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मासूम बच्चियों से बलात्कार की बढ़ती घटनाएं: दिव्यांग तक सुरक्षित नहीं..- न्यूज़ बर्थ

Posted On: 15 May, 2017 Junction Forum में

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इस साल फरवरी माह में इलाहाबाद में 13 साल की दिव्यांग बालिका सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई. बालिका को टाफी दिलाने के बहाने अपराधी कब्रिस्तान के भीतर ले गए वहां पर बालिका के साथ दरिंदगी की सारी हदें पार कीं और उसे बुरी तरह से जख्मी व लहूलुहान हालत में छोड़कर भाग गए. हालाँकि बाद में दोनों आरोपी स्थानीय जनता के सहयोग से गिरफ्तार कर लिए गए. दरिंदगी की शिकार बालिका को पुलिस डफरिन अस्पताल ले गई, वहां पर भर्ती से लेकर इलाज तक में टालमटोल हुई. बच्ची को आठ टांके लगे. वहां की महिला डॉक्टर ने संवेदनहीनता दिखाते हुए बच्ची के गरीब परिजनों और पुलिस से कहा कि लड़की को अब यहां से एसआरएन अस्पताल ले जाओ वरना उसे बाहर फेंक दिया जाएगा. तुरंत दूसरे अस्पताल में ले के जाने पर टांके टूटने का खतरा था, जिससे बालिका की हालत और बिगड़ सकती थी, इसलिए इंस्पेक्टर ने एसपी सिटी को फोन कर सारी बात बताई तो उन्होंने फ़ौरन सीएमओ से बात की. तब सीएमओ ने आदेश दिया कि बालिका को रात भर डफरिन में रखा जाए.

सीएमओ ने आदेश दिया तब जाकर महिला डॉक्टर ने बालिका को भर्ती किया, लेकिन रात भर परिजनों को खरी-खोटी सुनाती रही. ये हालत है जनाब, हमारे सरकारी अस्पतालों की, संवेदनहीन ऐसे डॉक्टर हैं यहाँ पर. फरवरी माह में ही हरिद्वार में मानसिक रूप से दिव्यांग एक किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया था. पंद्रह वर्षीय एक किशोरी के मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का लाभ उठाकर दो आरोपियों ने झाडी में ले जाकर, अपने घर में तथा किशोरी के घर पर जाकर दुष्कर्म किया. किशोरी के पेट में दर्द होने पर उसके परिजन जब उसे एक निजी अस्पताल में ले गए, तब उन्हें पता कि वो चार महीने की गर्भवती है. इस मामले के दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. मई महीने में राजधानी लखनऊ में एक निजी स्कूल में 5 साल की मासूम बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है. जहां पर एक निजी स्कूल में पढ़ने वाली एक पांच साल की मासूम छात्रा के साथ स्कूल के ही चार कर्मचारियों ने लगातार 7 महीने तक यौन उत्पीड़न किया.

ये चारों कर्मचारी बच्ची को डराधमकाकर उसके साथ यौन उत्पीड़न कर रहे थे. मासूम बच्ची ने डर के कारण अपने घर में भी किसी को नहीं बताया. यौन अंगों में संक्रमण के कारण जब बच्ची की तबियत ज्यादा खराब हुई तब उसे डॉक्टर को दिखाना पड़ा. जब बच्ची की मां ने डरी सहमी बच्ची को हौसला देते हुए उससे पूछा तो उस मासूम बच्ची ने सारी बात बताई. पुलिस में मामला दर्ज होते ही सभी आरोपी फरार हो गए. इस मामले ने निजी स्कूलों के गैरजिम्मेदाराना प्रशासन के ऊपर भी सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. इसी मई माह में अभी कुछ रोज पहले पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गुरुवार को रात में एक युवक द्वारा पांच वर्षीय दिव्यांग मासूम बच्ची के साथ बलात्कार किया गया. एक महिला अपनी पांच वर्षीय मूकबधिर बेटी के साथ घर के बाहर सो रही थी, तभी उसे एक युवक अगवा कर खेत में ले गया और उसके साथ बलात्कार किया. बेहोशी की हालत में लहूलुहान मासूम बच्ची को छोड़कर वो कुछ दूर पर जारी वैवाहिक समारोह में शामिल हो गया. लोग उसे संदेह से देखने लगे कि ये है कौन?

