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सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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sadguruji


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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीया सोनम सैनीजी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपको संस्मरण अच्छा लगा, इसे लिखने की सार्थकता सफल हुई ! आपने सही लिखा है कि गोर लोग सांवले लोंगो को घूर घूर के यूँ देखते हैं, जैसे सांवला होना कोई अपराध हो ! ये एक हीन भावना है और ये सांवले लोंगो में भी होती है, जो अपने से ज्यादा काले लोंगो के प्रति दुर्भावना रखते हैं ! बहुत से लोग दिल मिलाने और रिस्ता बनाने से पहले चमड़ी मिलते हैं ! मेरे यहाँ आने वाली एक महिला बिसन रिश्ते नापसंद करने के बाद एक गोरी सुन्दर बहू ढूंढ के लाई ! उसके अहंकार और बुरे आचरण से घर में वो कलह मची है कि शादी को महज एक साल बीतते बीतते ही घर में बंटवारें कि नौबत आ गई है ! सार्थक प्रतिक्रिया के लिए सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

के द्वारा:

आदरणीय हरिप्रकाश गर्ग जी ! ब्लॉग पर आपका स्वागत है ! आपने बुद्धिजीवी की तरह लेख को पढ़ा और अपनी प्रतिक्रिया दी, इसके लिए हार्दिक आभार ! "सद्गुरु" शब्द को लेकर मन में कोई हीन ग्रंथि न पालें, ये भगवान का नाम है, जो मैंने अपने नाम "राजेंद्र ऋषि" के साथ जोड़ रखा है ! ब्लॉग का नाम भी "सद्गुरुजी" है, जो भगवान का एक नाम है ! आप मुझे सद्गुरुजी कहें, ऐसा मैं कहाँ कह रहा हूँ ! लेख को आपने अप्रमाणित कहा है ! ये बताइये कि क्या आत्मा परमात्मा प्रमाणित है, जो उसपर हर क्षण कुछ न कुछ लिखा जाता है ! रही बात आधी अधूरी जानकारी की तो ते आपका विचार है ! लेख आम जनता को सरलता से समझने के लिए सरल भाषा में लिखा गया है ! रही बात गांधी जी की तो उस विषय में काफी कुछ पढ़ने के बाद ही लिखा गया है ! संक्षेप में ये जानकारी इस लिंक प्राप्त कर सकते हैं ! "गांधीजी की सेक्स लाइफ, विचारकों की नजर में" http://hindi.webdunia.com/current-affairs/82-113061700002_1.htm

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आत्मा शरीर के भीतर अनुमन्ता के रूप में है. इसका अर्थ है कि साधना की ऊँची अवस्था में आत्मा साधक का मार्गदर्शन करने लगती है. आत्मा बतियाती है, बशर्ते हम साधना करके उस लायक बनें. आत्मा देह के भीतर भर्ता के रूप में है, वो पूरे शरीर और हर अंग का पालन-पोषण करती है. आत्मा यदि देह से बाहर निकल जाये तो शरीर कार्य करना बंद कर देता है. इसी को मृत्यु कहा जाता है. परमात्मा सभी प्राणियों के शरीर के भीतर ह्रदय में रहते हैं. शरीर में स्थित परमात्मा अपनी माया यानि तीन गुणो के द्वारा सबको उनके कर्मानुसार एक शरीर से दूसरे शरीर में भ्रमण करातें है, जब तक की कोई प्राणी साधना करके मोक्ष न पा ले आत्मा मार्ग दर्शन करने लगती हैं क्या यह इनट्यूशन हैं ? गीता में क्या नहीं हैं डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर अभिवादन! आपने भारतीय समाज की एक कटु सत्य को लिखा है. हालाँकि अब यह धीरे काम हो रहा है क्योंकि दलित वर्ग भी अब सर उठाने लगे हैं. हमारे हिन्दू धर्म के दलित वर्ग ही ज्यादातर मुस्लमान या ईसाई बने हैं. हमें आत्म मंथन करना होगा और सबको बराबरी का दर्जा देना होगा. सफाई कर्मचारी को बहुत से लोग अभी भी पानी भी नहीं पिलाना चाहते हैं, जबकि मेरे यहाँ कोई भी आकर पानी मांगता है, पीता है . मैं तो कभी कभी उन लोगों के साथ ही चाय पीता हूँ अगर वे मेरा घर में या आस पास सफाई का काम कर रहे हों तो.आखिर उनके द्वारा सफाई किये जाने के कारण ही हम साफ़ सुथरे जगह में रहते हैं. आपने उत्कृष्ट आलेख लिखा है और जागरण ने सही आलेख को सम्मानित किया है आपको शुभकामनाएं!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

श्री सद्गुरु जी एक बार मने एक मृत्यू मैं पगड़ी के टाइम गई मुझे उस मृत्यु का बहुत कष्ट था जवान मौत थी वहा एक प्रवचन देने आये थे उन्होंने बिना कारण मुझे डांटना शुरू कर दिया उन्हें लगा में बाते कर रही हूँ उन्होंने कहाँ क्या तुम्हे मृत्यु नहीं आनी है मैने कहा नहीं तुम कभी यह चोला नही छोडोगी मैने कहाँ मैं केवल वस्त्र बदलूंगी आप मोक्ष को प्राप्त होंगे आप परमात्मा से मिलेंगे में तो बार-बार यहाँ आउगी| मेरे समझ में गीता की गूढ़ता कभी समझ नहीं आई कर्मवाद में कर्म तुम करो फल मेरे हाथ में है में ऐसा सोचती हूँ दोनों सेनाये जब युद्ध करती हैं तुम सामने वाले को मार दो नहीं तो वः तुम्हे मार देगा कौन बचेगा इसका फैसला वक्त करता है अत: सब कुछ भगवान के हाथ में अर्पित कर दो एक बार एक जर्मन हमें मिले उनसे मेरे शौहर ने पूछा आप घूमनेआये हैं उन्होंने कहा नही थिओलोजी समझने आया हूँ आप की रेस बहुत बिकसित भी हैं धर्म भी हें आप यहाँ क्या समझ सकते हैं उन्होंने कहा आपकी गीता में मनुष्य के मन में उठने वाले हर सवाल का जबाब है | आपने बड़े सरल रूप में समझाने का प्रयत्न किया है मेरी अटपटी बातों पर आप हंसियेगा नहीं शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

