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सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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sadguruji


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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

आदरणीया शकुंतला मिश्रा जी ! सादर अभिनन्दन ! ब्लॉग पर समय देने के लिए हार्दिक आभार ! भारत में स्वदेशी आंदोलन चलाने वाले और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के राष्ट्रीय महासचिव रहे स्वर्गीय राजिव दीक्षित जी न सिर्फ उच्चकोटि के एक भारतीय वैज्ञानिक और स्वदेशी अपनाने के प्रखर वक्ता थे, बल्कि आजादी बचाओ आन्दोलन के संस्थापक भी थे ! स्वर्गीय राजिव दीक्षित जी के जिस प्रयोग की आपने चर्चा की है उस व्याख्यान को पूरे विस्तार से इस लिंक पर आप पढ़ सकती हैं ! लेख की अपनी सीमाएं हैं, जिसका पालन करना पड़ता है और करना भी चाहिए ! आप यहाँ पर विस्तार से स्वर्गीय राजिव दीक्षित जी का व्याख्यान पढ़ें- "संगठन की मर्यादा और सिद्धांत" https://thethaluaclub.wordpress.com/2015/02/15/org/

के द्वारा: sadguruji sadguruji

उत्तराखण्ड मे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने हरीश रावत सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि राज्य में खनन और शराब में खुला भ्रष्ट्राचार किया गया है ! प्रदेश में खनन माफिया, शराब माफिया, भूमाफिया ने सरकार को जकडा हुआ था ! भय और भ्रष्ट्राचार का वातावरण पूरे प्रदेश में था ! 20-22 दिन के राष्ट्रपति शासन में एक सौ करोड़ से ज्यादा पेनाल्टी का पैसा हमारे प्रदेश के खजाने में आ गया है ! इस हिसाब से साढ़े चार साल में पांच हजार चार सौ करोड़ रुपए सरकार के लोगों के जेब में गया है, जबकि यह पैसा सरकार के खजाने में आना चाहिए था ! इसलिये कांग्रेस सरकार के उपर लगा भ्रष्ट्राचार का आरोप माफ नही हो सकता है. इसके खिलाफ भाजपा का संघर्ष जारी रहेगा ! भाजपा राज्य में सजग प्रहरी की तरह काम करेगी !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी उत्तम लेख आजकल इस कदर विज्ञापन द्वारा हर वस्तु बेचीं जाती है विज्ञापन को बूढ़े बच्चे हरेक के दिमाग में डाल देते हैं छोटे बच्चों को देखिये खाने में दाल सब्जी नहीं खाते कुरकुरे खाते हैं पानी की जगह पेप्सी या कोक पीते हैं गरीब भी यह सोच क्र बड़े लोगों के बच्चे जिन वस्तुओं का इस्तेमाल करते हैं व्ही अपने बच्चों को खिलाते पिलाते हैं एक बार एक काली लडकी मेरे पति के पास आई कहने लगी में गोरी होना चाहती हूँ फेयर एंड लवली खरीदना चाहती हूँ मेरी माँ नहीं मानती इन्होने जबाब दिया यदि फेयर एंड लवली से गोर होते तेरी आंटी सबसे पहले गोरी हो जाती | अच्छा स्वास्थ्य वर्धक भोजन न खाकर कृतिम प्रसाधनों के इस्लेमाल की रूचि बढ़ रही है सेलिब्रटी को देख कर उसी प्रोडक्ट का इस्तेमाल चाहते हैं ज्ञान कारी लेख

के द्वारा: Shobha Shobha

शत-प्रतिशत सहमत हूँ आपसे आदरणीय सद्गुरु जी । जनता के साथ होने वाली इस निर्मम ठगी में कोई भी अपनी सहभागिता से इनकार नहीं कर सकता और इसीलिए कानून को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसा कोई भी व्यक्ति या अभिकरण अपने उत्तरदायित्व से बचकर निकल न सके । प्रधानमंत्री के माध्यम से 'मेक इन इंडिया' का कोलाहल तो बहुत हो रहा है जिसमें विदेशी निवेशकों को भारत में न्यौता जा रहा है किन्तु ये अपने लाभ को ही सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले विदेशी निवेशक भारतीय जनता के प्रति अपने उत्तरदायित्व को ठीक से समझकर उसे भलीभाँति निभाएंगे, इस बात का ध्यान कौन रखेगा ? स्वदेशी आंदोलन चलाने वाले स्वर्गीय राजीव जी को मेरा नमन । आज ऐसे ही आंदोलन की आवश्यकता है । हमें विदेशियों के हितार्थ 'मेक इन इंडिया' नहीं वरन अपने देशवासियों के हितार्थ 'मेड इन इंडिया' चाहिए ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा:

