Misfit : मिसफ़िट

तपस्या कीजिये मैं तो तापस भाव भर दूंगा ! तिमिर जब छाएगा – उजेले राहभर दूंगा !!

118 Posts

156 comments

girishmukul


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by: Rss Feed

मेरा डाक टिकिट

Posted On: 19 Jul, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Hindi Sahitya Social Issues में

2 Comments

मेरा डाक टिकिट

Posted On: 19 Jul, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Social Issues में

0 Comment

वामअंग फरकन लगे 01

Posted On: 4 Apr, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

social issues में

0 Comment

माँ कहती थी आ गौरैया

Posted On: 4 Apr, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Social Issues में

1 Comment

पोट्रेट्स

Posted On: 20 Oct, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others social issues हास्य व्यंग में

0 Comment

Page 1 of 1212345»10...Last »

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

नमन अडानी अंबानी के दौर में जमशेद जी टाटा को याद कीजिये.. देखिये तब क्या था..   तब क्या सरकार उन पर मोहित न थी..        खैर मेरा आलेख प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिखा है. आत्म मुग्ध नहीं हूं.. न ही मैं राष्ट्रगान गाकर राष्ट्र को कोसने पर विश्वास रखता. पहली भारतीय प्रतिभाएं सराहीं गईं .. रहा अडानी को धन देने का सवाल आप जानते हैं कि कर्ज़ किसे मिलता है. बैंक ने कुछ सोच कर ही किया होगा. विस्तार से सोचिये.. आर्थिक विकास का आधार साम्य नही हो सकता. हम जब साझा खेती नहीं कर पाते भाई भाई तुरंत बंटवारा चाहते हैं उस भारत में को आपरेटिव मूवमेंट कितना सफ़ल है आप समझ सकते हैं. मैने जो लिखा खुद से सैकड़ो सवाल कर के लिखा है.. यह तो प्राक्कथन है.. इसे आप पुस्तक के रूप में शीघ्र पाएंगे.. आप विद्वान है आशीर्वाद दीजिये.. कुछ अच्छा लिख दूं.. प्रणाम सादर गिरीश मुकुल

के द्वारा: girishmukul girishmukul

प्रिया, गिरीश जी सही कहा आने, हमें भी ऐसा ही लगता है कि अगले १५-२० वर्षो में भारत विश्व की एक शक्ति का केंद्र होगा जो युवा भारतियों का देश होगा लेकिन आप का कथन "विश्व में भारत की ब्रांडिंग कर रहे प्रधानसेवक की ऊर्ज़ा चुकी नहीं. वे “मेक इन इंडिया” सूत्र को आकार देने में जुट चुके हैं." गले से नीचे नहीं उतरता है क्योंकि आपके (मेरे नहीं ) पधान सेवक अभी तो अपनी ही ब्रांडिंग में मस्त है ? क्या मेक इन इंडिया का विजन यही है कि एक अकेले अडानी को ६२०० करोड़ रुपया का कर्ज केवल इस लिए दिया जाय कि वह ऑस्ट्रेलिया में कोयले की खोज करे आप बताओं कि यह कैसा मेक इन इण्डिया है " अब नारा यह होना चाहिए "सब का साथ केवल अडानी का विकास " और हो भी क्यों न जिस व्यक्ति ने एक सूबे के नेता को भारत का प्रधान सेवक बनाने में अपना योग दान दिया हो उसे उपकृत तो करना ही पड़ेगा ? धन्यवाद

के द्वारा: s.p. singh s.p. singh

बहुत सही | इस बन्दे मे दम है साहब| ऐसा भाषण जो लालकिले की प्राचीर से आज तक नहीं सुना| पूरा भाषण भारत की अस्मिता को अक्षुण्ण रखने की जद्दोजहद से भरा|   कुछ मूर्ख लोग हैं जो गला फाड़ कर चिल्ला रहे हैं की अच्छे दिन नहीं आये| अरे गधों, हमने इस सरकार को इसलिए नहीं चुना क्यूंकि इसके पास कोई जादू की छड़ी है और बस २/३ महीनों में सारे देश का नक्शा बदल जायेगा| हमने इन्हें मत दिया था गुड गवर्नंस के लिए। हमें मुफ्त कुछ नहीं चाहिए पर बस सरकार जो करे उसमें घोटाले न हों, हमें सस्ता भी नहीं चाहिए पर बस हमारे मेहनत की कमाई का उचित प्रतिफल मिले| साहब १५० किलोमीटर का सफ़र रेल ६० रुपये में कराती है और फिर स्टेशन से घर जाने में १५०/२०० रुपये लग जाते हैं| रेल ने ६० का ७० कर दिया तो हमें तकलीफ हो जाती है , ये सोच बदलनी होगी| इतने सालों से कांग्रेसियों को झेल रहे थे तब कुछ नहीं हुआ अब हमें २ महीनों में ही परिणाम चाहिए|  हमें याद रखना चाहिए की  हमने प्रधान मंत्री चुना है जादूगर नहीं| हमें अपनी सोच बदलनी ही होगी तभी इस देश का नक्शा बदलेगा|  आपके विचारों के लिए साधुवाद!