जय श्री राम सद्गुरुजी बहुत ही दिल को छूने वाला और दुखदायी हमारे प्राचीन भारत में ऐसी वर्ना व्यवस्था कभी नहीं थी ये बीच में आ गयी.हमारी माँ जब हम ट्रेन से सफ़र करके आते तो हमें सब कपडे धोने और नहाने को कहती क्योंकि जमादार भी उसमे चलते है याह्तक जब हम नाइजीरिया से जहां हमने २१ साल कार्य किया आते तो भी कपडे धोने को कहती और कायस्थों को भी मुसलमानों की तरह समझते थे.हम तो कुछ नहीं कर सके क्योंकि माँ जिस तरह बरसती थी सहन नहीं होता था.ये सब अशिक्षा का परिणाम है और गाँव में ज्यादा है.देश की गुलामी का एककरण यही है.हम आको हृदय से आपकी इंसानियत के बारे में साधुवाद कहते और आपने तो अपने कार्य से हमारा दिल जीत लिए.सुन्दर लेख के लिए बहुत बधाई

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

श्री आदरणीय सद्गुरु जी बहुत अच्छा लेख यदि देश जातियों उपजातियों में बटा नहीं होता देश की तस्वीर अलग होती परन्तु दिल्ली में अब जाती सोच लगभग खत्म हो गई हैं मेरे घर में एक महिला काम करती थी वह बाल्मीकि हैं वह मेरे ही घर में ही नहीं कई पढ़े लिखे घर में काम करती है इतनी सभ्य और सुसंकृत है आप सोच नहीं सकते उसके दो लड़के हैं उनको पढ़ाना स्कूल में एडमिशन कराना सब मैने ही किया जिन घरों से संबंधित है सब उसकी मदद करते हैं बच्चों की साइंस की ट्यूशन एक अन्य परिवार नें अरेंज की है हाँ विवाह संबंध में हम अपनी ही जाती में करते हैं ब्राह्मण हैं ब्राह्मण कोई भी स्वीकार्य है | अब कोई पूछता भी नहीं हैं मेरी बचपन से साथ पढ़ी लड़की के पिता को सब भगत जी कहते थे उनकी बेटी प्रिंसिपल हैं और उसने अपने पिता से ज्योतिष सीखा अब पूरी पंडित है हाँ शुरू में परेशानी होती हैं कुछ स्ट्रगल के बाद जब यह आगे बढ़ जाते हैं कोई नहीं पूछता आपकी जाती क्या है | डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: jlsingh jlsingh

श्री सद्गुरु जी सबसे पहले भारत नए सहायता भेजी है ट्विटर पर मोदी जी ने सुचना दी श्री कोईराला थाईलैंड की यात्रा पर थे हमारी सेना दिन रात मलवे से जिन्दों और लाशें निकाल रहे हैं इस वक्त जिन्दों के लिए पानी खाना दोनों का इंतजाम करना है विश्व में भारत की ततपरता की सराहना हुई हैं इस वक्त जरूरत है मैनेजमेंट की वह उन्हीं की सरकार को करना है पर्वतीय क्षेत्र है लकड़ी की कमी नहीं होगी परन्तु सरकार दिखाई नहीं दे रही यदि कोई भी देश सरकारी काम को हाथ में लेगा संप्रभुता की बात कही जायेगी कहते हैं एयर पोर्ट पर किसी चीज की कमी नहीं है उनके अपने वालंटियर आगे आएं परन्तु जिन्दे निकालना जरूरी है ऊपर से बरसात चीन अलग से नाराज लग रहा है उसकी नेपाल पर आँख है |

