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बावरी दुनिया का बाबरी विवाद......

Posted On: 22 Apr, 2017 कविता में

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जैसा की इतिहास की किताबे बोलती हैं भारत में मुगलों का आगमन इरादतन ग़लत था क्योंकि अपना घर छोड़कर दूसरे के घर में पाँव पसारना कतई अच्छी नियत का संकेत नही हो सकता ! मुगलों ने भारत में अपना शक्ति प्रदर्शन भरपूर किया जिसके बलबूते काफ़ी जगह पर कब्जा कर अपना क्रूर साम्राज्य स्थापित किया ! उनका क्रूर साम्राज्य दिन-ब-दिन संपन्न होता गया जिसके परिणामस्वरूप उनके अनेकों वंशजों ने अपने अपने शासनकाल में भारत की अखंडता और एकता पर तेज तलवार चलाई ! प्रारंभिक 1500 के आसपास तैमूरी राजवंश के राजकुमार बाबर के द्वारा मुगल साम्राज्य की नीव रखी गयी ! बाबर के आदेश पर ही 1527 में एक मस्जिद का निर्माण किया गया जिसका नामकरण ही बाबर के नाम पर करके बाबरी मस्जिद किया गया ! मुगलों ने भारत के इतिहास के साथ खूब छेड़छाड़ की ! आज जिसको हम अपने इतिहास से जोड़कर देखते हैं वो हमारा वास्तविक इतिहास नही हैं क्योंकि हमारा वास्तविक इतिहास तो मुगलों की नापाक हरकतों से डर कर ऐसे अंधेरे में चला गया जहाँ से उसको निकालना बहुत बड़ी चुनौती हैं आज के इस तेज़ी से विकसित हो रहे समाज के लिए ! उनकी नापाक हरकतों का ही एक नतीजा जो हमारे सामने हैं वो हैं राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का विवाद जो ना जाने कितने वर्षों से न्यायालय की चौखट पर भीख माँग रहा हैं इंसाफ़ की ! अगर संपूर्ण इतिहास में जाया जाएँ तो ये एक वक़्त को जाया करने वाली बात होगी क्योंकि इतिहास गवाह हैं जब जब इतिहास और अतीत में हम गये हैं तब तब वर्तमान पर ख़तरा मंडराया हैं, भविष्य का रास्ता धुँधला नज़र आया हैं ! इस विवाद के चलते ना जाने कितने अनेको बड़े बड़े कांड हो गये कितनी बार धर्म की चिंगारी भयानक आग में परिवर्तित हो गयी, अनेको जान गयी और अंत में एक कसक मन में रह गयी जो रह रह कर खुद से सवाल करती हैं कि मैं हिंदू हूँ या मुसलमान ? वक़्त की बर्बादी का सबसे अच्छा उदाहरण हमारे न्यायालय में देखने को मिलता हैं ! राम मंदिर और बाबरी मस्जिद विवाद जिसके चलते भारत की शांति ख़तरे में हैं, जिसके चलते भारत की आंतरिक कलह भारत की अनेकता में एकता की विशेषता पर सवाल उठा रही हैं ऐसे गंभीर मुद्दे पर न्यायालय एक ऐसा फ़ैसला नही ले पाया हैं जिस फ़ैसले को सुनकर सबको लगे कि वाकई न्यायालय में इंसाफ़ होता हैं ! वर्तमान समय में हर कोई अपने हक के लिए लड़ रहा हैं, जीवन को सिर्फ़ अधिकारों की लड़ाई के लिए सुपुर्द कर दिया हैं, खुद अभी तक ये नही जान पाया हैं कि आख़िर हम लड़ किस बात पर रहे हैं, जीवन का उद्देश्य बस लड़ना रह गया हैं ! भगवान ने भी अक्ल की आपूर्ति इतनी कम करदी हैं मानवों में कि हर मुद्दे को स्वाभिमान की लड़ाई समझने लग गये हैं ! अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि हैं ये सर्वविदित सत्य हैं, क्योंकि शास्त्र कभी झूठ नही बोलते ,शास्त्रों की रचना कलियुग में ना होकर सत्य युग, त्रेता युग व द्वापर युग में हुई हैं ! इसका प्रमाण देना बेवकूफी से बढ़कर कुछ नही हैं ! इसका प्रमाण देने से पहले हमें ये पता कर लेना चाहिए कि हम कौन हैं ? हमारा आगाज़ कहाँ से हुआ और हमारा अंत क्या हैं ? हमे अगर अब कुछ पता ही करना हैं तो पता करो हमारे वास्तविक इतिहास का जो सदियों से गुमनामी के अंधेरे में जी रहा हैं, पता करो कि अल्लाह और राम का धर्म क्या हैं ? पता करो कि अल्लाह और राम भी आपस में इंसानों की तरह लड़ते झगड़ते हैं क्या? पता करो कि मरणोपरांत मानव क्या धर्म के आधार पर अलग अलग पहुँचता हैं ? पता करो क्या क़ुरान की आयते राम को आती नही या अल्लाह को गीता के श्लोक याद नही ? अब तो होश में आओ ए अक्ल के मुफ़लिसो…. कही ये जिंदगी न्यायालय के निर्णय के इंतजार में ही ना गुजर जाएँ…..बहुत हो गयी अब धर्म की लड़ाई…..कभी गोधरा हो गया….कभी जंग दादरी हो गयी…मस्जिद तो बाबरी थी या नही?… पर दुनिया सच में बाबरी हो गयी ! लड़ना हैं तो अपने आप से लॅडो….मन में पलते पाप से लॅडो !
अब न्यायालय के फ़ैसले का इंतजार मत करो और सब मिलकर न्यायालय को अपना फ़ैसला सुना दो….
कि यहाँ मंदिर बनेगा
यहाँ मस्जिद बनेगी
सुबह की अज़ान होगी
शाम की आरती होगी !
मिलेगें गले जब दो सपूत
एक ही माँ के बिछड़े
तो खुशी से गदगद
पल पल माँ भारती होगी !
कर दो वादा न्यायालय से
अब ना कोई कलह होगी
अब ना कोई दंगा होगा !
ना लज्जाएगी मां भारती अब
लाठियों की जगह हाथों में
अब लहराता तिरंगा होगा !
अब ना मस्जिदें धराशायी होगी
ना मंदिर में अब ताले होंगे !
अब जमकर मरहम होगी उन घावों पर
ग़लतफहमी में दिल ने जो अब तक पाले होंगे !
बुरा समय हो या आपदा कोई
मिलकर सब साथ खड़े होंगे !
दिन वो दूर नही जब हिंद के दुश्मन
कदमों में अपने मृत पड़े होंगे !
आतंक के सौदागर
जब जिंदगी हार जाएँगे !
अपने सिपाही जब
सारे दुश्मन मार आएँगे !
हर तरफ अमन होगा
ना सीमा पर जब कोई रखवाली होगी !
सच कहता हैं “जीत”
तब ही असली ईद होगी
तब ही दिल से दीवाली होगी !

अंत में इन पंक्तियों के साथ लेख को विराम देना चाहूँगा….
हिंदू मुस्लिम हैं आँखे दौ, मगर पेगंबर तो एक हैं !
हैं लहर से लहर जुदा, मगर समंदर तो एक हैं !
अलग अलग जाती धर्म से मिलकर बना हैं समाज
हैं चाचा बाबा के रिश्ते जुदा, मगर घर तो एक हैं !
जितेंद्र अग्रवाल “जीत”

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