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क्‍या सच में राजनीति में कोई स्‍थाई दोस्‍त या दुश्‍मन नहीं होता?

Posted On: 2 Aug, 2017 Junction Forum में

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कहते हैं राजनीति में न कोई स्‍थाई दोस्‍त होता है, न दुश्‍मन। यहां सब कुछ सिर्फ सत्‍ता का केंद्र ही होता है, चाहे वह दोस्‍ती हो या फिर दुश्‍मनी। बिहार में हालिया घटित राजनीतिक घटनाक्रम इसका ताजा उदाहरण है।


Nitish-Lalu


इन दिनों सियासी गलियारों और बुद्धिजीवियों में सबसे ज्‍यादा एक ही बात की चर्चा है कि क्‍या नीतीश का भाजपा के साथ सरकार बनाना उचित है। क्‍या जनता के मतों की कोई कीमत नहीं है। कोई इसे देश और प्रदेश की प्रगति के लिए नीतीश का सही कदम बता रहा है, तो कोई नैतिकता की दुहाई देकर इसे गलत करार दे रहा है।

इस राजनीतिक उठापटक को देखकर आपके मन में भी कई तरह के विचार आए होंगे। आपको भी नीतीश का भाजपा के साथ जाना सही या गलत लगा होगा। यह भी हो सकता है कि आपको इतिहास में हुई ऐसी ही कोई दूसरी राजनीतिक घटना याद आ गई हो। तो देर किस बात की, आप अपनी राय, अपने विचार ‘जागरण जंक्‍शन’ मंच के माध्‍यम से लोगों तक पहुंचा सकते हैं।

नोट- अपना ब्‍लॉग लिखते समय इतना अवश्‍य ध्‍यान रखें कि आपके शब्‍द और विचार अभद्र, अश्‍लील और अशोभनीय न हों तथा किसी की भावनाओं को चोट न पहुंचाते हों।



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