www.gopalrajuarticles.webs.com

Just another weblog

63 Posts

136 comments

Gopal Raju


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by: Rss Feed

गुप्त नवरात्र क्या हैं ?

Posted On: 9 Feb, 2016  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

लाल किताब के उपाय- Lal Kitab Ke Upay

Posted On: 17 Dec, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

Wish Box – इच्छा पात्र

Posted On: 10 Nov, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

कीलन तंत्र से बनायें सुरक्षा कवच

Posted On: 11 Aug, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

1 Comment

गिलोय – अमृत बेल

Posted On: 8 Aug, 2015  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

चमत्कारिक अंगूठियां (Fortunate Rings)

Posted On: 14 Dec, 2014  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

मंगल दोष के सरल-सुगम समाधान

Posted On: 11 Jul, 2014  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

शंकराचार्य जी महाराज ने तो छोड़ दी एक फुरफुरी

Posted On: 5 Jul, 2014  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

1 Comment

Page 1 of 712345»...Last »

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा:

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा:

के द्वारा: Gopal Raju Gopal Raju

के द्वारा: Gopal Raju Gopal Raju

के द्वारा:

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: Gopal Raju Gopal Raju

के द्वारा: shalinikaushik shalinikaushik

गोपाल राजू जी, मैं आपके जीव प्रेम व दया भाव के लिए आपकी सराहना करता हूँ, निश्चय ही हमें ऐसे प्रयास करने चाहिए कि दया व अहिंसा का वैश्विक संदेश प्रसारित हो व एक आदर्श विश्व की स्थापना हो किन्तु प्रश्न यह है कि क्या यह सत्य से मुंह मोड़कर संभव है? क्या यथार्थ पर पर्दा डालकर वास्तविक परिवर्तन लाया जा सकता है? हमें सत्य को पहचानना होगा, स्वीकारना होगा व उसमें से अनुचित के त्याग का साहस दिखाना होगा अन्यथा हम कुछ व्यक्तियों को भ्रमित भले ही करने में सफल हो जाएँ सकारात्मक संदेश दूर तक नहीं दे सकते। अंततोगत्वा झूठ की आयु अधिक नहीं होती.... इस्लाम पशुओं की कुर्बानी नहीं सिखाता, यह एक ऐसा ही झूठ है। आपके लेख से स्पष्ट होता है कि कि आपको इस्लाम का विशेष ज्ञान नहीं है, आपने मौलिक रूप में कुरान व इस्लामी हदीसे नहीं पढ़ी। मात्र अन्य लोगों की लिखी कुछ किताबें आपके विश्वास का आधार हैं। यदि मैं गलत नहीं हूँ तो “इस्लाम धर्म क्या कहता है” नामक पतली सी किताब पढ़कर आपने यह लेख लिखा होगा। हाँलाकि कुछ वैसी ही और किताबें भी हैं...!! मैं ऐसा इसलिए कह पा रहा हूँ क्योंकि मैंने बचपन से ही कुरान को पढ़ा है और बाद में हदीसों को भी पढ़ा। कुरान में अल-फ़ातिहा से लेकर अल-नास तक कुल 114 सूरा हैं। अल-फ़ातिहा का अर्थ अरबी में प्रारम्भ होता है अतः पहला सूरा मात्र 7 आयतों के साथ शुरुआत मात्र है जैसे कि मंगलाचरण होता है। कुरान की वास्तविक शुरुआत दूसरे सूरा “अल-बकरा” से होती है। बकरा का अरबी में अर्थ ही बैल अथवा बछड़ा होता है। अल-बकरा इसका नाम ही इसीलिए है क्योंकि यह बछड़े के कत्ल से ताल्लुक रखता है। इसमें अल्लाह ने आयात उतारीं जिसमें पैगम्बर मूसा ने गाय को पूजते लोगों को मना कर गाय काटने की सीख दी थी। आयत 67 देखें- “निश्चय ही अल्लाह तुम्हें आदेश देता है कि एक गाय जब्ह करो”। आयत 54 कहती है- लोगों! तुमने बछड़े को देवता बनाकर अपने ऊपर जुल्म किया है, अपने बनाने वाले की ओर लौटो और अपने ही लोगों को कत्ल करो (जो ऐसा नहीं करते हैं)। इसी तरह कुरान के कई सूरों में जैसे कि “सूरा 5 अल माइदा व सूरा 6 अल-अनआम में इतमिनान से लिखा है मांस के बारे में। आपने जिस किताब को पढ़कर उसका हूबहू यहाँ उतार दिया है उसमें संदर्भों को तोड़-मरोड़ कर लिखा गया है; उदाहरण देखिए, सूरे बकरा की जो आयत लिखी है वहाँ खेती व नस्ल लिखा है। आयत 204 से 210 तक इस संदर्भ में संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का संदर्भ दिया गया है, जीवअहिंसा का नहीं। इसी सूरा की आयत 172-173 बताती है कि कैसा मांस खाना चाहिए कैसा नहीं.! खून को हराम किया गया है जैसे कि सूअर के मांस को व उस मांस को जो जानवर अल्लाह का नाम लेकर न काटा गया हो!! कुत्तों की बात हदीसों में कई बार आयी है, विशेषकर बुखारी व मुस्लिम में जहां मैंने खुद पढ़ा है। मुस्लिम सहीह किताब 24 में लिखा है कि अल्लाह के रसूल (पैगम्बर) ने बताया कि फरिश्ता जिब्रायील उनसे मिलने नहीं आया क्योंकि उनके कमरे में कुत्ता आ गया था, फिर पैगम्बर ने सभी कुत्तों को मार डालने का आदेश दे दिया। कुत्ता शैतान की रचना है। केवल उन्हीं कुत्तों पर दया बख्सी गई जो रखवाली अथवा शिकार के काम आते थे। हदीसों में जानवर की कुर्बानी के सैकड़ों प्रसंग आते हैं। यहाँ विस्तार भय से अधिक नहीं लिखा जा सकता.... मेरा आशय न कुर्बानी का समर्थन है क्योंकि मैं स्वयं इसे उचित नहीं मानता, और न ही किसी की भावना को ठेस पहुंचाना। मेरा मानना है कि किसी भी धर्म की किताब को आप अपने तरीके से तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत नहीं कर सकते। आज के यथार्थ में हम अपनी बात सीधे तरीके से रखें वह अधिक ठीक है। यह आवश्यक तो नहीं हर मुसलमान आज मांस खाता हो अथवा रूढ विचारधारा पर चलता हो... बौद्धिक उन्नति के समर्थन की आवश्यकता है। हिन्दू धर्म में भी एक समय मांस व बलि की कुप्रथा का प्रचलन हो गया था, हमने उसका पूर्ण अस्वीकारण किया, अब कई स्थानों पर यह बंद हो चुका है व बंद हो रहा है। मेरे एक मित्र ने अभी इस बार से उत्तराखंड से इस संदर्भ की सूचना दी है जहां इस वर्ष से ऐसी कुप्रथाओं को बंद कर दिया गया। अतः तोड़-मरोड़कर व गलत व्याख्या से अच्छा है बौद्धिकता को समर्थन करें... इस तरह के झूठ से लोग अधिक दिन नहीं बहलते!!!

