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सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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sadguruji


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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

श्री सद्गुरु जी यह आश्रम नईं हैं क्लब हैं जो लोग यहां जाते हैं वह भी जानते हैं वह कहां जा रहे हैं जी रहें है औरतों के बारे में खास कर कह रहीं हूँ यदि वह घर से कहि जाना चाहे उन पर कई बंधन हैं यदि वह सतसंग का नाम लेती हैं कोई परेशानी नहीं हैं मेरी काम वाली ने मुझे श्राद्ध के दिनों में बहुत व्यस्त देखा उसने मुझे कहा गुरु धारण कर लो सब प्रपंचों से छुटकारा मिल जाता है कुछ करने की जरूरत नहीं हैं | यह तो कुछ बाबा है जिन्होंने धर्म के नाम पर पखण्ड शुरू कर दिया मुझे राजा राम मोहन राय याद हैं जो हमे चिता से उठा करj लाये थे दयानंद सरस्वती ने nya रास्ता दिखाया था विवेकानंद और कितने महापुरुष परन्तु उन्होंने कभी अपने को भगवान नही कहा था यह भगवान का नया फैशन चला है हम भी उतने ही दोषी हैं आध्यात्म को कुछ पाने से जोड़ लिया साईं बाबा के जाओ जो चढ़ाओगे दुगना मिलेगा यह दुनिया हैं यहाँ कोई किसी को क्या ठगेगा हम खुद ही ठगे जाना चाहते हैं नहीं तो अच्छे मार्ग दर्शकों की कमी नहीं है मेरे पति को लोग कई बार कहते हैं चलिए अमुक जगह बहुत अच्छे सन्यासी हैं बड़ा सुंदर प्रवचन हैं या साक्षात भगवान मिल जायेंगे वह कहते हैं अरे भाई मैं मथुरा का हूँ यह तो डाक्टर बन गया नही तो मैं भी पंडिताई कर रहा होता | सद्गुरु जी क्या आप नवभारत टाइम्स ब्लॉग मे लिखते हैं आप बहुत अच्छा लिखते है अत : वहां भी लिखिए दैनिक जागरण की तरह ब्लॉग बनता है डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीया डॉ शोभा जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! काफी दिनों के बाद मंच पर उपस्थित होकर आपने मंच का सूनापन दूर किया है ! मंच पर पुनः वैचारिक रूप से उपस्थित होने के लिए आपको अतिशय धन्यवाद ! कई ब्लॉगों पर किये गए आपके कमेंट से पता चला कि आपका टेकीफोन ख़राब था ! यही परेशानी मेरे यहाँ थी ! मैंने बीएसएनएल का ब्रॉडबैंड हटवाकर रिलायंस का थ्री जी मोडम ले लिया,जिसकी स्पीड और कार्यप्रणाली बहुत अच्छी है ! प्रस्तुत कविता वास्तव में ही कोई कविता न होकर मेरे दिल की आवाज है ! आपने सही कहा है कि काला धन आना बहुत ही मुश्किल है ! उसका पुरानी सरकारों ने पहले ही इंतजाम कर लिया हैं ! बोफोर्स के समान यह चुनाव में भुनाने का सिक्का बनेगा ! सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया के लिए तथा मंच पर अपनी खुशनुमा बौद्धिक उपस्थिति देने के लिए अतिशय हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सुधीर शर्मा जी ! ब्लॉग पर आपका बहुत बहुत अभिनन्दन और स्वागत है ! आपने सही कहा है कि लोकसभा चुनाव के दौरान जनता ने ये दृढ निश्चय कर लिया था कि इस बार देश को नरेंद्र मोदी जी के रूप में एक बहुत शक्तिशाली प्रधानमंत्री देना है ! जनता ने वैसा ही किया ! आपकी ये बात भी सही है कि मोदी जी के 'स्वच्छता अभियान' को जनता का इतना ज्यादा समर्थन और सहयोग मिल रहा है कि शायद महात्मा गांधी के 'स्वच्छता अभियान' को भी इतना जनसमर्थन और जनसहयोग नहीं मिला रहा होगा ! लेख को पसंद करने के लिए धन्यवाद ! भविष्य में भी आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी ! यदि आप हिंदी में अपनी प्रतिक्रिया दें तो ज्यादा अच्छा रहेगा ! हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभ पटेल की तुलना महान रणनीतिकार चाणक्य से करते हुए कहा कि शताब्दियों पहले चाणक्य ने कई राज्यों को जोड़ा था.चाणक्य के बाद यह काम सरदार पटेल ने किया.मोदी जी ने कहा कि अनेकता में एकता हमारी संस्कृति और विरासत है.उन्होंने कहा कि जिस एकता के लिए सरदार पटेल ने अपना पूरा जीवन लगा दिया उसके ही जन्मदिन के दिन पर देश ने उस दंश को झेला जिसमें हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया.प्रधानमंत्री जी ने कहा कि यह विडंबना ही है कि मौजूदा दौर में हमने इस महान लौह पुरुष और उनके काम को भुला दिया. महान दूरदर्शी सरदार पटेल को जो सम्मान मिलना चाहिए था , वो अब तक नहीं मिल पाया था ! असल में कांग्रेस ने अपने इतर किसी को देखा ही नहीं कभी ! सार्थक पोस्ट श्री सद गुरु जी ! http://yogi-saraswat.blogspot.in/

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: DEEPTI SAXENA DEEPTI SAXENA

छठ पर्व के समय ये सब रेलवे की असफलता ही मानी जाएगी.फ़िलहाल रेलमंत्री और प्रधानमंत्री जी त्योहार के मौसम में बिहार जाने वाले यात्रियों को विशेष यात्रा सुविधा का लाभ देकर अच्छे दिनों का संकेत देने में असफल ही साबित हुए हैं.शायद अगले साल से वो छठ के समय बिहार जाने वाले यात्रियों को विशेष यात्रा सुविधा मुहैया कराएँगे,ऐसी उम्मीद करनी चाहिए ९० यात्रयों के बैठने की जगह में ७०० यात्री ठूंस कर गए टाटानगर स्टेसन से साउथ बिहार एक्सप्रेस में ..यार रिपोर्ट जमशेदपुर के दैनिक जागरण में छपी. आरक्षित डिब्बे भी जेनरल डब्बे जैसे ... रेलवे को तो मुनाफा हो रहा है न! इस बार बिहार को रेल मंत्रालय न मिला... हर साल एक्स्ट्रा कोच और एक्स्ट्रा गाड़ियां चलई जाती थी. इस साल मोदी जी नाराज हैं बिहारियों से शायद... फिर भी सूर्य भगवन सब कृपा बनाये रक्खें यही प्रार्थना है.. सादर सद्गुरु जी. इस बार आपने बहुत ही सुन्दर आलेख लिखा... मैं हर साल लिखता था. इस बार नहीं लिख सका हूँ..

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: pratima pratima

आदरणीय चंद्रामृत जी ! ब्लॉग पर आपका स्वागत है ! आपने सही कहा है कि 'नारी का सेक्स के विषय पर बात करना गलत माना जाता है ! फीमेल लेखिका का सेक्स पर लिखने पर उसे बुद्धिजीवियों दवारा गाली दी जाती है !' मैंने उस स्त्री से बातचीत के कुछ महत्वपूर्ण अंश ही मंच पर साँझा किये हैं ! मुझे लगा कि पूरी बातचीत प्रकाशित करना शायद बहुत से लोंगो को अच्छा न लगे ! इंसान की सबसे बड़ी कमी यही है कि वो बाहरी रूप से अच्छा बने रहने के लिए जीवनभर सत्य से कोसो दूर भागता रहता है,जबकि आंतरिक रूप से चोरी छिपे प्रकृति के सारे रसास्वादन करता रहता है ! श्रीमद भगवद्गीता और भगवान कृष्ण की नजर में ये भी एक तरह की चोरी ही है ! सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिए आपका अतिशय हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी मैं मोदी जी की बहुत फैन हु न जाने मुझे क्यों लगता है अब सब कुछ अच्छा होगा मोदी जी की के किस अभियान को सराहूँ वह हर प्रकार से जनता को अपने से जोड़ते हैं आपने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा है एक अविवाहित व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ जोर दार तरीके से लड़ता है जय ललिता जी ,बहन माया वती जी को आप भूल गये वोट बैंक की खातिर ममताजी के बंगाल में क्या हो रहा है पूरी आतंकवादियों को बम सप्लाई करने की फैक्ट्री चल रहीं हैं हाँ नवीन पटनायक जी ने विवाह नहीं किया उनके खुद के भ्रष्टाचार की कोइ बात अभी नहीं उठी है मोदी जी इंसान ही बहुत अच्छे हैं उन्होंने देश के दुःख को महसूस किया हैं उनकी कोशिश है आपका लेख सदा अच्छा होता है अपने में सम्पूर्ण डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

मोदी जी के विषय में इतना कुछ पढ़ ने के बाद उनकी जीवन यात्रा का रहस्य भी ज्ञात होता है आपके लेख से !आदरणीय सद्गुरुजी !सरल और सुन्दर शैली में लिखा गया ज्ञान वर्धक लेख एक कौतुहल पैदा करता है पाठक में !मोदी जी के प्रति!!सादर !! आदरणीया डॉ रंजना गुप्ता जी ! सुप्रभात ! काफी दिनों के अध्य्यन के बाद कुछ कहने में सफलता मिली है ! मेरी बेटी को उनमे बहुत दिलचस्पी रहती है ! वो उनके बारे में अधिक से अधिक जानने को उत्सुक रहती है ! शिक्षाप्रद और देशभक्ति से परिपूर्ण कुछ गीत उसे बहुत पसंद हैं ! 'नन्हा मुन्ना राही हूँ,देश का सिपाही हूँ..'जब मन में आता है,तब गा लेती है ! वो ये जानने को बहुत उत्सुक रहती है कि मई क्या लिख रहा हूँ और कब क्या कर रहा हूँ ! मेरे साथ यज्ञ और सत्संग में बैठती है और सवालों के ढेर हमेशा मेरे सामने रखे रहती है ! उसे अच्छे ढंग से शिक्षित और संस्कारित करने के लिए घर में सभी लोग अपने अपने ढंग से कोशिश करते है ! अपनी सार्थक प्रतिक्रिया द्वारा पोस्ट को सार्थकता प्रदान करने के लिए आपका बहुत बहुत हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय एल.एस. बिष्ट् जी ! ब्लॉग पर आपका स्वागत है ! काफी अध्ययन करने के बाद ये लेख मैंने लिखा है ! मेरी बेटी की मोदी जी के प्रति जिज्ञासा ने मुझे ये लेख लिखने के लिए प्रेरित किया ! प्रतिदिन जहाँ एक ओर मोदी समर्थकों से मुलाकात होती है तो वहीँ दूसरी तरफ मोदी विरोधियों से भी भेंट होती है ! मोदीजी से मेरा कोई भी सांसारिक लेन देन नहीं है ! जैसे सचिन का मैं समर्थक रहा वैसे ही मोदीजी का भी समर्थक हूँ ! मोदीजी से भावनात्मक लगाव उन्हें वोट देने के कारण और उनकी हमारे राष्ट्र और हमारी सभ्यता-संस्कृति के प्रति उनके गहरे लगाव के कारण है ! आपने सही कहा है कि समय के साथ वह एक बेहतर प्रधानमंत्री साबित होंगे ! मेरे विचार से हजारों मायने में मोदीजी ऐतिहासिक भी साबित होंगे ! सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! दिन मंगलमय हो ! मेरे स्वर्गीय पिताजी के सेना में होने के कारण तथा उनके १९६२,१९६५ और १९७१ के युद्ध में भाग लेने के कारण मुझे अपने देश से बहुत ज्यादा लगाव है ! जब भी देश पर कोई संकट आता है,अपना सर्वोत्तम उत्सर्ग करने की भावना मन में सवाथ ही पैदा हो जाती है ! कैफ़ी आज़मी साहब के लिखे गीत-'कर चले हम फ़िदा..',की कुछ पंक्तियाँ मेरे खून में देशप्रेम की उबाल ला देती हैं-'ज़िंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर जान देने की रुत रोज़ आती नहीं हस्न और इश्क दोनों को रुस्वा करे वो जवानी जो खूँ में नहाती नहीं ! मैं कोशिश करता हूँ कि मेरे लेख हर दृष्टि से सम्पूर्ण रहे,परन्तु हर लेख में ऐसा नहीं हो पाता है ! अपनी सार्थक प्रतिक्रिया से पोस्ट को सार्थकता प्रदान करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! सुप्रभात ! आपने सही कहा है कि करवाचौथ का दिन वीमेन'डे है ! पति के लिए व्रत रखकर वो बहुत खुश होती हैं ! मधुमेह होते हुए भी आपने व्रत रखा,ये बहुत बड़ी बात है ! आपको और डॉ साहब दोनों को बधाई ! आपलोग स्वस्थ और दीर्घायु रहें,समाज की सेवा में लगे रहें,ईश्वर से बस यही प्रार्थना है ! कल मेरी श्रीमतीजी ने भी व्रत रखा हुआ था.मैंने उनका साथ दिया और जो उन्होंने कहा,वो मैंने किया ! हालाँकि मैं कभी उपवास नहीं रखता हूँ ! मेरे विचार से व्रत व उपवास का अर्थ बस यही है कि ईश्वर को हमेशा याद करते हुए जो कुछ भी आपसे अच्छा हो सकता है,वो अपने परिवार और समाज के लिए करें ! मैं प्रकृति के साथ चलना पसंद करता हूँ,जैसे भूख लगी तो खाना खा लिया और प्यास लगी तो पानी पी लिया ! क्रोध से बचना और कभी आ गया तो छोटे बच्चों के साथ खेलना ! इस मामले में मैं अघोरी हूँ ! आप इतनी पढ़ीलिखी और समाज में बेहद सम्मानित होते हुए भी व्रत रहती हैं ! आपके भीतर का अच्छा संस्कार और पति के प्रति गहरा भावनात्मक लगाव आपको व्रत रखने के लिए प्रेरित करता है ! व्रत का हिमायती नहीं होते हुए भी आपके भावनात्मक जज्बे को सलाम ! आपने सही कहा है कि इस देवभूमि की महिलाएं विचित्र हैं ! मुझे लगता है कि अधिकतर महिलाओं को पति से ज्यादा आसपड़ोस और समाज की फिक्र होती है,जैसे कि यदि व्रत नहीं रहूंगी तो रिश्तेदार और आसपड़ोस वाले क्या कहेंगे ! दूसरी बात मैंने ये महसूस की है कि व्रत रहने वालों की परिवार और समाज में इज्जत बहुत होती है ! व्रत-उपवास और त्याग की भावना भारतीय संस्कृति का सबसे जयादा गहरा और आमजनता के बीच बेहद लोकप्रिय संस्कार है ! इसके जेड इतनी गहरी हैं कि आनेवाली पीढ़ियां भी इसे अपनाएंगी ! हाँ..थोड़ा सा परिवर्तन ये हो जायेगा कि व्रत-उपवास और हर त्यौहार का दिखावा और बाजारीकरण होने के साथ साथ ये भी हो जायेगा कि पति-पत्नी दोनों ही व्रत रहने लगेंगे ! आजकल महिलाये अपने को पुरुष से किसी भी मामले में कमतर नहीं समझतीं हैं और वो चाहती हैं कि जो वो अपने पति के लिए करें,उसके बदले में उसका पति भी उनके लिए वही सब करें ! यही समानता और बराबरी करने की भावना आज समाज में पारिवारिक रिश्तों को भी तोड़ रही है ! आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी,विस्तृत और विचारणीय प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार और मधुमेह जैसा कष्टप्रद रोग सहकर भी करवाचौथ का व्रत रखने की पुनः बधाई !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉ रंजना जी ! दिन मंगलमय हो ! करवाचौथ पर्व की शुभकामनाएँ ! त्वरित टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार ! आप ने सही कहा है कि स्त्री पत्नी बन कर रात- दिन पति की लम्बी आयु की कामना करती है ! वह सदैव यही चाहती है कि वह सदा सुहागिन ही रहे कभी उसके पति की मृत्यु उससे पहले न हो ! और इसी कामना को फलीभूत करने के लिए वह करवा चौथ का व्रत रखती है ! आपकी ये बात भी सही है कि पुरुष सदा से ही स्त्री को छलता आया है ! आज सुबह छह बजे जब छत से टहलकर आया तो इस पोस्ट को लिखने बैठ गया ! एक बार तो मुझे लगा कि छतपर जो कुछ मैंने देखा है,उसमे विशेष बात क्या है ! परन्तु फिर मैंने सोचा कि लिखा जाये और मंच पर ब्लॉगर साथियों और कृपालु पाठकों के समक्ष प्रस्तुत तो किया जाये ! सभी को करवाचौथ की शुभकामनाएँ !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर आपका सादर अभिनन्दन है ! आपकी प्रतिक्रिया आपके निर्मल ह्रदय का उद्गार है ! आपने अपनी सार्थक प्रतिक्रिया से इस आलेख को जो सार्थकता प्रदान की है,उसके लिए अतिशय आभार ! आप स्वयं एक बुद्धिजीवी हैं और समसामयिक तथा राजनीतिक लेखों पर आपकी बहुत गहरी पकड़ है ! आपके लेखों का हम सभी को इंतजार रहता है ! आपने बिल्कुल सही कहा है कि "हालात यह हो गए है इतनी प्राचीन कांग्रेस का इतिहास कभी - कभी ऐसा लगता है राजीब गांधी , सोनिया गांधी , राहुल , गांधी , प्रियंका गांधी .राबर्ट वडेरा गांधी और वडेरा की संतानों में सीमित हो कर रह जाएगा ! कांग्रेस में एक से एक विद्वान थे राजनेता थे सब किनारे लगा दिए गए नेहरू जी जो महान स्टेट्स मैन देश और विदेशों में माननीय थे इंदिरा जी महान कर्मठ नेता उन्हें मोदी जी उठा रहे हैं !" आप ठीक कहा है कि "हम सबलोग देश की खुशहाली और उन्नति चाहते हैं !" इतनी सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी मोदी जी के इस अभियान का इतना असर हुआ लोगों ने अपने आस पास की सफाई करवानी शुरू कर दी जरूरत बस अब उस कूड़े के उठवाने की है जो सफाई के बाद इकट्ठा हुआ है आपने बहुत ही सुंदर नॉलेजिएबल लेख लिखा है अब लोगो को पता चल l रहा है इस देश में और भी अनेक प्रधान मंत्री हुए है हालात यह हो गए है इतनी प्राचीन कांग्रेस का इतिहास कभी - कभी ऐसा लगता है राजीब गांधी , सोनिया गांधी , राहुल , गांधी , प्रियंका गांधी .राबर्ट वडेरा गांधी और वडेरा की संतानों में सीमित हो कर रह जाएगा | कांग्रेस में एक से एक विद्वान थे राजनेता थे सब किनारे लगा दिए गए नेहरू जी जो महान स्टेट्स मैन देश और विदेशों में माननीय थे इंदिरा जी महान कर्मठ नेता उन्हें मोदी जी उठा रहे हैं हम जनता केवल यह चाहती है देश में खुशहाली रहे देश का नाम ऊचा हो सद्गुरु जी लेखन हम सब की आवाज है जिसे हम अपने पाठकों के लिए उठाते हैं आपके लेखों को पसंद करने वाले अनगिनत हैं मैने इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया है ऐसे ही लिखते रहिये आपकी लेखनी में सरस्वती का वास है मोदी जी के बाद देश में एक उमंग की लहर उठी है ऐसा लगता है अब कुछ अच्छा होने वाला है डॉ शोभा भारद्वाज

