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धारा 370 एवं 35 A अलगाव वादी सोच को बढ़ाती है पार्ट -2

Posted On: 23 Aug, 2017 Others में

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modi in kashmirमाउंट बेटन ने तर्क दिया जम्मू कश्मीर सम्प्रभु राज्य है महाराजा आने भारतीय संघ के साथ विलय स्वीकार नहीं किया है तुरंत सरदार पटेल ने वी.के मेनन को वास्तविक स्थिति जानने के लिए विमान द्वारा श्री नगर भेजा मेनन अगले दिन ही कश्मीर की वास्तविक स्थिति की जानकारी, कश्मीर के महाराजा द्वारा हस्ताक्षर किया गया विलय का पत्र और ‘शेख अब्दुल्ला’ प्रभाव शाली नेता ,नेशनल कांफ्रेंस कश्मीर के अध्यक्ष का पत्र, विलय की स्वीकृति और कश्मीर की रक्षा के लिए प्रार्थना की गयी थी | देरी से श्री नगर पर कब्जा हो सकता था लेकिन कबायली लूटपाट करने लगे | 26 अक्टूबर की शाम को होने वाली मीटिंग में माउंट बेटन ने फिर प्रस्ताव रखा कश्मीर में कानून व्यवस्था ठीक होने के बाद प्रजातांत्रिक ढंग से जनता की सहमती से विलय स्वीकार किया जाये| जवाहर लाल नेहरु ने बिना किसी हिचक के प्रस्ताव तुरंत स्वीकार कर लिया अब श्री पटेल के पास कोई चारा नहीं था नेहरू जी कश्मीर समस्या का हल स्वयं करना चाहते थे |एक ऐसी कूटनीतिक भूल जिसे आज तक देश भुगत रहा है कश्मीर की धरती खून से रंगी जा रही हैं |

कश्मीर की रक्षा के लिए भारतीय सेनायें ने जैसे ही 27 अक्टूबर को श्री नगर के लिए प्रस्थान किया पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल मो० अली जिन्ना ने पाकिस्तान से सेनायें कश्मीर के लिए भेज दी गयी |कश्मीर युद्ध का अखाड़ा बन गया पहली नवम्बर को माउंटबेटन जिन्ना से बात करने लाहौर गये उन्होंने जिन्ना से पूछा युद्ध विराम की स्थिति में क्या कबायली लौट जायेंगे? जिन्ना का उत्तर था पहले भारतीय सेनायें लौटें | जिन्ना चाहते थे दोनों  गवर्नर जनरल मिल कर जनमत संग्रह करवा लें माउंटबेटन जानते थे जितने अधिकार मुस्लिम लीग के प्रेसिडेंट और गवर्नर जरनल जिन्ना के पास हैं उनके पास नहीं हैं| एक और बड़ी भूल लार्ड माउंटबेटन के प्रभाव से नेहरू जी ने की एक जनवरी 1948 कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास भेजा गया यहीं से समस्या का अंतर्राष्ट्रीकरण हो गया विश्व शक्तियाँ के दखल के कारण समस्या का हल मुश्किल था सुरक्षा परिषद में पास होने वाले प्रस्तावों के पर सोवियत रूस के वीटो की जरूरत पड़ती थी |समस्या का निराकरण के लिए तीसरी शक्ति की मध्यस्थता के प्रस्तावों से छुटकारा नेहरू जी की बेटी देश की प्रधान मंत्री इंदिरा जी ने दिलवाया बंगलादेश युद्ध के बाद इंदिरा जी और श्री भुट्टो के बीच वार्ता के दौरान इंदिराजी ने दबाब से शर्त मनवाई कश्मीर की समस्या का हल अब आपसी बातचीत से निकाला जाएगा |

शेख अब्दुल्ला इंडिपेंडेंट कश्मीर का स्वप्न देखने लगे भारत पाकिस्तान के मध्य एक इंडिपेंडेट स्टेट| जबकि वह कश्मीर के वजीरे आजम थे | अमेरिका और ब्रिटिश अखबारों में शेख के प्रति गहरा झुकाव दिखाई देने लगा | भारत के अमेरिकन एम्बेसेडर और उनकी पत्नी के साथ उन्होंने अमरनाथ की यात्रा भी की शेख अब्दुल्ला अलग बोली बोलने लगे वह नेहरू जी के प्रिय मित्र थे लेकिन अगस्त 1953 में नेहरू जी को उन्हें गिरफ्तार करना पड़ा उनके स्थान पर बख्शी गुलाम वजीरे आजम बने | कश्मीर के राज्यपाल, सदर-ऐ रियासत कहलाते थे पहले इनका चुनाव विधान सभा करती थी अब राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है यह स्थिति 1966 में बदली अब जम्मू कश्मीर का वजीरे आजम मुख्य मंत्री कहलाता है |

जब भी धारा 370 एवं 35A का मामला उठा अधिकतर टलता रहता है अटल बिहारी वाजपेयी अपने प्रधान मंत्री काल में हल ढूंढना चाहते थे लेकिन उनकी कई दलों की मिली जुली सरकार थी | अब सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई करनी है| ऐसे विशेषाधिकार देने वाली धारायें दूसरों के अधिकारों का हनन कर रहीं है| धारा 370 के अनुसार भारतीय संसद को रक्षा ,विदेशी मामले और संचार के विषयों पर ही कानून बनाने के सीमित अधिकार दिए गये हैं अन्य विषयों पर बने कानूनों को लागू करने के लिए राज्य सरकार की सहमती आवश्यक है |