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: drashok drashok

आदरणीय सदगुरु जी, सादर अभिवादन! काफी दिनों बाद आपकी ब्यथा को पढ रहा हून. वैसे आप तो खुद एक खुली किताब हैं अपना दुख सुख साझा करते ही रहते हैं दूसरों को भी यथासंभव मदद करते हैं. कुछ दिन पहले ब्रज किशोर सिंह ने जागरण जनकसन पर अपनी ब्यथा बताई थी. आज भी वी अपने माता पिता के लिये व्यग्र हैं पर उनके माता पिता अपने बेटी दामाद के साथ हैं. शोभा जी ने भी अपने मन की बात बता ही डी. हम सबके बीच एक आत्मीय सम्बंध सा हो ही गया है. अपने मन की बात साझा कर लेने से मन हल्का होता है. पहले भी लोग डायरी लिखते थे आज ब्लॉग एक माध्यम है. ...यह संसार ऐसा ही है और हम सब कठपुतलियाँ यथासम्भव सत्कार और प्रतिकार जरूरी है. बस और क्या कहूँ आप सभी अनुभवी हैं सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! क्षमा मांगने की आवश्यकता नहीं है ! आपने मेरे लेखन का उद्देश्य समझा, मेरे लिए यही बहुत है ! आपने सही कहा है कि जीवन की फिलॉसफी इस लेख में है, जिसके बिना ये लेख अधूरा और महत्वहीन रह जाता ! हर लेख में समाज को कुछ विचारणीय दर्शन देना मेरे लिखने का मूल उद्देश्य रहना है ! इस मंच पर आपकी सक्रियता और पढ़ने लिखने की रूचि को मैं सलाम करता हूँ ! कृपालु पाठकों और ब्लॉगर मित्रों से आत्मीय संबंध बनाये बिना सिर्फ इस मंच पर या किसी भी मंच पर यंत्रवत लिखते जाना मुझे तो एक तरह का अहंकार और मानसिक रोग लगता है ! सौभाग्य से हममे से अधिकतर ब्लॉगर मित्र इस खतरनाक बिमारी से दूर हैं ! किसी का भी विचार पूरी दुनिया के लोगों की विचारधारा को नहीं बदल सकता है, परन्तु कुछ लोगों की भी विचारधारा बदलती है तो यह लिखने वाले लेखक का अहोभाग्य है ! आपका सहयोग, समर्थन और सुझाव सदैव मिलता रहे, बस यही आकांक्षा है ! बहुत बहुत हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी मैने एक स्पैशलिस्ट डॉ ० से पूछा क्या पहले आज की प्रचलित बीमारिया डाइबटीज , ब्लड प्रेशर यूरिक एसिड पहले नहीं होते थे क्या उन्होंने कहा बहुत कम पहले लोग जैसे मिल बाँट कर खाते हैं ऐसे थे ऐसे ही अपनी समस्या भी दूसरों से कहते थे और लोग सुझाव देते थे अब हम अपने मन मैं घुटते हैं पर कहते नहीं आपका लेखन कम हो गया आप समाज सेवा से जुड़े हैं आप किसी एक परिवार के नहीं है समाज के हैं सबके हैं जिस दिन इस सत्य को आप समझ लेंगे फिर से लिखेंगे आप बहुत अच्छे इन्सान हैं इसी लिए परेशान हैं आप का धर्म माँ की सेवा करना है वह आप आपकी पत्नी बहुत अच्छी तरह कर रहें हैं जाता इन्सान होश मैं नहीं रहता उसके सामने पुरे जीवन की रील चलती है इसी लिए शायद गीता सुनाई जाती है डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरनीय श्री सद्गुरु जी काफी समय बाद आपका लेख पढने के लिए मिला बहुत सुंदर लेख आपने अपनी माता जी की तबियत के बारे लिखा सबसे प्यारी बात आपकी बच्ची की शरारतें आपकी बात पर मुझे अपनी बेटी याद आ गयी बहुत छोटी थी उसे पढना बिलकुल अच्छा नही लगता था हम लोग मथुरा को बिलोंग करते हैं एक बार हम विदेश से ऐसे अवसर पर आये जब नवरात्र के दिन थे मेरी लडकी को भी दो दिन तक अष्टमी नवमी कनया पूजन के लिए बुलाया वह बड़ी खुश उसने अपने फादर से कहा हम यही मथुरा में रहेंगे हम विदेश नहीं जायेंगे हम वहाँ क्यों रहते हैं इन्होने कहा बेटा मेरी जाब हैं पैसे के लिए हम वहां रहते हैं अरे पापा आप चिंता न करो यहाँ लोग घर में बुला कर पैर धोते हैं प्लेट में देखो खाने की डिश देते हैं रूपये भी देते हैं हम यहीं रहेंगे रूपये में आप को दे दूंगी हो गये न पैसे सब बहुत हंसे यह अब मथुरा में रह कर अपना खानदानी काम पंडिताई करेगी | आज बहुत पढ़ लिख गई हैं याद दिलाओ तो शर्माती हैं आपकी बच्ची की शैतानिया चंचलता को दर्शाती हैं बहुत अच्छा लेख डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय श्री सद्गुरु जी मेरे पति ने आपके लेख पर प्रतिक्रिया देने के लिए कहा मैने उनके ब्लॉग पर प्रतिक्रिया अपने नाम से दे दी उन्होंने आपके लेख को पढ़ कर अपने घर को अपने परिवार को याद किया आपके लेख में उन्हें अपने मथुरा की मिट्टी की सुगन्ध आई | आपने बहुत सुंदर होली जैसा ही प्रिय लेख लिखा हैं यह मेरी प्रतिक्रिया है |साथ ही आपने होली जैसे त्यौहार को खराब करने पर दुःख जताया है वाकई हम मजबूर हो कर अपने परिचितों के आने पर होली खेलते हैं नहीं तो दरवाजा बंद रखते हैं हमारे घर मेरे बच्चों के विदेशी मित्र भी कभी कभी होली देखने आते हैं हम उन्हें छत पर बिठा देते हैं | या मन्दिरों में होने वाली शाम को फूलों की होली दिखाने ले जाते हैं डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री आदरणीय सद्गुरु जी होली मुबारक हो होली के शुभ अवसर पर बेहद खूबसूरत लेख| लेख पढ़ कर मुझे अपनी सुसराल मथुरा की होली याद आ गई होली के शुभ अवसर पर हम सब मथुरा जाते थे बिलकुल साफ़ सुथरी होली होती थी हमारा घर कंस किले के पास यमुना जी के किनारे था होली खत्म होने पर पूरा परिवार यमुना किनारे जाते थे वह सब दिन अम्मा जी के साथ खत्म हो गये | आपके द्वारा लिखे होली के गीतों में वहां गाये जाने वाले गीत याद आ गये शाम को हम सब बांके बिहारी जी के मन्दिर जाते थे उनसे होली खेलने वहां लोग यह गीत गाते थे बहुत आकर्षक लेख कई जगह मैने जोगीरा वाला गाना सूना है मै उसे प्रिंट करा कर अपनी बहनों को दूंगी उन्हें गाने का बहुत शौक है डॉ शोभा

के द्वारा: drashok drashok

आदरणीय श्री राजेन्द्र ऋषि जी , सादर ! आदमी जब हार जाता है तो उसकी साड़ी कमियां दिखाई देने लगती हैं लेकिन जब वो ही आदमी जीत हासिल कर लेता है तो उसकी सर्री कमियां उसकी योग्यताओं में बदल जाती हैं ! बेहतरीन आलेख ! बेहतर है ! लेकिन अब जिम्मेदारी ज्यादा है , विपक्ष में रहकर या सत्ता से दूर रहकर किसी को भी गाली दी जा सकती है लेकिन जब जिम्मेदारियों की बात आती है तो असल टैलेंट पता लगता है ! भावनाएं अच्छी हैं कजरी की , उम्मीद करनी चाहिए काम भी अच्छे ही करेंगे ! हर भारतवासी उनसे उम्मीद कर सकता है किउनके चुने जाने पर आगे से पाकिस्तान और अरब देशों में मिठाई बटे न बटे हिंदुस्तान में जरूर बंटेगी ! आशा कर सकते हैं कि उन्हें आगे से चन्दा भारत के खून पसीने कि कमाई से मिलेगा और उसी से वो चुनाव लड़ेंगे , आशा कर सकते हैं कि उन्हें अब चुनाव लड़ने के लिए देश के दुश्मनों से चन्दा नहीं लेना पड़ेगा !बहुत बढ़िया http://yogi-saraswat.blogspot.in/2015/02/blog-post_9.html

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आदरणीय श्री राजेन्द्र ऋषि जी , सादर ! आदमी जब हार जाता है तो उसकी साड़ी कमियां दिखाई देने लगती हैं लेकिन जब वो ही आदमी जीत हासिल कर लेता है तो उसकी सर्री कमियां उसकी योग्यताओं में बदल जाती हैं ! बेहतरीन आलेख ! बेहतर है ! लेकिन अब जिम्मेदारी ज्यादा है , विपक्ष में रहकर या सत्ता से दूर रहकर किसी को भी गाली दी जा सकती है लेकिन जब जिम्मेदारियों की बात आती है तो असल टैलेंट पता लगता है ! भावनाएं अच्छी हैं कजरी की , उम्मीद करनी चाहिए काम भी अच्छे ही करेंगे ! हर भारतवासी उनसे उम्मीद कर सकता है किउनके चुने जाने पर आगे से पाकिस्तान और अरब देशों में मिठाई बटे न बटे हिंदुस्तान में जरूर बंटेगी ! आशा कर सकते हैं कि उन्हें आगे से चन्दा भारत के खून पसीने कि कमाई से मिलेगा और उसी से वो चुनाव लड़ेंगे , आशा कर सकते हैं कि उन्हें अब चुनाव लड़ने के लिए देश के दुश्मनों से चन्दा नहीं लेना पड़ेगा ! http://yogi-saraswat.blogspot.in/2015/02/blog-post_9.html

