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सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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sadguruji


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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: sadguruji sadguruji

रोहित वेमुला की मौत के बाद राहुल गांधी और अरविन्द केजरीवाल समेत दलित राजनीति करने वाले तमाम नेता जो आज घड़ियाली आंसू बहाने और महज दलित वोटरों को लुभाने के लिए झूठी सहानुभूति दर्शाने के लिए हैंदराबाद भाग रहे हैं, उनसे भी जनता को यह सवाल पूछना चाहिए कि जब रोहित वेमुला और उसके साथी खुले आसमान के नीचे रहकर अपने निलंबन के विरुद्ध संघर्ष कर रहे थे, तब वे कहाँ थे? ये ड्रामेबाज नेता साथ दिए होते तो एक होनहार विज्ञान लेखक देश नहीं खोता. शिकायत और निराशा जनता को भाजपा से भी है. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की तरफ़ से कोई बयान नहीं आया. प्रधानमंत्री मोदी को इस मामले में एक बयान देना चाहिए था जिससे एक बड़ा संदेश जाता, लेकिन उन्होंने कोई बयान नहीं दिया. भाजपा के नेता भी यही कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री के बयान से उस छात्र के परिवार को और उस समुदाय को थोड़ी सांत्वना मिलती. सामंती प्रवृत्ति के संवेदनहीन और स्वार्थी लोग रोहित वेमुला की मौत के जिम्मेदार हैं. अम्बेडकर को आदर्श मानने वाले रोहित वेमुला ने व्यवस्था परिवर्तन करने का ख्वाब लिए हुए और उससे जूझते हुए हार मान ली, पर ये संघर्ष जारी रहेगा. आदरणीय सद्गुरु जी आपने अंत में अपनी राय रख दी. और यही इस घटना की उपलब्धि ...या जो कह लीजिये. आज प्रधान मंत्री ने रोहित को माँ भर्ती का लाल कहा. काश यह बात दो दिन पहले कही होती तो इतना बवाल जो अब हो रहा है नहीं होता. शायद! फिर भी अगर घटना घाटी है तो प्रतिफल तो निकलना ही है. हमारे हिन्दू समाज में जाति-प्रथा और भेदभाव हिंदिओं को एक नहीं होने देगी. अभी भी बहुत तरह के सुर उठ रहे हैं. फिर आप कैसे अपने हिन्दुओं का पूर्ण समर्थन ले पाएंगे. कभी आप रोटी सेंकते हैं/थे और अब जिनको मौका मिलेगा अपनी रोटी सेंकेगा ही यही तो राजनीति है. प्रधान मंत्री ने विकलांगो को नया दिव्यांग नाम दिया है. उन्हें सुविधाजनक उपलकरण भेंट किये है. यह अच्छी बात है, पर बहुत सारे लोग विकलांगों को भी हे दृष्टिकोण से देखते हैं. कहते हैं यह इनके पूर्व जन्म का ,किया हुआ पाप है तभी यह दंड मिला है. दलितों के साथ कोई हमदर्दी व्यक्त करता है तो कोई बेरहमी ...क्योंकि इन्होने भी पूर्व जन्म में कोई पाप किया था तभी तो दलित के घर पैदा हुए.... आपका लेख निष्पक्ष है इसलिए हम आपके इस प्रस्तुति पर अभिनंदन करते हैं. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

सद्गुरुजी, नमस्कार ! सारगर्भित और विस्तृत जानकारी के लिए धन्यवाद ! किसी बाड़े में धुँआ उठने का मतलब है की वहां आग है, जो धीरे धीरे विराट रूप ले सकती है ! मेरा मानना है की निस्वार्थ जांच होनी चाहिए, और गलत आचरण करने वाले नेता, राजनेता, विपक्षी नेता जो घड़ियाली आंसू बहाने के लिए आग को बुझाने की जगह और भड़काने की कोशिश करते हैं, उन्हें ऐसा सबक सिखाया जाना चाहिए की उनकी सात पीढ़ियां तक याद रखें ! जो भी टीचर विद्यार्थी यूनिवर्सिटी में असामाजिक तत्वों से जुड़े हैं, देश से गद्दारी डरते है, या आतंकवादियों से किसी भी तरह का समपर्क साधने की कोशिश करते हैं,उन्हें कटघरे में लाकर, जेल में दाल कर सजा दी जानी चाहिए और क़ानून व्यवस्था को सही करना होगा ! जागते रहो !

