बोल कि लब आजाद हैं...

jagran

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krishnakant


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हर हत्या एक संभावना है

Posted On: 27 Jul, 2013  
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Hindi Sahitya Junction Forum Others Politics में

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अदालतों ने जगाई न्‍याय की उम्मीद

Posted On: 15 Feb, 2013  
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Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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मैं दोषी नहीं था

Posted On: 29 Oct, 2012  
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महिला उत्पीड़न के सवाल

Posted On: 10 Jul, 2012  
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इन रिश्तों को तपने दो

Posted On: 27 Jun, 2012  
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पीड़ा यह न जाने कैसी

Posted On: 27 Jun, 2012  
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के द्वारा: adityaupadhyay adityaupadhyay

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के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

के द्वारा: avinashgaurav avinashgaurav

चुनाव का परचा भरते समय सभी अपने अपराधिक केस लिखते है फिर केजरीवाल ने कह दिया तो अपराध   हो गया असल बात ये है कि कांग्रेस एक विदेसी संस्था है जिसका काम हिन्दुओ पर शासन करना है  यह काम ये लोग बखूबी कर रहे हैंइसके लिए इन्होने एक नया शब्द सैकुलर  कहना शुरू कर दिया है सभी गदारो ने सैकुलर का लबादा ओढ लिया है कुछ लालची व जयचन्द टाइप हिन्दू साथ दे रहे है क्यो न सभी हिन्दुओ को फांसी दे दी जाएअमरिकी वैब बिजीनैससइनसाईडर के अनुसार सोनिया की  जायदाद45000 करोड है ये बात जर्मन अखबारडी वैलट ने भी छापी है  कहां से आई लोकपाल बना तो यह जायदादकैसे रह पायेगी बार -बार अमरिका इलाज कराने का बहाना है या असलीयत राम जाने

के द्वारा: snsharmaji snsharmaji

गान्धी की जीवनी व अन्य ऐतिहासिक रिकार्ड देखने पर पता चलता है कि इस सबके मूल मे गान्धी की  पोलीसी है1920 मे अंग्रेज सेना मे भर्ती का प्रचार   1939 मे सुभाष के कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर एतराज  1942 भारत छोडो आन्दोलन का परित्याग  1944 मे स्वराज का नारा छोड डोमीनियन स्टेट पर सहमति 1945 मे तुरकी केस मे देस को फसाना मालाबार मे 20000 हिन्दुओ के मुस्लिमो द्वारा कत्ल पर न बोलना  पटेल को छोड नेहरू पर अडना लिसट लम्बी है यानि गुणात्मक पहलू छोड मन मरजी पर चलना ये कांग्रेस की संस्कृति है फितरत हैखूब खाओ कोई बोले तो पहले चरण मे इगनोर करो दूसरे चरण मे उसे बदनाम करो  तीसरे चरण मे प्रलोभन दों चौथे चरण मे मरवा दो 

के द्वारा: snsharmaji snsharmaji

के द्वारा: krishnakant krishnakant

के द्वारा: krishnakant krishnakant

के द्वारा: krishnakant krishnakant

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मौजूदा कानून ब्यवस्था अगर देश को प्रशासन या सरकार के चलने में अपेक्छित पारदर्शीता दिखा सकती तो कसी अन्ना हजारे या जन्लोक्पाल की देश को जरुरत ही क्यूँ पड़ती , यहाँ तो सरकार सरासर असंवैधानिक रवैया अपनाये हुए है और मनमानी पर उतारू है क्यूंकि वह बहुमत में है और बहुमत में हो क्यूँ न जब उसने बहन मायावती , श्री मुलायम सिंह यादव और श्री लालू प्रसाद यादव जैसे लोगों को अपने साथ बिठाये हुए है जिनपर आय से अधिक सम्पति के मुक़दमे चल रहे हैं और सर्कार का सीबीआई को अपने अधीन रखने का मकसद ही केवल एक है की सर्कार सीबीआई को अपनी सुविधा अनुसार उपयोग करेगी किस केश को दबाकर रखना है और किस में तेजी लाना है यह सब तो नेताओं के समर्थन के आधार पर तय किया जाता है और यह बात तय है की अगर यह सर्कार अपने पांच साल पूरे करके हटती है तो अपने देश की आर्थिक हालत ऐसी हो जाएगी, लोग इतने दुखी हो जायेंगे की उससे उबरने में वर्षो लगेंगे दुर्भाग्य तो इस देश का ऐसा है की आज बिपक्छ भी सर्कार की हाँ में हाँ मिला रही है वर्ना कमर तोड़ महंगाई के लिए अब तक देश ब्यापी आन्दोलन की जरुरत है लेकिन बीजेपी तो अपने अगले पीएम के चुनाव में ब्यस्त है और अंदरूनी कलह से भी गुजर रही है अब ऐसे में जनता करे तो क्या करे कहाँ से इमानदार छबि वाले नेताओं को चुने जब चुनाव में केवल धनबल ही छाया हुवा है कैसे किसी इमानदार ब्यक्ति के पास इतना रुपया पैसा हो सकता है और बिना पैसे चुनाव लड़ा नहीं जा सकता यह तो चुनाव आयोग भी मानता है और देशवासी भी मानने को मजबूर है वर्ना आज देश को इमानदार छबि वाले युवा नेताओं की सख्त जरुरत है तभी कोई सुधार की आशा की जा सकती है

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

कृषण कान्त जी प्रणाम, क्या आपको लगता है की भ्रष्टाचार एक कानूनी समस्या है और टीम अन्ना का जन लोक पाल या सरकारी लोकपाल इसको चुटकियों में समाप्त कर देगा नहीं ऐसा कदापि नहीं हो सकता क्योंकि भ्रष्टाचार नक्सल समस्या से भी आधिक खतरनाक है यह एक सामाजिक बुराई है जो हमारे खून में समां गई है जो व्यक्ति जिस स्थान पर है सरकारी या गैर सरकारी उसे इमानदारी की कमाई के साथ ऊपर से भी कुछ और कमाई चाहिए ? कानून तो आज भी है जिसके कारण रोज ही अखबारों पढ़ने को मिलता है की छापे में छोटे छोटे कर्मचारियों के यहाँ भी करोडो का धन मिल रहा है तो कानून तो अपना कार्य कर ही रहा है बात केवल उसे इमानदारी से लागू करने की है ? बस बात इतनी सी है !!!!! धन्यवाद.

के द्वारा: s.p. singh s.p. singh




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