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तीन साल,मीडिया रचित ,श्री १०८ योगी आदित्य ..स्त्रोत्र

Posted On: 26 May, 2017 हास्य व्यंग में

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व्यंग्य ..हिन्दुओं के सनातन धर्म मैं जब कोई शुभ कार्य किया जाता है तो सर्व प्रथम नव ग्रहों की पूजा स्तुति होती है | नवग्रहों मैं सूर्य यानि आदित्य ही सर्व शक्ति शाली हैं अतः उन्हीं से शुभ कार्य मैं स्तुति आरम्भ की जाती है | आदित्य यानि सूर्य एक ऐसा गृह है जिसकी पूजा स्तुति उदय काल से ही आरम्भ हो जाती है | ……………………………………………………………………………………..भगवन राम हों या भगवन श्रीकृष्ण कोई भी बिना योगी आदित्य (सूर्य ) स्तुति यानि ‘आदित्य हृदय स्त्रोत्र’ के शक्तिमान नहीं बन पाए | भगवन राम को भी आदित्य यानि सूर्य की उपासना से ही शक्ति प्राप्त हुयी | शत्रुओं के विनाश के लिए आदित्य हृदय स्त्रोत्र की रचना जब रामायण काल मैं या महाभारत काल मैं की गयी तभी भगवन राम और श्री कृष्ण विजयी हुए | …………………………………………………………………………………….आदित्य उदय काल मैं केसरिया रंग से प्राणियों को सुखी करते हैं | जितना वे गगन मैं उठते जाते हैं उनका ताप प्राणियों को कहीं पोषित करता है तो कहीं जला तक देता है | उदय काल का केसरिया रंग पुण्यात्माओं के लिए शांति प्रदान करता है | समझदार पुण्यात्मा तो उनके ताप से बचने के लिए उदय काल से ही आदित्य यानि सूर्य को अर्ध्य देकर और ‘ॐ आदित्याय नमः’ का जप करके उनके प्रकोप से शांति अनुभव कर लेते हैं | पापी निसाचर तो उनके उदय से पहिले ही अपने सुरक्षित अँधेरे स्थानों को ढूंढ लेते हैं | पापियों के लिए तो आदित्य काल बन कर ही उदय होते हैं | जो उनके उदय काल मैं पोषण पाना चाहते हैं उनके लिए ‘ॐ आदित्याय नमः’ मंत्र का जप करते रहना जरूरी हो जाता है | अन्यथा उनका अपने अस्तित्व को बनाये रखना कठिन हो जाता है | आदित्य यानि सूर्य प्रकृति का कारक है ,ब्रह्मा विष्णु महेश भी आदित्य के बिना अपना कर्तव्य निभाने मैं असहाय हो जाते हैं | समस्त गृह नक्षत्रों ,ब्रह्माण्ड के और समस्त जीवों के ,प्रकृति के कारक ,आदित्य उनके पोषक हैं | किन्तु कुपित होने पर वे ही उनके संहारक ,प्रताड़क भी हो जाते हैं | ………………………………………………………………………………………………………………..पापी निशाचरों के लिए एक ही मार्ग है की वे छुपे रहें ,अन्यथा आदित्य ताप से बचना उनके लिए कठिन होगा | जहाँ आदित्य का ताप नहीं पहुँच पाता या कमजोर रहता है वहीँ पापियों का पोषण होता जाता है | ………………………………………………..साधारण पापी तो आदित्य के प्रकाश मात्र से ही नष्ट हो जाते हैं अन्य ताप को झेलते नष्ट होते जाते हैं | भीषण से भीषण पापी भी आदित्य ताप को नहीं सहन कर पाते हैं | …………………………………………………………………………………………………………………………………भगवन राम और भगवन श्री कृष्ण की तरह, पापियों के सर्वनाश के किये ही नरेंद्र मोदी जी ने साक्षात् आदित्य यानि सूर्य के महत्त्व को समझते योगी आदित्य नाथ को पृथ्वी पर अवतरित किया है | भ्रष्टाचारियों और पापियों मैं हा हा कर मचा हुआ है | उनके लिए पाप मार्ग को त्यागना या आदित्य हृदय स्त्रोत्र का पाठ करना ही एक मात्र मार्ग रह गया है | जो साधु पुण्यात्मा लोग आदित्य का महत्त्व ताप को समझते हैं वे पहिले से ही आदित्य हृदय स्त्रोत्र का पाठ करते रहे हैं | ………………………………………………….एक आदित्य हृदय स्त्रोत्र रामायण काल मैं रचा गया था दूसरा महाभारत काल मैं | अब पापियों के नाश के लिए और आदित्य के ताप से बचने के लिए तीसरा आदित्य हृदय स्तोत्र मोदी युग मैं रचा जायेगा ताकि जन सामान्य अपना लोक परलोक सुधार सके | ………………………………………………………जो लोग उदय काल मैं ही आदित्य ताप से बचने हेतु आदित्य हृदय स्त्रोत्र का पाठ आरम्भ कर चुके हैं ,उन्हें आदित्य के भयंकर दोपहरी का ताप झेलने की शक्ति मिलती रहेगी ,किन्तु जो मुर्ख पापी आदित्य ताप को नहीं पहिचान रहे हैं और अपने आपको नहीं सुधार रहे हैं वे आदित्य ताप मैं अवश्य ही झूलज कर नष्ट होते जायेंगे | ………………………………………………………विश्व हो या गृह नक्षत्र कहीं भी किसी नरेंद्र ,सुरेंद्र ,पुरुषोत्तम ,या देव यक्ष ,राक्षस ,भूत पिशाच ,यहाँ तक की ब्रह्मा विष्णु और महेश सभी को आदित्य हृदय स्त्रोत्र के पाठ से अपने अस्तित्व को बचाना ही बुद्धिमता होगी | ………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………….