JagranJunction Blogs

Aapki Awaaz, Aapka Blog. Your Voice, Your Blog.

60,001 Posts

73891 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 1 postid : 1310530

सफलता

Posted On: 30 Jan, 2017 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Safalta_shubham_singh

आज की पीढ़ी को सफलता नहीं मिल पा रही है, उन्हें दिशा नहीं मिल पा रही सफल होने की।

हम हमेसा कहते रहते है की हम यह कार्य करते हे इसमें सफल नहीं हो पा रहे, फिर दूसरा कार्य ऐसे ही चलता जाता है और हम परेशान की सफल हो कैसे ?

दुसरो से पूछते है हम कौन सा कार्य करे जिसमे हम सफल हो सके ?

पहली बात तो यह है की आपको कोई भी व्यक्ति नहीं बता सकता की आप कौन से कार्य में सफल हो सकते है।

यह आपको खुद पता होना चाहिए की आपकी रूचि किस कार्य में है और आप किस कार्य में अपना बेस्ट दे सकते है।

गंभीर परेशानी आज की यही है की किसी ने लक्ष्य नहीं बनाया है। बस जिधर देखा की दूसरे खुश है तो उसी कार्य पर निकल पड़े और जब उस कार्य से निराशा मिली तो फिर दूसरा कार्य पकड़ लिया।  बस भटक रहे है।

जिसमे आपकी रूचि हो उस कार्य के बारे में विचार करो, उसको अपना लक्ष्य बनाओ। जिसमे आप अपना बेस्ट दे सकते हो वह कार्य करो।

हम हमेसा कहते है हमे सफलता चाहिए पर कभी यह सोचा की हमसे सफलता क्या चाहती है या सफलता होती क्या है ?

कभी नहीं।

फुर्सत ही कहा है हमे यह सब सोचने की, कभी अपने बारे में सोचने से समय बचे तो तभी तो सोचेंगे।

क्या है आखिर सफलता ?

जो आपने चाहा वो आपको मिल जाना क्या यह सफलता है ?

दूसरे को देखा की वह उस कार्य में सफल है तो में भी वही कार्य करु क्या यह सफलता है ?

किसी ने आपकी बुराई की और आप उसको दिखने के लिए कुछ कार्य करे क्या यह सफलता है ?

अपने आप से ही प्रश्न कीजिये की सफलता होती क्या है ?

सफलता एक दृण संकल्प और प्रेम अपने कार्यो के प्रति। अगर दृण संकल्प और प्रेम होगा कार्यो में तभी आप सफल हो सकेगें अन्यथा नहीं।

दृण संकल्प हमे ऊर्जा देता है कार्य करने की, बड़ी रोचक घटना घटती है संकल्प ऊर्जा कि हमारे जीवन में, अगर आप अपने जीवन को ध्यान पूर्वक जी रहे हो तो आपने अनुभव किया होगा पर आज कल ध्यान से जीता कौन है।

आपने कोई विचार किया और फिर उस विचार पर निर्णय किया की बस अब मुझे यही कार्य करना है इसके आलावा और कुछ नहीं।

अब चाहे आंधी,तूफान आये इस रास्ते पर लोग चाहे कुछ भी कहे में यह कार्य ही करूगां।

चाहे मुझे कितनी ही निराशा हाथ लगे पर में एक दिन इस कार्य में सफल जरूर होंगा।

यह जो आपका निर्णय होता है यह आपको पूरी तरह बदल देता है, जब आप निर्णय करते है तो हमारे अंदर से एक ऊर्जा उत्पन होती है की बस अब मुझे यही कार्य करना है और आप कार्य  करने के 3-4 दिन बाद नहीं बदलते।

आप उसी क्षण बदल जाते है, जिस क्षण आपने निर्णय किया फिर आप ऊर्जा से भरे होते है, पहले वाले व्यक्ति नहीं रह जाते।

इसी तरह प्रेम हमे ध्यान की ऊर्जा देता है, हमारा ध्यान कार्यो में एकत्रित कर के रखता है।

हमारा ध्यान दूसरी तरफ नहीं भटकता, विचार करने की ऊर्जा देता है कार्य के विचार से उसके रास्ते निर्मित होते है, हमे साथ भी उन्ही लोगो का अच्छा लगता है जो उस कार्य में रूचि रखते है, फिर हम उस कार्य में रूचि रखने वाले लोगो से मित्रता बनाते है चारो तरफ हमारा वातावरण उसी कार्य का होता है।

जैसे हमे किसी चीज से प्यार होता है फिर हम उसी चीज के बारे में सोचते है उसको अपने से अलग नहीं होने देते उसका ध्यान रखते है ऐसे ही प्रेम हमे कार्यो में रखता है।

दृण संकल्प और प्रेम के बाद आती है एक और चीज सीख, अनुभव की आप अपने कार्यो से क्या सीख रहे है, अपनी गलतियों से क्या सीख रहे है।

ऐसा तो है नहीं की आज आपने कार्य शुरू किया और कल आपको सफलता मिल जाएगी।

कार्यो में गलतिया भी होती है निराशा भी हाथ लगती है,यह नहीं की कार्य  में निराशा हाथ लगी तो आप कार्य ही छोड़ दे और दूसरे कार्य की तरफ चले जाये।

जब कभी निराशा हाथ लगे तो एक बार पीछे अपने कार्य के बारे में सोचना की मुझसे गलती कहा हो गयी।

फिर उस गलती से सीखना और उस सीख को आगे अपने कार्यो पर लागु करना।

आप अपनी गलतियों से क्या सीखते है और उन्हें कैसे आगे कार्यो पर लागु करते है यह सब आप पर निर्भर करता है।

एक बात ध्यान में रखिये की जो आपका जीवन है, यह दूसरे व्यक्तियों के लिए एक सन्देश होता है और यह सन्देश हमारे कार्यो पर निर्भर करता है की हम अच्छा कार्य करे तो सन्देश अच्छा जायेगा और बुरा करेगें तो बुरा सन्देश जायेगा।

जैसे हम सफल व्यक्तियों की जीवनी पड़ते है, उनके विचार पड़ते है और बुरे व्यक्तियों से तो हम दूर ही रहते है।

दृण संकल्प, प्रेम, सीख यह तीन चीजे सफलता हमसे चाहती है।

कार्य छोटा हो या बड़ा यह तीनो चीज बहुत जरुरी है किसी भी कार्य में सफल होने के लिए।

क्या आपके कार्यो में यह तीनो है?

छोटी-छोटी बाते है इन्हें ध्यान में रखिये, इन्हें अनुभव कीजिये।

जीवन का अर्थ ही जीवन को अनुभव करना है।

जब भी कोई विचार करो तो उसको अपने मन, दिमाग, दिल से सुनना ना की दुसरो से सुनना।

जितना ही दुसरो से सुनोगे उतना ही आप भटकोगे। दुसरो के बजाय अपने मन, दिमाग, दिल का इस्तमाल करे।

For Shubham singh Hindi suvichaar join on facebook page https://www.facebook.com/shubhauthor/



Tags:               

Rate this Article:

0 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 50 votes, average: 0.00 out of 5 (0 votes, average: 0.00 out of 5, rated)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran