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सोमनाथ मंदिर में इतने साल से गैर हिंदुओं के प्रवेश पर है रोक! जानें क्‍या है वजह

Posted On: 30 Nov, 2017 Hindi News में

Avanish Kumar Upadhyay

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गुजरात का सोमनाथ मंदिर बुधवार को राहुल गांधी के दर्शन करने के बाद से एक बार फिर सुर्खियों में है। दरअसल, गुजरात में चुनाव प्रचार करने पहुंचे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, अहमद पटेल के साथ सोमनाथ मंदिर में पूजा करने गए। यहां मंदिर के सुरक्षा विभाग के रजिस्टर में दोनों के नाम की एंट्री दर्ज हुई। यह एंट्री कांग्रेस के मीडिया को-ऑर्डिनेटर मनोज त्यागी ने की। हालांकि, रजिस्टर में राहुल गांधी के दस्तखत नहीं हैं, लेकिन नाम दर्ज होने के कारण अब विवाद हो गया है। क्‍योंकि सोमनाथ मंदिर के नियमों के मुताबिक अगर कोई गैर-हिंदू मंदिर के अंदर जाता है, तभी उसे सुरक्षा दफ्तर में जाकर रजिस्टर में एंट्री करानी होती है। अब इसे लेकर सियासी गलियारे में बवाल मचा है कि राहुल ने बतौर हिंदू मंदिर में प्रवेश क्‍यों नहीं किया। खैर, ये तो है सियासत की बात। आइये हम आपको बताते हैं कि सोमनाथ मंदिर में बिना इजाजत गैर हिंदुओं के प्रवेश पर कब से प्रतिबंध है और इसके पीछे की वजह क्‍या है।


somnath


2015 में लगी थी रोक


rahul gandhi in somnath tample


गुजरात स्थित भगवान शिव के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर जून 2015 में रोक लगाई गई थी। इस बारे में मंदिर अधिकारियों ने फैसला लिया था कि हिंदुओं के अलावा अन्य धर्मों के लोग बिना पूर्व अनुमति के सोमनाथ मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे। इस संबंध में मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर अधिकारियों ने एक नोटिस भी चिपकाया। द्वार पर लगे इस नोटिस में कहा गया कि श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग हिंदुओं के लिए तीर्थ स्थान है। इस पवित्र तीर्थ स्थल पर गैर हिंदुओं को प्रवेश के लिए (मंदिर के) महाप्रबंधक कार्यालय से इजाजत लेनी होगी।


इस वजह से लगी रोक


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इस नियम के बारे में मंदिर प्रबंधन ने कहा था कि ज्यादातर बड़े हिंदू धर्मस्थलों पर यह परंपरा रही है। इसलिए सोमनाथ में यह नियम लागू किया गया है, जिससे तीर्थधाम की आस्था और धर्म का माहौल बना रहे। बता दें कि यह प्रसिद्ध शिव मंदिर सोमनाथ जिले के वेरावल कस्बे के पास है। सोमनाथ मंदिर की व्यवस्था और संचालन का कार्य सोमनाथ ट्रस्ट के अधीन है। देशभर से रोज हजारों भक्त मंदिर में दर्शन करने आते हैं। इसकी सुरक्षा में भारी पुलिस बल तैनात रहता है।


ऐसी है मान्‍यता


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सोमनाथ मंदिर अत्यन्त प्राचीन और ऐतिहासिक सूर्य मंदिर है। यह भारतीय इतिहास तथा हिन्दुओं के चुनिन्दा और महत्वपूर्ण मंदिरों में से एक है। इसे आज भी भारत के १२ ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में माना व जाना जाता है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में स्पष्ट है। लोककथाओं के अनुसार श्रीकृष्ण ने यहीं देहत्याग किया था। इस कारण इस क्षेत्र का और भी महत्व बढ़ गया।


हिंदू धर्म के इतिहास का प्रतीक


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यह मंदिर हिंदू धर्म के उत्थान-पतन के इतिहास का प्रतीक रहा है। अत्यंत वैभवशाली होने के कारण इतिहास में कई बार यह मंदिर तोड़ा तथा पुनर्निर्मित किया गया। वर्तमान भवन के पुनर्निर्माण का आरंभ भारत की स्वतंत्रता के बाद लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने करवाया। 1 दिसंबर 1995 को तत्‍कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया। मंदिर प्रांगण में रात 7:30 से 8:30 बजे तक साउंड एंड लाइट शो चलता है। इसमें सोमनाथ मंदिर के इतिहास का बड़ा ही सुंदर सचित्र वर्णन किया जाता है…Next


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