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: rajanidurgesh rajanidurgesh

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: deepak pande deepak pande

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर हरिस्मरण! आपका यह आलेख सचमुच क्रांतिकारी है. आपने विभिन्न स्रोतों से काफी साड़ी जानकारियां भी इकठ्ठा की है. यह एक शोध पूर्ण आलेख है. सवाल यही है की हम कब बदलेंगे? और हमारी धार्मिक, सामजिक, कानूनी मान्यता कब बदलेगी और सबसे अलग अहमारा सोच कब बदलेगा. आज भी महिलाएं विभिन्न प्रकार से प्रताड़ित की जा रही हैं. सडकों पर, घरों में और कार्यस्थलों पर भी. मंदिर मस्जिद प्रवेश निषेध तो तथाकथित पोंगा पंडित ही लगाते हैं. राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं को भी आगे बढकर कुरीतियों को दूर करने के उपाय करने चाहिए. बहरहाल आपके इस अनुपम लेख और आपको साप्ताहिक सम्मान की बहुत बहुत बधाई! ऐसे ही हम सबका ज्ञान वर्धन करते रहे.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

सद्गुरुजी आपका लेख पढ़ा, अच्छा ही नहीं बहुत अच्छा लगा ! ये सवाल मेरे जहान में भी नहीं उत्तर रहे हैं की अरविन केजरीवाल क्या इतना असभ्य इंसान है की देश के वरिष्ठ पूजनीय राष्ट्रपति के बाद संविधानिक देश के सिरमौर के प्रति इतनी गंदी और असभ्य भाषा का इस्तेमाल करने लगा है ! उसके मुख्य सचिव के ऊपर भ्रष्टाचार आरोप लगे हैं और सीबीआई ने उसके कार्यालयों पर छापा मारा है फिर मुख्य मंत्री केजरीवाल क्यों भड़क गए, न्यायालय को अपना काम करने दो ! अगर वो भ्रष्ट है तो जेल जाएगा,नहीं छूट जाएगा ! आपको झूठ बोलने की क्यों जरूरत पड़ गयी की "मेरे आफिस पर सीबीआई ने ताला लगा दिया है" ! झूठ के पाँव नहीं होते, केजरीवाल जी, मोदी जी की इज्जत बढ़ रही है जनता की नज़रों में लेकिन आप निम्न स्तर पर चले गए हो इतनी गंदी भाषा का इस्तेमाल कर के !

के द्वारा: harirawat harirawat

रेल कंर्मचारियों द्वारा ली जाने वाली रिश्वत से यात्रियों को छुटकारा दिलाना भी एक बड़ी समस्या है। इस साल 24 जुलाई को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सिकंदरा राऊ रेलवे स्टेशन के निकट कासगंज-मथुरा पैसेंजर गाड़ी से मथुरा जा रहे राष्ट स्तरीय तलवारबाजी चैम्पियन ‘होशियार सिंह’ को रेलवे पुलिस के कर्मचारियों ने चलती ट्रेन से धक्का दे दिया था, जिसके परिणामस्वरूप उसकी मृत्यु हो गई थी। होशियार सिंह के छोटे भाई मुनीष कुमार ने आरोप लगाया था कि जब होशियार सिंह उनसे मिलने पहुंचा तो वहां तैनात जी.आर.पी. वालों ने उससे 200 रुपए रिश्वत मांगी। होशियार सिंह के इंकार करने पर उन्होंने उसे चलती गाड़ी सेे धक्का दे दिया।

