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राजनीति में भी हिट थे विनोद खन्‍ना, इन अहम मंत्रालयों की संभाली थी जिम्मेदारी

Posted On: 6 Oct, 2017 Politics में

Avanish Kumar Upadhyay

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बॉलीवुड के हैंडसम मैन विनोद खन्‍ना, फिल्‍मों में जितने सफल थे, उतने ही राजनीति में भी हिट रहे। बॉलीवुड में अपने कॅरियर के टॉप पर रहने के दौरान उन्‍होंने इंडस्‍ट्री छोड़कर ओशो के आश्रम की ओर रुख किया। वहां से पांच साल बाद वापस इंडस्‍ट्री में आए और फिर से अपने पांंव बी-टाउन में जमाए। 1997 में उन्‍होंने राजनीति में कदम रखा और इस फील्‍ड में भी सक्‍सेस हुए। विनोद केंद्रीय मंत्री भी रहे थे। आइये आपको बताते हैं विनोद खन्‍ना के पॉलिटिकल कॅरियर के बारे में।


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विदेश राज्‍यमंत्री का अहम पद संभाला


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विनोद खन्‍ना ने 1997 में बीजेपी ज्वाॅइन की और यहीं से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ। 1998 में ही वे 12वीं लोकसभा के चुनाव में पहली बार पंजाब के गुरुदासपुर सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। वर्ष 1999 में विनोद खन्ना दोबारा गुरुदासपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतने में कामयाब रहे। सन् 2002 में केंद्र सरकार में उन्हें केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री बनाया गया। इसके छह महीने बाद ही उन्‍हें केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री का अहम पद सौंप दिया गया।


2014 में लिया 2009 की हार का बदला


vinod khanna1


सन् 2004 के लोकसभा चुनाव में विनोद खन्ना ने गुरुदासपुर से ही तीसरी बार चुनाव जीता। इसके बाद सन् 2009 के लोकसभा चुनाव में विनोद खन्ना गुरुदासपुर की सीट से चुनाव हार गए। उनकी जगह कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा ने चुनाव जीता। हालांकि जीत का अंतर बहुत ज्‍यादा नहीं था। 16वीं लोकसभा के चुनाव में विनोद खन्ना ने फिर से इसी सीट से चुनाव लड़ा अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी प्रतापसिंह बाजवा को हराकर 2009 की हार का बदला लिया।


पत्‍नी कविता ने लिखा था फेसबुक पोस्‍ट


vinod khanna and kavita


27 अप्रैल 2017 को विनोद खन्‍ना की मौत के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि गुरुदासपुर की लोकसभा सीट से भाजपा उनकी पत्नी कविता खन्ना को चुनाव में उतारेगी। मगर 21 सितंबर को बीजेपी ने लोकसभा उप-चुनाव के लिए गुरुदासपुर सीट से स्वर्ण सिंह सलारिया को अपना उम्मीदवार घोषित किया। 2014 में भी स्वर्ण सिंह को गुरुदासपुर का मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन उस समय पार्टी ने विनोद खन्ना को चुना था और चुनाव में विनोद की जीत हुई। सलारिया के उम्‍मीदवार घोषित होने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्ज था कि इससे कविता काफी नाराज हैं। मगर इसके बाद कविता खन्ना ने उप-चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार न चुने जाने के संबन्ध में फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्‍होंने लिखा था कि वे इससे बिल्‍कुल निराश नहीं हैं। पोस्‍ट में उन्‍होंने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की थी।


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