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सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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sadguruji


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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा:

आदरणीय सिंह साहब ! हार्दिक अभिनन्दन ! दिन मंगलमय हो ! सिंह साहब आप निश्चिन्त रहें,मैं मंच छोड़कर नहीं जा रहा हूँ ! समय और ईश्वर की इच्छा जबतक होगी,तबतक मैं मंच पर मौजूद रहूँगा ! मेरी निजी धारणा है कि किसी भी चीज को अपनी ओर से न पकड़ो और न छोडो ! समय ओर ईश्वर जब चाहेंगे तो जो छूटना होगा,वो अपने आप छूट जायेगा ! यदि मैं चाहता तो चुपचाप नया ब्लॉग बना लेता,परन्तु मैंने ऐसा नहीं किया ! अभी मैं नया ब्लॉग बनाने नहीं जा रहा हूँ ! मैं चाहता हूँ कि जागरण जंक्शन परिवार कुछ तो जबाब दे ! वे किसी भी ब्लॉगर के सवाल या समस्या का जबाब नहीं दे रहे हैं ! ये केवल ब्लॉगरों की ही नहीं बल्कि फीडबैक की भी तौहीन है ! ऐसे जबाब न देने वाले महत्वहीन फीडबैक का फायदा क्या है ? वो जबाब भी देंगे और स्पेस भी बढ़ाएंगे ! आपका सुझाव अच्छा लगा कि चित्रों का प्रयोग कम किया जाये ! आप निश्चिन्त रहिये मेरे भीतर के भगवान कृष्ण यही कहते हैं कि वो जबाब भी देंगे और स्पेस भी बढ़ाएंगे ! सहयोग और समर्थन के लिए ह्रदय से आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री राजेन्द्र ऋषि जी आप क्या दैनिक जागरण के लिए लिखते हैं या अपने पाठकों के लिए और हम सब के लिए आप नया ब्लाग ले लें क्या आप हम सब को प्रति क्रिया दिए बिना रह सकेंगें या हमें जिनको आपके लेख पढने और उसका जबाब देने की आदत है उनके कष्ट का अनुमान हैं | आप अपनी ईगो मत लगाईये ईगो उनसे लगाई जाती है जिनमें समझ हो आप तो दैनिक जागरण की मार्किटिंग का हिस्सा है यह क्या समझे सब अपनी नौकरी का समय देखते है उन्हें यह चिंता नहीं है हम पाठक क्या चाहते है आपको मैंने सदा सद्गुरु जी के नाम से सम्बोधित किया है आपके हटने के बाद हमें बहूत झटका लगेगा कई लोग गये हम आज भी रीडर ब्लाग में उन्हें ढूढते है जब नहीं मिलते शॉक लगता हैआपका नाम राजेन्द्र ऋषि भी बहूत अच्छा है | मुझे जब भी क्रोध आता है मैंनही करती हूँ उल्टा मुझे जिन पर क्रोध आता है मुझे वह क्रोध के लायक ही नही लगते गिला भी न करें नया नाम नया लेखन पुराने पाठक | हमें आपके लेख चहिये प्रतिक्रिया चाहिए | डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! लड़कियों को लेकर गांव के लोगों की मानसिकता आज भी अच्छी नहीं है ! शहर में भी ऐसी विकृत मानसिकता के लोंगो की कमी नहीं है ! पढ़े लिखे लोग तक डॉक्टर से बार बार पूछते हैं कि गर्भ में लड़का है या लड़की ! लड़की होने का पता चलता है तो गर्भपात कराने की सोचने लगते हैं ! एकपणे सही कहा है कि 'बेटी तो लक्ष्मी होती है ! आज के युग मे यदि बेटी को भी पढ़ाओ लिखाओ वह माँ बाप का नाम रोशन करती है' ! परन्तु बहुत लोग इस बात को नहीं स्वीकार करते हैं ! वो पैदा तो माँ की कोख से ही होते हैं,परन्तु बड़े होकर उसी कोख के दुश्मन बन जाते हैं ! लोग लड़कियों को लेकर काल्पनिक भय के शिकार होते हैं जैसे-शादी विवाह,दहेज़ आदि की समस्या और लड़की के जवान होकर बिगड़ने का डर ! प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया निर्मला सिंह गौर जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! प्रेतों को सिद्ध कर उनकी शक्ति का दुरूपयोग करके लोंगो को ठगने वाले वास्तव अघोरी साधु होते ही नहीं हैं ! वास्तविक अघोरी साधु लोककल्याण के लिए ही आत्माओं को सिद्ध करते हैं ! उनकी साधना का परम लक्ष्य भगवान शिव का सानिध्य पाना होता है ! ये घटना जब मैंने सुनी तो हतप्रभ रह गया था ! उस समय मैं सोच रहा था कि संगीता के हत्यारे ससुर से लाख गुना बेहतर तो वो नाग-नागिन थे ! वो सर्पयोनि में होकर भी इतने समझदार थे कि बच्ची और उसकी माँ को कोई क्षति नहीं पहुंचाई ! बल्कि वे तो बच्ची की रखवाली तक करते रहे ! आपने मंच न छोड़ने की बात की है ! आप निश्चिन्त रहिये मैं मंच नहीं छोड़ रहा हूँ ! मैं जागरण जंक्शन परिवार द्वारा स्पेस बढाए जाने की प्रतीक्षा करूँगा ! स्पेस बढ़ने के लिए जागरण जंक्शन परिवार से आग्रह करने लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरुजी -प्रणाम ,जिन अघोरी साधुओं को अपवित्र और असामाजिक समझा जाता है उनका असली रूप बता के आपने कई पूर्वाग्रह मिटा दिये हैं ,ये सच्ची कहानी पढ़ कर बहुत दुःख हुआ कि घर के खून के रिश्ते इतने क्रूर हो सकते हैं ,बेटियों की हत्या का पाप जन्म जन्मान्तर तक ढोना पड़ता है ,मंच पर ये कहानी शेयर करने के लिये आभार . दूसरी बात आप मंच से विदाई मत लीजियेगा ,फिर यहाँ कुछ खास नहीं बचेगा पढ़ने को,अभी जेजे पर आपके बहुत सार्थक ,ज्ञानवर्धक और अनुभबी ब्लॉग पढ़ने को मिलते हैं ,जो अपनी उत्कृष्ट शैली और रोचकता के होते तुरंत पढ़े भी जाते हैं ,साथ ही सबको आपकी प्रतिक्रिया की भी प्रतीक्षा रहती है .जेजे से अनुरोध है की स्पेस बढ़ाये .रक्षा बंधन की सादर शुभ कामनाएं .

के द्वारा: Nirmala Singh Gaur Nirmala Singh Gaur

आदरणीया डॉ रंजना गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! ये एक गांव की सच्ची कहानी है ! वो अघोरी बाबा और कहानी के सभी पात्र जीवित हैं ! अघोर साधना का चरमोत्कर्ष है-जीव का शिव से मिलन ! वो अघोरी बाबा भी इस अवस्था को प्राप्त साधु हैं ! इस समय वो कहाँ होंगे,ये तो वही जानें ! आपने सही कहा है कि काशी में ऐसे योगी आते जाते रहते हैं ! परन्तु वो अपनी इच्छा से ही किसी को दर्शन देते हैं ! पोस्ट की सराहना के लिए धन्यवाद ! आपने मेरे ब्लॉग के स्पेस खत्म होने की चर्चा की है और नया ब्लॉग शुरू करने की सलाह दी है ! जागरण परिवार से मैंने दो बार स्पेस बढ़ाने के लिए आग्रह किया है ! यदि वो स्पेस नहीं बढ़ाते हैं तो 'छुप गया कोई रे..' की अंतिम दो किस्तों के साथ इस ब्लॉग का समापन कर दूंगा ! ब्लॉग पर आने के लिए और याद करने के लिए ह्रदय से आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर नमन ! काफी देर से आपके ब्लॉग पर नजर पड़ी, लेकिन जब पड़ी तो फिर हटी नहीं | मैं यहाँ नया हूँ, मंच के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है | मुझे लग रहा हैं की मैंने इस मंच का इतिहास पढ़ लिया | आपने कहा की, पुराने रचनाकार निराशा में मंच छोड़ गए, ...आदरणीय सुरेश प्रसाद जी, जिनकी प्रेरणा से ही मैं इस मंच से जुड़ा...आज उनका कोई अता-पता नहीं है...| आपके जिक्र में, एक नाम मेरे लिए विशेष था आदरणीय जे.एल सिंह जी का | हम इस मंच पर ही मिले, और आज फेसबुक पर काफी करीब हैं..हमने मिलकर एक समूह प्रारम्भ किया है 'युवावाणी" जिसमे हम विषयवार साप्ताहिक परिचर्चा भी आयोजित करते हैं | बहुत शानदार जानकारी रही मेरे लिए, उमीद करता हूँ की 'संचालक मंडली' आपकी बातों को पूरी गंभीरता से लें..और आवश्यक सुधार के प्रति प्रयाश करें | पारिश्रमिक न मिलना उतना बुरा नहीं है, बुरा है साहित्यकारों/रचनाकारों/लेखकों को पाठक के रूप परिभाषित करना | धन्यवाद, नमन |

के द्वारा: KKumar Abhishek KKumar Abhishek

आदरणीया डॉक्टर रंजना जी ! सादर अभिनन्दन ! इधर मेरी कई रचनाएँ जागरण जंक्शन मंच द्वारा फीचर नहीं गईं ! "अदिति-बाइसवीं सदी के नारी की महत्वकांक्षा भरी उड़ान","दुःख उपजे मन रोये साधो जेहि दिन हरि भजन नहीं होये","बँधा हुआ एक एक धागे से भाई बहन का प्यार-राखी पर्व " और "धर्मवीर भारती के उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ की समीक्षा" ये सब रचनाएँ फीचर होने के लायक ही नहीं समझीं गईं ! शायद भूलवश ये रचना फीचर कर दी गई हो ! मैं सोच रहा हूँ कि अब मंच पर मैं कम लिखूँ ! काफी सुझाव और सद्विचार मैंने दे ही दिए हैं ! इसी पर अमल हो जाये तो इस मंच पर एक क्रन्तिकारी और सभी ब्लॉगरों के लिए हितकारी परिवर्तन आ जायेगा ! वैचारिक जगत में निरुद्देश्य भटक रहा ये मंच एक सार्थक उद्देश्य को पा जायेगा ! सभी ब्लॉगरों को भी अच्छे से अच्छा लिखने की प्रेरणा मिलेगी ! प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए आपको हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सिंह साहब ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपने इस पोस्ट को पसंद किया और जागरण जंक्शन परिवार को दिए गए मेरे सुझावों से सहमति व्यक्त की,इसके लिए बहुत बहुत हार्दिक आभार ! आपने एक सुझाव और दिया है कि जागरण जंक्शन की वेबसाइट में जो तकनीकी खराबी है,उसे दूर किया जाये ! मैंने भी अनेक बार देखा है कि ये वेबसाइट दिन में जल्दी खुलती नहीं है ! इसके खुलने की स्पीड भी बहुत स्लो रहती है ! जागरण परिवार से मेरा भी अनुरोध है कि इस तकनीकी समस्या को दूर करें ! सिंह साहब आपने अपनी प्रतिक्रिया में आदरणीय श्री राजकमल शर्मा जी की चर्चा की है,जो काफी समय से मंच पर अनुपस्थित हैं ! मेरा भी उनसे आग्रह है कि वो इस मंच पर पुन: पधारे ! हम सबलोग उनका स्वागत करेंगे ! उन वरिष्ठ ब्लॉगर से हमें बहुत कुछ सिखने का भी सौभाग्य प्राप्त होगा ! इतनी भावपूर्ण प्रतिक्रिया के लिए सिंह साहब आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर अभिवादन! आपके एक साल का सफर और २२५ ब्लॉग बेहद महत्वपूर्ण हैं. आपका यह समीक्षात्मक ब्लॉग सभी ब्लॉगर्स पर निष्पक्ष टिप्पणी और जागरण जंक्सन को दिए गए सुझाव और भी महत्वपूर्ण है. उम्मीद करूंगा कि जागरण जंक्सन की टीम अवश्य ध्यान देगी. अब मैं अपनी बात कहता हूँ .श्री राजकमल शर्मा इस मंच के वरिष्ठतम ब्लॉगर थे.और आप ही की तरह वह हर ब्लॉग पर नजर भी रखते थे और अपनी रचनात्मक प्रतिक्रिया भी ऐसे सहज और विनोदपूर्ण अंदाज में देते थे कि बुरा भी न लगे. हममे से बहुत सारे लोग उन्हें गुरुदेव ही कहते थे. पर क्या करूँ उनका जाना और उनके साथ संवादहीनता .मेरे लिए आज भी कष्टकर है. मैंने हर माध्यम से उनसे संपर्क करने की कोशिश की पर सफल न हो सका.अब आप तो सद्गुरु हैं ही आपकी दृष्टि भी सब पर रहती है. आपका विचार, गहन अध्ययन और परामर्श सबके लिए हितकारी है, ऐसा मैं मानता हूँ. आगे भी आपका इसी तरह का समीक्षात्मक ब्लॉग और परामर्श पढने को मिलता रहेगा. इसी आशा के साथ. जागरण जंक्सन अपनी तकनीकी समस्या भी दूर करे तो सबके लिए बेहतर होगा. बीच बीच में यह साइट लुप्त हो जाता है या देर से खुलता है, इस कारण भी हमलोग गैरहाजिर हो जाते हैं. अंत में आपका और सभी मित्रों, लेखक, लेखिकाओं का आभार और धन्यवाद ! ....सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