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी । आपने इस अनमोल सूचना को विहित करने वाला यह तथ्यपरक लेख लिखकर मेरे जैसे उन अनगिनत लोगों पर बहुत बड़ा उपकार किया है जो इस कविता को बचपन से पढ़ते आ रहे हैं और इससे प्रेरणा लेते आ रहे हैं । मैंने तो यह कालजयी कविता अपने बालकों को प्रेरणा देने के लिए अपने घर में दीवार पर चिपका रखी है । लेकिन अन्य लोगों की भांति मैं भी अब तक इसके रचनाकार के नाम से अनभिज्ञ ही था । खेद का विषय है कि महान कवि श्री सोहनलाल द्विवेदी को उनके जीवनकाल में इस कविता के लिए समुचित श्रेय नहीं दिया गया और इस कविता के प्रशंसक भी या तो कवि के नाम से अपरिचित रहे या फिर किसी दूसरे व्यक्ति को इसका सर्जक मानकर भ्रमित रहे । बहुत-बहुत साधुवाद आपको । सोनम की बात भी सही है कि बिना सच्चाई जाने किसी भी बात का प्रचार प्रसार नही किया जाना चाहिए क्योंकि इससे ग़लत जानकारी प्रेषित होती है और झूठी बातो को ही सच मान लिया जाता है । देर से ही सही, अमिताभ बच्चन ने अपनी भूल का सुधार किया, यह एक अच्छी बात है ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

आदरणीय सदगुरु जी नमस्कार ....., आज बहुत दिनों बाद आपका कोई लेख पढ़ा .... अच्छी जानकारी युक्त लेख है, एक पुरानी और फेमस कविता को उसके असली रचियता का नाम मिल जाना सच में रचियता के लिए ये गौरव की बात है ...., एक बात और यहां सभी को समझनी चाहिए कि बिना सच्चाई जाने किसी भी बात का प्रचार प्रसार नही किया जाना चाहिए इससे गलत जानकारी प्रेषित होती है ...... और झूठी बातो को ही सच मान लिया जाता है.... ऐसी स्तिथि में जब कभी भी सच सामने आता है तो फिर उसे स्वीकाने में बहुत कठिनाई होती है ....एक अच्छे लेख के लिए बधाई व शुभकामनाये सर व साथ ही इस कविता के असली रचियता के नाम के बारे में जानकारी देने के लिए धय्न्वाद व आभार ....

के द्वारा: Sonam Saini Sonam Saini

श्री आदरणीय सद्गुरु जी मुझे एक महिलाओं के फंग्शन मैं जाने का मौका मिला वहां पर अध्यक्ष की जगह गौड़ साहब बहुत सम्मानित हैं दिल्ली की लाइब्रेरियों के अध्यक्ष हैं उन्हें बिठाया गया वहां एक महोदया आई नेता थी उन्होंने बड़ी नाराजगी से कहा यहां किसी पुरुष का क्या काम इस पद को किसी महिला को सम्मानित करना चाहिए मैं केवल दर्शक थी मैं उठ खड़ी हुई मैने कहा अरे मैडम राजा राम मोहन राय जी को जानती हैं वह तपाक से बोलीं उन्होंने सती प्रथा बंद करवाई थी मैने कहा आज ज़िंदा हो न इसी का धन्यवाद देने के लिए गौड़ साहब को अध्यक्ष के आसन पर आसीन किया हैं | अहसान मंद बनों पुरुष समाज का जिन्होंने हमें हिम्मत दी कभी पिता बन कर कभी भाई बन कर कभी पति बन कर पहली महिला डाक्टरी पढ़ने विदेश गई थी उनको उनके पति ने पढ़ने भेजा था यदि महिला किसी सफल व्यक्ति के पीछे हैं तो पुरुषों का भी अहसान कम नहीं है | सद्गुरु जी आपने जिस विषय पर लिखा है बहुत अच्छा विषय है

