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देश के करोडों युवाओं के रोल मॉडल हैं मिसाइल मैन डॉ. कलाम

Posted On: 26 Jul, 2017  
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बनोगी उसकी ही कठपुतली

Posted On: 26 Jul, 2017  
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कब तक हम कहेंगे क्रांतिकारियों को आतंकवादी

Posted On: 26 Jul, 2017  
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दलित क्यों कहें

Posted On: 26 Jul, 2017  
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दलित क्यों कहें

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अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों

Posted On: 26 Jul, 2017  
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अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों

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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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…जब उन्होंने रौंद डाली इंसानियत

Posted On: 26 Jul, 2017  
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…जब उन्होंने रौंद डाली इंसानियत

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महामहिम का हार्दिक अभिनन्दन

Posted On: 26 Jul, 2017  
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महामहिम का हार्दिक अभिनन्दन

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गुरुग्राम के रियल्टी जगत को एनएचएआई का डबल तोहफा

Posted On: 26 Jul, 2017  
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के द्वारा: bdsingh bdsingh

आदरणीय जागरण जंक्शन परिवार,सादर हरि स्मरण.ब्लॉग शिरोमणि प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए बधाई.आप लोग समय-समय पर अन्य प्रतियोगिताएं भी आयोजित करें,जिससे हिंदी लेखन को बढ़ावा मिले.मै इस बात के लिए आप लोगों का आभारी हूँ कि आप के ब्लॉग पर पढ़ते-लिखते हुए अपनी हिंदी की गलतियों में सुधार कर रहा हूँ.आदरणीय संतलाल करुण जी ने बहुत सही कहा है कि जागरण जंक्शन ब्लॉग पर लिखने कि पूरी आज़ादी है और अपने विचार व्यक्त करके आनंद और आत्मिक शांति कि अनुभूति होती है.आप लोगों से आग्रह है कि "बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक" इसे हिंदी में कोई नाम दें और देवनागरी में लिखें.जैसे-"सप्ताह के सर्वश्रेष्ठ लेखक" या "सप्ताह के ब्लॉग शिरोमणि" या "सप्ताह का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग" या "सप्ताह का ब्लॉग शिरोमणि" कर दें.मुझे उम्मीद है आप इस पर जरुर विचार करेंगे. जागरण जंक्शन ब्लॉग आने वाले ५ वर्षों में दुनिया का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला हिंदी ब्लॉग होगा ऐसा मुझे विश्वास है.अपनी शुभकामनाओं सहित.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय जागरण जंक्शन परिवार,सादर हरि स्मरण.ब्लॉग शिरोमणि प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए बधाई.आप लोग समय-समय पर अन्य प्रतियोगिताएं भी आयोजित करें,जिससे हिंदी लेखन को बढ़ावा मिले.मै इस बात के लिए आप लोगों का आभारी हूँ कि आप के ब्लॉग पर पढ़ते-लिखते हुए अपनी हिंदी की गलतियों में सुधार कर रहा हूँ.आदरणीय संतलाल करुण जी ने बहुत सही कहा है कि जागरण जंक्शन ब्लॉग पर लिखने कि पूरी आज़ादी है और अपने विचार व्यक्त करके आनंद और आत्मिक शांति कि अनुभूति होती है.आप लोगों से आग्रह है कि "बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक" इसे हिंदी में कोई नाम दें और देवनागरी में लिखें.जैसे-"सप्ताह के सर्वश्रेष्ठ लेखक" या "सप्ताह के ब्लॉग शिरोमणि" या "सप्ताह का सर्वश्रेष्ठ ब्लॉग" या "सप्ताह का ब्लॉग शिरोमणि" कर दें.मुझे उम्मीद है आप इस पर जरुर विचार करेंगे. जागरण जंक्शन ब्लॉग आने वाले ५ वर्षों में दुनिया का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला हिंदी ब्लॉग होगा ऐसा मुझे विश्वास है.अपनी शुभकामनाओं सहित.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