तभी अपनी बेटी को खोजते हुए परिजन भी वहां पहुंच गए. आरोपी युवक की लस्तपस्त हालत देखकर लोगों को शक हुआ और वो ख़तरा भांप भागने लगा तो लोंगो ने दौड़ाकर उसे दबोच लिया. आरोपी की जमकर पिटाई के बाद लोंगो ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया. तलाशी के दौरान उसके वस्त्र और शरीर पर लगे खून के निशान देख सभी समझ गए कि इसी शैतान ने दिव्यांग बच्ची के साथ बलात्कार किया था. उस बच्ची से बतात्कार करने वाला शैतान इस वारदात को अंजाम देने से पहले उसी विवाह समारोह से नौ साल की एक नाबालिक बालिका को सौ रुपये देकर तथा उसे बहला फुसलाकर एकांत में ले गया था. जब वो उससे गलत हरकतें करने लगा, तब समझदार बच्ची ने शोर मचाना शुरू कर दिया. जब लोग आये तो वो रात के अंधरे का फायदा उठाकर वहां से भाग निकला. दूसरी बच्ची से कुकर्म करने के बाद वो फिर उसी वैवाहिक समारोह में आकर शामिल हो गया था, जहाँ पर जनता के सहयोग से उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

बच्ची को उपचार के लिए पहले कबीरचैरा अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन लेकिन उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डाक्टरों ने उसे बीएचयू ट्रामा सेंटर के लिए रेफर कर दिया. बच्ची गंभीर हालत में इस समय बीएचयू ट्रामा सेंटर में भर्ती है. मजदूरी करने वाले गरीब मां-बाप की पांच साल की मूक बधिर बच्ची हवस में अंधे एक शैतान के हैवानियत की इस कदर शिकार हुई है कि कुछ लिखना तक मुश्किल हो रहा है. उसके शरीर में कई जगह पर गहरे घाव और चोट के निशान है. निर्भया के दरिंदों को फांसी की सजा मिलने के बाद देशवासियों को लगा था कि अब दरिंदे बलात्कार की घटना को अंजाम देने से डरेंगे और इस तरह की दुखद व लज्जाजनक घटनाएं अब होनी बंद हो जाएंगी, लेकिन हुआ इसका उल्टा है. निर्भया काण्ड के बाद पूरे देशभर में बलात्कार की घटनाएं बढ़ीं हैं. अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया केस में अपराधियों की सजा-ए-मौत की सजा को बरकरार रखने का फैसला सुनाया है, जो बहुत अच्छा निर्णय है. किन्तु मासूम बच्चियों के प्रति दिनोदिन बलात्कार की घटनाएं जिस हिसाब से बढ़ रही हैं, उससे नहीं लगता है कि निर्भया के दरिंदों को फांसी देने भर से कम होंगी या रुकेंगी,

निर्भया जैसे कई बलात्कार काण्ड अब तक हो चुके हैं. अभी कुछ रोज पहले हरियाणा के सोनीपत में निर्भया कांड जैसी घटना हुई है. अपराधियों के भीतर कानून का कोई खौफ ही नहीं रह गया है. समाज में कानून का भय स्थापित करने के लिए बलात्कारियों को अब भीड़ के सामने सार्वजनिक रूप से फांसी की सजा देनी चाहिए और ये सजाएं भी घटना होने के एक दो माह के भीतर हो जानी चाहिए. हमें यह बात याद रखनी चाहिए कि न्याय नहीं मिलने पर या न्याय में देरी होने पर ही गरीब लोग नक्सलवाद, माओवाद अथवा त्वरित न्याय देने वाले अन्य संगठनों की ओर आकर्षित होते हैं. भले ही कानूनी या संवैधानिक रूप से ऐसे संगठनों की कोई मान्यता नहीं है, बल्कि उन्हें तो देशद्रोही माना जाता है, लेकिन हम सबलोग जानते हैं कि अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में वो अपनी एक समानांतर सरकार चला रहे हैं. कई बार न्याय में देरी होने या न्याय नहीं मिलने के बहाने लोग कानून अपने हाथ में लेते हैं ओर अपराधियों को खुद ही सजा देने पर उतारू हो जाते हैं. यह भी सही नहीं है, इससे समाज में अराजकता उत्पन्न होगी. ये सारी विकट परिस्थितियां देश की शान्ति, तरक्की और अच्छे भविष्य के लिए ठीक नहीं हैं.

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आलेख और प्रस्तुति= सद्गुरु श्री राजेंद्र ऋषि जी, प्रकृति पुरुष सिद्धपीठ आश्रम, ग्राम- घमहापुर, पोस्ट- कन्द्वा, जिला- वाराणसी. पिन- 221106.
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