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अथ गब्बर कथा: वर्तमान राजनीति पर गब्बर-सांभा संवाद और पद्मावती पर ठाकुर से वाकयुद्ध

Posted On: 3 Dec, 2017 हास्य व्यंग में

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अथ गब्बर कथा- वर्तमान राजनीति पर गब्बर-सांभा संवाद और पद्मावती पर ठाकुर से वाक्युद्ध
गब्बर इस बात से चिंतित था कि रामगढ़ में यदि उसकी वापसी नहीं हुई तो दूसरे डाकू वहां घुस पड़ेंगे और उसका रहा-सहा खौफ भी फाख्ता हो जाएगा।
वो अपनी चट्टान पर बुलेटों का वो बेल्ट घुमा रहा था जिसमें कभी गोलियां हुआ करती थी पर आज वो खाली था। इतने में सांभा वहां से गुजरा और गब्बर को परेशान देखकर उससे उसका मन बहलाने को बातें करने लगा।
जय मां काली सरदार
जय मां काली कराली
सरदार परेशान हो…
हां, सांभा..अगर हम रामगढ़ में वापसी न कर पाए तो क्या होगा सांभा?
सरदार तुम एक काम करो।
क्या?
तुम यहां-वहां डाकुओं के डेरों पर जाकर उनसे दुआ-सलाम करके यारी-दोस्ती गांठ लो…
सांभा, हम यहां परेशान हैं और तू दिल्लगी कर रहा है
सरदार, तुम्हारी हालत तो लोधी जैसी हो गई …..
मतलब, खोल कर बता सांभा।
सरदार, केंद्र में लोधी सरकार है, लगभग सभी जगह ये सरकार काबिज है पर अपनी करनी के चलते अब इनकी सत्ता उखड़ रही है। चुलबुल की आंधी जोर पकड़ रही है या कि लोगों में असंतोष फैल रहा है उसका नतीजा है कि लोधी सरकार को नुकसान हो रहा है।
इससे घूमने का संबंध क्या है सांभा?
सरदार, लोधी सरकार को नुकसान हो रहा है और वो विदेशों में जाकर टाइम पास कर रहे हैं।
आगे घूमना नहीं मिलेगा न सांभा इसलिए ये घूमना फिरना हो रहा है।
सरदार, रामगढ़ में ठाकुर ने कहा कि वो लोधी को जितवाकर रहेगा।
वो कैसे सांभा?
सरदार, ठाकुर ने मेहबूबा के साथ मिलकर लोधी के दुश्मनों की हार्दिक इच्छा को खत्म करने के लिए उनकी सीडी बाजार में उतारी है।
सीडी, कितने खरीददार मिले हैं सांभा।
सरदार इसका रिस्पांस तो ठाकुर ही जानता है।
ठहरजा मैं ठाकुर को फोन लगाता हूं।
गब्बर ने ठाकुर को फोन लगाया। वो सीडी देख रहा था इस लिए फोन नहीं उठाया। परेशान गब्बर का जीएसटी (जब सब्र टूटने) होने लगा तब ठाकुर ने फोन उठाया।
सीडी…..
सीडी, हां है कितनी चाहिए और कहां चाहिए
अड्डे पर (गुज) रात में
कौन सा अड्डा….
डूंडे ठाकुर .. मैं गब्बर बोल रहा हूं
गब्बर अगर व वहां तेरे पास होता तो तुझे कटेहाथ से कसकर तमाचा मारता, परेशान मत कर, अभी  मजा आ रहा है। काम करने दे।
अबे ओ करणीसेना के छुटभैये नेता,
गब्बर, हम संजय को पाजीराव बनाकर हम थप्पड़  मारचुके  देवदास।
खामोशी: द कंफ्यूजिकल हथकटे ठाकुर..जब अकबर को जोधा ब्याही तब कहां थे तुम, जब  विदेशी आक्रांता मुगलों  के दरबार के ऊंचे लोगों  ने सिर झुकाया तब कहां थे तुम? एक संजय की बात पर तुमने ये लीला रची। बहुत नाइंसाफी है ये…. हमारी फुलवा सी फूल को तुम्हारे लोगों ने फूलन बनाया तब औरतों की इज्जत कहां गई थी ठाकुर। एक अकेेले को थप्पड़ मार के और एक हसीना पीपीका की नाक काटने की बात  कहकर तुमने बता दिया कि तुम लोग औरतों की कितनी इज्जत करते हो। राजा पतनसिंह कमजोर हो गया तो अपनी औरतों को आग में झोंक मारा। बहुत नाइंसाफी है ये ठाकुर। ये एकता उस समय कहां थी जब औरतें जल रही थी। तब तो अपनी-अपनी मूंछों और नाक के लिए तुम्हारे भाई-भाई आपस में मां की आंख कर रहे थे।
करणी तो स्वयं देवी  हैं औरत का सबसे बड़ा रूप। देवी के नाम पर औरत की नाक काटकर तुम खाजपूत बन गए हो ठाकुर।
गब्बर तुम भी तो सिंग हो ना?
सिंग नहीं सिंह हूं मैं ठाकुर औरतों की इज्जत जो करता है वो सिंह है गब्बर। सिंग घुसेगा खाजों के पिछवाड़े। मैंने बसंती की नाचने की प्रतिभा को पहचाना और मेहबूबा को पर्दे के बाहर किया। तुम इतना हंगामा अपनी बुराइयों को हटाने में क्यों नहीं करते ठाकुर? तुम औरतों की इज्जत की बात करते हो उन पर अत्याचार करके। तुम तो शुरू से महिला अधिकारों की टांग तोड़ रहे हो आज कैसे रखवाले बन गए। तुमने अपनी बहू को विधवा रखा और उसके जय के साथ हनीमून मनाने के सपनों को कटे हाथों से चकनाचूर कर दिया। आज भी तेरी बहू अटारी पर लालटेन जलाकर जय के भूत से आंखे चार करती है।
वो बातें बीत गईं गब्बर। मैं तो घोषणा करने वाला हूं पीपीका को कोई मेरे पास ले आए तो मैं उसे बसंती दे दूंगा।
बसंती कोई बकरी है जो किसी को दे देगा डूंडे ठाकुर।
नहीं वो घोड़ी यानी धन्नों की मालकिन है। वीरू से मैं बात कर लूंगा। तुम अपनी कहो गब्बर।
पीपीका के मामले में तुझसे बाद में बात करूंगा ठाकुर… डूंडे ठाकुर तू क्या सोचता है  सीडी मार्के ट में लाकर लोधी जी दुश्मनों की हार्दिक इच्छा का क्रियाकरम कर देंगे हां? पार्टी के (गद्) दारों को कम मत समझ।
गब्बर, राजनीति तू समझेगा नहीं, जो राजनीति के लिए बिक जाए, लोकहित छोड़कर अपने लोगों का सिक्का जमाए उसकी सीडी ही खरीदनी चाहिए। हर जगह सिर्फ पार्टी के (गद्)दार नहीं होते सभी लोग होते हैं  सभी का ख्याल करना होता है। गब्बर चिंता मतकर दिन किसी का हो (गुज) रात  का वक्त तो भारतीय जुगाड़़ुओं का ही होगा। गब्बर शर्त लगा ले।
हथकटे ठाकुर हारा तो क्या देगा?
सीडी ले लेना….
कौन सी
लाघव जी और कामकुमार की
अरे खामोश,
इतनें में अचानक  फोन कट गया। एक मैसेज सुनाई दिया। लाइन में फॉल्ट अपने की  वजह से बीएसएनएल नेटवर्क कुछ समय के लिए अनुपलब्ध है। रुकावट केे लिए खेद है।
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AGBA copyगब्बर इस बात से चिंतित था कि रामगढ़ में यदि उसकी वापसी नहीं हुई तो दूसरे डाकू वहां घुस पड़ेंगे और उसका रहा-सहा खौफ भी फाख्ता हो जाएगा।

वो अपनी चट्टान पर बुलेटों का वो बेल्ट घुमा रहा था जिसमें कभी गोलियां हुआ करती थी पर आज वो खाली था। इतने में सांभा वहां से गुजरा और गब्बर को परेशान देखकर उससे उसका मन बहलाने को बातें करने लगा।

जय मां काली सरदार

जय मां काली कराली

सरदार परेशान हो…

हां, सांभा..अगर हम रामगढ़ में वापसी न कर पाए तो क्या होगा सांभा?

सरदार तुम एक काम करो।

क्या?

तुम यहां-वहां डाकुओं के डेरों पर जाकर उनसे दुआ-सलाम करके यारी-दोस्ती गांठ लो…

सांभा, हम यहां परेशान हैं और तू दिल्लगी कर रहा है

सरदार, तुम्हारी हालत तो लोधी जैसी हो गई …..

मतलब, खोल कर बता सांभा।

सरदार, केंद्र में लोधी सरकार है, लगभग सभी जगह ये सरकार काबिज है पर अपनी करनी के चलते अब इनकी सत्ता उखड़ रही है। चुलबुल की आंधी जोर पकड़ रही है या कि लोगों में असंतोष फैल रहा है उसका नतीजा है कि लोधी सरकार को नुकसान हो रहा है।

इससे घूमने का संबंध क्या है सांभा?

सरदार, लोधी सरकार को नुकसान हो रहा है और वो विदेशों में जाकर टाइम पास कर रहे हैं।

आगे घूमना नहीं मिलेगा न सांभा इसलिए ये घूमना फिरना हो रहा है।

सरदार, रामगढ़ में ठाकुर ने कहा कि वो लोधी को जितवाकर रहेगा।

वो कैसे सांभा?

सरदार, ठाकुर ने मेहबूबा के साथ मिलकर लोधी के दुश्मनों की हार्दिक इच्छा को खत्म करने के लिए उनकी सीडी बाजार में उतारी है।

सीडी, कितने खरीददार मिले हैं सांभा।

सरदार इसका रिस्पांस तो ठाकुर ही जानता है।

ठहरजा मैं ठाकुर को फोन लगाता हूं।

गब्बर ने ठाकुर को फोन लगाया। वो सीडी देख रहा था इस लिए फोन नहीं उठाया। परेशान गब्बर का जीएसटी (जब सब्र टूटने) होने लगा तब ठाकुर ने फोन उठाया।

सीडी…..

सीडी, हां है कितनी चाहिए और कहां चाहिए

अड्डे पर (गुज) रात में

कौन सा अड्डा….

डूंडे ठाकुर .. मैं गब्बर बोल रहा हूं

गब्बर अगर व वहां तेरे पास होता तो तुझे कटेहाथ से कसकर तमाचा मारता, परेशान मत कर, अभी  मजा आ रहा है। काम करने दे।

अबे ओ करणीसेना के छुटभैये नेता,

गब्बर, हम संजय को पाजीराव बनाकर हम थप्पड़  मारचुके  देवदास।

खामोशी: द कंफ्यूजिकल हथकटे ठाकुर..जब अकबर को जोधा ब्याही तब कहां थे तुम, जब  विदेशी आक्रांता मुगलों  के दरबार के ऊंचे लोगों  ने सिर झुकाया तब कहां थे तुम? एक संजय की बात पर तुमने ये लीला रची। बहुत नाइंसाफी है ये…. हमारी फुलवा सी फूल को तुम्हारे लोगों ने फूलन बनाया तब औरतों की इज्जत कहां गई थी ठाकुर। एक अकेेले को थप्पड़ मार के और एक हसीना पीपीका की नाक काटने की बात  कहकर तुमने बता दिया कि तुम लोग औरतों की कितनी इज्जत करते हो। राजा पतनसिंह कमजोर हो गया तो अपनी औरतों को आग में झोंक मारा। बहुत नाइंसाफी है ये ठाकुर। ये एकता उस समय कहां थी जब औरतें जल रही थी। तब तो अपनी-अपनी मूंछों और नाक के लिए तुम्हारे भाई-भाई आपस में मां की आंख कर रहे थे।

करणी तो स्वयं देवी  हैं औरत का सबसे बड़ा रूप। देवी के नाम पर औरत की नाक काटकर तुम खाजपूत बन गए हो ठाकुर।

गब्बर तुम भी तो सिंग हो ना?

सिंग नहीं सिंह हूं मैं ठाकुर औरतों की इज्जत जो करता है वो सिंह है गब्बर। सिंग घुसेगा खाजों के पिछवाड़े। मैंने बसंती की नाचने की प्रतिभा को पहचाना और मेहबूबा को पर्दे के बाहर किया। तुम इतना हंगामा अपनी बुराइयों को हटाने में क्यों नहीं करते ठाकुर? तुम औरतों की इज्जत की बात करते हो उन पर अत्याचार करके। तुम तो शुरू से महिला अधिकारों की टांग तोड़ रहे हो आज कैसे रखवाले बन गए। तुमने अपनी बहू को विधवा रखा और उसके जय के साथ हनीमून मनाने के सपनों को कटे हाथों से चकनाचूर कर दिया। आज भी तेरी बहू अटारी पर लालटेन जलाकर जय के भूत से आंखे चार करती है।

वो बातें बीत गईं गब्बर। मैं तो घोषणा करने वाला हूं पीपीका को कोई मेरे पास ले आए तो मैं उसे बसंती दे दूंगा।

बसंती कोई बकरी है जो किसी को दे देगा डूंडे ठाकुर।

नहीं वो घोड़ी यानी धन्नों की मालकिन है। वीरू से मैं बात कर लूंगा। तुम अपनी कहो गब्बर।

पीपीका के मामले में तुझसे बाद में बात करूंगा ठाकुर… डूंडे ठाकुर तू क्या सोचता है  सीडी मार्के ट में लाकर लोधी जी दुश्मनों की हार्दिक इच्छा का क्रियाकरम कर देंगे हां? पार्टी के (गद्) दारों को कम मत समझ।

गब्बर, राजनीति तू समझेगा नहीं, जो राजनीति के लिए बिक जाए, लोकहित छोड़कर अपने लोगों का सिक्का जमाए उसकी सीडी ही खरीदनी चाहिए। हर जगह सिर्फ पार्टी के (गद्)दार नहीं होते सभी लोग होते हैं  सभी का ख्याल करना होता है। गब्बर चिंता मतकर दिन किसी का हो (गुज) रात  का वक्त तो भारतीय जुगाड़़ुओं का ही होगा। गब्बर शर्त लगा ले।

हथकटे ठाकुर हारा तो क्या देगा?

सीडी ले लेना….

कौन सी

लाघव जी और कामकुमार की

अरे खामोश,

इतनें में अचानक  फोन कट गया। एक मैसेज सुनाई दिया। लाइन में फॉल्ट अपने की  वजह से बीएसएनएल नेटवर्क कुछ समय के लिए अनुपलब्ध है। रुकावट केे लिए खेद है।



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