सदगुरू जी, एक वर्ष पूरा होने पर लिखा यह लेख सराहनीय है | इस मंच के अतीत और वर्तमान का अच्छा लेखा आपने प्र्स्तुत किया है | इस मंच को और अधिक उपयोगी बनाने हेतु दिए गए सुझावों से पूर्ण सहमत हूं | दर-असल अधूरे ब्लाग प्रकाशित करने का कोई मतलब नही | जिस तरह संपादकीय पृष्ठ पर रोज दो लेख प्रकाशित किए जाते हैं वैसे ही प्रतिदिन कम से कम दो ब्लाग प्रकाशित किए जाने चाहिए और रविवार को ब्लागर आफ़ द वीक ब्लाग को विशेष महत्व देते हुए अन्य दो ब्लाग के साथ छापा जाना चाहिए | तभी यह लेखन आम और खास पाठकों तक पहुंच सकेगा | इस पर पारिश्रमिक भी दिया जाना चाहिए | अभी तो ऐसा प्रतीत होता है कि 30-35 सक्रिय ब्लागर बस एक दूसरे की पीठ थपथपा रहे हैं | आम पाठक इसमे जुडता ही कहां है | वह तो अखबार पढता है | वैसे भी हिंदी प्रिंट मीडिया मे कितने लोग नेट पर जाकर ब्लाग पढते हैं | जागरण परिवार अगर इस मंच को गंभीरता से ले रहा है तो उसे इसे अपने दैनिक पत्र मे पारिश्रमिक के साथ स्थान देना चाहिए, अपनी संपादकीय नीतियां लागू करते हुए | इस विषय पर लिखने के लिए आप बधाई के पात्र हैं | आपने लेख में मुझे सम्मान दिया उसके लिऐ आभारी हूं ....शुभकामनाएं |

के द्वारा: एल.एस. बिष्ट् एल.एस. बिष्ट्

श्री सद्गूरूजी आपने अपने एक वर्ष तक लगातार ब्लाग ही नहीं लिखा बल्कि अपनी समीक्षा भी दी है आपके लेख शायद सभी लोग पढ़ते और पसंद करते है मैं तो आपकी नियमित पाठक हूँ आपकी विषय पर पकड़ भी बहुत अच्छी है | आपने अपने अनुभव और सुझाव दोनों ही जागरण जंक्शन को दिए हैं में आपके एक-एक सुझाव से सहमत हूँ एक डाक्टर ने लेख लिखा’ महगाई जो सबको रास आई ‘ यह लेख तम्बाकू से होने वाले कैंसर को लेकर लिखा गया था यह एक ऐसा लेख हैं जिसे हाई लाईट करने की जरूरत थी परन्तु ध्यान ही नहीं दिया गया यदि ध्यान दिया जाता बहूत से ऐसे डाक्टर हैं जिनके जीवन का उद्देश्य ही कैंसर उन्मूलन है वह भी अपने विचार लिखने के लिए उत्सुक होते |कई अति सुंदर कविताये लिखते या लिखती है दैनिक जागरण में आने वाली कविताओ से भी खूबसूरत होती है मेरे जैसी कविता को ठीक से न समझ पाने की क्षमता रखने वाली भावुक हो जाती है |आपने बहूत अच्छे सुझाव दिए हैं सूझ कई बड़े अच्छे प्रश्न उठाये है दूसरे पाठक भी आपके सुझावों पर गौर करेगें| डॉ शोभा भारद्वाज

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री सद्गूरूजी आपने अपने एक वर्ष तक लगातार ब्लाग ही नहीं लिखा बल्कि अपनी समीक्षा भी दी है आपके लेख शायद सभी लोग पढ़ते और पसंद करते है मैं तो आपकी नियमित पाठक हूँ आपकी विषय पर पकड़ भी बहुत अच्छी है | आपने अपने अनुभव और सुझाव दोनों ही जागरण जंक्शन को दिए हैं में आपके एक-एक सुझाव से सहमत हूँ एक डाक्टर ने लेख लिखा’ महगाई जो सबको रास आई ‘ यह लेख तम्बाकू से होने वाले कैंसर को लेकर लिखा गया था यह एक ऐसा लेख हैं जिसे हाई लाईट करने की जरूरत थी परन्तु ध्यान ही नहीं दिया गया यदि ध्यान दिया जाता बहूत से ऐसे डाक्टर हैं जिनके जीवन का उद्देश्य ही कैंसर उन्मूलन है वह भी अपने विचार लिखने के लिए उत्सुक होते |कई अति सुंदर कविताये लिखते या लिखती है दैनिक जागरण में आने वाली कविताओ से भी खूबसूरत होती है मेरे जैसी कविता को ठीक से न समझ पाने की क्षमता रखने वाली भावुक हो जाती है |आपने बहूत अच्छे सुझाव दिए हैं सूझ कई बड़े अच्छे प्रश्न उठाये है दूसरे पाठक भी आपके सुझावों पर गौर करेगें| मैने कई बार कोशिश की अपने विचार आपके एक वर्ष पूरे होने वाले लेख और समीक्षा में डालने की कोशिश की मजबूर होकर इस लेख में डाल रहीं हूँ डॉ शोभा भारद्वाज