श्री आदरणीय सद्गुरु जी श्री शंकराचार्य जी को लाइम लाइट में रहने की आदत है इसलिए वह साईं बाबा पर कमेंट कर देते हैं बूढ़े हैं शनी महाराज से डरते हैं शनि महाराज को आप जानते हैं क्रूर ग्रह मानते हैं मैं चैनलों पर जब भी शंकराचार्य जी और साईं भक्तों का विवाद हुआ है बुलाई गई हूँ मैने जम कर साईं बाबा का विरोध किया मेरा विरोध इस बात का है सनातन धर्म के मंदिरों में हमारे भगवान विराजते हैं वहां इनका क्या काम यह संत थे संत की तरह उनको माने यहां काफी मंदिरों मैं साईं की मूर्तियां लगा दी है जिसके लिए पैसा दिया जाता है यहाँ साईं भक्त प्रमुख हो गये | शंकराचार्य के सहायक भी चैनल में आते हैं उनसे हम कहते हैं आप उनको समझाएं ऐसे न बोलेन वः मुस्कराते हैं सब राजनीति हैं |

के द्वारा: Shobha Shobha

दृढ़-इच्छाशक्ति के बिना शठे शाठ्यम समाचरेत की नीति को कार्यान्वित करना संभव नहीं है सदगुरु जी । इसके लिए अपनी अंतर्राष्ट्रीय नेता की छवि बनाने का मोह त्यागकर राष्ट्रहित को ही सरोपरि मानना होगा । तब ही बात बनेगी । पाकिस्तान बदल नहीं सकता । वह भारत का विरोधी था, है और रहेगा । वहाँ की शासन-व्यवस्था और प्रशासन-तंत्र के सभी अंग ग़ैर-मुस्लिमों के विरोधी थे, हैं और रहेंगे । हमें अपनी पाकिस्तान संबंधी नीति बहुत सोच-समझकर बनानी होगी तथा उसकी सार्वजनिक अभिव्यक्ति तथा कार्यान्वयन में अतिशय सावधानी का परिचय देना होगा । हमें यह नहीं देखना चाहिए कि पाकिस्तान क्या चाहता है या संसार क्या चाहता है । हमें तो यह देखना चाहिए कि हम क्या चाहते हैं ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

आंतकवाद एवं परमाणु अप्रसार पर कांग्रेस की एक उपसमिति की अध्यक्षता करने वाले एक शीर्ष अमेरिकी सांसद पो ने एक साल पहले अपने एक पत्र में ओबामा से अपील की थी कि वह अमेरिका और पाकिस्तान के बीच असैन्य परमाणु समझौते के संबंध में किसी भी प्रकार की वार्ता नहीं करें ! उन्होंने पाकिस्तान के बारे में कहा था, "पाकिस्तान ने बार बार स्वयं को धूर्त और धोखेबाज साबित किया है !" पो ने आरोप भी लगाया था, "यह देश न केवल अफगानिस्तान में अमेरिकी बलों और उनके हितों पर हमला करने वाले आतंकवादी संगठनों को आश्रय देता है बल्कि उसने ईरान जैसे देशों के साथ पूर्व में किए गए परमाणु सौदों के मामले भी अपनी ईमानदारी साबित नहीं की हैै !"

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी आपके इस लेख को मैने कई बार पढ़ा मुझे एक बात याद आई एक पाकिस्तानी डाक़्टर हुनर गुल ने मुझे बताया जब हिन्दुओं ने इस्लाम ले लिया कैसे लिया यह नहीं लिखूंगी हा वह घंटो मंदिरों के बाहर खड़े होकर रोते थे भजन में गायी जाने वाली राम धुन पर सर पटकने लगते थे उनके लिए नाद और कव्वालियां लिखी गईं वह जब उनको गाते थे अपना कलेजा निकाल कर रख देते थे |वह भी सूफी म्यूजिक के साथ चलता है |वह बड़े दर्द से बताते थे मैं वहीं पहुंच गई उनका दर्द आज भी पंजाब के लोक संगीत मैं झलकता उस मूरत नूं मैं की आखाँ आँखा ते जाने जहांन आखां सच आंखन ते रब दी शान आखाँ किते मैहर अड़ी किते मेरी चन्ना इन्हें पाकिस्तान की सूफी संत आबिदा प्रवीन गाती हैं मुझे इतना ही याद है

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री आदरणीय सद्गुरुजी हमारे परिवार में एक शादी थी उस दिन भयानक ठंड थी सभी महिलाओं ने अपने स्वेटर शाल एक जगह पर ढेर लगा दिया और बरात के साथ चल दीं मेरे ननदोई सज्जनता में उनका जबाब नहीं वह स्वेटरों का ढेर उठा कर बरात में लेकर आये उन्होंने कहा अरे आप लोग स्वेटर और शाल पहन लो कितनी ठंड है सभी नाचती औरतें चिढ गईं आपसे किसने कहा था स्वेटर ले कर आओं बिचारे की समझ नहीं आ रहा था क्या करें उन्होंने रिश्तेदार भाबी जो बूढी थी से कहा आप तो पहन लो बुढ़ापे का शरीर है वह इतना चिढ़ी क्या तुम्हें मैं ही बूढी नजर आ रही हूँ मैने उनसे कहा आप स्वेटर व्ही रख आइए जहां से लाये थे आज उन्हें गर्म स्वेटर की बात कहना सबसे गाली लगेगा मेरी सुनिए मेरी कजन हैं वह मुझसे शायद कुछ ही बड़ी है वह एक परिवार के समारोह में अपने पोते पोतियां और नाती सम्भाल कर बैठी थी मैं उनकी बहुओं और बेटी और उनके हमउम्र की रिंग लीडर बन कर सबके साथ नाच रही थी अचानक मेरी बहन ने मुझसे पूछा शोभा तुम्हारी ाेज उम्र कितनी है मुझे इतना गुस्सा आया मैने कहा तुमने मेरा रिश्ता कराना है |औरत की उम्र तो रुकी ही अच्छी |

के द्वारा: Shobha Shobha

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विस्फोटक स्थिति के बीच हलकी-फुल्की ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

अंत में इस सारी चर्चा का सार ये है कि हमारा देश हिन्दुस्तान हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई हम सभी का है और हम सभी को सुख चैन से यहाँ पर रहने का अधिकार है, किन्तु हम सबको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि देश सबसे ऊपर है, अपने धर्म से भी ऊपर ! हमारा देश सुरक्षित, सम्पन्न और शांतिपूर्ण है, तभी हम सबका जीवन भी सुरक्षित, सम्पन्न और शंतिपूर्ण होगा ! देशप्रेम हम जापानियों से सीखें, जो कहते हैं कि बुद्ध हमारे भगवान हैं, लेकिन यदि वो हमारे देश पर आक्रमण करते हैं तो वो हमारे सबसे बड़े दुश्मन हैं ! हम उनसे युद्ध कर उन्हें हरा देंगे ! देश सबसे ऊपर है ! जापानियों की दृष्टि में देश धर्म से भी ऊपर है ! यही राष्ट प्रेम हममे भी होना चाहिए ! जयहिंद !!

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श‍िवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत माता के नारे पर फड़नवीस पके हुए केले की तरह नरम पड़ गए हैं ! शिवसेना के अनुसार ओवैसी पर देशद्रोह का मामला लगाकर जेल में बंद करना चाहिए था ! मंगलवार को उसके मुखपत्र सामना में लिखा गया, 'अखंड भारत के लिए आंदोलन करने वाले श‍िवसैनिक को डकैती का आरोप लगाकर जेल भेज दिया जाता है और अपने ही महाराष्ट्र में हैदराबाद का ओवैसी आता है और गला काटा तो भी भारत माता की जय नहीं बोलूंगा ऐसा थूक कर चला जाता है. उस ओवैसी पर देशद्रोह का मामला लगाकर उसे घसीटकर लाते हुए कसाब की कोठरी में धकेलने की मुख्य्मंत्री ने हिम्मत क्यों नहीं दिखाई?'

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सुप्रभात ! आपने बहुत अच्छे संस्मरण के साथ जो मैं कहना चाहता था वो कह दिया है ! हर छोटे बच्चे को चाहे कार्टून के द्वारा या फिर अन्य तरीके से ये सिखाना जरुरी है कि "play with me but don't tuch me stay there I dont like kissi and huggi" अर्थात "मेरे साथ खेलो पर मुझे छुओ मत ! दूर रहो ! मैं किसिंग और लिपटाना-चिपटाना पसंद नहीं करती !" आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! बहुत कारगर और सुन्दर वाक्य है ! छोटे बच्चों को जरूर रटाना पसंद करूंगा ! दरअसल मासूम बच्चों का शोषण देख खून खोलने लगता है ! कोई सुन्दर और सुगन्धित फूलों से हरा भरा गमला है तो वो दूर से देखने में ही अच्छा लगता है ! लेकिन कुछ लोंगो की प्रवृति ही मनोविकृत होती है ! जबतक दो चार फूल तोड़ न ले उन्हें चैन नहीं आता है ! मुझे अपने यहाँ गमले में खिले फूलों की भी रक्षा करनी पड़ती है ! बहुत से मेहमान नहा धोकर फूल तोड़ने पहुँच जाते हैं ! मैं साफ़ कहता हूँ कि देखो, फूल मत तोड़ना ! बस गमले के सामने खड़े हो अपने इष्ट को याद करो और उसे गमले समेत फूलों से लदा पौधा अपने मन ही मन समर्पित कर दो ! अधिकतर को ये बात नहीं भाती है ! सनकी साधू समझ हंसने लगते है ! ब्लॉग पर समय देंने के लिए सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री राजेन्द्र जी "किसी महिला या पुरुष ने उसके गाल पर किस किया नहीं कि रोते हुए आकर मुझसे लिपट जाती है. शांतिप्रिय स्वभाव का होते हुए भी उनकी इस अक्षम्य हरकत पर मुझे गुस्सा आ ही जाता है. मैं अपने सारे मेहमानों, परिचितों और आश्रम से जुड़े लोंगो को मना भी करता हूँ कि बच्ची को किस न करें. बहुत से अनपढ़, गंवार से लेकर अच्छे खासे पढ़े लिखे लोंगो के ऊपर भी प्यार जताने का ऐसा भूत सवार रहता है" हमारे यहाँ विदेशी मेहमान आईं उनकी केवल ढाई साल की बेबी थी सभी प्यार जताना चाहते बच्ची कड़कती आवाज में डांटती play with me but don't tuch me stay there I dont like kissi and huggi बच्ची की माँ से मैने पूछा यह क्या ?उसने बताया में एक कार्टून फिल्म लायी उसमें बच्चों को कैसे रहें शिक्षा दी जाती है मुझे जब कोइ कहता है मैं उनको कह देती हूँ कार्टून की भाषा बोलती है असल में मैने अपनी बेबी को यहां लाने से पहले तैयार कर दिया |आप भी बच्ची को बोल्ड बना दे खुदी डांट देगी यह आज के समय की जरूरत है

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपकी टिपण्णी अनुभव से परिपूर्ण होती है, इसलिए बहुत विचारणीय भी होती है ! आपने बिलकुल सही कहा है कि आतंकवाद से ग्रसित कई देशों में मुस्लिम अपना जीवन बचाने के लिए घरबार छोड़ के योरोप के सुरक्षित देशों की ओर भाग रहे हैं ! उन्हें ऊपर वाले पर इतना ही भरोसा है तो अपने ही देश में रहना चाहिए ! इससे ये साबित होता है कि अपने मुल्क को सबसे ऊपर रखना चाहिए, ऊपर वाले से भी ऊपर ! मुल्क सही सलामत है तभी हम सुख चैन से जीवन जीते हुए बिना किसी भय के ऊपर वाले की अच्छे ढंग से इबादत कर सकते हैं ! आपकी इस बात से पूर्णतः सहमत हूँ कि फतवे राजनीति करने के मकसद से जारी होते हैं और ये वोट बैंक की राजनीति करने वाले देशों में ही चलते भी हैं, जैसे भारत ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी नास्‍त्रेदमस के ग्रंथ ‘द प्रोफेसीज’ का गहराई से अध्ययन करने पर पता चलता है कि 2025 तक यह व्‍यक्ति भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की कायापलट कर देगा. नास्‍त्रेदमस ने इक्कीसवीं सदी में एंटीक्रिस्ट यानि ईसाई विरोधियों का जन्म होने और उनसे भीषण युद्ध यानि तृतीय विश्व युद्ध होने की बात कही है.एक मैगजीन हमारे यहाँ आती थी प्लेन ट्रुथ उसमें एक लेख था शायद समय भी दिया था मुझे याद नहीं मुख्य प्रसंग याद है एक दिन ईस्ट वेस्ट की सेनाये मिडिल ईस्ट में धर्म युद्ध करने जायेंगी इसमें दुनिया का हर देश भाग लेने के लिए मजबूर होगा | आप देख रहें हैं क्या हो रहा हैं अभी आप और देखेंगे | एक बात और मैने महम्मद शीर्षक से पढ़ी है १४०० वर्ष बाद दुनिया चाँद पर पहुंच चुकी होगी बहुत ऊंची- बिल्ग्डिंग होंगी एक युद्ध होगा आगे में लिख नहीं सकती कंट्रो वर्षल हो जाएगा बहुत अच्छा लेख

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! जागरण जंक्शन मंच के संचालकों की लापरवाही और सुस्ती के कारण बहुत सी रचनाएँ फीचर नहीं हो पाती हैं ! रोज वो लोग फीचर पोर्टल चेन्ज करेंगे, तभी अधिकतर रचनाएँ फिचर हो पाएंगी, क्योंकि रोज लगभग सौ रचनाएँ लोग पोस्ट करते होंगे ! मुझे लगता है कि मंच की देखरेख करने वाले कर्मियों की कमी है ! अब तो इस मंच पर पुराने ब्लॉगरों को ढूंढना भी आसान नहीं है, क्योंकि सर्च करने वाला ऑप्शन ही ख़त्म कर दिया गया है ! लिखना बंद करने के बाद आप अपने ब्लॉग को तो यूजर नेम और पासवर्ड के जरिये ढूंढ लेंगे, किन्तु दूसरे लोग आपके ब्लॉग तक नहीं पहुँच पाएंगे ! ये इस मंच की सबसे बड़ी कमी है ! पोस्ट पसंद करने के लिए और होली की बधाई देने के लिए धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

श्री आदरणीय सद्गुरु जी, पंजाब के प्रसिद्ध लोक गीत के साथ आपने विवाह का अति सुंदर वर्णन किया है. मैं आगे थोड़ा लिख दूँ. बेटी की डोली जब घर के मुख्य द्वार पर पहुंचती है, बेटी फिर बाबा से गुहार लगाती हुई कहती है- "बाबा मेरा डोला दरवाजे से नहीं निकल पा रहा है." बाबा कहता है- "मैं एक-एक ईंट हटा दूंगा. बेटी अपने घर जाओ." डोला घर की चोखट से निकल कर गलियाँ पार करता हुआ खेतों की पगदंडी से गुजर रहा है. बेटी का अब मोह भंग हो गया है. उसने जौ की बाल तोड़ी और जौ निकाल कर बिना पीछे देखे सर से ऊपर से पीछे डालते हुए कहा- "मेरे जन्म दाता, माँ बाबा, मेरे भाईयो और मेरे परिजनों! तुम खुश रहो. खूब फलो फूलो. मैं तो परदेस जा रही हूँ. वहाँ जा रही हूँ जहाँ मेरा भाग्य ले जा रहा है. डोली एक दरवाजे पर रुकी. दुल्हन के स्वागत के लिए दुल्हे के परिजन खड़े थे. डोली रुक गयी. अब यही उसका घर आंगन था. डॉक्टर शोभा भारद्वाज.

के द्वारा:

के द्वारा:

श्री आदरणीय सद्गुरु जी पूरे विवाह का वर्णन पढ़ा बहुत हंसी आई अपनी शादी याद आ गयी डॉ साहब ने मेरे पिता जी से कहा मेरे चाचा और भाईउनको बरात में जा कर क्लेश करने की आदत है मेरे पिताजी ने कहा आप चिंता न करें मेरठ के अस्पताल के इंचार्ज और एक बिजनेस मैंन थे दोनों फाइन पर्सनैलिटी उनको मेरे पिता जी ने इन दो महानुभावों की सेवा में लगा दिया| बस पूछिए मत उन्होंने जब वह गुस्से का मूड़ बनाते दोनों उन्हें कहते गुस्सा नहीं करना अरे आप दोनों कितने सुंदर हैं गुस्सा करते ही अजीब लगते हैं पूरी शादी शांति से निपट गयी | मेरे सुसराल की बिरादरी की पहली शादी थी जो उन क्लेशी लालों के होते हुए शान्ति से निपट गयी थी| परन्तु जब भी उन्हें गुस्सा आता मुझे आवाज लगाते मैं भाग कर आती भाग कर कहती आती हांजी जी चाचा जी वः कहते अरे तेरी साँस चढ़ रही हए आराम से आराम से

के द्वारा: Shobha Shobha

मीडिया मे छपे समाचार के अनुसार जेएनयू की एक उच्चस्तरीय समिति ने कथित रूप से राष्ट्रविरोधी नारेबाजी मामले में छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत चार अन्य को निकालने की सिफारिश की है. समिति ने पिछले महीने आतंकी अफजल गुरु को लेकर आयोजित कार्यक्रम में कथित भूमिका को लेकर कन्हैया कुमार, उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और दो अन्य को निकालने बात कही है. ये सभी छात्र विश्वविद्यालय नियम एवं अनुशासन के उल्लंघन के दोषी पाए गए थे. उच्चस्तरीय समिति ने एक महीने से अधिक समय की जांच के बाद पांच छात्रों को निकालने की सिफारिश की है. हालांकि इस संबंध में अंतिम फैसला कुलपति और प्राक्टर कार्यालय द्वारा किया जाएगा.

के द्वारा:

के द्वारा: nishamittal nishamittal

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन मिट जायेंगे मिटाने वाले, ये हिन्दुस्तान है - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन देश की पहली मिसाइल 'पृथ्वी' और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

आदरणीय डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आज से दो साल पहले इस प्रेम व्यथा ने मुझे काफी प्रभावित किया था ! पांडे जी ने जब ये व्यथा मुझे सुनाई थी तो मेरी आँखों में आंसू छलक आये थे ! उस समय भी संक्षेप में चर्चा मैंने की थी ! वास्तविक और निःस्वार्थ भाव वाली कुछ प्रेम कहानियों को लिखना शुरू किया तो इस पूरी वाकये को विस्तार से मंच पर रखने की इच्छा हुई ! वो प्रेमी जोड़े तो अब इस दुनिया में नहीं हैं, किन्तु उनकी यादें संजोकर रखने वाली हैं ! बसंत के मौसम में आज कल की घटिया राजनीति से मन उबा तो सोचा हमारे समाज की कुछ उन वास्तविक और आदर्शमय प्रेम कहानियों को मंच पर प्रस्तुत करूँ, जो मैंने देखी या फिर सुनी हैं ! मंच पर समय देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आपका लेख पढ़कर जगदीश गुप्त जी के अमर गीत - 'सच हम नहीं, सच तुम नहीं, सच है सतत संघर्ष ही' की पंक्तियाँ याद आ गईं - 'हमने रचा, आओ हमीं अब तोड़ दें इस प्यार को, यह क्या मिलन, मिलना वही जो मोड़ दे मझधार को, जो साथ कूलों के चले, जो ढाल पाते ही ढले, वह ज़िंदगी क्या ज़िंदगी जो सिर्फ़ पानी सी बही' । अनुकरणीय और स्तुत्य विचार हैं आपके सद्गुरु जी । अभिनंदन । सच्चा प्रेम तो वही है जो आगे बढ़ने की प्रेरणा दे और किसी लक्ष्य तक पहुँचाए । और प्यार दिल में सदा ही रहता है चाहे उसे शादी की मंज़िल नसीब न हो सके । सामाजिक रूप से किसी और से बंध जाने पर भी उसे विस्मृत नहीं किया जा सकता जो कभी प्राणप्रिय रहा हो क्योंकि जिन्हें हम भूलना चाहें, वो अकसर याद आते हैं ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: nishamittal nishamittal

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपने मेरी बात का समर्थन किया, इसके लिए हार्दिक आभार ! कृतिका का प्रसंग बहुत जटिल था ! अपने घर में उसने किसी की बात ही नहीं मानी ! किन्तु ईश्वर की कृपा से मेरा समझाना काम कर गया ! जो कभी मरने मारने पर उतारू थी, आज वो बहुत सुखी जिंदगी बसर कर रही है ! मेरी राय में कोई भी गुरु शरीर रूप से उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना कि उसका गुरुत्व ! उसे सदैव आगे आगे रहना चाहिए, क्योंकि शिष्यों और सांसरिकों के लिए वो बड़े काम का है ! आज हो उल्टा रहा है ! गुरुओं का शरीर आगे आगे चल रहा है और गुरुत्व या तो पीछे है या फिर गायब ? ब्लॉग पर आने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: sadguruji sadguruji

रोहित वेमुला की मौत के बाद राहुल गांधी और अरविन्द केजरीवाल समेत दलित राजनीति करने वाले तमाम नेता जो आज घड़ियाली आंसू बहाने और महज दलित वोटरों को लुभाने के लिए झूठी सहानुभूति दर्शाने के लिए हैंदराबाद भाग रहे हैं, उनसे भी जनता को यह सवाल पूछना चाहिए कि जब रोहित वेमुला और उसके साथी खुले आसमान के नीचे रहकर अपने निलंबन के विरुद्ध संघर्ष कर रहे थे, तब वे कहाँ थे? ये ड्रामेबाज नेता साथ दिए होते तो एक होनहार विज्ञान लेखक देश नहीं खोता. शिकायत और निराशा जनता को भाजपा से भी है. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की तरफ़ से कोई बयान नहीं आया. प्रधानमंत्री मोदी को इस मामले में एक बयान देना चाहिए था जिससे एक बड़ा संदेश जाता, लेकिन उन्होंने कोई बयान नहीं दिया. भाजपा के नेता भी यही कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री के बयान से उस छात्र के परिवार को और उस समुदाय को थोड़ी सांत्वना मिलती. सामंती प्रवृत्ति के संवेदनहीन और स्वार्थी लोग रोहित वेमुला की मौत के जिम्मेदार हैं. अम्बेडकर को आदर्श मानने वाले रोहित वेमुला ने व्यवस्था परिवर्तन करने का ख्वाब लिए हुए और उससे जूझते हुए हार मान ली, पर ये संघर्ष जारी रहेगा. आदरणीय सद्गुरु जी आपने अंत में अपनी राय रख दी. और यही इस घटना की उपलब्धि ...या जो कह लीजिये. आज प्रधान मंत्री ने रोहित को माँ भर्ती का लाल कहा. काश यह बात दो दिन पहले कही होती तो इतना बवाल जो अब हो रहा है नहीं होता. शायद! फिर भी अगर घटना घाटी है तो प्रतिफल तो निकलना ही है. हमारे हिन्दू समाज में जाति-प्रथा और भेदभाव हिंदिओं को एक नहीं होने देगी. अभी भी बहुत तरह के सुर उठ रहे हैं. फिर आप कैसे अपने हिन्दुओं का पूर्ण समर्थन ले पाएंगे. कभी आप रोटी सेंकते हैं/थे और अब जिनको मौका मिलेगा अपनी रोटी सेंकेगा ही यही तो राजनीति है. प्रधान मंत्री ने विकलांगो को नया दिव्यांग नाम दिया है. उन्हें सुविधाजनक उपलकरण भेंट किये है. यह अच्छी बात है, पर बहुत सारे लोग विकलांगों को भी हे दृष्टिकोण से देखते हैं. कहते हैं यह इनके पूर्व जन्म का ,किया हुआ पाप है तभी यह दंड मिला है. दलितों के साथ कोई हमदर्दी व्यक्त करता है तो कोई बेरहमी ...क्योंकि इन्होने भी पूर्व जन्म में कोई पाप किया था तभी तो दलित के घर पैदा हुए.... आपका लेख निष्पक्ष है इसलिए हम आपके इस प्रस्तुति पर अभिनंदन करते हैं. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

सद्गुरुजी, नमस्कार ! सारगर्भित और विस्तृत जानकारी के लिए धन्यवाद ! किसी बाड़े में धुँआ उठने का मतलब है की वहां आग है, जो धीरे धीरे विराट रूप ले सकती है ! मेरा मानना है की निस्वार्थ जांच होनी चाहिए, और गलत आचरण करने वाले नेता, राजनेता, विपक्षी नेता जो घड़ियाली आंसू बहाने के लिए आग को बुझाने की जगह और भड़काने की कोशिश करते हैं, उन्हें ऐसा सबक सिखाया जाना चाहिए की उनकी सात पीढ़ियां तक याद रखें ! जो भी टीचर विद्यार्थी यूनिवर्सिटी में असामाजिक तत्वों से जुड़े हैं, देश से गद्दारी डरते है, या आतंकवादियों से किसी भी तरह का समपर्क साधने की कोशिश करते हैं,उन्हें कटघरे में लाकर, जेल में दाल कर सजा दी जानी चाहिए और क़ानून व्यवस्था को सही करना होगा ! जागते रहो !

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: rajanidurgesh rajanidurgesh

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: deepak pande deepak pande

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर हरिस्मरण! आपका यह आलेख सचमुच क्रांतिकारी है. आपने विभिन्न स्रोतों से काफी साड़ी जानकारियां भी इकठ्ठा की है. यह एक शोध पूर्ण आलेख है. सवाल यही है की हम कब बदलेंगे? और हमारी धार्मिक, सामजिक, कानूनी मान्यता कब बदलेगी और सबसे अलग अहमारा सोच कब बदलेगा. आज भी महिलाएं विभिन्न प्रकार से प्रताड़ित की जा रही हैं. सडकों पर, घरों में और कार्यस्थलों पर भी. मंदिर मस्जिद प्रवेश निषेध तो तथाकथित पोंगा पंडित ही लगाते हैं. राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं को भी आगे बढकर कुरीतियों को दूर करने के उपाय करने चाहिए. बहरहाल आपके इस अनुपम लेख और आपको साप्ताहिक सम्मान की बहुत बहुत बधाई! ऐसे ही हम सबका ज्ञान वर्धन करते रहे.

के द्वारा: jlsingh jlsingh

सद्गुरुजी आपका लेख पढ़ा, अच्छा ही नहीं बहुत अच्छा लगा ! ये सवाल मेरे जहान में भी नहीं उत्तर रहे हैं की अरविन केजरीवाल क्या इतना असभ्य इंसान है की देश के वरिष्ठ पूजनीय राष्ट्रपति के बाद संविधानिक देश के सिरमौर के प्रति इतनी गंदी और असभ्य भाषा का इस्तेमाल करने लगा है ! उसके मुख्य सचिव के ऊपर भ्रष्टाचार आरोप लगे हैं और सीबीआई ने उसके कार्यालयों पर छापा मारा है फिर मुख्य मंत्री केजरीवाल क्यों भड़क गए, न्यायालय को अपना काम करने दो ! अगर वो भ्रष्ट है तो जेल जाएगा,नहीं छूट जाएगा ! आपको झूठ बोलने की क्यों जरूरत पड़ गयी की "मेरे आफिस पर सीबीआई ने ताला लगा दिया है" ! झूठ के पाँव नहीं होते, केजरीवाल जी, मोदी जी की इज्जत बढ़ रही है जनता की नज़रों में लेकिन आप निम्न स्तर पर चले गए हो इतनी गंदी भाषा का इस्तेमाल कर के !

के द्वारा: harirawat harirawat

रेल कंर्मचारियों द्वारा ली जाने वाली रिश्वत से यात्रियों को छुटकारा दिलाना भी एक बड़ी समस्या है। इस साल 24 जुलाई को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सिकंदरा राऊ रेलवे स्टेशन के निकट कासगंज-मथुरा पैसेंजर गाड़ी से मथुरा जा रहे राष्ट स्तरीय तलवारबाजी चैम्पियन ‘होशियार सिंह’ को रेलवे पुलिस के कर्मचारियों ने चलती ट्रेन से धक्का दे दिया था, जिसके परिणामस्वरूप उसकी मृत्यु हो गई थी। होशियार सिंह के छोटे भाई मुनीष कुमार ने आरोप लगाया था कि जब होशियार सिंह उनसे मिलने पहुंचा तो वहां तैनात जी.आर.पी. वालों ने उससे 200 रुपए रिश्वत मांगी। होशियार सिंह के इंकार करने पर उन्होंने उसे चलती गाड़ी सेे धक्का दे दिया।

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