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22 लोगों को लाइन में खड़ा करके गोली मारने वाली फूलन देवी ने आखिरी वक्त में अपना लिया था बौद्ध धर्म

Posted On: 10 Aug, 2017 Infotainment में

Pratima Jaiswal

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‘अखबार में छपती रही खबर उसकी, मगर किसी को हाल उसका मालूम न था.’

कुछ ऐसी ही कहानी थी फूलन देवी की. फूलन देवी, किसी के लिए डकैत तो किसी के लिए हत्यारन तो किसी के लिए दलितों की मसीहा. फूलन की शख्सियत से परे अक्सर मन में सवाल आता है कि बचपन में घरवालों की प्रताड़ना, उम्रदराज व्यक्ति से शादी, गैंग रेप की  शिकार और 22 लोगों से अपने अपमान का बदला लेने वाली एक साधारण-सी औरत किस तरह संसद में पहुंची.


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निर्देशक शेखर कपूर ने फूलन पर ‘बैंडिट क्वीन’ फिल्म बनाई थी लेकिन कभी हैरानी की बात है कि शेखर ने बिना पूछे कुछ ऐसे विवादस्पद सीन फिल्म में डाल दिए, जिसपर फूलन को कड़ी आपत्ति थी. फूलन ने भारत सरकार से फिल्म को बैन करने की गुहार लगाई, लेकिन फिल्म रिलीज कर दी गई.


11 साल की फूलनदेवी की शादी हुई थी 35 के आदमी से

अगर आपने शेखर कपूर की बैंडिट क्वीन देखी होगी तो उसमें दिखाया गया है कि फूलन के पिता ने 10,000 रुपयों के लिए उसे बेच दिया था. जबकि फूलन ने इस सीन का जमकर विरोध करते हुए कहा था कि ‘मेरी शादी करवाई गई थी. मेरे पिता को एक खलनायक के तौर पर दिखाया गया है. कम उम्र में अगर मेरा रेप हुआ भी था तो मेरी जिंदगी को सार्वजनिक करने का ये हक किसी को नहीं है’


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विक्रम मल्हार के साथ जिस्मानी रिश्ते नहीं थे

फिल्म में दिखाया गया था कि विक्रम और फूलन एक-दूसरे के साथ बंद कमरे में हैं. जबकि इस सीन को देखकर फूलन इतनी भड़क गई थी कि शेखर को खुली चिट्टी लिख दी थी. फूलन के मुताबिक उस कमरे में बाकी दोस्त भी थे और विक्रम को पीठ में गोली लगी थी ना कि कोई रोमांस चल रहा था.


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बेहमई वाले सीन से थी ज्यादा दिक्कत

फूलन की इस फिल्म से सबसे बड़ी चिंता थी बेहमई वाला सीन. बेहमई में फूलन ने उसकी बर्बादी के लिए जिम्मेदार 22 ठाकुरों को एक लाइन में खड़ा करके गोली मार दी थी.कहा जाता है इन लोगों ने फूलन के साथ रेप किया था. ये हत्याकांड उसका बदला था. बेहमई कांड को मिला कर फूलन पर कुल 53 मुकदमे दर्ज थे. जेल से तो फूलन बाहर आ चुकी थीं. पॉलिटिक्स में करियर शुरू करने वाली थीं. उस फिल्म के रेप सीन और बेहमई कांड की वजह से फूलन को डर था कि कहीं उसका पॉलिटिकल करियर शुरू होने से पहले ही खत्म ना हो जाए. हालांकि, फूलन ने 1996 में उत्तरप्रदेश के भदोही से चुनाव लड़ा और लोकसभा सांसद बन गई.


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बौद्ध धर्म अपनाकर फिर से जिंदगी शुरू करना चाहती थी फूलन

बिना मुकदमा करीब 11 साल तक जेल में रहने के बाद फूलन को जब 1996 नें रिहा किया गया तो बौद्ध धर्म अपनाकर वो नई जिंदगी शुरू करना चाहती थी. राजनीति में बहुत कम समय में ही फूलन के कई दुश्मन खड़े हो गए थे. 25 जुलाई 2001 में घर के बाहर ही शेर सिंह राणा ने फूलन देवी की हत्या कर दी. माना जाता है कि पति उम्मेद सिंह भी फूलन की हत्या की साजिश में शामिल था. हालांकि, उसपर कोई मुकदमा नहीं चलाया गया. …Next


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