महान कवि शुक्राचार्य स्वरुप मीडिया , अपने विभिन्न चैनलों से आदित्य हृदय स्त्रोत्र का पाठ लगातार करते अपने लोक परलोक सुधार रहे हैं | आम जनता को भी इस परम कल्याणमय आदित्य हृदय स्त्रोत्र का पाठ दिन मैं तीन बार करते रहना चाहिए | ………………………………………………………………………………………………………………………………………….युद्ध से थके हारे भगवन राम को अगस्त मुनि ने इस आदित्य हृदय स्त्रोत्र का पाठ करके युद्ध मैं शक्ति प्रदान की थी | जिसके बाद उन्होंने पापी अत्याचारी रावण का वध किया था | ………………………………………………………………………………………………………………………………………..इसी प्रकार अमित शाह और मोदी जी ने इस आदित्य हृदय स्त्रोत्र के महत्त्व को समझते ॐ आदित्याय नमः से इसका पाठ आरम्भ किया | शुक्राचार्य मीडिया द्वारा रचित यह आदित्य हृदय स्त्रोत्र जनता मैं शांति प्रदान कर रहा है | ……………………………………………………………………………………………………………………………………..यदि आदित्य हृदय स्त्रोत्र का पाठ कठिन लगे तो विभिन्न मीडिया चैनलों मैं उसका पाठ होता रहता है जिसको देख सुनकर भी अपने मन को शांति प्रदान की जा सकती है | यह परम पवित्र और समस्त शत्रुओं का नाश करने वाला है | परम कल्याणमय ,मंगलों का मंगल करने वाला, सब पापों का नाश करने वाला है | यह चिंता और शोक को मिटाने वाला तथा आयु बढ़ने वाला उत्तम साधन है | ………………………………………………………………………………………………………………………….देवताओं और असुरों दोनों से नमस्कृत ,आदित्य यानि सूर्य समस्त पराक्रम के कारक हैं जिनका सूर्य जन्म कुंडली मैं कमजोर है या जो सूर्य के अति ताप से झुलस रहे हों उन्हें शुक्राचार्य यानि मीडिया विरचित सूर्य यानि आदित्य के सहत्र नाम स्त्रोत्र या आदित्य हृदय स्त्रोत्र का पाठ अवश्य करते ,सुनते या देखते रहना चाहिए | अपने उदय के १०० दिनों मैं शुक्राचार्य द्वारा १०० नामों से स्थापित यह स्त्रोत्र सभी जन मानस के लिए कल्याणकारी होगा | …………………………………………………………………………………………………………………………..यदि इस स्त्रोत्र का पठान पठान या श्रवण केसरिया वस्त्रों को योगी आदित्यनाथ जी की तरह पहिनकर किया जाये तो सिद्धियों को जल्दी प्रदान करेगा | सूर्य सा तेज पाना सुगम हो जायेगा | ऐसा जनता मानने लगी है तभी ऐसे वस्त्रों की मांग बहुत बढ़ती जा रही है | संसद हो या बहार ऐसे वस्त्रों के धारक की वाणी मैं सरस्वती मानी जाती है | ………………………………………………………………………………………..सूर्य के सात रंगों मैं एकाकार सफ़ेद रंग कभी स्वच्छता का प्रतिक होता था अब उसी के केसरिया रंग को स्वच्छता का प्रतिक माना जाता रहेगा |धीरे धीरे सफ़ेद खादी वस्त्र भी केसरिया रंग मैं रंगते जायेंगे | अब लाल बत्ती की क्या जरूरत होगी जब पहिनावा ही केसरिया होगा | सभी केसरिया रंग से रंगे होंगे | न कोई बड़ा होगा न छोटा | हवाई चप्पल वाले भी हवाई जहाज मैं केवल २५०० रूपये मैं सफर कर सकेगा | ……………………………………………………………………………………………………………………………..सन्यास की परिभाषा को भी बदल देने की शक्ति इस स्रोत्र की है | सन्यासी होना अब किसी माता पिता के लिए सम्मान शांति कारक कर देगा यह स्त्रोत्र | भगवन श्रीकृष्ण की गीता अब बच्चों को पाठ्यक्रम मैं पढ़ाई जाएगी और माता पिता निश्चिन्त होंगे कि बच्चा योगी सन्यासी बन सूर्य (आदित्य ) सा चमकेगा | | पहिले भयभीत रहते थे माता पिता कि गीता के पठान पठान से कहीं सन्यासी न बन जाये ..| …………………………………………………………………………………………………………………………सदियों से पापियों निसाचरों का नाश करते आये आदित्य कोई कुछ दिनों महीनों या सालों के नहीं वे तो प्रतिदिन उदय होते रहते हैं उनके अस्ताचल को जाने की कामना करना मूर्खता ही होगी क्यों की फिर वे पुनः उदित होते रहेंगे और पापियों का नाश करते रहेंगे | अतः इस कल्याण कारी स्त्रोत्र का पाठ दिन मैं तीन बार सुबह दोपहर और शाम करते रहना चाहिए | ………………………………………….अब युग आदित्य का ही होगा अपने चरम पर सभी ग्रहों को निश्तेज कर देंगे | आदित्य का तेज ,ताप असहनीय होगा तो छुपते छुपाते छाँव ढूंढनी पड़ेगी | ………………………………………………………..ॐ शांति शांति शांति



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