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अघोषित आपातकाल के साए में!

Posted On: 28 Jun, 2015  
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दैनिक हिन्द गजट कार्यालय में बम पटकेंगे

Posted On: 22 Feb, 2015  
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खवासा बफर जोन में नहीं है एक भी मादा!

Posted On: 13 Feb, 2015  
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मादा बाघिन का कोई अंग नहीं था गायब

Posted On: 12 Feb, 2015  
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कैसे मरी मादा बाघिन, रहस्य बरकरार!

Posted On: 11 Feb, 2015  
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महज 21 दिन में साई मंदिर के रिकॉर्ड दिए गए

Posted On: 22 Jan, 2015  
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बीस रूपए के स्टाम्प में बदल गया मालिकाना हक

Posted On: 19 Jan, 2015  
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बदल दिया गया साई मंदिर का मालिकाना हक!

Posted On: 18 Jan, 2015  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

आज मै एक ऐसी रचना लेकर आप सब के सामने उपस्थित हुआ हूँ, जिसे पढ़कर आप सब की आँखे नाम हो जायेगी. और यही हमारे देश की कड़वी सच्चाई भी है, इस कविता के माध्यम से मै ऋषभ शुक्ला, इस समाज का निर्दयी ही सही लेकिन है तो सच. आज हमारे समाज के लोग महिलाओ के प्रती वही पुरानी सोच रखते है जो वह हमेशा रखते आये है, और आगे भी ऐसी ही सोच रखने का इरादा है. गरीब माँ-बाप अपनी बेटियों को बोझ समझते है और वह संतान के रूप में एक बेटा चाहते है, और इसके लिए वह गर्भ में ही जाच के द्वारा उन्हें यदी पता चल गया की गर्भ में बच्ची है तो उसे इस दुनिया में आने से पहले ही मार देते है, उस नन्ही सी जान को जो इस निर्मम दुनिया में आने को बेताब रहती है, उसकी सभी इच्छाओ को भी मार देते है . मै इस कविता के माध्यम से उस छोटी गुडिया के दर्द को आप सब से मुखातिब करने का प्रयत्न कर रहा हूँ. कृपया मेरी गुजारिश है की आप सब इस लिंक को देखे और उसके बारे में कम से कम दो शब्द कहे. यदी कमेंट देने में कोई असुविधा हो तो उसे लाइक करे या वोट करे. http://rushabhshukla.jagranjunction.com/?p=25 शुक्रिया

के द्वारा: ऋषभ शुक्ला ऋषभ शुक्ला

के द्वारा: ऋषभ शुक्ला ऋषभ शुक्ला

हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि फटाफट क्रिकेट के आयोजकों को देश की दशा और दिशा से सरकारों की तरह ही लेना देना नहीं है। इन आयोजकों को देश से भी कोई लेना देना नहीं है, इनका कोई ईमान धरम नहीं है, इनका कोई सामाजिक सरोकार नहीं है। देश में आज क्या परिस्थितियां हैं इस बात से ये कोसों दूर सिर्फ और सिर्फ अपना हित ही परमोधर्म मानकर चल रही हैं। देश में महाराष्ट्र के भयंकर सूखे से सभी आवगत हैं। इसी सूबे से आने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शरद पंवार केंद्र में कृषि मंत्री बनकर किसानों के हितों के संवंर्धन का प्रहसन कर रहे हैं। इस सूबे में पानी के लिए किसान त्राहीमाम त्राहीमाम कह रहे हैं। इस सूबे की भाजपा की इकाई यहां आईपीएल का विरोध कर रही है। भाजपा के विरोध को सियासी चश्मा लगाकर देख रहे हैं अन्य सियासी दल। कितने आश्चर्य की बात है कि इसी सूबे में स्यंभू संत आसाराम बापू हजारों लिटर पानी रंग में घोलकर बर्बाद कर आनंदित होते हैं, दूसरी और फटाफट क्रिकेट के लिए पिचों की क्योरिंग आदि में हजारों लिटर पानी बहा दिया जाएगा, पर किसानों के लिए पानी की बारी आते ही केंद्र और राज्य सरकारें हाथ खड़े कर देती हैं!सही कहा आपने खरे साब , सहमत हूँ !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat




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