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय एल.एस. बिष्ट् जी ! सादर अभिनन्दन ! इस मंच पर सभी ब्लॉगर मित्र अपनी अपनी शैली में लिखते हैं ! यही इस अनुपम मंच की खूबसूरती है ! ऐसा लगता है मानो ये मंच एक गुलदस्ता हो और विभिन्न तरह की रचनायें तरह तरह के सुंगंध देते सुन्दर पुष्प हों ! मैंने कोशिश की है कि कुछ अलग ढंग से लिखा जाये और अधिक से अधिक पाठकों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाये ! अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के द्वारा मेरे इस प्रयास को सार्थकता प्रदान करने के लिए मैं आप सभी ब्लॉगर मित्रों का ह्रदय से आभारी हूँ ! मेरे ब्लॉग पर आकर मेरी रचनाओं को पढ़ने और सराहने के लिए अपने सभी कृपालु पाठकों का भी अतिशय आभारी हूँ ! आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉक्टर शोभाजी ! हार्दिक अभिनन्दन ! लेख पर इतनी गहराई से विचार करने के लिए धन्यवाद ! आपने बिलकुल सही कहा है कि 'अपने जीवन के अंतिम दिनों में अपने देश की हालत देख कर विवेकानन्द जी बहुत विचलित थे वह देश की आजादी और विकास दोनों चाहते थे !'मोदी जी का आजाद भारत में जन्म लेना और स्वामी विवेकानंद के पदचिन्हो पर चलते हुए राजनीति में आना तथा देश के विकास के लिए दृढ संकल्पित होकर प्रयास करना ये सोचने के लिए प्रेरित करता है कि स्वामी विवेकानंद मोदीजी के स्वरुप में वैचारिक अथवा आत्मिक रूप से पुनर्जन्म ले चुके हैं.जीवात्मा जिस बात का संकल्प ले लेती है,उस यदि इस जन्म में न पूरा कर पाई तो अगले जन्म में उसे पूरा करने का फिर से प्रयास करती है ! जो भी हो,परन्तु भारत के लिए तो ये अच्छा ही है ! ऐसी विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिए आपका अतिशय आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सुप्रभात ! नवरात्रि का ये शुभ दिन मंगलमय हो ! जी..मैंने बहुत गहराई से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विचार सुनने-पढ़ने के बाद ही लिखना शुरू किया ! आपने मेरे प्रयास को पसंद किया,इसके लिए हार्दिक आभार ! जब मेरे ब्लॉग का स्पेस नहीं बढ़ा था,तब आपने कहा था कि 'ये मंच दैनिक जागरण की मार्केटिंग का एक हिस्सा है ! आप दैनिक जागरण के लिए नहीं बल्कि अपने पाठकों के लिए लिखते हैं !' आपकी बात पर मैंने विचार किया और उस दिन से अपने पाठकों पर ध्यान देना शुरू किया ! आपके ब्लॉग पर भी लिखा ! ये आपकी सहृदयता थी ! अब दैनिक जागरण और प्रतिक्रिया पर ध्यान न देते हुए बस अपने पाठकों के लिए लिख रहा हूँ ! अनेक लेखों पर हजारों कृपालु पाठकों की दृष्टि पड़ते देखकर बहुत हैरान और अभिभूत हूँ ! इस अनुपम मंच पर इतने पाठक होंगे,ये मैंने नहीं सोचा था ! इस ओर ध्यान दिलाने के लिए मैं आपका ह्रदय से आभारी हूँ !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉक्टर रंजना गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! अपनी प्रतिक्रिया में आपने सही कहा है कि 'जब तक हर व्यक्ति में खोंट न निकाली जाए तब तक कुछ लोगो का खाना भी हजम नही होता !'सबसे ज्यादा आश्चर्य मुझे देश के विपक्षी दलों पर हो रहा है,जो मोदी की आलोचना कर रहे हैं ! मोदी जी से नफरत तो समझ में आती है,क्योंकि उनकी ही वजह से आज वो सत्ता से बाहर हैं ! परन्तु देश से नफरत समझ में नहीं आती है ! मुझे तो संदेह होता है कि इन लोंगो को देश से प्रेम भी है या नहीं ? हमारे देश की पटरी पर आती अर्थव्यवस्था डूब जाये,सीमा पर पीछे हटता चीन हमपर हमला कर दे,नियंत्रित होते आतंकवादी अपने नापाक इरादों में कामयाब हो खूनखराबा करें,क्या यही सब वो लोग चाहते हैं ? उन्हें शर्म आनी चाहिए ! मोदीभक्त न सही कम से कम देशभक्त तो बनें ! प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय राजेश कुमार श्रीवास्तव जी ! ब्लॉग पर आपका अभिनन्दन है ! मैं जल्दबाजी में नहीं हूँ ! दस साल बाद भी इस मंच पर दृढ निश्चय के साथ मैं वही कहूँगा,जो आज कह रहा हूँ ! मैं आपके और आदरणीया यमुना पाठक जी के विचारों से सहमत नहीं हूँ कि मैं और मेरा कोई विचारणीय मुद्दा है ! ये सब महज बाल की खाल निकालने वाली बात है और संकीर्ण मानसिकता है ! क्या हम सबलोग मैं और मेरा का प्रयोग नहीं करते हैं ? हमें इन फिजूल की बातों पर ध्यान न देकर प्रधानमंत्री जी की विदेशों में आर्थिक,राजनीतिक और कूटनीतिक क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक सफलता पर विचार करना चाहिए ! इतनी गौरवान्वित उपलब्द्धि भारत को आजतक नहीं मिली थी ! इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है ? प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय आम आदमी जी ! ब्लॉग पर आपका स्वागत है ! आपने अपना नाम गुप्त रखते हुए 'आम आदमी' के नाम से ईमेल बनाकर ये प्रतिक्रिया भेजी है ! आपने पूरे लेख को ध्यान से नहीं पढ़ा है ! ये पूरा लेख और ब्लागरों के कमेंट सब डॉक्टर नाईक के लिए एक चुनौती है ! इसमें सारे साबुत और तर्क दिए गए हैं ! डॉक्टर जाकिर नाईक इस मंच पर ब्लॉग बनाकर अथवा कमेंट देकर जबाब दे सकते हैं ! मैंने चुनौती भी उन्हें इसी मंच पर दिया है ! वो इस मंच पर वैचारिक रूप से आकर बहस कर सकते हैं ! बहस से सुधार या मन में शांति नहीं आती है ! बेहतर हो कि आप अपने को और अपनी विचारधारा को बदलें ! डॉक्टर जाकिर नाईक इस समय देश से बाहर जाकर पीस टीवी चला रहे हैं ! इसीलिए जबाब देने का ये मंच ही एकमात्र माध्यम है ! ब्लॉग पर आने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

कभी कभी कुपित होकर शिक्षा देने के लिए आप जलप्रलय,सूखा,भूकम्प,बीमारी आदि कष्ट भी देती हैं,ताकि प्रकृति से छेड़छाड़ कर रहा मनुष्य सचेत हो जाये.आप बहुत दयालु हैं.आप की करुणा सबपर बरसती है.आप को माँ मानकर श्रद्धा रखनेवालों भक्तों पर आप मोक्ष रूपी अमृत की वर्षा भी करती हैं.हे सभी दुखी जनों के दुःख हरनेवाली माँ,हम सब भारतवासी आपकी आरती उतारते हैं. आप हमसबपर कृपा करें.हम सबके भीतर ज्ञानशक्ति,इच्छाशक्ति और क्रियाशक्ति बढ़ाये,ताकि धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष आदि चारो पुरुषार्थों को हम अपने जीवन में सफलतापूर्वक सिद्ध कर सकें.माँ दुर्गा जी की यानि प्रकृति की कृपा आप सबपर हो.आप सबकी मनोकामनाएं पूर्ण हों.आप सब अपने जीवन में स्वस्थ रहें और सृजनात्मक कार्यों में सदैव लीन रहें. हमारी भी माँ से यही प्रार्थना है ... अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली | तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती ||

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय सद्गुरू जी जाकिर साहब में अपना ही कॉम्प्लैक्स है अरबी और पर्शियन किताबों मे लिखा है कि हिन्द में दबे लोग ईमान लाये जिससे वह अपर कास्ट के बराबर हो सके इसके लिए वहां एक विशेष शब्द का प्रयोग किया गया है वह मैं नहीं लिखूंगी यह वहां के समाज में इस तरह कि बाते कर बताने कि कोशिश करते है हम सच्चे मुस्लिम हैं अभी तक अरब अजम का फर्क खत्म नही हुआ यह हमारे बेचारे अपने ही अस्तित्व कि लड़ाई लड़ते हैंविदेशों में समझाने कि कोशिश करते है हम हिन्दू काफ़िर है वह बड़े हैरानः होते थे अरे यह बहुत मजबूत कौम है जिसे तुम बदल नहीं पाये हमारा धर्म इतने थपेड़े के बाद भी वही का वहीं है उल्टा इन पर आज अपने को प्रूफ करना पड़ता हैं हम हिन्द के नहीं है हम तो बाहर से आये हैं हम पीछे से आसमानी हैं हम अक्सर मजाक करते थे जैसे किसी का कुछ देना है जल्दी ले लो भाई अगर में मर गई तुम्हें कैसे बापिस करूंगी तुम तो जन्नत नशीन हो गी मैं दोजख जाउगी वह लोग हँसते थे | कहते थे तुम बहुत कहवी लोग हो शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! आपका अनुभव बहुत अच्छा लगा ! वो बहुत विचारणीय भी है ! उनके सवाल और आपलोगो के बुद्धिमत्तापूर्ण हाजिर जबाब बेहद लाजबाब है ! आपने सही कहा है कि विश्व के किसी भी मुस्लिम देश मैं चले जाये कोइ वैर नही रखता,परन्तु हमारे देश के और पाकिस्तान के मुस्लिम अपने को कुछ ज्यादा ही धर्म का पैरोकार समझते हैं,जबकि इनके पूर्वज हिन्दू थे ! अपनी पठनीय और विचारणीय प्रतिक्रिया से पोस्ट को सार्थकता प्रदान करने के लिए ह्रदय से आभार ! आपके विदेश जाने के अनुभव में सक्रीय भागीदार होने के कारण इस प्रतिक्रिया का श्रेय डॉक्टर साहब को भी है ! मेरा धन्यवाद उन तक जरूर पहुंचा दीजियेगा ! मेरी तरफ से आप लोंगो के लिए स्वस्थ और प्रसन्न रहने की बहुत बहुत शुभकामनाएं !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी हम परिवार सहित दस वर्ष इस्लामिक मुल्क में रहे हैं मेरे पति वहा डॉ थे उन्होंने उस मुल्क मैं वार चल रही थी उन्होंने बहुत काम किया उन्हें वहाँ के लोग हाथ चूम कर कहते थे तुम मुसलमान हो वह सदा कहते मैं हिन्दू हु तुम्हारे अनुसार काफिर वह कहते थे जो इंसान अपने ईमान पर अडिग है वह मुसलमान हैं इस हिसाब से वहुत कम ही मुसलमान हैं जाकिर साहब जो करते हैं वह हमें सामने रख कर बोलते हैं वह इस्लाम या मुसलमान होने का मतलब ही नहीं समझते वह आपके किसी भी सवाल का जबाब देने के योग्य ही नहीं है उनका जिहाद तो हम हैं हमसे लोग पूछते थे आपका दीन क्या हैं हम कहते वही है जो १४०० साल पहले तुम्हारा था हम आतिश परस्त (हम यज्ञ हवन करते हैं ) वः पूछते तुम गोउ परस्त हो हम कहते थे हाँ तुम एक ही बार मार कर खा जाते हो हम वर्षो दूध पीते है और कई बछड़े होते है साथ ही यह भी कहते थे जिस दिन खुदा चाहेगा सबको मुसलमान कर देगा तुम्हें कष्ट उठाने नहीं देगा अरे जानवर खुदा को नही मानता उसके भी खाने का इंतजाम कुदरत करती है | यह लोग ईरान के खुर्द सुन्नी मुसलमान लोग थे ओर हमारे तर्क को सुनते थे यही नही हमसे कहते आप अपने मुर्दे जलाते हो क्या कबाब बनाते हो हम कहते थे खुदा की दी देह हैं हम तुरंत वापस कर देते हैं तू कुछ वर्ष जानवरों के खाने के बाद मिट्टी होने के बाद देते हो |विश्व के किसी भी मुस्लिम देश मैं चले जाये कोइ वैर नही रखता पर हमारे और पाकिस्तानी मुस्लिम अपने को ज्यादा धर्म का पैरोकार समझाते हैं क्योकि mostly the are convert इनके खुद के मन में यह रहता है हम तुमसे ज्यादा उच्च हैं डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय डॉ रंजना गुप्ता जी ! डॉ जाकिर नाईक पर ये मेरा पहला लेख है ! उनकी सभी बेतुकी बातों को इसमें शामिल करना संभव नहीं था ! यदि आवश्यकता महसूस हुई तो दूसरा लेख भी लिखूंगा ! आदरणीया सरिता सिन्हा जी ने कुछ दिन पहले मेरे ब्लॉग पर अपने एक कमेन्ट में कहा था कि मंच पर लिखने के नाम पर महज थोथा आदर्शवाद परोसा जा रहा है,जिससे वो ऊब गई हैं ! हालाँकि अपने लेखन में मैंने हमेशा समाज में घटी सत्य घटनाओं को ही लिखने के लिए चुना है ! फिर भी उनकी बात पर विचार करते हुए मुझे लगा कि अब मुझे कुछ ऐसे ज्वलंत मुद्दों पर लेख लिखना चाहिए,जिसपर कोई कुछ बोलना नहीं चाहता है ! शायद सेकुलर कहलाना लोग ज्यादा पसंद करते हैं ! भले ही कोई हमारी धर्म और संस्कृति की जड़ों पर वार करता रहे ! यथार्थपूर्ण और विचारणीय प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए ह्रदय से आभार !!

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉक्टर रंजना जी ! आपने जबाब दिया ! आपका बहुत बहुत स्वागत और धन्यवाद ! मेरे पैर की चोट अब काफी हद तक ठीक हो गई है ! पोस्ट की सराहना के लिए ह्रदय से आभार ! आप शीघ्र से शीघ्र अपनी कोई नयी रचना प्रकाशित करें !आपके पाठक इंतजार कर रहे होंगे ! आप निराश न हों और लिखतीं रहें ! आदरणीया डॉक्टर शोभा जी की एक बात मुझे बहुत सही लगी कि ये मंच दैनिक जागरण की मार्केटिंग का एक हिस्सा मात्र है ! हमें ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि हम दैनिक जागरण के लिए नहीं,बल्कि इस मंच पर अपने पाठकों के लिए लिख रहे हैं ! इस बार हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में कोई आयोजन नहीं हुआ ! मंच के प्रति जागरण परिवार की उदासीनता और उपेक्षा निश्चित रूप से चिंता का विषय है ! इस ओर उन्हें ही ध्यान देना होगा !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर आपका स्वागत है ! बहुत विचारणीय प्रतिक्रिया आपने व्यक्त की है ! महानगरों में ऐसा ही हो रहा है ! माँ बाप का कहना नहीं मानने वाले बच्चे जब एक दिन स्वयं माँ बाप बनते हैं,तब उन्हें माँ बाप की तकलीफों का अनुभव होता है ! एक बूढ़ा बाप धुप में काम करते अपने बेटे पर चिल्ला रहा था,परन्तु बेटा अपने बूढ़े पिता की बात पर ध्यान नहीं दे रहा था ! तब बूढ़े पिता ने अपने सालभर के पोते को ले जाकर धूप में रख दिया ! बच्चा रोने लगा ! उसका पिता दौड़कर ओपन बेटे को गोद में उठा लिया और अपने बूढ़े बाप पर गुस्से में आ बरसने लगा ! बूढ़ा व्यक्ति व्यंग्य से मुस्कुराते हुए बोला-अब तुझे एक बाप के दर्द का एहसास हुआ ! विस्तृत और बहुत विचारणीय प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए आपका बहुत बहुत आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी हमारे देश का एक खास वर्ग माता पिता के लिए उदासीन हो गया है उन्हें माँ बाप जरूरत का रिश्ता लगता है जन्म देने पर भी उनका तर्क होता है हमारा बीजारोपण जब हो गया हमें दुनिया में लाना आपकी मजबूरी थी परन्तु जब वह अपने बच्चों को पालते हैं तब वह इतने भावुक होते हैं की हम इन्हें दुनिया में कोई कमी रहने नहीं देगे तब साथ ही कहते हैं हमारे माँ बाप ने हमें अच्छी तरह नहीं पाला वह भूल जाते हैं अपनी जरूरतें भी उन्होंने उन पर कुर्बान कर दी थी आज भी महानगरों से दूर रहने वाले के लिए उसके माँ बाप उसके लिए सब कुछ हैं में जिस सर्कल मैं रहती हूँ मुझे यही सुनने देखने को मिलता है बहुत दुःख होता है डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

सद्गुरु जी नमस्कार .....माँ -बाप तो जीवन की नीव होते हैं, जीने की वजह होते हैं पता नही लोग कैसे उन्हें ही त्याग कर ख़ुशी से रह लेते हैं ...शायद ऐसे लोग इंसान नही होते होंगे ....बहुत अच्छा लेख ..."माँ आपने खाना खा लिया.ये पूछकर मन को बहुत ख़ुशी होती है.परन्तु जब मेरी पत्नी से उनकी कहा सुनी हो जाती है और वो नाराज होकर खाना नहीं खाती हैं तो मैं उन्हें लाख कोशिश करके भी मना नहीं पाता हूँ.अपनी बेबशी पर आँखों में आंसू आ जाते हैं.उस समय मैं अकेले में बैठकर देरतक यही सोचता हूँ कि काश मैं माँ होता तो माँ को आसानी से रुठने से मना लेता.मुझे उस वक्त बेहद अफ़सोस होता है कि मैं माँ नहीं हूँ.." .....ये विचार अक्सर मन में आ जाते हैं लेकिन माँ को मनाना आसान काम नही है ...माँ अपनी बात आसानी से मनवा लेती है लेकिन बच्चो की मानने में आनाकानी करती है ............

के द्वारा: Sonam Saini Sonam Saini

आदरणीय स्वामी जी,आप के लेख में अध्यात्म और सामाजिकता का बहुत दिव्य समावेश है ,नारी ,गृह लक्ष्मी है और सदाचारी नारी तो साक्षात कुलदेवी है,आप के संस्मरण को पढ़ते वक्त ,मुझे जय शंकर प्रसाद की वो पंक्तियाँ -" अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी,आँचल में है दूध और आँखों में पानी "ही याद आती रहीं|अवश्य ही नारी के मायके के लोगों को भी ताकतवर और supportive होना चाहिए,हमारी बाबा जी की बहिन के पति का स्वर्गवास होने के बाद,उनके देवर ने उन्हें और उनके किशोर उम्र के बच्चों को सताना प्रारम्भ कर दिया था,बाबा जी के चाचा जी एक बार वहां गए ,तो हमारी बुआ उनसे मिलने पर रोई और बोली ,यह हमें परेशान करते हैं,हमारे पितामह पहलवानी करते थे,उनके ४० वर्षीय देवर को दोनों हाथों से हवा में उठाकर बोले ,बताओ तुम्हे ,ऊपर भेंजे या नीचे | बुआ जी के देवर बोले -अरे चच्चा ,आप बाप हो ,मैं आप का बेटा ,गलती हो गयी मुझसे .आगे से कोई बात नहीं होंगी |

के द्वारा: pkdubey pkdubey

आदरणीय सद्गुरु जी वैसे तो आप ने जवलंत समस्या को समाज के सामने उजागर किया है परन्तु आज मैं आप से पूर्णतया सहमत न होने की धृष्टता करने जा रहा हूँ| मैं समझता हूँ गुरु अथवा अध्यापक के नाम में ही शालीनता और कर्मनिष्ठा है| अभी पूरी तरह से निराश होने का वक्त नहीं आया|अभी भी बहुत से अध्यापक हैं जो अपने शिष्यों के प्रति पितावत व्यवहार रखते हैं और उन्हें सही राह दिखलाने का हरसंभव प्रयास करते हैं| कई बार कुछ मजबूरियां आड़े आ जाती हैं| वार्ना सभी गुरुओं में खोट नहीं| आज भी देश की नई पीढ़ी गुरुओं के सहयोग से ही देश और समाज की बागडोर थामे हुए है और उन्हीं से ही हमारी उम्मीदें भी कायम हैं | धृष्टता के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ| परन्तु गुरुओं की भूमिका पर सुविचारित लेख लिखने के लिए आप को बहुत बहुत साधुवाद|

के द्वारा: bhagwandassmendiratta bhagwandassmendiratta

आदरणीया शोभा जी और आदरणीय दृश्यम गुप्ता जी ! अपने कमेंट में आपने दो अहम मुद्दे उठाये हैं ! पहला ये कि आखिर पुरुष ऐसा क्यों होगया…बाप, भाई, बेटा एसा क्यों होगया ….और दूसरा ये कि क्या आज कच्छा पहनकर फूल खिलाने वाली, …पैसे के लिए अधनंगे विज्ञापन देने वाली नारी …. अधोवस्त्रों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने वाली नारी …अपना कर्तव्य पूर्ण रूप से निभा रही है ? मुझे ये दोनों प्रश्न बहुत प्रभात किये ! आपको धन्यवाद देते हुए कहना चाहूंगा कि संस्कारहीनता इसकी मुख्य वजह है और संस्कारहीनता परुष और नारी दोनों में ही बढ़ रही है ! अधिकतर मर्दों की नजर में आज भी नारी एक भोग की वस्तु ही है ! पिछले कई दशक से चल रहे नारी मुक्ति आंदोलन से प्रभावित नारी अधनंगे वस्त्रों में मॉडलिंग कर रुपए कमाना अपना अधिकार समझती है ! आज क्यों नारी ऐसी हुई है ? आज स्त्रियों को करियर बनाने की मिली आजादी और पुरुषों के शोषण के प्रति उपजा आक्रोश इसकी सबसे बड़ी वजह है ! बहुत सार्थक और विचारणीय कमेंट के लिए ह्रदय से आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आपने लिखा है …….इस देश की नारी अवश्य ही बहुत बड़े सुधार कार्य कर सकती है….बिलकुल सच है .. ——.परन्तु यही तो नहीं होरहा है ….पुरुष व नारियां सभी सोचें …. सिर्फ संवेदना से क्या होगा…. ——आखिर पुरुष ऐसा क्यों होगया…बाप, भाई, बेटा एसा क्यों होगया …. —— पुरुष को बचपन, युवावस्था आदि में शिक्षा , परामर्श कर्तव्यनिष्ठा सिखाने वाला कौन है …..नारी ही… —– और क्या आज कच्छा पहनकर फूल खिलाने वाली, …पैसे के लिए अधनंगे विज्ञापन देने वाली नारी …. अधोवस्त्रों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने वाली नारी …अपना कर्तव्य पूर्ण रूप से निभा रही है .. —— पुरुष वर्ग भी सोचे कि क्यों नारी ऐसी हुई है … drshyamguptadrgupta04@gmail.com

के द्वारा: Shobha Shobha

आपने लिखा है …….इस देश की नारी अवश्य ही बहुत बड़े सुधार कार्य कर सकती है….बिलकुल सच है .. ——.परन्तु यही तो नहीं होरहा है ….पुरुष व नारियां सभी सोचें …. सिर्फ संवेदना से क्या होगा…. ——आखिर पुरुष ऐसा क्यों होगया…बाप, भाई, बेटा एसा क्यों होगया …. —— पुरुष को बचपन, युवावस्था आदि में शिक्षा , परामर्श कर्तव्यनिष्ठा सिखाने वाला कौन है …..नारी ही… —– और क्या आज कच्छा पहनकर फूल खिलाने वाली, …पैसे के लिए अधनंगे विज्ञापन देने वाली नारी …. अधोवस्त्रों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने वाली नारी …अपना कर्तव्य पूर्ण रूप से निभा रही है .. —— पुरुष वर्ग भी सोचे कि क्यों नारी ऐसी हुई है … drshyamgupta shyamthot.blogspot.com drgupta04@gmail.com

के द्वारा: Shobha Shobha

जी हाँ आज कल चिकित्सा को कुछ चिकित्सकों ने धंधा बना लिया है, परन्तु सभी ऐसे हैं ये कहना अनुचित होगा| छाया की तकलीफ निसंदेह इस क्षेत्र का घिनौना चेहरा सामने लाती है| मैं इसमें दोष हमारी शिक्षा पद्धति का देखता हूँ , आज डॉक्टर बनने के लिए अभिभावक लाखों रूपये खर्च कर कॉलेज में सीट "खरीदते" हैं | खरीद फरोख्त से हासिल वस्तु में सेवाभाव कहाँ से आएगा? जो रूपये डॉक्टर बनने में खर्च हुए हैं उन्हें सूद समेत वसूलने का जरिया तो ये गरीब और अशिक्षित लोग ही हैं| यदि शिक्षा और शिक्षण को धंधा ना बनाया जाये तो परिणाम सुखकर ही होंगे| कानून तो बहुत सारे बन सकते हैं पर "स्व" का शुद्धिकरण करना हम सब के लिए परमावश्यक है| स्वयं शुद्धि से सारे बुरे कर्मों को करने की प्रवृति ही नष्ट हो सकती है , तब ऐसी दुखद घटनाएं नहीं होंगी| हम रोजाना ही ऐसी घटनाये सुनते देखते हैं लेकिन उन्हें अधोरेखित नहीं कर पाते| आपने इन घटनाओं को चिन्हांकित किया और हमें सोचने पर मजबूर किया | सादर धन्यवाद|

के द्वारा: अवी अवी

के द्वारा: nishamittal nishamittal

आदरणीय सिंह साहब ! सुप्रभात ! वास्तव में आज एक मंगलमय सुबह हुई है ! मेरे ब्लॉग की स्पेस 25MB बढ़ा दी गई है ! आप सबके सहयोग और समर्थन से ही ये संभव हुआ है ! मेरा भी दृढसंकल्प था कि मंच छोड़कर नहीं जाऊंगा और अपने अधिकार के लिए संघर्ष करूँगा ! भीतर से भगवान भी मंच पर बने रहने की प्रेरणा दे रहे थे ! देर से ही सही,परन्तु जागरण जंक्शन परिवार द्वारा मेरी बात सुनी गई ! जागरण जंक्शन परिवार को धन्यवाद देते हुए सिंह साहब की तरह से मेरा भी उनसे आग्रह है कि सभी ब्लागरों की समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द किया जाये ! मंच को तकनीकी रूप से और एडवांस किया जाये तथा इसे सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया जाये ! आदरणीय सिंह साहब ! सदैव की भांति इस बार भी सहयोग और साम्रथन देने के लिए हृदय से आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉ रंजना गुप्ता जी ! दिन मंगलमय हो ! मैंने आपसे हमेशा यही कहा था कि मैं मंच छोड़कर नहीं जा रहा हूँ ! मुझे विश्वास था कि देर-सबेर मेरी बात जरूर सुनी जाएगी ! पिछले दो माह से कई बार आग्रह करने के बाद अन्तोगत्वा जागरण जंक्शन परिवार द्वारा 25MB स्पेस बढ़ा दी गई है ! जागरण जंक्शन परिवार को धन्यवाद देते हुए मेरा उनसे आग्रह है कि फीडबैक पर सुनवाई जल्द से जल्द की जाये और उत्तर जरूर दिया जाये ! आदरणीया डॉ रंजना गुप्ता जी ने अपने कमेंट में सुझाव दिया है कि साहित्यकारों के लिए इस मंच पर लेखन व प्रकाशन से संबंधित कोई विशेष सम्मानजनक व्यवस्था की जाये और इस मंच पर कवियों और साहित्यकारों को विशेष महत्व दिया जाये ! आपके सुझाव पर जरूर विचार करें !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा:

