचर्या के बारे में पता चलने लगा. इन्द्र को अहिल्या के रूप को पाने की एक युक्ति सूझी. उन्होंने सुबह गौतम ऋषि के वेश में आकर अहिल्या के साथ कामक्रीडा करने की योजना बनाई क्योंकि सूर्य उदय होने से पूर्व ही गौतम ऋषि नदी में स्नान करने के लिए चले जाते थे.


gautamaepisode


Read : इस श्राप के कारण जब यमराज को भी बनना पड़ा मनुष्य


इसके बाद करीब 2-3 घंटे बाद पूजा करने के बाद आते थे. इन्द्र आधी रात से ही कुटिया के बाहर छिपकर ऋषि के जाने की प्रतीक्षा करने लगे. इस दौरान इन्द्र की कामेच्छा उनपर इतनी हावी हो गई कि उन्हें एक और योजना सूझी. उन्होंने अपनी माया से ऐसा वातावरण बनाया जिसे देखकर ऐसा प्रतीत होता था कि सुबह हो गई हो. ये देखकर गौतम ऋषि कुटिया से बाहर चले गए. उनके जाने के कुछ समय बाद इन्द्र ने गौतम ऋषि का वेश बनाकर कुटिया में प्रवेश किया. उन्होंने आते ही कहा अहिल्या से प्रणय निवेदन किया. अपने पति द्वारा इस तरह के विचित्र व्यवहार को देखकर पहले तो देवी अहिल्या को शंका हुई लेकिन इन्द्र के छल-कपट से सराबोर मीठी बातों को सुनकर अहिल्या भी अपने पति के स्नेह में सबकुछ भूल बैठी. दूसरी तरफ नदी के पास जाने पर गौतम ऋषि ने आसपास का वातावरण देखा जिससे उन्हें अनुभव हुआ कि अभी भोर नहीं हुई है. वो किसी अनहोनी की कल्पना करके अपने घर पहुंचे. वहां जाकर उन्होंने देखा कि उनके वेश में कोई दूसरा पुरुष उनकी पत्नी के साथ रति क्रियाएं कर रहा है.


indra eyes


Read : हनुमान ने नहीं, देवी के इस श्राप ने किया था लंका को भस्म

ये देखते ही वो क्रोध से व्याकुल हो उठे. वहीं दूसरी ओर उनकी पत्नी ने जब अपने पति को अपने सामने खड़ा पाया तो उन्हें सारी बात समझ में आने लगी. अंजाने में किए गए अपराध को सोचकर उनका चेहरा पीला पड़ गया. इन्द्र भी भयभीत हो गए. क्रोध से भरकर गौतम ऋषि ने इन्द्र से कहा ‘मूर्ख, तूने मेरी पत्नी का स्त्रीत्व भंग किया है. उसकी योनि को पाने की इच्छा मात्र के लिए तूने इतना बड़ा अपराध कर दिया. यदि तुझे स्त्री योनि को पाने की इतनी ही लालसा है तो मैं तुझे श्राप देता हूं कि अभी इसी समय तेरे पूरे शरीर पर हजार योनियां उत्पन्न हो जाएगी’. कुछ ही पलों में श्राप का प्रभाव इन्द्र के शरीर पर पड़ने लगा और उनके पूरे शरीर पर स्त्री योनियां निकल आई. ये देखकर इन्द्र आत्मग्लानिता से भर उठे. उन्होंने हाथ जोड़कर गौतम ऋषि से श्राप मुक्ति की प्रार्थना की. ऋषि ने इन्द्र पर दया करते हुए हजार योनियों को हजार आंखों में बदल दिया. वहीं दूसरी ओर अपनी पत्नी को शिला में बदल दिया. आपने भी गौर किया होगा इन्द्र को ‘देवराज’ की उपाधि देने के साथ ही उन्हें देवताओं का राजा भी माना जाता है लेकिन उनकी पूजा एक भगवान के तौर पर नहीं की जाती. इन्द्र द्वारा ऐसे ही अपराधों के कारण उन्हें दूसरे देवताओं की तुलना में ज्यादा आदर- सत्कार नहीं दिया जाता…Next


Read more :

किस गर्भवती ने दिया था सीता को राम से वियोग का श्राप

स्त्रियों से दूर रहने वाले हनुमान को इस मंदिर में स्त्री रूप में पूजा जाता है, जानिए कहां है यह मंदिर और क्या है इसका रहस्य

क्या माता सीता को प्रभु राम के प्रति हनुमान की भक्ति पर शक था? जानिए रामायण की इस अनसुनी घटना को



Tags:                                 

Rate this Article:

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5 (0 votes, average: 0.00 out of 5, rated)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran