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कश्मीर में, 'हाँ, मैं इंडियन हूँ...' यह कहने वाले दिल बढ़ें और सुरक्षित हो धड़कें-राजनीति

Posted On: 24 Jun, 2017 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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टीवी न्यूज चैनलों पर डीएसपी मोहम्मद अयूब पंडित की नृशंस ह्त्या पर उनके शोक संतप्त परिवार की रोती बिलखती महिलाओं को देखना बहुत दुखद था. सभी भारतियों का मन दुःख और गुस्से से भरा हुआ था. पुलिस उपाधीक्षक मोहम्मद अयूब पंडित के परिवार से जुडी एक महिला अपनी छाती पीट-पीटकर रोते हुए कह रही थी, ‘हाँ, मैं इंडियन हूँ…’ बेहद गमगीन माहौल, लड़खड़ाती जुबान और आँखों से बहते आंसू, फिर भी कोई बोले, ‘मेरा दिल है हिन्दुस्तानी.’ उस महान भारतीय महिला को सलाम कर कुछ देर के लिए निशब्द और मौन हो गया था. मुझे चिंता है, कश्मीर में जो हिन्दुस्तानी दिल धड़क रहे हैं, उनकी. ऐसे दिल धड़कने बंद नहीं होने चाहिए. कश्मीर में ऐसे ही लोग आज हिन्दुस्तान की धड़कन बने हुए हैं. जिनके सिर पर कश्मीर को आजाद कराने और इस्लामी मुल्क बनाने का जूनून सवार है, वो मोहम्मद अयूब पंडित जैसे इंडियंस के दिल पर आजादी के बाद से ही निरंतर हमले करते रहे हैं और ऐसे देशभक्त हिन्दुस्तानियों के दिलों की धड़कनों को बंद करने की नाकाम कोशिश करते रहे हैं. पुलिस उपाधीक्षक मोहम्मद अयूब पंडित की देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा को सलाम.

देशभक्त कश्मीरी हिन्दुस्तानियों के दिलों की धड़कनों को बड़े पैमाने पर बंद करने के लिए अलगाववादियों और आतंकियों ने पाकिस्तान के सहयोग से 1990 में कश्मीर घाटी को गैर मुस्लिमों से विहिन किया. 19 जनवरी 1990 को सुबह कश्मीर के हर हिन्दू घर पर आतंकियों ने धमकीभरा एक नोटिस चिपका दिया था, जिस पर लिखा था- ‘कश्मीर छोड़ के नहीं गए तो मारे जाओगे.’ सदियों से रह रहे कश्मीरी हिन्दुओं ने जब कश्मीर घाटी छोड़ने से इंकार किया तो बड़े पैमाने पर उनकी ह्त्या हुई. उनके घर जला दिए गए, उनकी माताओं-बहन-बेटियों से बलात्कार किया गया, कइयों को ज़िंदा जला दिया गया और उनके बच्चों को सड़क पर लाकर बेहद नृशंस तरीके से कत्ल कर दिया गया. उस वृहद् नरसंहार में कई हिन्दू नेता एवं अनेकों उच्च अधिकारी भी मार दिए गए. कश्मीर से 1990 में लगभग 7 लाख से अधिक कश्मीरी हिन्दुओं का विस्थापन हुआ. कश्मीरी हिन्दुओं, बौद्धों, शियाओं और सिखों को कश्मीर से निकालने का ऐसा घृणित कार्य औरंगजेब के शासन काल में भी नहीं हुआ था.

संसद, सरकार, नेता, अधिकारी, लेखक, बुद्धिजीवी, समाजसेवी और भारत के मुसलमान उस समय ये सब लोग उस नरसंहार पर चुप थे. यही वजह थी कि कश्मीर में आतंकियों का हौसला दिनोदिन बढ़ता ही गया. कश्मीरी हिन्दुओं की ह्त्या और कश्मीर घाटी से उन्हें भगाने के बाद कश्मीर में इंडियंस की चुन-चुन कर ह्त्या हो रही है, चाहे वो सेना या सुरक्षा बल के जवान हों या फिर पुलिस के जवान और अधिकारी. जी हाँ, पढ़ने सुनने में थोड़ा अजीब लगेगा, लेकिन ये एक कड़वी सच्चाई है कि पाकिस्तान से धन, हथियार और आतंकी, हर तरह का सहयोग लेकर कश्मीरी अलगाववादियों व आतंकियों ने पहले कश्मीर घाटी को गैर मुस्लिमों से विहिन किया और अब वो जो भारत से लगाव रखते हैं, ऐसे इंडियंस का सफाया कर रहे हैं. कश्मीर घाटी में आंतरिक गड़बड़ी कर हालात को खराब करना, राज्य पुलिस के सिपाहियों की हत्या करना और उन्हें पुलिस की नौकरी छोड़ने पर मजबूर करना आतंकियों का अब मुख्य मकसद है. दूसरी तरफ पाकिस्तान सीमाओं पर बड़े पैमाने पर हमले कर आतंकवादियों की निरंतर घुसपैठ करा रहा है.

ये सब कश्मीर को आजाद कराने की, उसे इस्लामी मुल्क बनाने की इनकी दशकों पुरानी योजना का एक अहम् हिस्सा है और हिन्दुस्तान के टुकड़े करने का एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है. एक तरफ जहाँ राजीव गांधी के शासन काल में 1990 तक कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद कश्मीर में अपनी मजबूत जड़े जमाया तो वहीँ दूसरी तरफ बीजेपी और पीडीपी के मौजूदा शासनकाल में ये अपने अपने चरमशिखर पर पहुँच गया है. कुछ अर्सा पहले असहिष्णुता के बहाने अवार्ड वापसी करने वाले लेखक, बुद्धिजीवी, समाजसेवी और भारत के अधिकतर मुसलमान कश्मीर के खराब हालात को लेकर आज चुप हैं. जो बोल रहे हैं वो आतंक से जूझते आर्मी चीफ को ही गुंडा और जनरल डायर बता रहे हैं. बीजेपी और कांग्रेस के नेता न्यूज चैनलों पर एक दूसरे को कश्मीर समस्या का दोषी करार देने के लिए आपस में ही लड़ रहे हैं. बारहों महीने राष्ट्रवाद का नारा बुलंद करने वाली मोदी सरकार में इतनी भी हिम्मत नहीं है कि सब अलगाववादियों को एक ट्रक में बैठाकर मुज्जफराबाद यानि पाक अधिकृत कश्मीर में छोड़ आये. सबसे बड़ी बात ये कि मोदी सरकार कब चेतेगी कि कश्मीर में, ‘हाँ, मैं इंडियन हूँ…’ यह कहने वाले दिल बढ़ें और सुरक्षित हो धड़कें. जयहिंद.



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