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री आदरणीय सद्गुरु जी सराय काले खान पर प्रसिद्ध सूफी संत निजामुद्दीन ओलिया साहब का मक़बरा हैं यह आमिर खुसरो के गुरु सूफी संत थे जब ट्रांस में आते थे नाचते थे उनके बाल हवा में लहराते थे अलाउद्दीन ख़िलजी देवगिरि को लूट कर लाया वहां से प्रसिद्ध गायक देव को भी ले आया यमुना नदी के किनारे श्मियाना लगा था गायक देव दूर निकल आये दुःख में भक्ति संगीत गा रहे थे गाते समय उनका अंदर का सुर जाग्रत हो जाता था ओलिया साहब ट्रांस में आ गए उनका अद्भुत नृत्य कुछ ही शिष्य देख पाये आमिर खुसरो ने देव मुझे पूरा नाम भूल गया शायद गोपाल देव था के पीछे लग गए जब देव कभी गाते वह चोबदार बन कर खड़े हो जाते परन्तु वह अनोखा संगीत कभी सुन नहीं पाये यही संत थे जिन्होंने भारतीयों के मलहम लगाया बाकी धर्म कैसे बचा भगवान जाने

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! आपने सही कहा है कि अपना विकास करने लिए महिलाओं को हिम्मत जुटानी पड़ेगी ! आपने बिलकुल सही कहा है कि सती प्रथा ख़त्म कराकर राजा राम मोहन राय ने महिलाओं को चिता से उठाया है, अब आगे बढ़ना और अपने हक़ के लिए लड़ना उनका काम है ! आपके परिवार की चर्चा मुझे बहुत अच्छी लगी ! आप लोग अपने अच्छे आचरण और व्यवहार से समाज को बहुत अच्छी शिक्षा और प्रेरणा दे रहे हैं ! आपका परिवार बहुत सात्विक और संस्कारी है, इसलिए वहां पर महिलाओं का सम्मान काफी है ! आपने स्वयं एक बेहद सम्मानित और स्वतंत्र जीवन जिया है ! परिवारो में ऐसा ही होना चाहिए, तभी महिलाओं के प्रति भेदभाव वाली हमारी सदियों पुरानी सोच बदलेगी ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर अभिवादन! संसद में चर्चा के बाद धर्म और पंथ लेकर भी बहस छिड़ गयी है. धर्म और पंथ में अंतर क्या है?. आपने धर्म के बारे में जितनी बातें बताई है वह हिन्दू धर्मग्रंथों और हिन्दू धर्म के आराधकों की बातें ही बतलाई है. दूसरे धर्म को माननेवाले के इस मत से सहमत हैं या होंगे, यह कैसे सिद्ध होगा. सभी धर्मों के अपने अपने देवता और ईश्वर हैं, अलग-अलग पूजा पद्धतियाँ है. धर्म निरपेक्ष और पंथ निरपेक्ष का मतलब मेरी बुद्धि के अनुसार कानून सबके लिए यानी सभी मतावलम्बियों के लिए एक होगा. नाम, पहचान, धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर कानून नहीं बनाया जाता. राज्य या राष्ट का एक ही कानून होता है और वह संविधान द्वारा अनुशासित होता है. बस ..मेरी बुद्धि यही कहती है. ... बेहतर यही होता कि इस ब्लॉग पर अन्य विद्वानों की राय भी रक्खी जाती.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

"धर्म और आध्यात्म में अंतर क्या है ?" लेख मे धर्म के सांसरिक या स्थूल रूप हिन्दू, मुस्लिम आदि की ही सांकेतिक रूप से चर्चा की गई है ! लेख के अंत मे मेरा अपना निजी मत भी है कि धर्म का वास्तविक अर्थ परमात्मा है ! हमारे समाज मे धर्म के बहुत से प्रचलित अर्थ हैं, जैसे- कर्तव्य, अहिंसा, न्याय, सदाचरण, सद्गुण आदि ! जहां तक आध्यात्म की बात है तो आत्मा का आधिपत्य समझना और अनुभूत करना ही आध्यात्म है ! सरल शब्दों मे यदि कहें तो अपने शरीर के भीतर स्थित चेतन तत्व को जानना, समझना और ध्यान के द्वारा उस शाश्वत सत्ता की अनुभूति महसूस करना ही आध्यात्म है ! वस्तुत यह अपने आप के बारे में या अपने वास्तविक स्वरूप के बारे मे जानना है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

