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गुजरात चुनाव प्रचार नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी

Posted On: 8 Dec, 2017 Junction Forum में

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राहुल बनाम मोदी

राहुल बनाम मोदी

‘विकास से शुरू चुनाव प्रचार ने कई करवटें बदली–गुजरात का चुनाव दो चरणों में होगा 9 दिसम्बर और 14 दिसम्बर 18 दिसम्बर को हिमाचल और गुजरात का रिजल्ट आयेगा |विकास से शुरू हुए चुनाव प्रचार ने कई करवटें बदली कांग्रेस और भाजपा के अनेक स्टार गुजरात में हैं रैलियों का दौर चल रहा है | राहुल गाँधी ने मोदी जी से अनेक प्रश्न पूछे चुनाव मोदी बनाम राहुल बन गया तरह-तरह के आरोपों प्रत्यारोपों का दौर चला अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया हाल ही में मणि शंकर अय्यर ने प्रधान मंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए उन्हें नीच कहा जिसे मोदी जी ने अपने चुनाव भाषणों का विषय बनाया उनको ब्यान का दुःख था उन्होंने कहा 18 दिसम्बर को चुनाव नतीजों द्वारा गुजरात की जनता करार उत्तर देगी| चुनाव के समय एक-एक बात का महत्व होता है राहुल गाँधी ने तुरंत उनसे माफ़ी मांगने को कहा श्री अय्यर ने मीडिया के सामने सफाई पेश करते हुए माफ़ी मांगते हुए कहा वह हिन्दी भाषी नहीं हैं और उन्होंने मोदी के लिए अंग्रेजी के शब्द Low का हिन्दी अनुवाद नीच किया था पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री अय्यर हिंदी उर्दू के अच्छे ज्ञाता है वह भी जानते हैं उन्होंने ‘देश के प्रधान मंत्री’ के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग किस कूटनीति के तहत किया ? चुनाव में होने वाले नुक्सान से बचने के लिए राहुल गांधी ने श्री अय्यर को कांग्रेस की सदस्यता से निलम्बित कर दिया |

चुनाव में अपनी ताकत मजबूत करने के लिए कांग्रेस के नये गठजोड़ बने पाटीदारों को आरक्षण देने के नाम पर हार्दिक पटेल राजनीति की बिसात बिछा कर बैठे थे वह कहते हैं वह कांग्रेस के साथ इसलिए जुड़े है कांग्रेस ने पाटीदारों को आरक्षण देने का समर्थन करती है उन्हें आश्वासन दिया है यदि वह सत्ता में आये तो पाटीदारों को आरक्षण मिलेगा क्या पाटीदार इतने पिछड़े हैं जिन्हें आरक्षण की जरूरत महसूस हुई जबकि गुजरात का आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न वर्ग है| आजकल आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति चमकाना आसान है आरक्षण का नारा नौजवानों को आकर्षित करता है कांग्रेस के एक प्रसिद्ध वकील नेता ने हार्दिक पटेल को संविधान की अपने हिसाब से व्याख्या कर आरक्षण का गणित समझाया और वह समझ भी गये | दलित और आदिवासियों के नेता भी राहुल गांधी का समर्थन कर रहे हैं |अभी तक मुस्लिम इमामो का फतवा राहुल गांधी के समर्थन में नहीं आया है |मुस्लिम वोट बैंक को रिझाने की कोशिश भी नहीं की गयी है मुस्लिम समाज को वह अपना वोटर समझते हैं गुजरात में मुस्लिम समाज की परसेंटेज कम है वहाँ का वोहरा समाज मोदी जी का समर्थन करता है मोदी जी की विदेश यात्राओं में उनके सम्मान में भारतीय प्रवासियों द्वारा आयोजित सभाओं में वह बड़ी संख्या में आते है |राहुल जी आजकल हिन्दू समाज को रिझाने में लगे हैं वह मन्दिर मन्दिर दर्शन करने जा रहे है उनके हिन्दू ,शिव भक्त और जनेऊधारी होने की भी चर्चा हो रही है गुजरात के चुनाव में समय बहुत  महत्वपूर्ण है राहुल जी उपाध्यक्ष से अध्यक्ष बनने जा रहे हैं चुनाव जीतना उनके लिए भी सम्मान का प्रश्न है

राष्ट्रीयता अपने देश के लिए मर मिटने की भावना है — कांग्रेस 22 वर्ष के भाजपा शासन को उखाड़ फेकने के लिए एडी चोटी का जोर लगा रही है | गुजरात चुनाव की घोषणा होने पर गांधीनगर के एक चर्च के प्रधान पादरी ने लोगों को वोटिंग से पहले एक खुला खत लिखा है, सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ खत क्या फतवा था प्रधान पादरी थॉमस मैक्वैन ने लिखा था  ’गुजरात विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो चुका है चुनाव के परिणाम देश के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इसकी प्रतिक्रिया और प्रतिध्वनि हमारे प्यारे देश पर पड़ेगी। यह हमारे देश के भविष्य पर भी असर डालेगा। हमें मालूम है कि हमारे देश की धर्मनिपेक्षता और लोकतंत्र इस समय दांव पर है। मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है’ | देश में संवैधानिक मूल्यों को कुचला जा रहा है। देश में ओबीसी, पिछड़ों, गरीबों और अल्पसंख्यक के बीच असुरक्षा का भाव बढ़ता जा रहा है। देश भर में राष्ट्रवादी ताकतें चरम पर हैं। हमारी प्रार्थना देश को राष्ट्रवादी ताकतों से भी किन राष्ट्रवादियों से खतरा है लोकतंत्र में राष्ट्रवाद को खारिज कर दें उन्होंने विश्व इतिहास से कुछ उदाहरण दिए थे |किस्से खतरा है? उत्तर साफ़ था | पादरी की मंशा बीजेपी पर निशाना साधने की थी पत्र राहुल सोनिया गांधी के विरुद्ध नहीं था|  संविधान के नाम पर राष्ट्रवाद पर टिप्पणी किसी प्रकार उचित नहीं थी | प्रधान पादरी की चिठ्ठी के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत की गयी उनसे जिला चुनाव अधिकारी ने उनसे जबाब माँगा |

भारत में इसाई मिशनरियां सक्रिय है धर्म परिवर्तन के लिए सबसे अधिक पैसा बाहर से आ रहा है कईयों का व्यवसाय ही बन चुका है सिलाई कढ़ाई सिखाने के नाम पर महिलाओं को रोजगार दिया जाता है लेकिन पहली शर्त धर्म परिवर्तन है | भारत में विभिन्न धर्म ,संस्कृतियाँ हैं लेकिन अनेकता में एकता और सहिष्णुता देश की पहचान और आत्मा है इसी लिए सभी एक हैं |देश का संविधान पन्थ निरपेक्षता को महत्व देता है देश सोवियत संघ की भांति अनेक राष्ट्रों का समूह नहीं है इसी लिए सोवियत संघ टूट गया | योरोप में चर्च और राजा सत्ता का संघर्ष इतिहास का विषय है लेकिन धीर-धीरे पोप की सत्ता को दबा कर धर्म निरपेक्षता को महत्व दिया गया | सदियों से भारत गुलाम रहा पहले मुस्लिम हमलावर आये देश सोने की चिड़िया माना जाता था यहाँ के खेतों में लहलहाती फसलें जल से भरी नदियाँ प्रकृति के हर मौसम यहाँ मिलते थे अत : हमलावर यहाँ की समृद्धि से आकर्षित हो कर हमले करते रहते थे कुछ लूटपाट कर वापिस अपने वतन लौट जाते थे अधिकतर यहीं के हो कर रह गये बाद में उन्होंने सत्ता पर अधिकार कर दिया रोजगार की खोज में आने वालों , साहित्यकारों और विद्वानों ने भी भारत का रुख किया यहाँ तक फ़ारसी देश राजकीय काम काज की भाषा रही थी |

अनेक योरोपियन देशों की भारत पर नजर थी यहाँ उपनिवेश स्थापित करने के लिए सत्ता संघर्ष हुए गोवा तो 1961 तक पुर्तगाल के आधीन रहा |तिजारत करने आये अंग्रेजों ने सत्ता पर कब्जा कर लिया पहले ईस्ट इंडिया का शासन था उनके खिलाफ हिन्दू मुस्लिम दोनों मिल कर लड़े 1857 की क्रान्ति का नेतृत्व बहादुर शाह जफर ने किया था क्रान्ति को कुचल कर भारत ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा बना लिया गया | विदेशी सत्ता का विरोध बढ़ता रहा देश में वन्दे मातरम के स्वर गूँजे करोड़ो हाथ आजादी और भारत माता की जय में उठे भारत भूमि को जीवन का पालन करने वाली माता के रूप में देखा गया गुलामी में माता को जंजीरों में जकड़ा समझ कर उसकी मुक्ति की कोशिश की जाने लगी यहाँ से त्याग और बलिदान का सिलसिला शुरू हुआ |हर मातृभूमि के लिए बलिदान के इच्छुक स्तंत्रता संग्राम के सिपाहियों में भारत माता का काल्पनिक स्वरूप उत्साह का संचार करता था वन्दे मातरम का विरोध भी हुआ कुछ विचारक अपने देश को धरती का टुकडा मानते थे देश आजाद हुआ देश का विभाजन भी दो राष्ट्रीयताओं के नाम पर हुआ था | अंग्रेज गये लेकिन भारतीय संविधान द्वारा एंग्लो इंडियन को विशेष रूप से लोकसभा की दो सीटों के लिए मनोनीत किया जाता है |

राष्ट्रीयता अपने देश के लिए मर मिटने की भावना है  चीन ने हमारे देश पर हमला किया पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध लड़े शहीदों की अर्थी के पीछे भी शहादत देने वालों के लिए भारत माता का जयघोष पूरे देश में गुंजा |125 करोड़ के देश में तो उबैसी जैसे विचारक नमक जैसे भी नहीं हैं |धर्म निरपेक्ष देश है इसलिए धर्म की दुहाई देना भी राजनीतिक गोटियाँ चलने की नापाक हरकत है प्रवासियों को भी अपने देश पर गर्व है | ओबामा  अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ने हिदुस्तान टाईम्स के लीडर शिप शिखर सम्मेलन में अपने भाषण के दौरान कहा “ भारत को अपनी मुस्लिम आबादी का ध्यान रखना चाहिए जो ख़ुद को इस देश से जुड़ा हुआ और भारतीय मानते हैं’ अजीब बात है| ऐसी ही मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान कहा था भारत के संसाधनों पर पहला अधिकार अल्पसंख्यकों का है जिसमें मुस्लिम प्रमुख माना जबकि भारत सबका है |

चुनाव में मुख्यतया कांग्रेस और भाजपा अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं कुछ लोगों के अनुसार राहुल गांधी जी के लिए चुनाव जीतना जरूरी है लेकिन गुजरात का चुनाव नहीं भी जीता गया राहुल गांधी पर आंच नहीं आयेगी हारने का सारा जिम्मा कांग्रेसी अपने पर ले लेंगे |

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