लेखन एक अलग तरह का आनंद, अनुभूति और आत्मिक शान्ति प्रदान करता है | ‘जागरण जंक्शन’ लेखन के लिए अन्य की अपेक्षा अधिक खुला, बल्कि पूरा-का-पूरा खुला-फैला मैदान मुहैया कराता है | मैंने लगभग एक साल से लेखन का ऐसा ही खुलापन ‘जागरण जंक्शन’ पर पाया | इधर ‘ब्लॉग शिरोमणि’ प्रतियोगिता में कुछ सीमाएँ तो थीं, पर मैं बड़ी सहजता से अपनी बात रखता गया | अभिव्यक्ति के इन्हीं लघु प्रयत्नों से मुझे मतलब भर का सुकून मिल जाया करता है | ऐसे सुकून देने वाले मंच (जागरण जंक्शन) के प्रति मैं आभारी तो हूँ ही, इस मंचीयता में अपने समस्त विजेता-अविजेता सहभागियों का उपकार मानता हूँ कि उनकी वैचारिकता के साथ मैं आगे बढ़ सका | ‘जागरण जंक्शन’ के पाठकगण जो अपनी पठनीयता से हमारे साथ आए उनके प्रति सहृदय सद्भाव प्रकट करता हूँ |

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

लेखन एक अलग तरह का आनंद, अनुभूति और आत्मिक शान्ति प्रदान करता है | ‘जागरण जंक्शन’ लेखन के लिए अन्य की अपेक्षा अधिक खुला, बल्कि पूरा-का-पूरा खुला-फैला मैदान मुहैया कराता है | मैंने लगभग एक साल से लेखन का ऐसा ही खुलापन ‘जागरण जंक्शन’ पर पाया | इधर ‘ब्लॉग शिरोमणि’ प्रतियोगिता में कुछ सीमाएँ तो थीं, पर मैं बड़ी सहजता से अपनी बात रखता गया | अभिव्यक्ति के इन्हीं लघु प्रयत्नों से मुझे मतलब भर का सुकून मिल जाया करता है | ऐसे सुकून देने वाले मंच (जागरण जंक्शन) के प्रति मैं आभारी तो हूँ ही, इस मंचीयता में अपने समस्त विजेता-अविजेता सहभागियों का उपकार मानता हूँ कि उनकी वैचारिकता के साथ मैं आगे बढ़ सका | ‘जागरण जंक्शन’ के पाठकगण जो अपनी पठनीयता से हमारे साथ आए उनके प्रति सहृदय सद्भाव प्रकट करता हूँ |

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के द्वारा: seemakanwal seemakanwal

के द्वारा: Santosh Varma Santosh Varma

के द्वारा: priyanka shrama priyanka shrama

के द्वारा: santosh pandey santosh pandey

के द्वारा: Madan Mohan saxena Madan Mohan saxena

के द्वारा: seemakanwal seemakanwal

के द्वारा: gangeshgunjan gangeshgunjan

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अंगरेजी के प्रति मोह का एक अन्य कारण है ,श्रेष्ठ पदों पर बैठे अधिकारी या ग्लेमर की दुनिया के वे लोग ,जिनको व्यक्ति टी वी, फिल्मों राजनीति या अन्य क्षेत्रों में सफलता के शिखर पर पहुँचते देखता है और फिर अंग्रेजी रंग ढंग अपनाते देखता है,जिनके बच्चे पंचतारा जिन्दगी जीते हैं. स्वयम को और अपनी आने वाली पीढी को भी सफलता के शिखर पर देखने की कामना हर व्यक्ति का स्वप्न होता है अतः वह अनुसरण करते हुए अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना चाहता है. विदेश गमन की चाह भारतीयों का एक ऐसा मोह है,जिसके कारण अंगरेजी उनके दिलो दिमाग पर छाई रहती है.और वो ये मान बैठता है कि उनके बच्चे आगे की पढाई अच्छी तरह करके उच्च पद नहीं प्राप्त नहीं कर सकेंगें. और होता क्या है इनके पद चिन्हों पर चलने की कोशिश में हम अपनी मात्र भाषा को धीरे धीरे छोड़ते चले जाते हैं ! बहुत सटीक लेखन आदरणीय निशा जी मित्तल !