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री सद्गूरूजी आपने अपने एक वर्ष तक लगातार ब्लाग ही नहीं लिखा बल्कि अपनी समीक्षा भी दी है आपके लेख शायद सभी लोग पढ़ते और पसंद करते है मैं तो आपकी नियमित पाठक हूँ आपकी विषय पर पकड़ भी बहुत अच्छी है | आपने अपने अनुभव और सुझाव दोनों ही जागरण जंक्शन को दिए हैं में आपके एक-एक सुझाव से सहमत हूँ एक डाक्टर ने लेख लिखा’ महगाई जो सबको रास आई ‘ यह लेख तम्बाकू से होने वाले कैंसर को लेकर लिखा गया था यह एक ऐसा लेख हैं जिसे हाई लाईट करने की जरूरत थी परन्तु ध्यान ही नहीं दिया गया यदि ध्यान दिया जाता बहूत से ऐसे डाक्टर हैं जिनके जीवन का उद्देश्य ही कैंसर उन्मूलन है वह भी अपने विचार लिखने के लिए उत्सुक होते |कई अति सुंदर कविताये लिखते या लिखती है दैनिक जागरण में आने वाली कविताओ से भी खूबसूरत होती है मेरे जैसी कविता को ठीक से न समझ पाने की क्षमता रखने वाली भावुक हो जाती है |आपने बहूत अच्छे सुझाव दिए हैं सूझ कई बड़े अच्छे प्रश्न उठाये है दूसरे पाठक भी आपके सुझावों पर गौर करेगें| मैने कई बार कोशिश की अपने विचार आपके एक वर्ष पूरे होने वाले लेख और समीक्षा मैं डालने कई मजबूर होकर इस लेख में डाल रहीं हूँ डॉ शोभा भारद्वाज

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय डॉ.शैलेश जी ! ब्लॉग पर आपका सादर अभिनन्दन है ! लेख पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए धन्यवाद ! आपने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा है कि २२वीं सदी की स्त्री विनाश का सामान है ! मुझे अफ़सोस है कि आप ऐसा सोचते हैं ! स्त्री को कुदरत ने सृजन के लिए बनाया है और वो जबतक सृष्टि चलती रहेगी,सृजन ही करेगी,विनाश नहीं ! आपने अदिति को भड़काने और स्त्री जाति को सन्तुष्ट करने की बात लिखी है,वो सही नहीं है ! अदिति को अपने विवेक से जो सही लगा,उसने किया ! उसने मुझसे कोई राय नहीं ली थी ! उसकी आपबीती सुनकर मुझे लगा कि ये एक असाधारण स्त्री है ! इसकी आपबीती को प्रकाशित करना चाहिए ! अधिकतर महिलाओं की आज भी हमारे घरों में समाज में और पूरे देश दुनिया में जो दयनीय और चिंताजनक स्थिति है,वो किसी की भी नजरों से छिपी नहीं है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सिंह साहब ! सादर अभिनन्दन ! ये ब्लॉग लिखने का मेरा उद्देश्य भी यही था कि इस विषय पर खुलकर चर्चा हो ! इस मंच पर एक बहुत निराशाजनक कटु सत्य है कि सामाजिक सुधार वाले लेखों को जागरण जंक्शन परिवार द्वारा उतना महत्व नहीं दिया जाता है,जितना देना चाहिए ! मंच अपने उद्देश्यों की प्राप्ति में इसीलिए अब तक पूर्णत: सफल नहीं हो पाया है ! जागरण जंक्शन परिवार की सबसे बड़ी भूल ये है कि वो इस मंच पर लिखने वाले ब्लागरों को पाठक मात्र समझती है,इसीलिए कोई विशेष महत्व नहीं देती है ! जबकि सच्चाई ये है कि इस मंच के बहुत से ब्लागरों की रचनाएँ अख़बारों में छपने वाली रचनाओं से कहीं बेहतर होती हैं ! जागरण जंक्शन परिवार से मेरा आग्रह है कि इस विषय पर अपना नजरिया बदले और मंच के संचालन में एक क्रन्तिकारी परिवर्तन करे और बदलते समय के साथ चले ! इस विषय पर ब्लागरों से सुझाव भी आमंत्रित किये जा सकते हैं !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

मेरे मन में एक भाव उठा और मैं अपने आसन से उठ खड़ा हुआ.सदियों से पराधीन और पीड़ित भारतीय नारी के इस आधुनिक और स्वतंत्र होते स्वरूप को देखकर मैं प्रसन्न था.आने वाले बाइसवीं सदी की नारी निश्चय ही पूरी तरह से स्वतंत्र होगी और उसकी महत्वकांक्षाओं के पंख भी असीमित होंगे.आज उसके पंख कतरने वाले आने वाले कल को उसे खुले आसमान में उड़ता हुआ देखेंगे.!! जयहिन्द !! !! वन्देमातरम !! आदरणीय सद्गुरु जी आपने बहुत ही उपयुक्त समय में इस आलेख को प्रकाशित किया है आज जबकि स्त्रियां अपनी कमजोरी के जलते जुल्म और दरिंदगी शिकार हो रही है, जरूरत है अदिति जैसी बहादुर लड़कियों की जो सहस और बहादुरी के साथ परिश्थिति के साथ लड़े और जीते.... सादर

के द्वारा: jlsingh jlsingh

देश के कुछ प्रसिद्द मंदिरों में अब भी पशु-बलि प्रथा जारी है,जो अब पूर्णत:बंद होनी चाहिए.ये मंदिर मंदिर न होकर एक दुकान बन गए हैं और दर्शनार्थी दर्शनार्थी न होकर ग्राहक बन गए हैं.पूरे देशभर में अनगिनत ऐसे मंदिर हैं,जिनके पास अथाह सम्पत्ति है,उनमे से कुछ स्कूल,हॉस्पिटल,अनाथ आश्रम और वृद्धाश्रम आदि स्थापित कर सामाजिक सेवा कार्य कर रहे हैं,परन्तु अधिकतर मंदिर किसी भी सामाजिक सरोकार से नहीं जुड़े हैं और विशुद्ध रूप से मंदिर के जरिये एक धार्मीक व्यवसाय कर रहे हैं.सरकार को ऐसे मंदिरों का अधिग्रहण कर मंदिर की आमदनी को सामाजिक विकास के कार्यों में लगाना चाहिए.सरकार को मंदिर में पूजापाठ करने के लिए योग्य और जनता से भेदभाव रहित मित्रवत व्यवहार वाले पुजारियों को नियुक्त करनी चाहिए,तभी मंदिर और पुजारियों की सही उपयोगिता सिद्ध होगी. बहुत सही विचार रक्खे हैं आदरणीय सद्गुरु जी!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीया डॉक्टर रंजना जी ! सादर अभिनन्दन ! आपने जो प्रश्न पूछा है,वो लोंगो ने पूछा है ! हमलोग अक्सर ये सोचते हैं कि अच्छे गुरु कैसे मिलेंगे ! अच्छे संत ये चाहते हैं कि उन्हें अच्छे शिष्य मिलें ! अच्छे गुरुओं के साथ साथ अच्छे शिष्यों की भी कमी सी हो गई है ! ‘‘गुरु लोभी शिष लालची दोनों खेलें दांव। दोनों बूड़े बापुरै, चढ़ि पाथर की नांव।। संत कबीर दास जी कहते हैं कि-“गुरु और शिष्य लालच में आकर दांव खेलते हैं और पत्थर की नाव पर चढ़कर पानी में डूब जाते हैं.”इस समय ज्यादातर यही हो रहा है ! सच्चा गुरु पाने के लिए शिष्य का भी अच्छा और सच्चा होना जरुरी है ! शास्त्रों के अनुसार पूर्ण गुरु को ब्रह्मज्ञानी और ब्रह्मनिष्ठ होना चाहिए ! गुरु के सानिध्य में कुछ दिन रहने से इसका आभास हो जाता है ! शंका समाधान न हो और कोई अनुभव न हो तो दूसरा गुरु तलाशना चाहिए ! कबीर साहब कहते हैं कि-"‘‘जा गुरु से भ्रम न मिटै, भ्रान्ति न जिव की जाय, सौ गुरु झूठा जानिये, त्यागत देर न लाय.’’

के द्वारा: sadguruji sadguruji

इस संसार में गुरु की आवश्यकता हर मनुष्य को है.यदि हम गहराई से विचार करें कि हमें गुरु की आवश्यकता क्यों है,तो इस प्रश्न का एक ही उत्तर मिलेगा कि हमारी आत्मा जन्म जन्म से ईश्वर रूपी सत्य का साक्षात्कार करने के लिए बेचैन है और ये साक्षात्कार वर्तमान शरीरधारी पूर्ण गुरु के मिले बिना संभव नहीं है,इसीलिए हर जन्म में वो गुरु की तलाश करती है.परन्तु इस संसार में आकर जीवात्मा लोभी गुरुओं की या फिर मूर्ति और समाधी की पूजा करने में भटककर सारी उम्र गवां देती है.धर्मग्रंथों में कहा गया है कि मनुष्य का जन्म बड़े भाग्य से और बहुत मुश्किल से प्राप्त होता है.बहुत सुन्दर आलेख श्री सद्गुरु जी ! एकदम सही लिखा आपने गुरु की महिमा अपरम्पार है

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: एल.एस. बिष्ट् एल.एस. बिष्ट्

आदरणीया डॉक्टर रंजना गुप्ता जी ! आपका ह्रदय से आभार ! मैं तो सोच रहा था कि मैं अकेले ही ये लड़ाई लड़ रहा हूँ ! विवाद से बचने के लिए लोग सत्य से मुंह फेर लेते हैं ! ऐसे उपभोक्ता हित वाले विषय पर लोग साथ देने से घबराते हैं और कमेंट करने तक से बचते हैं ! उपभोक्ताओं में एकता नहीं होने का ही नेटवर्क कम्पनिया फायदा उठा रही हैं ! आपने अपनी आपबीती सुनाई और मेरे लेख का समर्थन किया,इसके लिए धन्यवाद और आभार शब्द भी छोटा पड़ जाता है ! क्या कहूँ,उसके लिए मेरे पास शब्द नहीं है ! मेरे विचार से हमेशा प्रीपेड नेट कनेक्शन लेना चाहिए ! उपभोक्ताओं को किसी भी कम्पनी का पोस्टपेड नेट कनेक्शन नहीं लेना चाहिए ! नेटवर्क प्रदान करने वाली कंपनियां न सिर्फ बिलों में हेर फेर करती हैं,बल्कि प्राइवेट एजेंसियों को ठेका देकर जबरदस्ती बिलों की वसूली कराती हैं ! वो सब वकील और एडवोकेट बनकर कोर्ट की झूठी धमकी देते हैं ! मैंने ये लेख प्रधानमंत्री जी तक पहुंचा दिया है ! यदि वो इन कम्पनियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करते हैं तो मुझे बहुत दुःख होगा और चुनाव के समय उनको समर्थन देने पर अफ़सोस भी होगा ! हमेशा साथ देने के लिए पुन: मेरा हार्दिक आभार स्वीकार कीजिये !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: ranjanagupta ranjanagupta

भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सभी अधिकारियों और सरकार के सभी मन्त्रियों से अपने सार्वजनिक भाषणों और सार्वजनिक वक्तव्यों में तथा सरकारी पत्रों में हिन्दी का इस्तेमाल करने का आदेश जारी किया है.हिंदी में काम करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान करने का फैसला किया गया है.ख़ुद प्रधानमंत्री मोदी जी राष्ट्रभाषा को सम्मान देने के लिए विदेशी प्रतिनिधिमण्डलों से हिन्दी में ही बात करेंगे.यह वाकई बहुत सुखद और स्वप्न देखने के जैसा एहसास है.प्रधानमंत्री जब विदेशियों से हिंदी में बात करते हैं तो करोडो देशवासियों का सिर गर्व से ऊँचा उठ जाता है.अबतक तो अधिकतर प्रधानमंत्रियों ने विदेशी तो क्या देशी लोंगो से बातचीत करने में भी राष्ट्रभाषा हिंदी की उपेक्षा ही की है.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

''प्रधानमंत्री जी और गृहमंत्री जी से मेरा आग्रह है कि दक्षिण भारत के कुछ नेताओं द्वारा जारी हिंदी विरोध की परवाह न करते हुए हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा बनाने की मुहीम और तेज की जाये.यह देश के करोडो भारतवासियों की मातृभाषा है और सभी देशवासियों को आपस में जोड़ने वाली संपर्क भाषा भी है.हिंदी में अंतर्राष्ट्रीय भाषा बनने की सारी खुबिया मौजूद हैं और हमें हिंदी को उस मुकाम तक पहुँचाना है.आज दुनिया के कई देश चाहते हैं कि हिंदी अंतर्राष्ट्रीय भाषा बने हम सब भारतवासियों को भी एकजुट होकर यही दृढ़संकल्प लेना चाहिए.!! '' सदगुरुजी, आपका कहा गया उपरोक्त कथन एक सार्वभौम सत्य है, आज देश को 'हिंदी' को राष्टीय और अन्तर्राष्टीय दोनों ही स्तरों पर विकसित करने की आवश्यकता है.. ~

के द्वारा: Sushma Gupta Sushma Gupta

आदरणीय सिंह साहब ! सुप्रभात ! हार्दिक अभिनन्दन ! मैंने अपने जीवन में अपने सद्गुरुओं के बताये अनुसार भजन किया है और मुझसे जो भी संभव हो सका है,अपनी सामर्थ्यनुसार लोककल्याण किया है ! अब काशी या फिर मगहर कहीं भी मेरा शरीर छूटे,मुझे सद्गति मिलेगी ! मैं कबीर साहब का अन्नय भक्त हूँ ! उनकी कही वाणी-"दास कबीर ने ऐसी ओढ़ी कि ज्यों की त्यों धर दीन्ही चदरिया.." मेरे मन में गूंजती रहती है ! आपने साधुओं की बात की है ! आज भी एक से महान संत हैं,जो अपने अतीत के बारे में सबकुछ बताते हैं.वो कुछ भी छिपाते नहीं हैं.जो छिपाते हैं,उनमे से अधिकतर कोई अपराध करके,घरवालों को कर्ज में लादकर या फिर स्त्री बच्चों को मझदार में छोड़कर घर से भागे हुए हैं ! मैंने जीवन को भरपूर जिया है और उसके लिए कठिन संघर्ध भी किया है ! अपने संस्कारों के सारे आवरण मैं हटाना चाहता हूँ,इसीलिए आपलोगों से व्यक्तिगत बातें शेयर करता हूँ ! हो सकता है कि मेरा कोई अनुभव किसी के काम आ जाये ! पोस्ट की प्रशंसा आपने की है,इसके लिए बहुत बहुत हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

सद गुरू जी आज के बच्चे अपनी संस्कृति से दूर हो गये हैं उनको जोड़ना कितना जरूरी होगा है |मेरे पिता बहूत टेलेंटेड थे उन पर मारकेश था हम लोग जरा ज्यादा मार्डन थे कभी इस विषय में कभी सोचा नहीं परन्तु जिन्होंने मेरे पिता की उम्र कम बताई थी उन्होंने कहा बस रोज अपनी माँ के पैर छु देना मेरे फादर जब तक माँ जियीउनके सामने पड़ते ही पैर छु देते जब तक मेरी दादी जिन्दा रही वह सदैव बीमार रहीं उनकी आयु भी ज्यादा नहीं थी कुछ अजीब उनके साथ होता जब उनकी मृत्यू हूई दो साल बाद मेरे पिता की कम उम्र में हार्ट अटैक से मृत्यू हो गई शायद हमारी दादी मेरे पिता के सारे कष्ट ले लेती थी आज मैं ऐसा सोच रही हूँ काश मेरी दादी जिन्दा रहती मेरे पिता और जी लेते शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

आदरणीय आचार्या जी ! सादर हरिस्मरण ! हार्दिक अभिनन्दन ! आप की बात से मैं पूर्णत: सहमत हूँ ! मैं तो कई बार ये बात कह चूका हूँ ! मुझे लगता है कि इसी कारण से बहुत सारे अच्छे साहित्यकार मंच छोड़ के जा चुके हैं ! इस मंच का संचालक दैनिक जागरण पेपर एक बहुत सम्मानित और सक्षम अख़बार है ! इतना तो वो अपने ब्लागरों के लिए कर सकते हैं,जो आपने सुझाव दिया है ! मैंने ये सुझाव विधिवत एक पोस्ट लिखकर दिया था ! जिसका समर्थन आदरणीय संतलाल करुण जी और आदरणीया डॉक्टर रंजना जी सहित बहुत से ब्लॉगर मित्रों ने किया था ! निचे दिए लिंक पर क्लिक कर आप पढ़ लें,फिर एक ब्लॉग यदि चाहे तो इस विषय पर आप लिंखे- http://sadguruji.jagranjunction.com/2014/02/17/%E0%A4%AC%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%89%E0%A4%97%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%AD%E0%A4%B5-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8/

के द्वारा: sadguruji sadguruji

परम श्रद्धेय सद्गुरु जी , सादर श्री हरि स्मरण ! बहुत दिनों से मेरे मन में एक बात चल रही थी और सोंचा था कि कभी न कभी वो बात जागरण जंक्शन मंच के संपादक - मंडल के माननीय सदस्यों के बीच रखूँगा, आज आप ने इस बात को छेड़कर बहुत दिनों से पल रहे मन के भावों को प्रकट करने का अवसर प्रदान कर दिया ! आप के ब्लॉग के माध्यम से माननीय संपादक - मंडल के सदस्यों के बीच इस बात को रखना चाहूँगा कि कांटेस्ट के विजेताओं तक कम से कम एक आकर्षक मान ( सम्मान )- पत्र पहुंचाने की सुनिश्चित व्यवस्था होनी चाहिए और हो सके तो साहित्यिक समाचार के रूप में दैनिक जागरण में भी तद्विषयक समाचार छपवाने की व्यवस्था होनी चाहिए ! सधन्यवाद !