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आदरणीय सिंह साहब ! सादर अभिनन्दन ! प्रतिक्रिया व्यक्त करने ले लिए हार्दिक आभार ! मुझे अफ़सोस है कि मेरी किसी बात से आपको दुःख पहुंचा ! "जनता किरण बेदीजी को दिल्ली का भावी मुख्यमंत्री बनाये" उस लेख का शायद आप जिक्र कर रहे हैं ! उस लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए आपने भी कहा था, "आदरणीय सद्गुरु जी, सादर अभिवादन! आपने सुना होगा केजरीवाल ने एक नयी कहानी बनाई है एक भिखारी ने उसे ५ रुपये का चंदा दिया …लगता है आपका शाप लगने ही वाला है केजरीवाल को, उसकी औकात अब पांच रुपये वाली होनेवाली है … चले थे देश को सुधारने कीचड साफ़ करने ..खुद कीचड से लथपथ हो गए! किरण बेदी जी तो मोदी रूपी सूर्य भाया अमित शाह तीक्ष्ण किरण के रूप में सब पर भारी पड़ने वाली हैं …ऐसी दमदार महिला को आखिर पहचाना तो मोदी जी और अमित शाह ने ही …अन्ना भी नहीं पहचान सके." मुझे इस सच को स्वीकारने में कोई संकोच नहीं है कि मेरे जैसे न जाने कितने लोंगो ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा और किरण बेदी जी को अपना सर्वश्रेष्ठ समर्थन दिया ! मैं आज भी अरविन्द केजरीवाल जी का समर्थक नहीं हूँ और मेरा दृढ विश्वास है कि उन्होंने लोकलुभावने सपने दिखाकर सत्ता तो हासिल कर लिया है, परन्तु आम जनता को संतुष्ट कर पाना उनके वश की बात भी नहीं है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी, यह वर्तमान राजनीति, विसंगति और भावी संकेत को लेकर लिखा गया अत्यंत गंभीर आलेख है -- " ‘पॉप्युलिस्ट ऐनर्की’ यानी लोकलुभावन अराजकता में पूरा यकीन रखने वाली आम आदमी पार्टी से आज अर्थशास्त्री, विदेशी निवेशक और यहाँ तक कि भारतीय शेयर बाजार यानि दलाल स्ट्रीट भी चिंतित है. सबको यही चिंता है कि आम आदमी पार्टी यदि सत्ता में आती है तो ‘पॉप्युलिस्ट पॉलिसीज’ यानि लोकलुभावनी योजनाएं चलाकर वो दिल्ली ही नहीं बल्कि पुरे देश की तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था को अवरुद्ध कर सकती है. वो चाहे दिल्ली में निवेश करने वाले देशी-विदेशी निवेशक हों या भारतीय पूंजी बाजार में बड़े निवेश करने का मन बना रहे देशी विदेशी उद्योगपति हों, उन सबकी निगाहें इस समय दिल्ली के चुनाव पर है." ... हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

आदरणीय सद्गुरु जी, वर्तमान आतंकवादी परिस्थितियों को लेकर घटना विशेष के माध्यम से आप ने अत्यंत प्रभावपूर्ण आलेख प्रस्तुत किया है – “मेरे विचार से तो ये इस बात का पुख्ता सबूत भी है कि आने वाले समय में सारे विश्व को एकजुट होकर चौथा विश्वयुद्ध मुस्लिम आतंकवादियों के खिलाफ ही लड़ना होगा. सारी दुनिया के नौजवान, जो चाहे किसी भी धर्म को मानते हों, परन्तु जो तरक्की और अमनपसंद हैं, उन्हें आने वाले उस खतरे से आगाह करते हुए जनाब कैफ़ी आज़मी साहब के शब्दों में बस यही सन्देश दूंगा कि वो पूरे विश्व में तेजी से फ़ैल रहे आतंकवाद से शारीरिक, मानसिक और वैचारिक रूप से जूझने के लिए और एक लम्बी लड़ाई के लिए तैयार हो जाएँ, यही पूरे विश्वभर में जगह जगह पर आतंकवाद से जूझते हुए शहीद होने वालों का का आखिरी सन्देश है.” ... हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

इस घटना से अब यह बात साफ़ हो गई है कि आंतकियों के साथ उनके परिजन भी मिले हुए हैं और वो कत्तई विश्वास के काबिल नहीं है. इस तरह से यदि मुस्लिम अपने परिवार से संबंधित आतंकवादियों का खुलकर साथ और समर्थन देंगे तब तो ये तय है कि आने वाले समय में कश्मीर सहित पूरे देशभर में आतंकवाद से सावधान रहने और जूझने की हमारी लड़ाई और भी जटिल और घातक हो जाएगी. कर्नल राय आतंकियों को समर्पण कराकर उन्हें सुधरने और देश की मुख्यधारा से जुड़ने का मौका देना चाहते थे, परन्तु उन्होंने धोखा दिया. कर्नल राय दो वर्षों से लगातार दक्षिण कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई में शामिल थे. वो दक्षिणी कश्मीर में आतंकियों को खोजने, मुठभेड़ की योजना बनाने और उसे क्रियान्वित करने में पूरी तरह से माहिर थे. इसी विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर युद्घ सेवा पदक देने की घोषणा की गई थी.वो विश्वास करने लायक कभी रहे ही नहीं !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर आपका सादर अभिनन्दन है ! कुछ व्यस्तताओं के कारण मंच पर मैं समय नहीं दे पाया ! आप सही कह रही हैं कि वोट मोदीजी के नाम पर ही आने हैं ! किरण बेदीजी को छह माह पूर्व ही भाजपा में शामिल हो जाना चाहिए था ! उन्हें मुख्यमंत्री का उम्मीदवार भी और पहले घोषित कर देना चाहिए था ! खैर, देर से सही पर पार्टी का अच्छा निर्णय है ! उम्मीद है कि भाजपा के झगडे भी जल्द ही बंद हो जायेंगे ! दिल्ली की जनता, भाजपा और किरण बेदीजी मिल के ईमानदारी का वो पुराना समय वापस लाएं, जिसकी चर्चा आपने की है ! आपके कमेंट हृदय को छूते हैं, क्योंकि ह्रदय से निकलते हैं ! आप किरण बेदीजी से जुड़े, डॉ भरत सिहं जी से जुड़े ईमानदारी वाले पुराने दिनों पर कोई लेख जरूर लिखिए, मुझे बहुत उत्सुकता से उसकी प्रतीक्षा रहेगी ! सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी बहुत अच्छा लेख दिल्ली वाले किरन बेदी जी को बहुत अच्छी तरह जानते हैं कभी उनका दिल्ली फिर तिहाड़ जेल की व्यवस्था में उनका दबदबा था किरन जी बेहद लगनी हैं हम महिलाये उनके आगमन से गौरव महसूस कर रहीं हैं जब मैं पी एच डी कर रही थी वह दिल्ली में पुलिस विभाग में नियुक्त हुई थी उनके जबर्दस्त चर्चे थे आईटीओ पर वह जीप में अक्सर नजर आती थी क्या रुआब था हम लडकियां उन्हें एडमायर करती थी मेरा विवाह हुआ मेरे पति पुलिस में डाक्टर थे वह समय बहुत ईमानदारी का था पुलिस अस्पताल के सर्जन डॉ भरत सिहं की ईमान दारी की लोग कसमें खाते थे मैं उस समय कई बार उनसे मुखातिब हुई थी आज आप के लेख द्वारा बहुत सी बातें ताजा हो गई यदि भाजपा में झगड़े होते रहे तो किरन जी क्या करेंगी ऐसे लड़ रहें हैं क्या कहू जबकि वोट मोदी जी के नाम पर आने हैं शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

