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बनारस में यहां आलिशान तरीके से होती है मेंढक की शादी, ऐसा होता है नजारा

Posted On: 9 Mar, 2017 Social Issues में

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बैंड-बाजे की धुन पर नाचते-गाते बराती, घोड़ी पर बैठा दूल्हा, बरात आने का इंतजार करती दुल्हन, ये नजारा आपने हर शादी में देखा होगा. दूल्हा और दुल्हन को देखकर कभी आपने कहा होगा कि क्या जोड़ी है. लेकिन शायद ही आप कभी ऐसी शादी में गए होंगे,जिसमें दूल्हा मेंढक बना हो और दुल्हन मेंढकी बनती है. लेकिन भारत के एक क्षेत्र में ऐसा रिवाज है जहां पर मेंढकों की शादी होती है और लोग बाराती बनकर खुद को शौभाग्यशाली मानते हैं.


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दअसल देश के कई ऐसे राज्य हैं जहां पर हर साल गर्मियों के दौरान मेंढक और मेंढकी की शादी करवाई जाती है, ताकि सूखी और बंजर धरती पर बारिश की बूंदे बरस सकें. इनमें उत्तर प्रदेश का बनारस, सोनभद्र, साथ ही बुंदेलखंड, महाराष्ट्र और असम भी शामिल है.



बनारस भारत के उन जगहों में गिना जाता है, जहां पर बड़े ही धूम-धाम से मेंढकों की शादी करवाई जाती है. बनारस एक ऐसा क्षेत्र है जहां पर देश विदेश से लोग घूमने आते हैं और इस खूबूसरत नगरी का आनंद उठाते हैं. बनारस की सबसे बड़ी पहचान यहां की कला और संस्कृति है जो सदियों पुरानी है. साथ ही यहां बहती मां गंगा इस नगरी को और खूबसूरत बनाती है. भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यहीं के सांसद हैं.



Frog Marriage



बारिश नहीं होने और जिले को सूखने से बचाने के लिए अक्सर यहां के लोग मेंढक और मेंढकी की शादी की परंपरा को निभाते हैं. ये शादी बड़े ही आलिशान तरीके से होती है तथा इसके लिए मुर्हूत निकाला जाता है. मेंढक और मेंढकी दोनों अलग-अलग गांव या मोहल्ले के होते हैं तथा इस शादी में पंडित को भी बुलाया जाता है. शादी होने से पहले मेंढकी की हल्दी की रस्म निभाई जाती है और मेढ़क के साथ भी पूरी परंपरा निभाई जाती है.



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जहां एक तरफ बैंड बाजे के साथ मेंढक की बारात निकलती है वहीं मेंढ़की को लाल चुनरी पहनाकर उसे दुल्हन की तरह सजाया जाता है और उसपर थोड़ा श्रृंगार भी किया जाता है. इस शादी में शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. साथ ही जो लोग शादी का आयोजन करवाते हैं वो लोग अपने रिश्तेदारों को भी आमंत्रण देते हैं.



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शादी के दौरान वो सारी रस्म होती है, जो एक हिंदू शादी में निभाई जाती है. जैसे वर माला, सिदूंर दान और सात-फेरे. शादी के बाद दूल्हा और दुल्हन को खाना भी खिलाया जाता है और आखिर में दोनों को विदा कर तालाब में छोड़ दिया जाता है…Next


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