के द्वारा: Acharya Vijay Gunjan Acharya Vijay Gunjan

बचपन में गर्मी की छुट्टियां हमें बहुत पसंद थी,क्योंकि खूब घूमने और खाने को मिलता था.परन्तु इन छुट्टियों पर ग्रहण लगा देते थे स्कूल के टीचर,जो इतना होमवर्क दे देते थे कि पूरी छुट्टियों भर पूरा न हो.मुझे याद है कि जब पंजाब में सातवीं में मैं पढ़ रहा था तो गर्मी की छुटियों से पहले जो टीचर क्लास में आता था वो कोर्स की आधी किताब कापी में लिख लाने का हुक्म देता था.बच्चे टीचर के जाने के बाद कहते थे-ओए..आधी किताब लिखेगा कौन..इनका पयो..खुद तो अपने परिवार के संग इधर उधर घूम के ऐस करेंगे और हम पूरी छुट्टियां लिखने में बिता दें..स्कूल खुलने के पंद्रह दिन बाद आओ..कौन पूछेगा कि होमवर्क किये की नहीं..बचपन की यूँ तो बहुत सी यादें हैं.अपने मामा जी या पिताजी के गांव जाकर शरारतें करना और खूब धमाचौकड़ी मचाना.नीम और आम के पेड़ पर चढ़कर खेलना..एकांत स्थान और शमशान में जाकर भूत प्रेतों की खोज करना..जीवन के रहस्य और सत्यं की खोज में लगे रहना सब याद आता है.आप प्रारम्भ से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति के रहे हैं और इसका लाभ हमें मिल रहा है श्री सद्गुरु जी ! http://yogi-saraswat.blogspot.in/

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के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

चुनाव परिणामों पर बोलते हुए मोदी जी ने कहा-” संसदीय इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब देश का नेतृत्व अंग्रेजों की गुलामी के बाद स्वतंत्र भारत में पैदा हुए लोगों के हाथ में होगा.”किसी एक गैर कांग्रेसी दल को आजाद भारत के इतिहास में पहली बार स्पष्ट बहुमत मिला है.हमारे देश में पिछले कई दशक से मिलीजुली सरकारों का दौर चल रहा था,जिसमे राजनीतिक सौदेबाजी से लेकर अनेक घोटाले तक हुए.सत्ताधारी नेताओं के गलत निर्णयों और उनके भोगविलास में डूबे होने के कारण देश आर्थिक मंदी की चपेट में आ गया था और आमजनता महंगाई की मार से अधमरी हो चली थी. आशा करनी चाहिए की देश को जीवन देने वाली गंगा , अपने पुराने स्वरुप में आएगी श्री सद्गुरु जी ! हर हर गंगे http://yogi-saraswat.blogspot.in/!

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आदरणीय हरिश्चंद्र जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! पोस्ट की सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! मैं आपके लेख पढता रहा कोई कमेंट नहीं किया ! मैं सोच लिया था कि १६ मई के बाद ही कमेंट करूँगा ! १६ मई के बाद कमेंट करने की इच्छा ही नहीं रही ! आपने एक लेख का शीर्षक ही दे दिया था-सेवानिब्रत होंगे “नरेंद्र मोदी” १७ मई को ! आपने उसमे कहा था कि स्वप्निल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी १७ मई को सेवानिब्रत हो जायेंगे ! मुझे अच्छा नहीं लगा था ! नया लेख आपका अच्छा लगा ! भारतीय जनता पार्टी की जीत का कौन है चाणक्य ? मेरे विचार से तो देश की जागरूक जनता ही भारतीय जनता पार्टी की जीत चाणक्य है ! ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

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स्वामी विवेकानंद जी मुस्कुराते हुए बोले-पेट पर इस पत्थर का बोझ तुसे कुछ घंटे भी नहीं उठाया गया,जबकि माँ अपने गर्भ में पलने वाले शिशु को नौ माह तक ढोती है और घर गृहस्थी का सारा काम भी करती है.इस संसार में माँ के जैसा कोई धैर्यवान और सहनशील नहीं है,इसीलिए माँ से बढ़कर महान इस संसार में और कोई नहीं है. माँ पर मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा गीत “उसको नही देखा हमने कभी, पर इसकी जरूरत क्या होगी, ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी“, मुझे बहुत पसंद है.जब भी ये गीत कहीं पर भी सुनने को मिलता है तो गीत के बोल और भाव ह्रदय को छूने लगते हैं और मन की याद आने लगती है बहुत सटीक और उत्कृष्ट उदहारण देकर आपने अपने लेख की शोभा और भी बधाई दी है श्री सद्गुरु जी ! बहुत प्रभावी लेख http://yogi-saraswat.blogspot.in/

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स्वामी विवेकानंद जी मुस्कुराते हुए बोले-पेट पर इस पत्थर का बोझ तुसे कुछ घंटे भी नहीं उठाया गया,जबकि माँ अपने गर्भ में पलने वाले शिशु को नौ माह तक ढोती है और घर गृहस्थी का सारा काम भी करती है.इस संसार में माँ के जैसा कोई धैर्यवान और सहनशील नहीं है,इसीलिए माँ से बढ़कर महान इस संसार में और कोई नहीं है. माँ पर मजरूह सुल्तानपुरी का लिखा गीत “उसको नही देखा हमने कभी, पर इसकी जरूरत क्या होगी, ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी“, मुझे बहुत पसंद है.जब भी ये गीत कहीं पर भी सुनने को मिलता है तो गीत के बोल और भाव ह्रदय को छूने लगते हैं और मन की याद आने लगती है बहुत सटीक और उत्कृष्ट उदहारण देकर आपने अपने लेख की शोभा और भी बधाई दी है श्री सद्गुरु जी ! http://yogi-saraswat.blogspot.in/

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आदरणीय सिंह साहब ! सादर अभिनन्दन ! सत्य कड़वा होता है ! उस समय मन पर सरस्वती हावी थीं,इसीलिए ऐसा कटु सत्यवाला कमेंट लिखा गया ! हो सकता है कि आदरणीय संतलाल जी और कुछ अन्य ब्लॉगर मित्रों को मेरा कमेंट अच्छा न लगे ! परन्तु ये एक कड़वी सच्चाई है कि देश के बुद्धिजीवी भ्रस्ट सरकार और भ्रस्ट नेताओं की आलोचना केवल करते हैं ! देश की भ्रस्ट व्यवस्था को बदलने के लिए वो व्यवहारिक रूप से कुछ नहीं करते हैं,यहाँ तक कि अधिकतर बुद्धिजीवी लोग वोट डालने भी नहीं जाते हैं ! बुद्धिजीवियों से फिर क्या उम्मीद की जाये कि ये देश को बदलेंगे ! भ्रस्ट नेताओं की पोलपट्टी खोलनेवाले इनके शुद्ध साहित्यिक लेख न तो आम जनता तक पहुँच पाते हैं और न ही आम जनता उनके विचाओं को आसानी से समझ सकती है ! इसीलिए मैं कहता हूँ कि बुद्धिजीवी लोग अपने स्वार्थ,यश और मंन की संतुष्टि के लिए लिखते हैं !! हार्दिक आभार !!