आदरणीय इमाम हुसैन कादरी जी ! सादर अभिनन्दन ! पूरे लेख को यदि ध्यान से आपने पढ़ा होगा तो पाया होगा कि इस धर्मान्तरण का मैंने स्पष्ट रूप से विरोध किया है ! ऐसे धर्मान्तरण से हिन्दू धर्म को न तो कोई फायदा है और न ही ऐसे धर्मान्तरण की कोई आवश्यकता है ! जो लोग जाति और छुआछूत के आधार पर हिन्दू धर्म में पहले से ही भेदभाव करते चले आ रहे हैं, वो लोग धर्मान्तरण करके आने वालों की क्या सेवा करेंगे ! केवल राजनीति और दिखावे के लिए धर्मान्तरण का कार्यक्रम आयोजित करने वालों से मैं पूछता हूँ कि क्या धर्म परिवर्तन करके हिन्दू धर्म में आने वाले लोंगो को वे "ब्राह्मण" घोषित करने कि हिम्मत जुटा सकते हैं ? कभी नहीं..यही कड़वा सत्य है ! आदरणीय इमाम हुसैन कादरी जी, प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत बहुत आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉक्टर रंजना गुप्ता जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! ब्लॉग पर आकर पोस्ट की सराहना करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! व्यस्तता के कारण फेसबुक पर दिन में एक बार ही आ पाता हूँ ! दोपहर को कुछ समय मिलता है ! आपका सन्देश मैंने पढ़ा ! फेसबुक पर आपकी रचनाएँ भी पढ़ीं ! आपसे आग्रह है कि इस मंच पर भी आप लिखतीं रहें ! आप अपने पाठकों और हम लोगों के लिए लिखतीं रहें ! आप विदुषी हैं ! बस इतना ही कहूँगा कि अच्छा लेखक वही है,जिसके लिखने कि प्यास कभी न बुझे ! हमें स्वयं प्यासे रहकर पाठकों की प्यास बुझानी चाहिए ! दूसरी जगह पर भी अब एडजस्ट हो गया हूँ ! मुझे एक ही रास्ता नजर आया कि अपनी सारी प्रतिभा और अपना सर्वोत्तम प्रयास रचना में आप उड़ेल दीजिये ! बस आप गुड बन जाइये ! प्रेमीजन स्वतः ही खींचे चले आएंगे ! आप सुनकर शायद हँसेगी कि मैं दूसरों को यदाकदा व कम से कम और अपने मन को निरंतर व अधिक से अधिक समझाता बुझाता रहता हूँ ! कोई नहीं है पास में तो मौन रहना बहुत भाता है ! प्रतिक्रिया देने के लिए के लिए अतिशय हार्दिक आभार और शुभरात्रि ! जगत के लिए फिर एक नई और हम सबके लिए बहुत बहुत मंगलमय सुबह हो !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय इमाम हुसैन कादरी जी ! ब्लॉग पर आपका स्वागत है ! काफी दिनों के बाद आप मंच पर उपस्थित हुए हैं ! आपकी प्रतिक्रिया में सहजता नहीं है ! मोदीजी तो शेर हैं ही ! उन्हें चूहा कौन बना रहा है ! मैं निराश भी नहीं हूँ ! मैं हमेशा ये कहूँगा कि मोदीजी के जैसा काबिल अब तक कोई प्रधानमंत्री नहीं हुआ है ! लेखक का धर्म मैंने निभाया है ! आपने लिखा है हिन्द को कोई तोड़ नहीं सकता है ! अच्छी बात है ! परन्तु हिन्द को तोड़ने की कोशिश करने वाले हैं कौन ! पाकिस्तान और उसके यहाँ डेरा डाले आतंकवादी ! वो दिन जरूर आएगा,जब भारत अमेरिका का साथ लेकर इन आतंकी डेरों का सफाया करेगा ! उपरवाले से दुआ है कि वो दिन जल्द आये ! प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

बहुत से बस यात्री इस घटना को छेड़छाड़ नहीं बल्कि सीट के लिए हुआ झगड़ा बता हैं.हरियाणा सरकार ने इस घटना की निष्पक्ष जाँच के आदेश दे दिए हैं.लड़कियों को पुरस्कृत करने पर भी रोक लगा दी गई है.हरियाणा सरकार का यह निर्णय सही है.किसी के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए.लडकियों के बारे में ये भी पता चला है कि लड़कों से मारपीट करना और उसका वीडियो बनाकर सोशल मिडिया पर प्रदर्शित करना इनकी पुरानी आदत है.जाँच में यदि ये सही पाया जाता है तो इन लड़कियों को भारतीय कानून के अनुसार दण्डित किया जाना चाहिए.ये दोनों बहने लड़कियों को लड़कों से झगड़ा करने का न सिर्फ गलत सन्देश दे रही हैं,बल्कि इसके साथ ही उन लड़कियों का भी मखौल उड़ा रही हैं,जो वास्तव में ही छेड़छाड़ का शिकार हो रही हैं.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: DEEPTI SAXENA DEEPTI SAXENA