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भारत में जितनी भी शिक्षाएँ दी जाती है चाहे वो तकनीकी शिक्षा हो या कम्प्युटर, अभियांत्रिकी हो या किसी उच्च स्तर की अधिकारिक शिक्षा, सभी के पाठ्यक्रम चीन और जापान की तरह भारत में भी अपनी भारतीय भाषा हिन्दी में हो। ऐसा करने से लोगो का मन, जो अंग्रेजी के प्रति सम्मान और हिन्दी के प्रति हीन भावना से ग्रसित हो चुका है, इसमे बदलाव आयेगा। हिन्दी जानने वाले लोग भी रोजगार पा सकेंगे। फिर हिन्दी सम्मान पाने के रास्ते पर अग्रसर हो जायेगा। अकेला चना भाड़ नही फोड़ सकता, इसके लिए इस देश में जितने भी नामी-गिरामी हस्तियाँ है जिनके बोलचाल और रहने-सहने के तरीको को लाखों-करोडों देशवासी अनुकरण करते है, उन्हें भी हिन्दी का सम्मान वापस दिलाने के लिए जोश के साथ आगे आना होगा। उन्हें भी अपने मंच या टेलीविजन के साक्षात्कार मे बोलने के लिए अपनी मातृभाषा का उपयोग कर लोगों को हिन्दी बोलने के लिए प्रेरित करना चाहिए। कम्पनियों को भी अपने उत्पादों का नाम व उसके प्रचार-प्रसार के लिए अधिक-से-अधिक हिन्दी का ही इस्तेमाल करना चाहिए। सार्थक और सशक्त लेखन भगवान् बाबु जी !

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के द्वारा: Ritu Gupta Ritu Gupta

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धार्मिक आस्था के नाम पर आम आदमी का दोहन और राजनीतिक संरक्षण में असीम संपत्ति का स्वामी बन सरकार को भी चुनौती देना … यह क्या आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं है. अपने भगवान या अवतारी पुरुष घोषित करनेवाले क्या अब बताएँगे की उनकी सारी अलौकिक शक्तियां कहाँ चली गयी? बहुत सारी महिलाएं, जो अभी भी उनका समर्थन कर रही हैं, क्या उनका यह धर्म नहीं बनता और भी बालिकाओं/महिलाओं को उनके चंगुल में फंसने से बचाए. हमारे यहाँ जल्द ही लोग अंध श्रद्धा के शिकार हो जाते हैं. कही जमीन की खुदाई में कला पत्थर मिल गया तो संकर भगवन का अवतार… किसी पपीते ने अगर गणेश जी के जैसी आकृति ले ली तो गणेश अवतार आदि आदि … आखिर हम कबतक ऐसे अंध श्रद्धा के शिकार होते रहेंगे. ये धार्मिक या अध्यात्मिक गुरु/कथावाचक अपने शिष्यों को माया मोह त्यागने का सन्देश/ उपदेश/प्रवचन देते हैं और खुद माया मोह में बंधते चले जाते हैं. क्रोध पर विजय प्राप्त करने की बात कहने वाले खुद क्रोधित हो अनाप शनाप बकते चले जाते हैं. मानव मात्र से प्रेम करना और उनका भला करना कब तक सम्भव होगा????? सटीक बात कही है आदरणीय श्री जवाहर सिंह जी !

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लेखिका ने सारगर्भित तथ्यों को शालीनता और सहजता के साथ सुधि पाठकों के समक्ष रखा है वह काबिलेतारीफ है जिस तरह हर संबंधों पर अंगुलियाँ उठाई जा रही है , उसी कड़ी में गुरु शिष्य सम्बन्ध भी कटघरे में खड़ा दिखाई देता है या हमे दिखाया जाता है ; इन सभी प्रश्नों के जवाब इस लेख को पढने के बाद महसूस होता है ज़रूरत है नीति नियंताओं को अपने क्षणिक स्वार्थ से ऊपर उठकर सोचने की ,नकलची प्रविर्तियों से छुटकारा पाने की,अपने moullik सोच को निखारने की शिक्षक अपनी क्षमताओं के अनुसार प्रदत कार्य को उत्साहपूर्वक करे , शिष्य अपने सम्मानित गुरुजनों का तभी सम्मान करते है जिनकी अपने विषय पर अच्छी pakad हो और उनकी मानसिक स्थिति के मुताबिक पढाता हो प्रबुध्जन भी अच्छे संबंधो की बात को भी एक दुसरे से साझा करे ताकि अन्य लोगों को भी मालूम पड़े दुनिया में सुधार के प्रयास भी जारी है, हिम्मत हारने की ज़रूरत नहीं गुरु तथा शिष्य दोनों को यहाँ यह भी विचारनीय कोई दुसरे देश से नहीं आएगा हमे sudharane खुद हमे यह सार्थक प्रयास कर देश को एक नई दिशा दे सकते है

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के द्वारा: Pradeep Kesarwani Pradeep Kesarwani