के द्वारा: sadguruji sadguruji

बहुत हुआ - आदरणीय संतलाल करुण की कविता पर आपकी प्रतिक्रिया पर मेरी प्रतिक्रिया यहाँ पोस्ट कर रहा हूँ ताकि आपतक मेरी बात भी पहुंचे! आदरणीया संतलाल करुण जी ! सादर अभिनन्दन ! आपने कविता अच्छी लिखी है,परन्तु क्या घर बैठे कविता लिखने से कोई जनक्रांति हो जाएगी ? आप जैसे बुद्धिजीवी अपने जैसे किसी दूसरे बुद्धिजीवी को प्रभावित करते हैं,वाहवाही की अौपचारिकता होती है और बात खत्म ! फिर आप जैसे विद्वान लोग अगली रचना लिखने में व्यस्त हो जाते हैं.परन्तु इससे आम आदमी कहाँ प्रभावित हो रहा है.वो तो शयद आपकी कविता का असली अर्थ भी नहीं समझ पायेगा.अधिकतर बुद्धिजीवी अपनी रचनाओं से अच्छा सन्देश देते हैं,परन्तु व्यवहारिक रूप में जब अमल की बात आती है तो मतदान केंद्र तक वोट डालने भी नहीं जाते हैं.क्या सभी पार्टियों और नेताओं को अपनी रचनाओं में कोसने और गाली भर देने से उनके कर्तव्य की इतिश्री हो जाती है ?उनसे अच्छे तो अनपढ़ और कम पढ़ेलिखे लोग हैं जो वोट देकर भ्रस्ट नेताओं और सरकार को उनके पद से हटाने का प्रयास करते हैं.बुद्धिजीवी लोग वस्तुत: बहुत स्वार्थी होते हैं,जो किसी सामाजिक क्रांति के लिए नहीं बल्कि अपने स्वार्थ,मन की संतुष्टि और यश के लिए लिखते हैं.आज यही स्थिति देश के बुद्धिजीवियों की है.देश की दुर्दशा के लिए वो ज्यादा जिम्मेदार हैं. jlsingh के द्वारा May 14, 2014 आदरणीय सद्गुरुजी, सादर अभिवादन! सत्य बहुत करुण होता है. आपकी बातों से बहुत हद तक सहमत हूँ. बुद्धिजीवी लोग वस्तुत: बहुत स्वार्थी होते हैं,जो किसी सामाजिक क्रांति के लिए नहीं बल्कि अपने स्वार्थ,मन की संतुष्टि और यश के लिए लिखते हैं.आज यही स्थिति देश के बुद्धिजीवियों की है.देश की दुर्दशा के लिए वो ज्यादा जिम्मेदार हैं. और ज्यादा कुछ कहने की हिम्मत मुझमे नहीं …अब देश की जनता ने अपना मत दे दिया है जनता के फैसले को मानना ही हमारी नियति रही है ..इंतज़ार कुछ चमत्कारों का….सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीया डॉक्टर रंजना गुप्ताजी ! सादर अभिनन्दन ! पोस्ट की सराहना के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ! आपने सही कहा है कि लेख से लोग अवश्य प्रेरणा लेंगे ! जागरण जंक्शन मंच,फेसबुक,ट्विटर और अन्य कई इंटरनेट संचार माध्यमों के जरिये पुरे देशभर में लाखों देशवासियों तक मेरे सन्देश मेरे लेखों के माध्यम से पहुंचे ! आप से दिल की बात कहता हूँ कि राजनीति मेरे लेखन का प्रिय विषय नहीं है ! परन्तु हमारे देश में जो चुनावी महाभारत चल रही थी उसमे तटस्थ रहना मैंने उचित नहीं समझा और मैंने देशहित में पांडवों का साथ देने का निश्चय किया ! मैं जानता हूँ कि इस मंच पर कई लोगों को मेरा ये कार्य अच्छा नहीं लगा है ! जागरण जंक्शन परिवार ने भी अपने को तटस्थ और सेकुलर साबित करने के लिए मेरे बहुत से अच्छे लेंखों को फीचर तक नहीं किया ! मुझे इन सब चीजों की कोई परवाह नहीं है ! चुनावी महाभारत का परिणाम चाहे जो हो परन्तु मुझे बहुत आत्मसंतुष्टि है कि मैंने देशहित में जो कुछ भी किया सही किया ! अनगिनत लोग जो मुझसे पिछले एक माह के दौरान मिले हैं उन्हें भी मैंने यही सलाह दी है कि देशहित में इस बार पांडवों का साथ दो ! हमेशा सहयोग और समर्थन देने के लिए मेरा हार्दिक आभार स्वीकार कीजिये ! !! जयहिंद !!

के द्वारा: sadguruji sadguruji

दूसरी विचारणीय बात ये है कि गुजरात सरकार ने प्रदीप सशर्मा पर जो सनसनीखेज आरोप लगाये हैं,उसपर जरा गौर कीजिये.गुजरात सरकार ने आरोप लगाया है कि-”सन २००९ में प्रदीप शर्मा की मोबाइल फोन पर हुई बातचीत को इंटरसेप्ट किया गया था.इससे पता चला कि प्रदीप शर्मा ने अपनी पत्नी के नाम अमरीका में बड़ी मात्रा में हवाला ट्रांजेक्शन किया था.शर्मा ने कई बेनामी प्रोपर्टी भी खरीद रखी है.प्रदीप शर्मा के कई शादीशुदा महिलाओं से अवैध संबंध थे.” गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया था कि-”न केवल महिला के पिता को बल्कि खुद महिला को पता था कि राज्य की एजेंसियां उसे ट्रैक कर रही है.राज्य की कार्रवाई के लिए महिला शुक्रगुजार थी.हलफनामे में कहा गया कि महिला को झूठे प्रचार से काफी दुख पहुंचा है.” कुछ दिन की सरकार और है जो करना है सो कर लेने दो श्री सद्गुरु जी ! हालाँकि अब उन्होंने ये फैसला वापस ले लिया है ! http://yogi-saraswat.blogspot.in/

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