श्री सद्गुरु जी यह आश्रम नईं हैं क्लब हैं जो लोग यहां जाते हैं वह भी जानते हैं वह कहां जा रहे हैं जी रहें है औरतों के बारे में खास कर कह रहीं हूँ यदि वह घर से कहि जाना चाहे उन पर कई बंधन हैं यदि वह सतसंग का नाम लेती हैं कोई परेशानी नहीं हैं मेरी काम वाली ने मुझे श्राद्ध के दिनों में बहुत व्यस्त देखा उसने मुझे कहा गुरु धारण कर लो सब प्रपंचों से छुटकारा मिल जाता है कुछ करने की जरूरत नहीं हैं | यह तो कुछ बाबा है जिन्होंने धर्म के नाम पर पखण्ड शुरू कर दिया मुझे राजा राम मोहन राय याद हैं जो हमे चिता से उठा करj लाये थे दयानंद सरस्वती ने nya रास्ता दिखाया था विवेकानंद और कितने महापुरुष परन्तु उन्होंने कभी अपने को भगवान नही कहा था यह भगवान का नया फैशन चला है हम भी उतने ही दोषी हैं आध्यात्म को कुछ पाने से जोड़ लिया साईं बाबा के जाओ जो चढ़ाओगे दुगना मिलेगा यह दुनिया हैं यहाँ कोई किसी को क्या ठगेगा हम खुद ही ठगे जाना चाहते हैं नहीं तो अच्छे मार्ग दर्शकों की कमी नहीं है मेरे पति को लोग कई बार कहते हैं चलिए अमुक जगह बहुत अच्छे सन्यासी हैं बड़ा सुंदर प्रवचन हैं या साक्षात भगवान मिल जायेंगे वह कहते हैं अरे भाई मैं मथुरा का हूँ यह तो डाक्टर बन गया नही तो मैं भी पंडिताई कर रहा होता | सद्गुरु जी क्या आप नवभारत टाइम्स ब्लॉग मे लिखते हैं आप बहुत अच्छा लिखते है अत : वहां भी लिखिए दैनिक जागरण की तरह ब्लॉग बनता है डॉ शोभा

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आदरणीया डॉ शोभा जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! काफी दिनों के बाद मंच पर उपस्थित होकर आपने मंच का सूनापन दूर किया है ! मंच पर पुनः वैचारिक रूप से उपस्थित होने के लिए आपको अतिशय धन्यवाद ! कई ब्लॉगों पर किये गए आपके कमेंट से पता चला कि आपका टेकीफोन ख़राब था ! यही परेशानी मेरे यहाँ थी ! मैंने बीएसएनएल का ब्रॉडबैंड हटवाकर रिलायंस का थ्री जी मोडम ले लिया,जिसकी स्पीड और कार्यप्रणाली बहुत अच्छी है ! प्रस्तुत कविता वास्तव में ही कोई कविता न होकर मेरे दिल की आवाज है ! आपने सही कहा है कि काला धन आना बहुत ही मुश्किल है ! उसका पुरानी सरकारों ने पहले ही इंतजाम कर लिया हैं ! बोफोर्स के समान यह चुनाव में भुनाने का सिक्का बनेगा ! सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया के लिए तथा मंच पर अपनी खुशनुमा बौद्धिक उपस्थिति देने के लिए अतिशय हार्दिक आभार !

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आदरणीय सुधीर शर्मा जी ! ब्लॉग पर आपका बहुत बहुत अभिनन्दन और स्वागत है ! आपने सही कहा है कि लोकसभा चुनाव के दौरान जनता ने ये दृढ निश्चय कर लिया था कि इस बार देश को नरेंद्र मोदी जी के रूप में एक बहुत शक्तिशाली प्रधानमंत्री देना है ! जनता ने वैसा ही किया ! आपकी ये बात भी सही है कि मोदी जी के 'स्वच्छता अभियान' को जनता का इतना ज्यादा समर्थन और सहयोग मिल रहा है कि शायद महात्मा गांधी के 'स्वच्छता अभियान' को भी इतना जनसमर्थन और जनसहयोग नहीं मिला रहा होगा ! लेख को पसंद करने के लिए धन्यवाद ! भविष्य में भी आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी ! यदि आप हिंदी में अपनी प्रतिक्रिया दें तो ज्यादा अच्छा रहेगा ! हार्दिक आभार !

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभ पटेल की तुलना महान रणनीतिकार चाणक्य से करते हुए कहा कि शताब्दियों पहले चाणक्य ने कई राज्यों को जोड़ा था.चाणक्य के बाद यह काम सरदार पटेल ने किया.मोदी जी ने कहा कि अनेकता में एकता हमारी संस्कृति और विरासत है.उन्होंने कहा कि जिस एकता के लिए सरदार पटेल ने अपना पूरा जीवन लगा दिया उसके ही जन्मदिन के दिन पर देश ने उस दंश को झेला जिसमें हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया.प्रधानमंत्री जी ने कहा कि यह विडंबना ही है कि मौजूदा दौर में हमने इस महान लौह पुरुष और उनके काम को भुला दिया. महान दूरदर्शी सरदार पटेल को जो सम्मान मिलना चाहिए था , वो अब तक नहीं मिल पाया था ! असल में कांग्रेस ने अपने इतर किसी को देखा ही नहीं कभी ! सार्थक पोस्ट श्री सद गुरु जी ! http://yogi-saraswat.blogspot.in/

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छठ पर्व के समय ये सब रेलवे की असफलता ही मानी जाएगी.फ़िलहाल रेलमंत्री और प्रधानमंत्री जी त्योहार के मौसम में बिहार जाने वाले यात्रियों को विशेष यात्रा सुविधा का लाभ देकर अच्छे दिनों का संकेत देने में असफल ही साबित हुए हैं.शायद अगले साल से वो छठ के समय बिहार जाने वाले यात्रियों को विशेष यात्रा सुविधा मुहैया कराएँगे,ऐसी उम्मीद करनी चाहिए ९० यात्रयों के बैठने की जगह में ७०० यात्री ठूंस कर गए टाटानगर स्टेसन से साउथ बिहार एक्सप्रेस में ..यार रिपोर्ट जमशेदपुर के दैनिक जागरण में छपी. आरक्षित डिब्बे भी जेनरल डब्बे जैसे ... रेलवे को तो मुनाफा हो रहा है न! इस बार बिहार को रेल मंत्रालय न मिला... हर साल एक्स्ट्रा कोच और एक्स्ट्रा गाड़ियां चलई जाती थी. इस साल मोदी जी नाराज हैं बिहारियों से शायद... फिर भी सूर्य भगवन सब कृपा बनाये रक्खें यही प्रार्थना है.. सादर सद्गुरु जी. इस बार आपने बहुत ही सुन्दर आलेख लिखा... मैं हर साल लिखता था. इस बार नहीं लिख सका हूँ..

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आदरणीय चंद्रामृत जी ! ब्लॉग पर आपका स्वागत है ! आपने सही कहा है कि 'नारी का सेक्स के विषय पर बात करना गलत माना जाता है ! फीमेल लेखिका का सेक्स पर लिखने पर उसे बुद्धिजीवियों दवारा गाली दी जाती है !' मैंने उस स्त्री से बातचीत के कुछ महत्वपूर्ण अंश ही मंच पर साँझा किये हैं ! मुझे लगा कि पूरी बातचीत प्रकाशित करना शायद बहुत से लोंगो को अच्छा न लगे ! इंसान की सबसे बड़ी कमी यही है कि वो बाहरी रूप से अच्छा बने रहने के लिए जीवनभर सत्य से कोसो दूर भागता रहता है,जबकि आंतरिक रूप से चोरी छिपे प्रकृति के सारे रसास्वादन करता रहता है ! श्रीमद भगवद्गीता और भगवान कृष्ण की नजर में ये भी एक तरह की चोरी ही है ! सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिए आपका अतिशय हार्दिक आभार !

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आदरणीय सद्गुरु जी मैं मोदी जी की बहुत फैन हु न जाने मुझे क्यों लगता है अब सब कुछ अच्छा होगा मोदी जी की के किस अभियान को सराहूँ वह हर प्रकार से जनता को अपने से जोड़ते हैं आपने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा है एक अविवाहित व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ जोर दार तरीके से लड़ता है जय ललिता जी ,बहन माया वती जी को आप भूल गये वोट बैंक की खातिर ममताजी के बंगाल में क्या हो रहा है पूरी आतंकवादियों को बम सप्लाई करने की फैक्ट्री चल रहीं हैं हाँ नवीन पटनायक जी ने विवाह नहीं किया उनके खुद के भ्रष्टाचार की कोइ बात अभी नहीं उठी है मोदी जी इंसान ही बहुत अच्छे हैं उन्होंने देश के दुःख को महसूस किया हैं उनकी कोशिश है आपका लेख सदा अच्छा होता है अपने में सम्पूर्ण डॉ शोभा

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मोदी जी के विषय में इतना कुछ पढ़ ने के बाद उनकी जीवन यात्रा का रहस्य भी ज्ञात होता है आपके लेख से !आदरणीय सद्गुरुजी !सरल और सुन्दर शैली में लिखा गया ज्ञान वर्धक लेख एक कौतुहल पैदा करता है पाठक में !मोदी जी के प्रति!!सादर !! आदरणीया डॉ रंजना गुप्ता जी ! सुप्रभात ! काफी दिनों के अध्य्यन के बाद कुछ कहने में सफलता मिली है ! मेरी बेटी को उनमे बहुत दिलचस्पी रहती है ! वो उनके बारे में अधिक से अधिक जानने को उत्सुक रहती है ! शिक्षाप्रद और देशभक्ति से परिपूर्ण कुछ गीत उसे बहुत पसंद हैं ! 'नन्हा मुन्ना राही हूँ,देश का सिपाही हूँ..'जब मन में आता है,तब गा लेती है ! वो ये जानने को बहुत उत्सुक रहती है कि मई क्या लिख रहा हूँ और कब क्या कर रहा हूँ ! मेरे साथ यज्ञ और सत्संग में बैठती है और सवालों के ढेर हमेशा मेरे सामने रखे रहती है ! उसे अच्छे ढंग से शिक्षित और संस्कारित करने के लिए घर में सभी लोग अपने अपने ढंग से कोशिश करते है ! अपनी सार्थक प्रतिक्रिया द्वारा पोस्ट को सार्थकता प्रदान करने के लिए आपका बहुत बहुत हार्दिक आभार !

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आदरणीय एल.एस. बिष्ट् जी ! ब्लॉग पर आपका स्वागत है ! काफी अध्ययन करने के बाद ये लेख मैंने लिखा है ! मेरी बेटी की मोदी जी के प्रति जिज्ञासा ने मुझे ये लेख लिखने के लिए प्रेरित किया ! प्रतिदिन जहाँ एक ओर मोदी समर्थकों से मुलाकात होती है तो वहीँ दूसरी तरफ मोदी विरोधियों से भी भेंट होती है ! मोदीजी से मेरा कोई भी सांसारिक लेन देन नहीं है ! जैसे सचिन का मैं समर्थक रहा वैसे ही मोदीजी का भी समर्थक हूँ ! मोदीजी से भावनात्मक लगाव उन्हें वोट देने के कारण और उनकी हमारे राष्ट्र और हमारी सभ्यता-संस्कृति के प्रति उनके गहरे लगाव के कारण है ! आपने सही कहा है कि समय के साथ वह एक बेहतर प्रधानमंत्री साबित होंगे ! मेरे विचार से हजारों मायने में मोदीजी ऐतिहासिक भी साबित होंगे ! सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत आभार !

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आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! दिन मंगलमय हो ! मेरे स्वर्गीय पिताजी के सेना में होने के कारण तथा उनके १९६२,१९६५ और १९७१ के युद्ध में भाग लेने के कारण मुझे अपने देश से बहुत ज्यादा लगाव है ! जब भी देश पर कोई संकट आता है,अपना सर्वोत्तम उत्सर्ग करने की भावना मन में सवाथ ही पैदा हो जाती है ! कैफ़ी आज़मी साहब के लिखे गीत-'कर चले हम फ़िदा..',की कुछ पंक्तियाँ मेरे खून में देशप्रेम की उबाल ला देती हैं-'ज़िंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर जान देने की रुत रोज़ आती नहीं हस्न और इश्क दोनों को रुस्वा करे वो जवानी जो खूँ में नहाती नहीं ! मैं कोशिश करता हूँ कि मेरे लेख हर दृष्टि से सम्पूर्ण रहे,परन्तु हर लेख में ऐसा नहीं हो पाता है ! अपनी सार्थक प्रतिक्रिया से पोस्ट को सार्थकता प्रदान करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

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आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! सुप्रभात ! आपने सही कहा है कि करवाचौथ का दिन वीमेन'डे है ! पति के लिए व्रत रखकर वो बहुत खुश होती हैं ! मधुमेह होते हुए भी आपने व्रत रखा,ये बहुत बड़ी बात है ! आपको और डॉ साहब दोनों को बधाई ! आपलोग स्वस्थ और दीर्घायु रहें,समाज की सेवा में लगे रहें,ईश्वर से बस यही प्रार्थना है ! कल मेरी श्रीमतीजी ने भी व्रत रखा हुआ था.मैंने उनका साथ दिया और जो उन्होंने कहा,वो मैंने किया ! हालाँकि मैं कभी उपवास नहीं रखता हूँ ! मेरे विचार से व्रत व उपवास का अर्थ बस यही है कि ईश्वर को हमेशा याद करते हुए जो कुछ भी आपसे अच्छा हो सकता है,वो अपने परिवार और समाज के लिए करें ! मैं प्रकृति के साथ चलना पसंद करता हूँ,जैसे भूख लगी तो खाना खा लिया और प्यास लगी तो पानी पी लिया ! क्रोध से बचना और कभी आ गया तो छोटे बच्चों के साथ खेलना ! इस मामले में मैं अघोरी हूँ ! आप इतनी पढ़ीलिखी और समाज में बेहद सम्मानित होते हुए भी व्रत रहती हैं ! आपके भीतर का अच्छा संस्कार और पति के प्रति गहरा भावनात्मक लगाव आपको व्रत रखने के लिए प्रेरित करता है ! व्रत का हिमायती नहीं होते हुए भी आपके भावनात्मक जज्बे को सलाम ! आपने सही कहा है कि इस देवभूमि की महिलाएं विचित्र हैं ! मुझे लगता है कि अधिकतर महिलाओं को पति से ज्यादा आसपड़ोस और समाज की फिक्र होती है,जैसे कि यदि व्रत नहीं रहूंगी तो रिश्तेदार और आसपड़ोस वाले क्या कहेंगे ! दूसरी बात मैंने ये महसूस की है कि व्रत रहने वालों की परिवार और समाज में इज्जत बहुत होती है ! व्रत-उपवास और त्याग की भावना भारतीय संस्कृति का सबसे जयादा गहरा और आमजनता के बीच बेहद लोकप्रिय संस्कार है ! इसके जेड इतनी गहरी हैं कि आनेवाली पीढ़ियां भी इसे अपनाएंगी ! हाँ..थोड़ा सा परिवर्तन ये हो जायेगा कि व्रत-उपवास और हर त्यौहार का दिखावा और बाजारीकरण होने के साथ साथ ये भी हो जायेगा कि पति-पत्नी दोनों ही व्रत रहने लगेंगे ! आजकल महिलाये अपने को पुरुष से किसी भी मामले में कमतर नहीं समझतीं हैं और वो चाहती हैं कि जो वो अपने पति के लिए करें,उसके बदले में उसका पति भी उनके लिए वही सब करें ! यही समानता और बराबरी करने की भावना आज समाज में पारिवारिक रिश्तों को भी तोड़ रही है ! आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी,विस्तृत और विचारणीय प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार और मधुमेह जैसा कष्टप्रद रोग सहकर भी करवाचौथ का व्रत रखने की पुनः बधाई !

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आदरणीया डॉ रंजना जी ! दिन मंगलमय हो ! करवाचौथ पर्व की शुभकामनाएँ ! त्वरित टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार ! आप ने सही कहा है कि स्त्री पत्नी बन कर रात- दिन पति की लम्बी आयु की कामना करती है ! वह सदैव यही चाहती है कि वह सदा सुहागिन ही रहे कभी उसके पति की मृत्यु उससे पहले न हो ! और इसी कामना को फलीभूत करने के लिए वह करवा चौथ का व्रत रखती है ! आपकी ये बात भी सही है कि पुरुष सदा से ही स्त्री को छलता आया है ! आज सुबह छह बजे जब छत से टहलकर आया तो इस पोस्ट को लिखने बैठ गया ! एक बार तो मुझे लगा कि छतपर जो कुछ मैंने देखा है,उसमे विशेष बात क्या है ! परन्तु फिर मैंने सोचा कि लिखा जाये और मंच पर ब्लॉगर साथियों और कृपालु पाठकों के समक्ष प्रस्तुत तो किया जाये ! सभी को करवाचौथ की शुभकामनाएँ !

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आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर आपका सादर अभिनन्दन है ! आपकी प्रतिक्रिया आपके निर्मल ह्रदय का उद्गार है ! आपने अपनी सार्थक प्रतिक्रिया से इस आलेख को जो सार्थकता प्रदान की है,उसके लिए अतिशय आभार ! आप स्वयं एक बुद्धिजीवी हैं और समसामयिक तथा राजनीतिक लेखों पर आपकी बहुत गहरी पकड़ है ! आपके लेखों का हम सभी को इंतजार रहता है ! आपने बिल्कुल सही कहा है कि "हालात यह हो गए है इतनी प्राचीन कांग्रेस का इतिहास कभी - कभी ऐसा लगता है राजीब गांधी , सोनिया गांधी , राहुल , गांधी , प्रियंका गांधी .राबर्ट वडेरा गांधी और वडेरा की संतानों में सीमित हो कर रह जाएगा ! कांग्रेस में एक से एक विद्वान थे राजनेता थे सब किनारे लगा दिए गए नेहरू जी जो महान स्टेट्स मैन देश और विदेशों में माननीय थे इंदिरा जी महान कर्मठ नेता उन्हें मोदी जी उठा रहे हैं !" आप ठीक कहा है कि "हम सबलोग देश की खुशहाली और उन्नति चाहते हैं !" इतनी सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी मोदी जी के इस अभियान का इतना असर हुआ लोगों ने अपने आस पास की सफाई करवानी शुरू कर दी जरूरत बस अब उस कूड़े के उठवाने की है जो सफाई के बाद इकट्ठा हुआ है आपने बहुत ही सुंदर नॉलेजिएबल लेख लिखा है अब लोगो को पता चल l रहा है इस देश में और भी अनेक प्रधान मंत्री हुए है हालात यह हो गए है इतनी प्राचीन कांग्रेस का इतिहास कभी - कभी ऐसा लगता है राजीब गांधी , सोनिया गांधी , राहुल , गांधी , प्रियंका गांधी .राबर्ट वडेरा गांधी और वडेरा की संतानों में सीमित हो कर रह जाएगा | कांग्रेस में एक से एक विद्वान थे राजनेता थे सब किनारे लगा दिए गए नेहरू जी जो महान स्टेट्स मैन देश और विदेशों में माननीय थे इंदिरा जी महान कर्मठ नेता उन्हें मोदी जी उठा रहे हैं हम जनता केवल यह चाहती है देश में खुशहाली रहे देश का नाम ऊचा हो सद्गुरु जी लेखन हम सब की आवाज है जिसे हम अपने पाठकों के लिए उठाते हैं आपके लेखों को पसंद करने वाले अनगिनत हैं मैने इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया है ऐसे ही लिखते रहिये आपकी लेखनी में सरस्वती का वास है मोदी जी के बाद देश में एक उमंग की लहर उठी है ऐसा लगता है अब कुछ अच्छा होने वाला है डॉ शोभा भारद्वाज

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आदरणीय एल.एस. बिष्ट् जी ! सादर अभिनन्दन ! इस मंच पर सभी ब्लॉगर मित्र अपनी अपनी शैली में लिखते हैं ! यही इस अनुपम मंच की खूबसूरती है ! ऐसा लगता है मानो ये मंच एक गुलदस्ता हो और विभिन्न तरह की रचनायें तरह तरह के सुंगंध देते सुन्दर पुष्प हों ! मैंने कोशिश की है कि कुछ अलग ढंग से लिखा जाये और अधिक से अधिक पाठकों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाये ! अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के द्वारा मेरे इस प्रयास को सार्थकता प्रदान करने के लिए मैं आप सभी ब्लॉगर मित्रों का ह्रदय से आभारी हूँ ! मेरे ब्लॉग पर आकर मेरी रचनाओं को पढ़ने और सराहने के लिए अपने सभी कृपालु पाठकों का भी अतिशय आभारी हूँ ! आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद !

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