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‘पॉक्सो एक्ट’ के दायरे में आते हैं बाल यौन शोषण से जुड़े अपराध, आरोप साबित होने पर मिलती है ये सजा

Posted On: 11 Sep, 2017 social issues में

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गुड़गांव में प्रद्युम्न के यौन शोषण और मर्डर का केस सुलझा भी नहीं था कि ईस्ट दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाली 6 साल की बच्ची के साथ यौन शोषण का मामला सामने आया है.


child abuse

बीते सालों में स्कूल में यौन शोषण से जुड़े मामले सबके सामने आ रहे हैं. ऐसे में इन आरोपियों पर पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होता है. आइए, जानते हैं क्या है पॉक्सो एक्ट.


क्या है पॉक्सो एक्ट

पॉक्सो शब्द अंग्रजी शब्द है, इसका मतलब होता है ‘प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट’ किशोरों के खिलाफ होने वाली यौन हिंसा के लिए अलग कानून की मांग की गई. 1992 में इसे भारत के संविधान में शामिल किया गया. मूल रूप से इसका खाका अमेरिका से लिया गया है. 2012 में पॉक्सो एक कानून का रूप ले चुका है. इस एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है. यह एक्ट बच्चों को सेक्सुअल हैरेसमेंट, सेक्सुअल असॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा देता है.

दोषी पाए जाने पर हो सकती है उम्रकैद

वर्ष 2012 में बनाए गए इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है. जिसका कड़ाई से पालन किया जाना भी सुनिश्चित किया गया है.

इस अधिनियम की धारा 4 के तहत वो मामले शामिल किए जाते हैं, जिनमें बच्चे के साथ दुष्कर्म या कुकर्म किया गया हो. इसमें सात साल सजा से लेकर उम्रकैद और अर्थदंड भी लगाया जा सकता है.

यौन शोषण से उत्पन्न गंभीर चोटों से लेकर पोर्न तस्वीर दिखाने के मामले शामिल

पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के अधीन वे मामले लाए जाते हैं, जिनमें बच्चों को दुष्कर्म या कुकर्म के बाद गम्भीर चोट पहुंचाई गई हो. इसमें दस साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है और साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

इसी प्रकार पॉक्सो अधिनियम की धारा 7 और 8 के तहत वो मामले पंजीकृत किए जाते हैं, जिनमें बच्चों के गुप्तांग से छेडछाड़ की जाती है. इसके धारा के आरोपियों पर दोष साबित हो जाने पर पांच से सात साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है.


बच्चों के साथ यौन अपराध के प्रति सख्त है कानून

  • पॉक्सो एक्ट की धारा 3 के तहत पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट को भी परिभाषित किया गया है. जिसमें बच्चे के शरीर के साथ किसी भी तरह की हरकत करने वाले शख्स को कड़ी सजा का प्रावधान है.
  • 18 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का यौन व्यवहार इस कानून के दायरे में आ जाता है. यह कानून लड़के और लड़की को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है. इस कानून के तहत पंजीकृत होने वाले मामलों की सुनवाई विशेष अदालत में होती है.
  • वर्ष 2012 में बनाए गए इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है. जिसका कड़ाई से पालन किया जाना भी सुनिश्चित किया गया है.
  • पॉक्सो अधिनियम की धारा 7 और 8 के तहत वो मामले पंजीकृत किए जाते हैं जिनमें बच्चों के गुप्तांग से छेडछाड़ की जाती है. इसके धारा के आरोपियों पर दोष सिद्ध हो जाने पर पांच से सात साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है.
  • 18 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का यौन व्यवहार इस कानून के दायरे में आ जाता है. यह कानून लड़के और लड़की को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है. इस कानून के तहत पंजीकृत होने वाले मामलों की सुनवाई विशेष अदालत में होती है. …Next



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