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अरविन्द केजरीवाल: हम बेवफ़ा हरगिज़ न थे, पर हम वफ़ा कर ना सके... जंक्शन मंच

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दिल्ली पूरे देश के दिल की धड़कन है और इन दिनों दिल्ली की राजनीति में जो सुनामी आई हुई है, उसने सभी के दिल की धड़कनें तेज कर दी हैं. सोचा इसी मुद्दे पर कुछ लिखा जाए, पर ज़रा नए ढंग से और लोगों को संगीत और गीत के साथ जोड़कर लिखा जाए, क्योंकि स्वरों में डूब कर लोगों के मन को छूना आसान होता है. दिल्ली की राजनीतिक नब्ज टटोलकर और वहां उठ रही विभिन्न तरह के स्वरों की पहचान कर एक काल्पनिक मंच मैंने तैयार किया है, जहाँ पर हिंदी फ़िल्मी गीतों के माध्यम से आम लोग, राजनीतिक दल और कुछ नेता अपने मन की बात कहेंगे. आम लोगों को भगवान यानि जनता जनार्दन कहा जाता है, इसलिए सबसे पहले अपने काल्पनिक मंच पर जनता को गाने का मौका दे रहा हूँ, जो एक गीत के माध्यम से नेताओं के बारे में उनकी जो सोच है, उसे व्यक्त करेगी. लीजिये सुनिए, जनता जनार्दन मेरे काल्पनिक मंच पर क्या गा रही है…

सैंया झूठों का बड़ा सरताज निकला
मुझे छोड़ चला, मुख मोड़ चला
दिल तोड़ चला बड़ा धोखेबाज निकला
सैंया झूठों का …
परदेसी की प्रीत बड़ी होती बुरी
जैसे मीठी ज़हर भरी हो तीखी छुरी
मैं तो भोली सी वो चालबाज निकला
मुझे छोड़ चला …
सैंया झूठों का …

जनता किस नेता के लिए ये गीत गा रही थी, पता नहीं. हो सकता है कि सभी नेताओं के लिए गा रही हो. भोली जनता को सब ज्ञानी लोग समझाते हैं कि अपने से प्यार करो, अपने परिवार, समाज, गुरु और भगवान से प्रेम करो, पर भूल से भी नेताओं से प्रेम मत काना, लेकिन जनता है कि ज्ञानियों का कहा मानती ही नहीं और किसी न किसी नए पुराने नेता के छलावा और उसके दिखाए लुभावने स्वप्नजाल में फंस दिल दे ही बैठती है. जनता के गाये गीत पर गौर करें तो जनता नेताओं को जहर भरी तीखी छुरी क्यों समझती है, ये तो नेताओं का धोखेबाजी वाला आचरण देख समझ में आ गया, लेकिन उन्हें परदेशी क्यों समझती है. शायद इसलिए कि जब एक प्रदेश का मुखिया बन सत्तासुख भोगने लगते हैं, तब उनका चंचल और लोभी मन उन प्रेदशों में ज्यादा विचरने लगता है, जहाँ उन्हें सत्ता नहीं मिली हुई है. खैर, छोड़िये इस बात को, कपिल मिश्रा अब मंच पर गा रहे हैं…

अरे हमका का समझत हो, का कहा का समझत हो
अरे हमका ऐसा वैसा ना समझो हम बड़े काम की चीज़
ओ बाबु बड़े काम की चीज़
कौन बुरा है कौन भला है हमको है तमीज़
हमका ऐसा वैसा ना समझो हम बड़े काम की चीज़…
अरे एक दिन हम गए जंगल माँ, उहाँ मिल गए हमका डाकू
ससुरा मिल गए हमका डाकू किसीके हाथ माँ बर्छा भाला, किसीके हाथ माँ चाकू
हमने पूछा ओ हमने पूछा, कितने हो तुम तब वो बोले दस
हम कहा बस, का कहा बस
ऐसा हाथ जमाया दो गज धरती माँ गए धस धस धस
हमका ऐसा वैसा ना समझो हम बड़े काम की चीज़…

कपिल मिश्रा किस जंगल में गए थे, ये तो वही जानें. फिलहाल इन दिनों दिल्ली के राजनीतिक जंगल में उनकी खूब चर्चा हो रही है. शनिवार को वो दिल्ली की केजरीवाल सरकार की कैबिनेट से बाहर कर दिए, इसके बाद क्रोधित कपिल मिश्रा ने मुख्यमंत्री केजरीवाल पर ऐसे सनसनीखेज आरोप लगाए कि दिल्ली के राजनीतिक गलियारे में जबरदस्त भूकंप आ गया. आम आदमी पार्टी से लेकर मुख्यमंत्री तक दहल उठे. कपिल मिश्रा ने दावा किया है कि सत्येंद्र जैन ने मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को उनकी आंखों के सामने 2 करोड़ रुपये कैश दिए थे. इसके साथ ही उन्होंने केजरीवाल के करीबी मंत्री सत्येंद्र जैन पर यह आरोप लगाया कि उन्होंने केजरीवाल के रिश्तेदारों को 50 करोड़ की जमीन दिलाई है. कपिल मिश्रा को आप पार्टी से बाहर कर दिया गया है, लेकिन अब वो अन्य पार्टियों के लिए बड़े काम की चीज बन गए हैं. आगे चर्चा करने से पहले आइये भाजपा का गायन सुन लें…