आदरणीय सिंह साहब ! हार्दिक अभिनन्दन ! दिन मंगलमय हो ! सिंह साहब आप निश्चिन्त रहें,मैं मंच छोड़कर नहीं जा रहा हूँ ! समय और ईश्वर की इच्छा जबतक होगी,तबतक मैं मंच पर मौजूद रहूँगा ! मेरी निजी धारणा है कि किसी भी चीज को अपनी ओर से न पकड़ो और न छोडो ! समय ओर ईश्वर जब चाहेंगे तो जो छूटना होगा,वो अपने आप छूट जायेगा ! यदि मैं चाहता तो चुपचाप नया ब्लॉग बना लेता,परन्तु मैंने ऐसा नहीं किया ! अभी मैं नया ब्लॉग बनाने नहीं जा रहा हूँ ! मैं चाहता हूँ कि जागरण जंक्शन परिवार कुछ तो जबाब दे ! वे किसी भी ब्लॉगर के सवाल या समस्या का जबाब नहीं दे रहे हैं ! ये केवल ब्लॉगरों की ही नहीं बल्कि फीडबैक की भी तौहीन है ! ऐसे जबाब न देने वाले महत्वहीन फीडबैक का फायदा क्या है ? वो जबाब भी देंगे और स्पेस भी बढ़ाएंगे ! आपका सुझाव अच्छा लगा कि चित्रों का प्रयोग कम किया जाये ! आप निश्चिन्त रहिये मेरे भीतर के भगवान कृष्ण यही कहते हैं कि वो जबाब भी देंगे और स्पेस भी बढ़ाएंगे ! सहयोग और समर्थन के लिए ह्रदय से आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री राजेन्द्र ऋषि जी आप क्या दैनिक जागरण के लिए लिखते हैं या अपने पाठकों के लिए और हम सब के लिए आप नया ब्लाग ले लें क्या आप हम सब को प्रति क्रिया दिए बिना रह सकेंगें या हमें जिनको आपके लेख पढने और उसका जबाब देने की आदत है उनके कष्ट का अनुमान हैं | आप अपनी ईगो मत लगाईये ईगो उनसे लगाई जाती है जिनमें समझ हो आप तो दैनिक जागरण की मार्किटिंग का हिस्सा है यह क्या समझे सब अपनी नौकरी का समय देखते है उन्हें यह चिंता नहीं है हम पाठक क्या चाहते है आपको मैंने सदा सद्गुरु जी के नाम से सम्बोधित किया है आपके हटने के बाद हमें बहूत झटका लगेगा कई लोग गये हम आज भी रीडर ब्लाग में उन्हें ढूढते है जब नहीं मिलते शॉक लगता हैआपका नाम राजेन्द्र ऋषि भी बहूत अच्छा है | मुझे जब भी क्रोध आता है मैंनही करती हूँ उल्टा मुझे जिन पर क्रोध आता है मुझे वह क्रोध के लायक ही नही लगते गिला भी न करें नया नाम नया लेखन पुराने पाठक | हमें आपके लेख चहिये प्रतिक्रिया चाहिए | डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! लड़कियों को लेकर गांव के लोगों की मानसिकता आज भी अच्छी नहीं है ! शहर में भी ऐसी विकृत मानसिकता के लोंगो की कमी नहीं है ! पढ़े लिखे लोग तक डॉक्टर से बार बार पूछते हैं कि गर्भ में लड़का है या लड़की ! लड़की होने का पता चलता है तो गर्भपात कराने की सोचने लगते हैं ! एकपणे सही कहा है कि 'बेटी तो लक्ष्मी होती है ! आज के युग मे यदि बेटी को भी पढ़ाओ लिखाओ वह माँ बाप का नाम रोशन करती है' ! परन्तु बहुत लोग इस बात को नहीं स्वीकार करते हैं ! वो पैदा तो माँ की कोख से ही होते हैं,परन्तु बड़े होकर उसी कोख के दुश्मन बन जाते हैं ! लोग लड़कियों को लेकर काल्पनिक भय के शिकार होते हैं जैसे-शादी विवाह,दहेज़ आदि की समस्या और लड़की के जवान होकर बिगड़ने का डर ! प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया निर्मला सिंह गौर जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! प्रेतों को सिद्ध कर उनकी शक्ति का दुरूपयोग करके लोंगो को ठगने वाले वास्तव अघोरी साधु होते ही नहीं हैं ! वास्तविक अघोरी साधु लोककल्याण के लिए ही आत्माओं को सिद्ध करते हैं ! उनकी साधना का परम लक्ष्य भगवान शिव का सानिध्य पाना होता है ! ये घटना जब मैंने सुनी तो हतप्रभ रह गया था ! उस समय मैं सोच रहा था कि संगीता के हत्यारे ससुर से लाख गुना बेहतर तो वो नाग-नागिन थे ! वो सर्पयोनि में होकर भी इतने समझदार थे कि बच्ची और उसकी माँ को कोई क्षति नहीं पहुंचाई ! बल्कि वे तो बच्ची की रखवाली तक करते रहे ! आपने मंच न छोड़ने की बात की है ! आप निश्चिन्त रहिये मैं मंच नहीं छोड़ रहा हूँ ! मैं जागरण जंक्शन परिवार द्वारा स्पेस बढाए जाने की प्रतीक्षा करूँगा ! स्पेस बढ़ने के लिए जागरण जंक्शन परिवार से आग्रह करने लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरुजी -प्रणाम ,जिन अघोरी साधुओं को अपवित्र और असामाजिक समझा जाता है उनका असली रूप बता के आपने कई पूर्वाग्रह मिटा दिये हैं ,ये सच्ची कहानी पढ़ कर बहुत दुःख हुआ कि घर के खून के रिश्ते इतने क्रूर हो सकते हैं ,बेटियों की हत्या का पाप जन्म जन्मान्तर तक ढोना पड़ता है ,मंच पर ये कहानी शेयर करने के लिये आभार . दूसरी बात आप मंच से विदाई मत लीजियेगा ,फिर यहाँ कुछ खास नहीं बचेगा पढ़ने को,अभी जेजे पर आपके बहुत सार्थक ,ज्ञानवर्धक और अनुभबी ब्लॉग पढ़ने को मिलते हैं ,जो अपनी उत्कृष्ट शैली और रोचकता के होते तुरंत पढ़े भी जाते हैं ,साथ ही सबको आपकी प्रतिक्रिया की भी प्रतीक्षा रहती है .जेजे से अनुरोध है की स्पेस बढ़ाये .रक्षा बंधन की सादर शुभ कामनाएं .

के द्वारा: Nirmala Singh Gaur Nirmala Singh Gaur

आदरणीया डॉ रंजना गुप्ता जी ! सादर अभिनन्दन ! ये एक गांव की सच्ची कहानी है ! वो अघोरी बाबा और कहानी के सभी पात्र जीवित हैं ! अघोर साधना का चरमोत्कर्ष है-जीव का शिव से मिलन ! वो अघोरी बाबा भी इस अवस्था को प्राप्त साधु हैं ! इस समय वो कहाँ होंगे,ये तो वही जानें ! आपने सही कहा है कि काशी में ऐसे योगी आते जाते रहते हैं ! परन्तु वो अपनी इच्छा से ही किसी को दर्शन देते हैं ! पोस्ट की सराहना के लिए धन्यवाद ! आपने मेरे ब्लॉग के स्पेस खत्म होने की चर्चा की है और नया ब्लॉग शुरू करने की सलाह दी है ! जागरण परिवार से मैंने दो बार स्पेस बढ़ाने के लिए आग्रह किया है ! यदि वो स्पेस नहीं बढ़ाते हैं तो 'छुप गया कोई रे..' की अंतिम दो किस्तों के साथ इस ब्लॉग का समापन कर दूंगा ! ब्लॉग पर आने के लिए और याद करने के लिए ह्रदय से आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर नमन ! काफी देर से आपके ब्लॉग पर नजर पड़ी, लेकिन जब पड़ी तो फिर हटी नहीं | मैं यहाँ नया हूँ, मंच के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है | मुझे लग रहा हैं की मैंने इस मंच का इतिहास पढ़ लिया | आपने कहा की, पुराने रचनाकार निराशा में मंच छोड़ गए, ...आदरणीय सुरेश प्रसाद जी, जिनकी प्रेरणा से ही मैं इस मंच से जुड़ा...आज उनका कोई अता-पता नहीं है...| आपके जिक्र में, एक नाम मेरे लिए विशेष था आदरणीय जे.एल सिंह जी का | हम इस मंच पर ही मिले, और आज फेसबुक पर काफी करीब हैं..हमने मिलकर एक समूह प्रारम्भ किया है 'युवावाणी" जिसमे हम विषयवार साप्ताहिक परिचर्चा भी आयोजित करते हैं | बहुत शानदार जानकारी रही मेरे लिए, उमीद करता हूँ की 'संचालक मंडली' आपकी बातों को पूरी गंभीरता से लें..और आवश्यक सुधार के प्रति प्रयाश करें | पारिश्रमिक न मिलना उतना बुरा नहीं है, बुरा है साहित्यकारों/रचनाकारों/लेखकों को पाठक के रूप परिभाषित करना | धन्यवाद, नमन |

