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किस काम के हैं वो सब सरकारी हॉस्पिटल जो जिंदगी से खेलें

Posted On: 13 Aug, 2017 Social Issues में

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हमारे देश में सबसे बड़ी आजादी भ्रष्टाचार करने और हर काम में लापरवाही बरतने की है. गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में अब तक पिछले एक सप्ताह में लगभग 60 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिसमें 48 बच्चों की मौत आक्सीजन की कमी के कारण हुई है. सरकार की ओर से फंड जारी करने के बावजूद आक्सीजन सप्लाई करने वाली कम्पनी को समय से भुगतान नहीं किया गया, उसने बच्चों की जिंदगी और मौत की परवाह न करते हुए लिक्विड आक्सीजन सप्लाई बंद कर दी. 48 बच्चों की मौत के लिए कालेज के प्रिंसिपल और आक्सीजन सप्लाई करने वाली कम्पनी दोनों ही दोषी हैं. इन पर ह्त्या का मुकदमा चलना चाहिए.


सरकारी अस्पताओं में भ्रष्टाचार का आलम ये है कि नियुक्ति, तबादला और सामानों की खरीद हर चीज में कमीशन ली जाती है. अखबारों में छपी ख़बरों के अनुसार सिलेंडर वाली आक्सीजन सप्लाई में दोगुना ज्यादा कमीशन मिलता है. हालाँकि सिलेंडर वाली आक्सीजन की कीमत टैंकर वाली आक्सीजन के मुकाबल में दोगुनी ज्यादा होती है. इस बात की जांच होनी चाहिए कि सिलेंडर वाली आक्सीजन सप्लाई से अधिक कमीशन लेने के चक्कर में तो कहीं टैंकर वाली आक्सीजन सप्लाई नहीं रोकी गई? यदि वाकई में ऐसा है तब तो यह जिम्मेदार अधिकारीयों के भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता की अति है, इन्हें नौकरी से निलंबित नहीं, बल्कि निष्कासित किया जाना चाहिए.


बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में अधिकारियों के भ्रष्टाचार, लापरवाही और आक्सीजन की कमी के कारण जिन 48 बच्चों की दुखद मौत हुई है, उनमें से 17 मासूम शिशु ऐसे थे, जिनके अभी नाम तक नहीं रखे गए थे. मीडिया में प्रकाशित दर्दनाक ख़बरों को पढ़कर आँखों में आंसू आ जाते हैं. एक गरीब व्यक्ति दिमागी बुखार से पीड़ित अपने नवजात बच्चे की जान बचाने के लिए दर-बदर की ठोकरें खाते हुए बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में पहुंचा, लेकिन 10 अगस्त को वहां पर उसके बच्चे की मौत हो गई. उस बच्चे के दादा-दादी ने अपने पोते के लिए पहले से ही खिलौने खरीदकर रखे थे. वो सब खिलौने उस बच्चे के साथ ही दफ़न कर दिए.


सरकारी अस्पतालों में गरीबों की पहुँच कितनी है, इसकी एक बानगी अखबार में छपे इस समाचार से देखिये. एक गरीब मा-बाप अपनी ग्यारह माह की दुधमुंही बेटी के संग सड़क के किनारे सो रहे थे. भोर के समय एक नशेड़ी ने मां की गोद से उस दुधमुंही बच्ची को उठा लिया और कुछ दूर ले जाकर उस मासूम बच्ची से दुष्कर्म का प्रयास करने लगा. बच्ची की रोने की आवाज सुन उसके माता पिता जग गए. अारोपी पकड़ा गया. घायल बच्ची को लेकर लेकर पुलिस पहले मंडलीय अस्पताल, फिर बीएचयू ले गई. डॉक्टरों ने रुपये के बिना गरीब बच्ची का इलाज करने से मना कर दिया. पुलिस ने अपने पास से बीस हजार रुपये जमा किए तब इलाज शुरू हुआ. पुलिस को सौ-सौ बार सलाम. अंत में बस इतना ही कहूंगा कि किस काम के हैं वो सरकारी हॉस्पिटल जो जिंदगी से खेलें.



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