भारतीय दर्शन के अनुसार अध्यात्म क्या है ? अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोऽध्यात्ममुच्यते । भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसंज्ञितः ॥गीता 8/3. अर्थात परम अक्षर 'ब्रह्म' है, अपना स्वरूप अर्थात जीवात्मा 'अध्यात्म' नाम से कहा जाता है तथा भूतों के भाव को उत्पन्न करने वाला जो त्याग है, वह 'कर्म' नाम से कहा गया है ! परम अक्षर यानी शाश्वत और अविनाशी ब्रह्म और जीवात्मा हैं ! बन्धन न देने वाला कर्म वो है, कर्तापन के अहनकार से रहित हो ! गीता के इस श्लोक में जीवात्मा रूपी अपने वास्तविक स्वरुप या परम स्वभाव को अध्यात्म कहा गया है ! सरल भाषा मे अध्यात्म का अर्थ है, अपने आप के बारे में जानना या अपनी देह के भीतर स्थित चेतन तत्व को जानना अथवा ध्यान समाधि के द्वारा आत्मप्रज्ञ यानी अपनी आत्मा मे लीन होना ! आत्मा परमात्मा का अंश है, इसलिये आत्मानुभूति को परमात्मा की अनुभूति भी कहा गया है ! आत्मा परमात्मा के बीच गुणात्मक नही, ब्लकि मात्रात्मक अंतर है, जैसे समुद्र से एक गिलास पानी निकाल लीजिये तो वो समुद्र का अंश होते हुए भी समुद्र नही कहलायेगा, जब तक कि उसे पुन्ह समुद्र मे विलीन न कर दिया जाये !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

देह छोड़ने के बाद हमारी कैसी गति होगी ? यंयंवापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम् | तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भाव भावितः ||गीता 8/8|| हे कुंतीपुत्र अर्जुन ! यह मनुष्य अन्तकाल में जिस-जिस भी भाव को स्मरण करता हुआ शरीर का त्याग करता है, उस-उस को ही प्राप्त होता है, क्योंकि वह सदा उसी भाव से भावित रहता है ! यदि भगवान का निरन्तर हम स्मरण करते हैं तो निसन्देह उसी को प्राप्त होंगे ! मृत्यु कब होगी, कैसे होगी, ये महत्वपूर्ण नही, महत्वपूर्ण है, परमात्मा को हमेशा याद रखना ! महात्मा बुद्ध पर लिखी हुई एक पुस्तक पढ रहा था, जिसमे उल्लेख था कि महात्मा बुद्ध के अनुसार हम अपना भूत और भविष्य आसानी से पता लगा सकते हैं ! बस हमे इस बात का निष्पक्ष हो के चिंतन-मनन और पूरी ईमानदारी से अध्ययन करना है कि हम वर्तमान मे कैसे हैं ? महात्मा बुद्ध कहते हैं कि पिछले जन्म मे इससे आप भिन्न नही थे और यदि वर्तमान समय मे अपने भीतर कोई सुधार नही करेंगे तो अगले जन्म मे भी इससे भिन्न नही होंगे !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

"भारतीय संविधान मे भारत मे धर्म की जगह पंथ शब्द लगा देने से क्या फर्क पड़ेगा ?" यह प्रश्न विचारणीय है और इसकी चर्चा भी लेख मे विस्तृत रूप से की गई है ! संक्षेप मे बताना चाहूंगा कि धर्म का वास्तविक अर्थ ईश्वर है और अधिकतर धर्मों का आधार भी ईश्वर ही है ! ईश्वर के नाम पर विधायक, सांसद और मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ लेते हैं ! इसका अर्थ यह हुआ कि भारत का संविधान ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकारता है, वो नास्तिक नहीं है ! धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है, सरकार और देश की जनता द्वारा धर्म यानि ईश्वर से कोई मतलब नही रखना, उसके प्रति उदासीन या तटस्थ रहना, जो भारत जैसे धार्मिक देश मे संभव नही है ! पंथनिरपेक्षता संभव है, सरकार देश के विभिन्न धार्मिक पंथों और मतमतांतरों के प्रति तटस्थ रहकर या उनसे एक दूरी बनाकर चल सकती है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji