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योग बनाम भोग

Posted On: 24 Jun, 2017 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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योग बनाम भोग
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समय विचित्र चल रहा है. विपक्ष की राजनीति तो आज अपने सर्वाधिक निम्न स्तर को छू रही है. माहौल इतना गंदला है या बना दिया गया है कि आज किसी की सही बात का समर्थन भी आपको तत्काल प्रभाव से ‘भक्त’ की पदवी से सुशोभित कर सकता है.
मुझे कोई बताए कि जब वेंकैया नायडू यह कहते हैं कि “फ़ैशन बन चुका है किसान कर्ज़ माफ़ी ”
तो वे क्या कुछ ग़लत कहते हैं ?
क्या कर्ज़ माफ़ी किसानों की समस्या का आख़िरी निदान है ?
क्या किसी भी प्रकार की कर्ज़ माफ़ी से देश के खज़ाने पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता ?
क्या कर्ज़ माफ़ी का रोग या कहें कर्ज़ माफ़ी के ज़हरीले बीज बोने का काम पूर्ववर्ती कांग्रेसी सरकारों की अदूरदर्शिता का कुपरिणाम नहीं ?
क्या कर्ज़ माफ़ी या मुआवज़े की राजनीति समाज की सहिष्णुता को दीमक की तरह नहीं चाट रही ? सामाजिक खाई को चौड़ा नहीं कर रही ? अराजकता नहीं फैला रही ?
क्या ? क्या ? क्या ?
श्रृंखला प्रश्नों की बड़ी है और हमें ही इन प्रश्नों के उत्तर खोजने होंगे !
ऊपर मैंने समय को विचित्र बताया है. वह इसलिए क्योंकि वेंकैया जी ने जैसे ही यह कहा तुरंत उस पर सतही राजनीति होने लगी. कि भाजपा किसान विरोधी है ! कि मोदी जी किसानों के नहीं कार्पोरेट,बड़े पूंजीपतियों के हितैषी हैं ! कि भाजपा किसानों की उपज का उचित मूल्यांकन करने में असफ़ल है !
सभी प्रश्नों का एक ही उत्तर कि भारत की छाती पर सबसे ज़्यादा समय तक ‘मूँग’ दलने वाली पार्टी कांग्रेस है और आज जो हम काट रहे हैं वह इसी कथित गांधीवादी पार्टी का ही किया धरा है. इसी पार्टी द्वारा ‘उर्रा कर’ बोए गए ज़हरीले बीजों का ही प्रतिफलन है… !
‘गूंगी गुड़िया’ से लेकर ‘मौन मोहन’ तक ने अपने ‘एक्शन’ से हमारे समाज का कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं छोड़ा जिसमें लालफीताशाही,भ्रष्टाचार आदि का बोलवाला न हो ! उदारीकरण के नाम पर ‘उधारी’-करण ! कार्यालयों में दलाल संस्कृति ! ‘मॉल’ के नाम पर ‘पैदल’ को हाशिए पर ढ़केलने का षड्यंत्र ! राजनीति के नाम पर ‘तुष्टिकरण’ ! शिक्षा का व्यवसायीकरण ! शिक्षा का कम्युनिष्टीकरण !
…ये सभी छटाएं कांग्रेसी ‘पॉवर हाउस’ की ही देन है. 3 साल से आया मोदी आज के हालात पर क्यूँ और कैसे दोषी हो गया ? बरसात में भी भीगकर अनुशासित बच्चे की तरह योग करते मोदी जी तो उस भारतीय गौरव की पुनर्स्थापना करने में जुटे हैं जिसे कांग्रेसवाद ने चाचा नेहरू की सदरी में लगे लाल गुलाब की तरह मात्र शो पीस की चीज़ बनाकर रख दिया है.
वह मोदी जो आज भी 18-18 धण्टे ‘चक्करघिन्नी’ बना देश-विदेश में भाग-भागकर जनाकांक्षाओं से जुड़कर एक ऐसी कार्य संस्कृति विकसित करने में जुटा है जिसमें सबका भला हो !
को समझने के लिए भाजपाई ‘योग’ दृष्टि की ज़रूरत है किसी कांग्रेसी ‘भोग’ दृष्टि की नहीं.
…और हम इस पोस्ट का अंत विपक्ष की एक रोचक टिप्पणी से करना चाहेंगे…मायावती जी को आपत्ति है कि मोदी ‘योग’ को ‘ईवेंट’ बनाकर गरिमाहीन कर रहे हैं.
गांधी की खादी भी ईवेंट बनकर ही लाभदायक लोकप्रियता प्राप्त कर रही है.
स्वामी रामदेव पर कभी लोगों ने ‘पतंजलि’ की मार्केटिंग का आरोप जड़ा था. वही भारतीय योग रामदेव जी के प्रयास से,मोदी जी के सहयोग से,योगी आदि के स्पर्श से पूरे विश्व में श्रद्धा विश्वास की दृष्टि से न केवल देखा जा रहा है वरन तन-मन-धन से लाभप्रद भी साबित हो रहा है.
विद्या हो या कोई जनोपयोगी योजना वह विस्तार के पंखों सवार होकर ही बृहद समाज का भला करती है. जिसे जनांदोलन बनाकर ही हासिल किया जा सकता है.
यह गौरव के क्षण हैं,कांग्रेसी ‘गबन’ लूट के नहीं !
किसान विश्वास रखें मोदी जी और उनका पूरा पीएमओ हमारे कृषि प्रधान समाज की दिक्क्तों से न केवल परिचित है वरन उसके निराकरण के लिए प्रयासरत भी.
कांग्रेसी ‘रायता’ समेटते-समेटते समय तो लगेगा ही !
भाइयों-बहिनों नहीं क्या ?

– #ईशू



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