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जाकी रही भावना जैसी

Posted On: 28 May, 2017 Social Issues में

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एक गाँव के पास एक नदी के बीचोबीच एक छोटा सा टापू था। उस टापू पर केवल एक हनुमानजी का मंदिर था। नदी साल में ८ महीने बहुत कम पानी रहता था और बाकि ४ महीने तो सूखी ही रहती थी.  उस मंदिर में ज्यादा लोग आते नहीं थे. रोज़ शाम को अन्धेरा होने से पहले एक पंडितजी एक छोटी सी नाव लेकर मंदिर में आते और भगवान को प्रसाद चढ़ा कर एक दिया जला कर चले जाते. पंडित जी के अलावा वहां १ और व्यक्ति आता था और वो था गाँव का एक शैतान और निक्कमा लडका.  जैसे ही पंडित जी बाहर जाते वो लड़का आता, सबसे पहले हनुमान जी की गदा से उनकी मूर्ती के पीछे जोर से मारता, फिर मंदिर के दिए से सिगरेट जलाता और आराम से मंदिर के अहाते हैं बैठ कर कश लगाता. सिगरेट ख़तम होने पर वो सारा प्रसाद चट करके वहां से चला जाता.  कई सालो तक ये दौर चलता रहा.  पुजारी और उस लड़के ने एक भी दिन अपना कार्यक्रम टूटने नहीं दिया।

एक दिन उस गाँव में आन्धी और तूफ़ान के साथ ज़ोरदार बारिश हुई. सारे नदी और नाले पानी से बहने लगे.  किसी की भी अपने घर से निकलने की हिम्मत नहीं हुई। पंडितजी को बड़े दुःख से अपना इतने सालों से चलता आया नियम तोड़ना पड़ा। उन्होंने अपने अपने घर ही में ही हाथ जोड़कर हनुमान जी ने माफ़ी मांगी। लेकिन वो शैतान लड़का शाम को अपने समय पर घर के बहार निकल और आंधी और तूफ़ान की परवाह किये बिना सीधा नदी की ओर निकल पड़ा। पानी से उफनती नदी से भी वो डरा नहीं और सीधा तैरता हुआ  मंदिर में जा पहुचा। मंदिर में पहुँच कर उसने गया उठा कर जैसे ही हनुमान जी की मूर्ति पर चलायी, एक तेज़ रौशनी की किरण उसकी आँखों में आई , सामने साक्षात बजरंग बलि खड़े थे। उन्होंने कहा “बेटा तूने नियम का पालन करके मेरी भक्ति की है. तू यहाँ आकर क्या करता है उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता पर तेरे मन से मेरा वास है, तू रोज़ शाम को मेरे बारे में ही सोचता है. और आज तू मेरे दर्शन करने के लिए आंधी तूफ़ान से लढ़  कर आया है, मैं प्रसन्न हुआ मांग क्या मांगता है”.

लड़का पहले तो बहुत डर  गया, बाद में जब उसे लगा की उसे सच में वरदान मिला है ख़ुशी से नाचने लगा। अब उसके पास एक ही दुविधा थी कि क्या मांगू? पैसा या प्रसिद्धि या आदर्श पत्नी या शक्ति या सुन्दर सा घर, या राज दरबार । उसका सर घूमने लगा, जेब से सिगरेट निकाली सोचा सिगरेट पी लू तो दिमाग सही चलेगा। लेकिन फिर उसे ध्यान आया की आज पंडित दिया जलाने तो आये नहीं और सिगरेट जलाएगा कैसे . अब उसका सारा डर  चला गया था और बजरंग बलि मुस्कुराते हुए उस लड़के की तरफ देख रहे थे. थोड़ी देर तक अपनी जेब टटोलने के बाद लड़के ने बजरंगबली की तरफ देखा और कहा: “माचिस है?”. और भगवन माचिस उसके हाथ पर रख कर अदृश्य हो गये.

अगर किसी चीज़ के लिए पागलपन की हद लगन हो तो सफल होने का अवसर ज़रूर मिलता है चाहे फिर वो लगन किसी भी चीज़ की हो.  लेकिन अगर आप लगन से मुर्खता करेंगे तो वो मिला  हुआ अवसर आपको मुर्खता में ही सफलता दिलयेगा



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