के द्वारा: अवी अवी

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

गिरीश ,,,यानी पर्वत के ईश्वर यानी शिव ,,,,बहुत बहुत बधाई ,,,जिस भविष्य वाणी को आप द्रष्टिगोचर कर रहे है वह वर्तमान मैं कही अधिक विकास कर चूका है   शायद हिमालय पर निवास करते आपका तीसरा नेत्र खुला होगा तब परिकल्पना हुई होगी  जब दुनियां मै सर्वत्र भौतिक विकास चरम पर है तो अनैतिक विकास क्यों नहीं होगा जब आध्यात्म अपने चरम पर था तब भी अनैतिकता अनाचरण  समान रूप से थे अब तो हम शायद पीक प्वाईट पर पहूंच रहे हैं तो क्यों नहीं ईस विधा मैं विकास करैंगे ,,,,यह प्रक्रति के नियम सिद्धांतों पर ही होता रहा है और होता रहेगा         ,    अंततः जो जैसा करेगा वैसा भरेगा       परेशान ना हो     बस गिरीश जी आप तपस्या मैं लीन हों  हम जीव यही कहते रहैंगे,,,,,    ,,, ओम     शांति ,,,शांति ,,,शांति,,,,,,,,   चाहे भयभीत होकर कहै या भक्ति से -------,,,,,,,,,,,

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

मेरा कहा तो सुनिए सच यही है कि – ये घीसूओं माधवों का हिन्दुस्तान है. एक बेतरतीब मंज़र पैदा करते ये लोग कभी कभार सल्लू की कार से कुचले जाते हैं वरना इनको सामाजिक-आर्थिक गैर बराबरी रोज़िन्ना कुचलती है। आप हम सब अपने अपने एक एक सिगमेंट का निर्माण करते हैं अपने इर्द गिर्द उसी में जीना चाहते हैं। घीसूओं माधवों का अपना सिगमेंट है.आपके हमारे सिगमेंट से बड़ा है. ध्यान रहे जब इनके हाथ मुट्ठियां बन बगावत के लिए तन जाएँगी तब सर्वत्र अराज़कता हिंसा होगी इस तथ्य को हम आप नकार नहीं सकते। नक्सलवाद इसी का उदाहरण है. घीसूओं माधवों के सिगमेंट में खोने का भय नहीं है। वह खोयेगा क्या है.…एकदम सटीक

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

सारे कवि लेखक चिंतक विचारक, यहां तक कि वो भी जो रोज़िन्ना पसीना बहाता है दो जून की रोटी कमाता है. व्यवस्था से खुद को दूर कर रहा है… भयातुर है उसमे एक भावना घर कर रही है कि उसे हमेशा छला और ठगा जाता है कौन जाने एक और कल भी ऐसा ही आए. लेखक चिंतक,विचारक, कवि, कार्टूनिष्ट, या आम-आदमी मूल्य हीन है. इनकी आवाज़ की की़मत..? कुछ भी नहीं ये रोयें या झीखें.. इनके मरने न मरने से किसी देश का क्या बनेगा बिगड़ेगा भला आप ही बताइये. देश में आतंक का जन्म होने के कारण को खोजती व्यवस्था गोया उसे एक ब्लैकहोल मान चुकी है.बिलकुल सही लिखा आपने और सटीक कार्टून का उपयोग करके आपने इसे और भी प्रभावी बना दिया है श्री गिरीश जी ! बहुत सुन्दर लेख

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul

के द्वारा: girishmukul girishmukul




latest from jagran