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ऐसे में एक इंसान होने के नाते किसी भी स्त्री-पुरुष को नारी -पुरुष वैषम्य भाव से ऊपर उठकर उस अकेली स्त्री को उसके संपूर्ण विश्वास और सम्मान से जीने का वातावरण देना चाहिए.नारी वर्ग आपस में स्वस्थ संपर्क रखे…परस्पर श्रधा,आदर,सहानुभूति के साथ एक-दूजे की क्षमता को प्रोत्साहन दे . पुरुष वर्ग भी स्त्री के बोध,बुद्धि,प्रतिभा,दक्षा,मेधा के साथ उसे स्वीकार करे,उसे मूक गुडिया या निर्बल समझ उसका अपमान ना करे .यही सुशिक्षा है…यही समाज का तकाज़ा और यही सामाजिक ज़रुरत भी है .ऐसे में स्त्री अकेली होते हुए भी भावनात्मक तथा सामाजिक दोनों रूप से स्वयं को मज़बूत समझ पायेगी ! साहसिक लेखन दिया है आपने यमुना जी ! बेस्ट ब्लॉगर होने पर हार्दिक बधाई !

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महान कलाकार अमिताभ बच्चन व करीना कपूर द्वारा जताई चिंता भी क्या समाज के सामने एक अभिनय ही नजर आयेगा जब तक वो सैक्सी और उत्तेजक द्रश्य देते नजर आते रहैंगे क्या ऐसे द्रश्य  किसी भी बलात्कारी या यौन अपराध के लिए उत्पेरक का काम नहीं करते ,,,जब ऐसे महान कलाकार ऐसे उत्प्रेरक सीन देने से ईन्कार करें तभी महसूस होगा कि यह भी अभिनय नही है ,,जब ऐसे महान कलाकार मर्यादित होकर मिसाल कायम करें तभी समाज की सोच मै परिवर्तन लाकर ऐसे जघन्य कांडो को कम किया जा सकता है वरना कानून या प्रसाशन क्या करेगा जब सोच ही खराब हों ,,,,,हम जन तो सिर्फ ,,,,,,,,,,,,,,,,ओम ........शांति ,......,शांति ..........शांति का जाप ही कर सकते हैैै,,

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

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निशाजी उस दिन पहले लालकिले पर चल रहा घिसा पिटा, रटा रटाया हमारे महानतम, ज्यादातर मुंह आँख कान बंद रखने वाले भारत के प्रधान मंत्री जी का भाषण आ रहा था, जो पहले कहा था वही कह रहे थे, , बोरियत हो रही थी, दूसरा चैनल लगाया, मोदी जी का भाषण चल रहा था, बिलकुल नयी शैली में, नए अंदाज में, चहरे पर तेज, एक उदाहरणीय व्यक्तित्व के धनी श्री मोदी जी न तो अपनी पिछली उपलब्धियां गिना रहे थे, न किसी के बोझ तले दबे लग थे बल्की एक उच्च कोटि के लीडर की झलक उन में नजर आ रही थी ! मैं सोच रहा था, किस को वरीयता दी जाय, जबाब आया जिसका पलड़ा भारी है तुम भी उधर खिसक जावो ! सचमुच में पिछले दस सालों से वही कांग्रेस के पिछले ६६ सालों का किस्सा सुनते सुनते कान पक गए तो चेनल बदली कर दिया, एक नया स्वच्छ प्रदूषण रहित ठंडा पवन झोंका सीधे दिल से टकराया, नई सुगंध मधुर देश संबधित भाषण कानों से टकराया, लगा नरेन्द्र मोदी का रथ दिल्ली पहुँच गया है ! सुन्दर लेख साधुवाद !हरेन्द्र जागते रहो

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आपने बहुत कुछ कह दिया आदरणीय निशा जी मित्तल ! कितने हैं जो जिन्होंने मनमोहन सिंह का भाषण देखा होगा सुना होगा ? स्पष्ट कहता हूँ वहां जितने थे उसके अलावा बस १-२ हजार ने लेकिन नरेन्द्र मोदी , एक मुख्यमंत्री का भाषण पूरा दीखता है , हर कोई देखता है ! मैं तारीफ नहीं कर रहा हूँ नरेन्द्र मोदी की , करता हूँ लेकिन उचित जगह और उचित मंच पर ! आप मनमोहन सिंह से क्या उम्मीद लगाया बैठे हैं , वो जिनके चरणों की धुल लेकर इस पद पर बैठे हैं उनके गीत गायेंगे वर्ना क्या शास्त्री जी इस लायक नहीं की उनको याद किया जा सके ? क्या ताल जी इस लायक नहीं की उनका नाम लिया जा सके ! मन मोहन ये भूल जाते हैं की वो भारत के प्रधानमंत्री हैं , याद बस एक परिवार रहता है ! हमेशा की तरह सशक्त आलेख

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