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तेरी खामोश आखें

Posted On: 16 May, 2017 कविता में

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तेरी आँखों का मयख़ाना  ,तो करता है मोहब्बत का ख़ामोशी से इकरार
फिर क्या है वजह की , तेरे लवों  पर है यह झूठा इनकार
तेरे होठों  की चमकती सुर्खियां  , तो देती है मुझे खुला सन्देश
आओ इन्हें जी भरकर चूम लो , जब तक तुम ना हो जाओ मदहोश ….
तेरे गुलाबी गालों  की ऊँची नीची घाटियाँ , जिनमें  महक रही चाहत की तन्हाइयाँ
जैसे बुला रही है मुझे ,आओ अपने लवों  से कर दो इन्हें सराबोर
कब तक रहेंगी यह भी ग़मगीन , इन्हें  भी अपनी मोहब्बत के रंग से कर दो रंगीन…..
तेरी मासूम अदाएं  जो अक्सर , कर जाती है बेवफाई मेरे जज्बातों से
उस पर  तू भी नहीं करती कबुल की, तू मेरी महबूबा इन झिझकते लवों  से
है मेरी आशिकी का जूनून, की मैं इनसे वफ़ा करने पर  आमदा हूँ
तू देती नहीं एक  इशारा भी ,पर मैं हूँ तेरे इन्तजार में पलकें  बिछाये खड़ा हूँ ….
तेरी उलझी सी लहराती जुल्फें, जो कह जाती है तेरे दिल का हाल
इसे मेरी मज़बूरी समझो है या मेरा डर , पर है मेरा भी दिल बेहाल
तुम बस अपने जहन में मेरा अक्श  बसा कर रख लो
मैं तो हूँ तुम्हारी जन्मों  से , अब बस इसी बात से सब्र कर लो ….
तेरी गहरी मुस्कान के पीछे ,जैसे कुछ जाने अनजाने से राज छिपे है
जो बात तेरे दिल में है वह , इन होठों से अभी बहुत परे है
जैसे कहते है वह मुझसे , है अगर मुझसे मोहब्बत तुझे सच्ची
मेरे बिना कहे भी तुम समझ ही लोगे मेरे लवों  की चुप्पी ….

Hilary-Duff-Pic-Drawing

तेरी आँखों का मयख़ाना  ,तो करता है मोहब्बत का ख़ामोशी से इक़रार

फिर क्या है वजह की , तेरे लवों  पर है यह झूठा इनकार

तेरे होठों  की चमकती सुर्खियां  , तो देती है मुझे खुला सन्देश

आओ इन्हें जी भरकर चूम लो , जब तक तुम ना हो जाओ मदहोश ….

तेरे गुलाबी गालों  की ऊँची नीची घाटियाँ , जिनमें  महक रही चाहत की तन्हाइयाँ

जैसे बुला रही है मुझे ,आओ अपने लवों  से कर दो इन्हें सराबोर

कब तक रहेंगी यह भी ग़मगीन , इन्हें  भी अपनी मोहब्बत के रंग से कर दो रंगीन…..

तेरी मासूम अदाएं  जो अक्सर , कर जाती है बेवफाई मेरे जज़्बातों  से

उस पर  तू भी नहीं करती कबुल की, तू मेरी महबूबा इन झिझकते लवों  से

है मेरी आशिकी का जूनून, की मैं इनसे वफ़ा करने पर  आमदा हूँ

तू देती नहीं एक  इशारा भी ,पर मैं हूँ तेरे इन्तजार में पलकें  बिछाये खड़ा हूँ ….

तेरी उलझी सी लहराती जुल्फें, जो कह जाती है तेरे दिल का हाल

इसे मेरी मज़बूरी समझो है या मेरा डर , पर है मेरा भी दिल बेहाल

तुम बस अपने जहन में मेरा अक्श  बसा कर रख लो

मैं तो हूँ तुम्हारी जन्मों  से , अब बस इसी बात से सब्र कर लो ….

तेरी गहरी मुस्कान के पीछे ,जैसे कुछ जाने अनजाने से राज़  छिपे है

जो बात तेरे दिल में है वह , इन होठों से अभी बहुत परे है

जैसे कहते है वह मुझसे , है अगर मुझसे मोहब्बत तुझे सच्ची

मेरे बिना कहे भी तुम समझ ही लोगे मेरे लवों  की चुप्पी ….

By

Kapil Kumar

Awara Masiha



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