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संसद का शीतकालीन सत्र शुरू, 'तीन तलाक' समेत ये अहम बिल पास कराना चाहेगी सरकार!

Posted On: 15 Dec, 2017 Politics में

Avanish Kumar Upadhyay

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संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो गया। सत्र के पहले ही दिन संसद में गर्मागर्मी देखने को मिली। विपक्ष ने शुक्रवार को राज्य सभा की कार्यवाही शुरू होते ही कई मुद्दों को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे के चलते राज्य सभा की कार्यवाही पहले 12 बजे तक और फिर दोपहर 2:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं, लोकसभा की कार्यवाही 18 दिसंबर दोपहर 11 बजे तक के लिए स्‍थगित कर दी गई है।


parliament


प्रधानमंत्री ने कहा- सकारात्मक बहस हो


pm modi parliament


सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सकारात्‍मक और अच्‍छी बहस की आशा की। उन्‍होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि संसद में सकारात्मक बहस होगी, देश लाभान्वित होगा और प्रजातंत्र मजबूत होगा। मुझे विश्वास है कि यह उत्पादक सत्र होगा। अच्‍छी, सकारात्‍मक और इनोवेटिव सुझावों के साथ बहस हो, तो संसद के समय का सदुपयोग होगा। आल पार्टी मीटिंग में भी उम्‍मीद जताई गई कि सकारात्‍मक बहस होगी, जिससे देश लाभान्वित होगा और लोकतंत्र मजबूत होगा।


14 दिनों तक चलेगी संसद


rajyasabha


बता दें कि 15 दिसंबर से 5 जनवरी तक चलने वाला यह सत्र मात्र 22 दिनों का होगा, जिसमें अगर छुट्टियों को हटा दें, तो संसद की कार्यवाही सिर्फ 14 दिनों तक ही चलेगी। पहले दिन लोकसभा में दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के बाद कार्यवाही स्थगित कर दी गई। वहीं, 18 दिसंबर को गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों के नतीजे भी आने हैं। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि चुनाव के नतीजों का प्रभाव भी संसद सत्र के दौरान देखने को मिल सकता है।


सरकार के लिए इतने बिल हैं अहम


Parliament1

प्रतीकात्‍मक फोटो


उधर, सत्र में केंद्र सरकार चाहेगी कि वह अपने बिल पास करवाए। इस सत्र में सरकार कुल 14 बिल पेश कर सकती है। इनमें सबसे बड़ा नाम तीन तलाक को लेकर पेश किए जाने वाले बिल का है। इस बिल के प्रावधान के तहत तीन तलाक देने वाले व्यक्ति को तीन साल तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा फाइनेंशल रिजॉल्‍यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस (एफआरडीआई) बिल, इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड संशोधन बिल, फॉरेस्ट संशोधन बिल, नागरिकता संशोधन विधेयक 2016, मोटरवाहन संशोधन विधेयक 2016, ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिकार संरक्षण विधेयक आदि शामिल हैं। वहीं, जीएसटी में हुए बदलाव को कानूनी जामा पहनाने के लिए भी संशोधन पेश किए जा सकते हैं…Next


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