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निठारी कांड: आरोपियों पर न हो कोई रहम

Posted On: 27 Jul, 2017 Others,social issues में

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दिसम्बर 2006 की कड़ाके की सर्दी में पूरे देश के लहू को उबाल देने वाले नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड में आरोपी मनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा मिली है. स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने 20 वर्षीय पिंकी सरकार रेप और मर्डर केस में पंढेर और कोली को दोषी पाते हुए इस कांड में सजा सुनाई है. यह इस कांड का 8वां केस है, जबकि हत्या और रेप के करीब 16 मामले इन लोगों पर दर्ज है.

Nithari

शायद ही इस घटना को अभी तक कोई भूला होगा, जब एक के बाद एक नोएडा के निठारी गांव. कोठी नंबर डी-5. से नरकंकाल मिलने शुरू हुए,  उस समय पूरे देश में सनसनी फैल गई. सीबीआई को जांच के दौरान मानव हड्डियों के हिस्से और 40 ऐसे पैकेट मिले थे, जिनमें मानव अंगों को भरकर नाले में फेंक दिया गया था. कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को पुलिस ने धर दबोचा. इस मामले का खुलासा 2006 में तब हुआ जब रिंपा हलधर और पिंकी सरकार के अगवा होने का मामला नोएडा पुलिस ने दर्ज किया. पुलिस ने ढूंढने की बहुत कोशिश की, पर कायमाबी नहीं मिली. 29 दिसंबर 2006 को कोठी के पीछे कुछ नर कंकाल मिलने के बाद मामले का खुलासा हुआ. पुलिस ने जांच तेज की और कोठी के पीछे खुदाई करायी तो पिंकी और रिंपा समेत कुल 15 बच्चों के कंकाल बरामद हुए. उस कोठी में आसपास के इलाकों से 2005 से गायब हो रहे बच्चों की लगातार हत्या की जा रही थी.

पुलिस ने पंढेर व कोली को गिरफ्तार कर लिया. 3 जनवरी 2007 को केंद्र सरकार ने जांच समिति गठित की. 4 जनवरी को उत्तरप्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच से इनकार कर दिया. अंत में 10 जनवरी को सीबीआई जांच शुरू हुई. हालांकि 2007 में जब इस मामले की जांच पुलिस कर रही थी, तब कोठी मालिक के समाज के कई प्रभावी लोगों से रिश्तों के आरोप लगे थे. उस समय मीडिया में इस तरह की भी खबरें भी आयी थी कि उसके रिश्ते उस समय उत्तरप्रदेश के एक ताकतवर नेता से भी थे. लेकिन पूरे देश के लोगो में गुस्से के सामने इन दोनों नरपिचाशों का एक झूठ न चला.

आइए, एक बार फिर हम चलते हैं राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा के सेक्टर-31 के पास स्थित उस छोटे से गांव निठारी में, जहां मासूम बच्चों की चीख-पुकार और आंखों में एक खौफनाक दृश्य अभी भी उभरता हुआ दिख जाता है. करोड़पति मोनिंदर सिंह पंधेर की उस खूनी कोठी नंबर डी-5 को भला कौन भूल सकता है. कौन भूल सकता है कि इसी कोठी में इंसान के रूप में मौजूद भेड़ियों ने एक दो नहीं, बल्कि 17 बच्चों को अपना शिकार बनाकर इसी कोठी में उन्हें दफन कर दिया था. इस कोठी में रहने वाले नरपिशाच बड़े ही शातिर ढंग से गांव के भोले-भाले मासूम बच्चों को किसी न किसी बहाने अपने पास बुलाते थे. इसके बाद उनके साथ हैवानियत की हदें पार कर उनकी हत्या करने के बाद लाश के टुकड़े-टुकड़े कर नाले में बहा देते.

दरिंदगी की हद यहां भी रुक जाती, तो गनीमत थी किन्तु सुरेन्द्र कोली तो हैवानियत के उस मोड़ तक जाता जहां दरिन्दे भी शर्म की वजह से गर्दन झुका लें. मासूम बच्चों को अपनी कोठी में ले जाकर उसके साथ कुकर्म उसके बाद उनका गला घोंटकर हत्या. इतने से भी मन नहीं भरा तो उनके शव के छोटे-छोटे टुकड़े कर कुछ पकाकर खाए तो कुछ हिस्से को कोठी के पीछे नाले में बहा दिए. यह खौफनाक सिलसिला करीब डेढ़ साल से ज्यादा समय तक चला. लेकिन किसी की नजर इस अमीरजादे दरिन्दे पंधेर की कोठी पर नहीं पड़ी. हां, इतना जरूर हुआ कि कोठी के पास स्थित पानी की एक टंकी के आसपास से बच्चों को गायब होने का शक जरूर हुआ, लेकिन इसे अन्धविश्वास का जामा पहना दिया गया और गांव वालों ने तो यहां तक मान लिया कि जरूर पानी टंकी के पास कोई भूत रहता है, जो बच्चों को निगल जाता है.

मगर पिंकी सरकार के लापता होने की जांच के दौरान जब यह पता चला कि उसकी हत्या कोली ने की है, तो पुलिस ने मामले को गहराई से जांचना शुरू किया. फिर क्या था, एक के बाद एक मामले खुलते गए और जांच दल को बड़े पैमाने पर बच्चों की नृशंस हत्याओं के बारे में पता चलता गया. उस समय कोली को सिलसिलेवार हत्यारा करार देते हुए अदालत ने कहा था कि उसके प्रति कोई दया नहीं दिखाई जानी चाहिए. 24 दिसंबर 2012 को सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस. लाल ने आरोपी सुरेंद्र कोली को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी. फैसले में न्यायाधीश ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि अभियुक्त के मन में हमेशा यही भावना बनी रहती है कि किसको मारूं, काटूं व खाऊं. अभियुक्त इन परिस्थितियों में समाज के लिए खतरा बन चुका है. उसके सुधार और पुनर्वास की संभावनाएं भी नहीं हैं. मृतका की आत्मा को तभी शांति मिल सकती है, जब अभियुक्त को मृत्यु दंड से ही दंडित किया जाए. इस कांड में नर पिशाच के नाम से कुख्यात सुरेंद्र कोली को 7वीं बार मौत की सजा सुनाई गई है. कोर्ट ने इस केस को रेयरेस्ट ऑफ द रेयर मानते हुए दोनों दोषियों को मरते दम तक फांसी पर लटकाने का आदेश दिया है.

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