भारत में  अनेक राज्यों का विलय हुआ लेकिन जम्मू कश्मीर ऐसा राज्य हैं-

1.यहाँ के नागरिकों को दोहरी नागरिकता प्राप्त है 2. जम्मू कश्मीर का झंडा अलग है महबूबा मुक्ति के कथन पर हैरानी होती है यदि धारा 35A हटाई गयी तो भारतीय झड़े को कोई कंधा देने वाला नहीं होगा यहाँ तिरंगे या राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान अपराध नहीं है |श्री नगर में अक्सर पाकिस्तान का झंडा देखा जा सकता है अब तो आतंकवादी इस्लामिक स्टेट का झंडा भी लहराते है जाकिर मूसा के आतंकवाद की कमान सम्भालने के बाद आतंकी के शव पर इस्लामिक स्टेट का काला झंडा कफन की तरह डालते देखा जा सकता है 3. विधान सभा का कार्यकाल 6 वर्ष है जबकि भारत के हर राज्य की विधान सभा का कार्यकाल 5 वर्ष है| 4 .भारतीय संसद को जम्मू कश्मीर के लिए कानून बनाने के अधिकार सीमित  हैं|  जीएसटी बिल विधान सभा में अलग दिन पास हो कर लागू किया गया | 5. जम्मू कश्मीर की महिला भारत के किसी राज्य के नागरिक से विवाह कर लेती है उस महिला की नागरिकता समाप्त ही नहीं होती वह पैतृक संपत्ति के अधिकार से भी वंचित हो जाती है| फारुख अब्दूल्ला की बेटी सारा और सचिन पायलेट ने प्रेम विवाह किया सारा की नागरिकता और अधिकार दोनों चले गये इसके विपरीत यदि पाकिस्तान के किसी व्यक्ति से कश्मीरी लड़की विवाह कर ले शौहर को  जम्मू कश्मीर की नागरिकता मिल जायेगी आश्चर्य ! ऐसा ही एक मामला न्यायालय न्यायालय के संज्ञान में आया कुपवाड़ा की निवासी अमरजीत कौर की शादी गैर कश्मीरी से हुई वह नागरिकता और पैतृक सम्पत्ति के अधिकार से वंचित हो गयी उन्होंने  24 वर्ष तक कोर्ट में मुकदमा लड़ा | जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के 2002 के फैसले के बाद 370 धारा की कमियां सामने आयीं |6. कश्मीरी के अलावा कोई भी भारतीय कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकता न कारखाना लगा सकता है जबकि कश्मीरी भारत के किसी भी भूभाग में जमीन खरीद सकते हैं कारखाने लगा सकते हैं | अलगाब वादियों ने करोड़ों की सम्पत्ति दिल्ली और बड़े शहरों में खरीद कर घर बनाये दोनों स्थानों में आते जाते रहते हैं |कश्मीर में हालात खराब होने के बाद अनेको कश्मीरियों (मुस्लिम ) सुरक्षा की दृष्टि से भारत के राज्यों ख़ास कर राजधानी में सम्पत्ति खरीदी  घर बनाये दुर्भाग्य कश्मीरी पंडितों को उनकी मात्रभूमि से निकाल दिया | उद्योग पतियों को कश्मीर में इंवेस्ट करने का अधिकार मिलता कश्मीर के लोगों को रोजगार के अवसर मिलते उनके दिन सुधरते |अमरनाथ मन्दिर के पास यात्रियों को चिकित्सा की सुविधा देने के लिए छोटी सी जमीन भी नहीं दी गयी ऊचाई  पर डाक्टरी सुविधा न मिलने के कारण कई यात्री मर जाते हैं |7.भारतीय संविधान की धारा 360, आर्थिक संकटकाल में आपतकालीन स्थिति की घोषणा हो सकती है लेकिन यह जम्मू कश्मीर पर लागू नहीं होती | 8.सुप्रीम कोर्ट के निर्णय जम्मू कश्मीर में मान्य नहीं होते थे |

समय-समय पर अनेक संशोधन किये गये- केन्द्रीय आईएएस,और आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति होने लगी और सीएजी के अधिकार भी लागू किये गये ,भारतीय जनगणना का कानून  भी लागू किया गया ,कश्मीर के हाई कोर्ट के निर्णयों के विरुद्ध अपील का अधिकार सुप्रीम कोर्ट को दिया गया यही नहीं चुनाव सम्बन्धी मामलों की अपील सुनने का भी अधिकार है, 1971 से विशिष्ट प्रकार के मामलों की सुनवाई का अधिकार भी दिया अर्थात सुप्रीम कोर्ट का जम्मू कश्मीर के मामले में अधिकार क्षेत्र बढ़ाया गया है   , केंद्र सरकार को विधान सभा में संवैधानिक संकट आने पर राष्ट्रपति शासन लागू करने का अधिकार भारतीय संसद में पास किये गये संशोधन दिया गया अर्थात अनुच्छेद 356, 357 के अंतर्गत अधिकार क्षेत्र बढ़ा | श्रमिकों के कल्याण के लिए श्रमिक संगठन, सामाजिक बीमा के केन्द्रीय कानून राज्य पर लागू किये गये , मतदान द्वारा जम्मू कश्मीर से सांसद चुन कर आते हैं हाल ही में होने वाले श्रीनगर- बड़गाव संसदीय उपचुनाव का अलगाव वादियों ने बायकाट किया उनके भय से कम मतदाता वोट देने निकले फारुख अब्दुल्ला छह प्रतिशत मतदान से चुन कर आयें | अब राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अनुच्छेद 246 के प्रावधान जम्मू कश्मीर पर लागू किये गये है|

simaa prhri

राजनीतिक दलों को जम्मू कश्मीर के मामले में एक होकर पार्टी हित से ऊपर उठ कर देश हित के बारे में सोचना चाहिये

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