के द्वारा: vasudev tripathi vasudev tripathi

के द्वारा: Gopal Raju Gopal Raju

प्रतिक्रिया का आभार | मेरे शब्द देखें भाई, "क्योंकि ऐसी बातें अधिकांशतः उस अबौद्धिक वर्ग के तांत्रिक-ज्योतिष द्वारा फैलायी जाती हैं जो पहले तो इन बातों से लोगों में एक अज्ञात भय पैदा करते हैं फिर उसको धन आदि किन्हीं बातों से कैश कराते हैं।" डॉक्टर के पास वही जाता है जो बीमार है | बिना बीमारी भी वह दोहन करता है | सौभाग्य इसमें ही है की किसी अनहोनी से किसी का साकार न हो | भुक्त भोगी ही व्यथा बयां कर सकता है | पेशे से मैं वैज्ञानिक हूँ | जल्दी मानता नहीं अंधविश्वासों को, पर जहाँ मानने वाली बात है उसको स्वीकार करना ही पड़ेगा मेरे भाई | विधाओं में दोष नहीं है भाई है, दोष है हमारी अज्ञानता में और Commercial exploitation करने वालो में | आपको आघात पहुंचा हो तो क्षमा-याचना |

के द्वारा: Gopal Raju Gopal Raju

के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

गोपालभाई दो बातें है । हालांकी दो बातें एक साथ सच नही होती लेकिन मेरे लिए है । पहली बात । बचपन में एक भाभी जी शरीर से दुसरी जिन्दा औरत की आत्मा को निकालल ने की विधि देखी । विधि करनेवाला ऐरा गैरा तान्त्रिक नही था । ८५-९० साल के रिटायर सरकारी नौकर थे और बडे विद्वान पुरोहित थे । उंगली पकडते ही अंदर घुसी हुई औरत कबूल करने लगी वो क्यों आई थी ईस शरीर में । उसे भाभी जी के कपडे पसंद आ गये थे । उस से उस का एड्रेस लिया कपडे भेजने का वचन दिया तो वो चली गई । भाभा जी घरमें तूफान मचाती थी सब बंद हो गया । दूसरी बात । आत्मा आदमी के शरीरमें किधर रहती है वो अभी तक कोइ बता नही पाया है । और शरीर में एक ही आत्मा क्यो । शरीरे तो अरबों सेल से बना ढांचा मात्र है । सब सेल स्वतंत्र जीवन है । आदमी सांस लेता है अपने लिए नही लेता, वो करोडों सेल को ओक्सिजन पहुंचाने के लिए लेता है । खाना खाता है तो भी वो सेलों लिए । कोइ जगह बाकी नही जो सेल से नही बनी हो । कौन से सेल में आदमी जी आत्मा रहती है समजमें नही आता । आदमी मरता है तब करोडों जीव एक साथ मरते हैं । कौन सा जीव भूत बनता है समजमें नही आता । विज्ञान तो कहता है की ब्रह्मांड की ४ टका चीज ही आदमी देख सकता है, ९६ टका चीजें अद्रष्य है, कभी नही देखाई देगी ।

के द्वारा: bharodiya bharodiya

के द्वारा: Gopal Raju Gopal Raju

के द्वारा: Gopal Raju Gopal Raju

के द्वारा:

के द्वारा:




latest from jagran