आ देखे जरा किसमें कितना है दम
जमके रखना कदम मेरे साथिया…
आगे निकल आये हम वो पीछे रह गये
उपर चले आये हम वो नीचे रह गये
वो हमसे हारेंगे हम बाजी मारेंगे
हम उनसे क्‍या है कम
आ देखे जरा किसमें कितना है दम…

भाजपा का ख़ुशी से नाचना गाना जायज भी है, क्योंकि राजनीति और कूटनीति के क्षेत्र में मोदी शाह की अत्यंत निपुण जोड़ी, बेईमानी और भ्रष्टाचार से मुक्त बिना भेदभाव के सबका विकास करने वाली पीएम मोदी की विशिष्ट कार्यशैली, जनता का असीम प्रेम और कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम ने भाजपा को देश के आधे से भी ज्यादा राज्यों में सत्ता के सिंहासन पर चढ़ा दिया है. आज के समय में भाजपा सभी राजनीतिक दलों को अधिकतर राज्यों में खुली चुनौती दे रही है कि ‘आ देखे जरा किसमें कितना है दम…’ दिल्ली में एमसीडी चुनाव जीतने के बाद भाजपा का लक्ष्य अब भविष्य में दिल्ली राज्य की सत्ता हथियाना है. इसके लिए उसे केजरीवाल सरकार पर बड़े हमले करने के लिए बड़े मुद्दे चाहिए, जो फिलहाल उसे कपिल मिश्रा ने दे दिया है. कपिल मिश्रा बीजेपी के लिए ठीक वैसे ही मददगार बन गए हैं, जैसे रावण द्वारा दुत्कार के भगाये जाने पर विभीषण भगवान राम के लिए सहायक बने थे. आइये अब अपने काल्पनिक मंच पर अरविन्द केजरीवाल के मुख से ये गीत सुनते हैं…

हम बेवफ़ा हरगिज़ न थे,
पर हम वफ़ा कर ना सके
हमको मिली उसकी सजा,
हम जो ख़ता कर ना सके…
तुमने जो देखा सुना, सच था मगर
कितना था सच, ये किसको पता
जाने तुम्हे मैने कोई धोखा दिया
जाने तुम्हे कोई धोखा हुआ
इस प्यार में सच झूठ का,
तुम फ़ैसला कर ना सके…

अरविन्द केजरीवाल कई राज्यों में चुनाव हारने के बाद अब दिल्ली में भी अपनी राजनीतिक जमीन खोते जा रहे हैं. उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि उनसे गलती क्या हो रही है और जनता उनसे दिनोंदिन नाराज क्यों होती चली जा रही है? इधर कपिल मिश्रा प्रकरण ने हार के जख्म से बनी कोढ़ में खुजली कर दर्द व जख्म और बढ़ाने का ही कार्य किया है. आम आदमी पार्टी से भी निलंबित कर दिए गए पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा के द्वारा लगाए गंभीर आरोपों पर दो दिन तक चुप रहने बाद दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सच्‍चाई अब सबके सामने आ जाएगी. उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि सच्‍चाई की जीत होगी और इसकी शुरुआत दिल्‍ली विधानसभा के विशेष सत्र से होगी. इसका अर्थ तो यही है कि केजरीवाल सदन में अपनी सफाई रखेंगे. विधानसभा में 60 के लगभग उनके विधायक होंगे, जिनका पूरा समर्थन और सहयोग उन्हें मिलेगा. अपना मनोबल बढ़ाने के लिए शायद यही सहारा वो ढूंढ रहे थे. अंत में यही कहूंगा कि हे प्रभु.. इतनी उथलपुथल के बाद अब आगे सब शुभ और शान्तिप्रद हो…

(डिस्क्लेमर (पूर्ण अस्वीकरण): ब्लॉगर मित्रों और कृपालु पाठकों से स्पष्ट रूप से निवेदन है कि ये सब गीत किसी भी राजनीतिक पार्टी या नेता ने किसी भी मंच पर नहीं गाया है. लेख में वर्णित ‘काल्पनिक मंच’ मनोरंजन करने के उद्देय से की गई एक कल्पना मात्र है. लेख में दिए गए फ़िल्मी गीतों के बोल क्रमश: ‘दो आँखें बारह हाथ’, ‘अदालत’, ‘रॉकी’ और ‘शालीमार’ आदि फिल्मों से साभार लिए गए हैं.)

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आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106.
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