के द्वारा: KKumar Abhishek KKumar Abhishek

आदरणीया डॉक्टर रंजना जी ! सादर अभिनन्दन ! इधर मेरी कई रचनाएँ जागरण जंक्शन मंच द्वारा फीचर नहीं गईं ! "अदिति-बाइसवीं सदी के नारी की महत्वकांक्षा भरी उड़ान","दुःख उपजे मन रोये साधो जेहि दिन हरि भजन नहीं होये","बँधा हुआ एक एक धागे से भाई बहन का प्यार-राखी पर्व " और "धर्मवीर भारती के उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ की समीक्षा" ये सब रचनाएँ फीचर होने के लायक ही नहीं समझीं गईं ! शायद भूलवश ये रचना फीचर कर दी गई हो ! मैं सोच रहा हूँ कि अब मंच पर मैं कम लिखूँ ! काफी सुझाव और सद्विचार मैंने दे ही दिए हैं ! इसी पर अमल हो जाये तो इस मंच पर एक क्रन्तिकारी और सभी ब्लॉगरों के लिए हितकारी परिवर्तन आ जायेगा ! वैचारिक जगत में निरुद्देश्य भटक रहा ये मंच एक सार्थक उद्देश्य को पा जायेगा ! सभी ब्लॉगरों को भी अच्छे से अच्छा लिखने की प्रेरणा मिलेगी ! प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए आपको हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सिंह साहब ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपने इस पोस्ट को पसंद किया और जागरण जंक्शन परिवार को दिए गए मेरे सुझावों से सहमति व्यक्त की,इसके लिए बहुत बहुत हार्दिक आभार ! आपने एक सुझाव और दिया है कि जागरण जंक्शन की वेबसाइट में जो तकनीकी खराबी है,उसे दूर किया जाये ! मैंने भी अनेक बार देखा है कि ये वेबसाइट दिन में जल्दी खुलती नहीं है ! इसके खुलने की स्पीड भी बहुत स्लो रहती है ! जागरण परिवार से मेरा भी अनुरोध है कि इस तकनीकी समस्या को दूर करें ! सिंह साहब आपने अपनी प्रतिक्रिया में आदरणीय श्री राजकमल शर्मा जी की चर्चा की है,जो काफी समय से मंच पर अनुपस्थित हैं ! मेरा भी उनसे आग्रह है कि वो इस मंच पर पुन: पधारे ! हम सबलोग उनका स्वागत करेंगे ! उन वरिष्ठ ब्लॉगर से हमें बहुत कुछ सिखने का भी सौभाग्य प्राप्त होगा ! इतनी भावपूर्ण प्रतिक्रिया के लिए सिंह साहब आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर अभिवादन! आपके एक साल का सफर और २२५ ब्लॉग बेहद महत्वपूर्ण हैं. आपका यह समीक्षात्मक ब्लॉग सभी ब्लॉगर्स पर निष्पक्ष टिप्पणी और जागरण जंक्सन को दिए गए सुझाव और भी महत्वपूर्ण है. उम्मीद करूंगा कि जागरण जंक्सन की टीम अवश्य ध्यान देगी. अब मैं अपनी बात कहता हूँ .श्री राजकमल शर्मा इस मंच के वरिष्ठतम ब्लॉगर थे.और आप ही की तरह वह हर ब्लॉग पर नजर भी रखते थे और अपनी रचनात्मक प्रतिक्रिया भी ऐसे सहज और विनोदपूर्ण अंदाज में देते थे कि बुरा भी न लगे. हममे से बहुत सारे लोग उन्हें गुरुदेव ही कहते थे. पर क्या करूँ उनका जाना और उनके साथ संवादहीनता .मेरे लिए आज भी कष्टकर है. मैंने हर माध्यम से उनसे संपर्क करने की कोशिश की पर सफल न हो सका.अब आप तो सद्गुरु हैं ही आपकी दृष्टि भी सब पर रहती है. आपका विचार, गहन अध्ययन और परामर्श सबके लिए हितकारी है, ऐसा मैं मानता हूँ. आगे भी आपका इसी तरह का समीक्षात्मक ब्लॉग और परामर्श पढने को मिलता रहेगा. इसी आशा के साथ. जागरण जंक्सन अपनी तकनीकी समस्या भी दूर करे तो सबके लिए बेहतर होगा. बीच बीच में यह साइट लुप्त हो जाता है या देर से खुलता है, इस कारण भी हमलोग गैरहाजिर हो जाते हैं. अंत में आपका और सभी मित्रों, लेखक, लेखिकाओं का आभार और धन्यवाद ! ....सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

सदगुरू जी, एक वर्ष पूरा होने पर लिखा यह लेख सराहनीय है | इस मंच के अतीत और वर्तमान का अच्छा लेखा आपने प्र्स्तुत किया है | इस मंच को और अधिक उपयोगी बनाने हेतु दिए गए सुझावों से पूर्ण सहमत हूं | दर-असल अधूरे ब्लाग प्रकाशित करने का कोई मतलब नही | जिस तरह संपादकीय पृष्ठ पर रोज दो लेख प्रकाशित किए जाते हैं वैसे ही प्रतिदिन कम से कम दो ब्लाग प्रकाशित किए जाने चाहिए और रविवार को ब्लागर आफ़ द वीक ब्लाग को विशेष महत्व देते हुए अन्य दो ब्लाग के साथ छापा जाना चाहिए | तभी यह लेखन आम और खास पाठकों तक पहुंच सकेगा | इस पर पारिश्रमिक भी दिया जाना चाहिए | अभी तो ऐसा प्रतीत होता है कि 30-35 सक्रिय ब्लागर बस एक दूसरे की पीठ थपथपा रहे हैं | आम पाठक इसमे जुडता ही कहां है | वह तो अखबार पढता है | वैसे भी हिंदी प्रिंट मीडिया मे कितने लोग नेट पर जाकर ब्लाग पढते हैं | जागरण परिवार अगर इस मंच को गंभीरता से ले रहा है तो उसे इसे अपने दैनिक पत्र मे पारिश्रमिक के साथ स्थान देना चाहिए, अपनी संपादकीय नीतियां लागू करते हुए | इस विषय पर लिखने के लिए आप बधाई के पात्र हैं | आपने लेख में मुझे सम्मान दिया उसके लिऐ आभारी हूं ....शुभकामनाएं |

के द्वारा: एल.एस. बिष्ट् एल.एस. बिष्ट्

श्री सद्गूरूजी आपने अपने एक वर्ष तक लगातार ब्लाग ही नहीं लिखा बल्कि अपनी समीक्षा भी दी है आपके लेख शायद सभी लोग पढ़ते और पसंद करते है मैं तो आपकी नियमित पाठक हूँ आपकी विषय पर पकड़ भी बहुत अच्छी है | आपने अपने अनुभव और सुझाव दोनों ही जागरण जंक्शन को दिए हैं में आपके एक-एक सुझाव से सहमत हूँ एक डाक्टर ने लेख लिखा’ महगाई जो सबको रास आई ‘ यह लेख तम्बाकू से होने वाले कैंसर को लेकर लिखा गया था यह एक ऐसा लेख हैं जिसे हाई लाईट करने की जरूरत थी परन्तु ध्यान ही नहीं दिया गया यदि ध्यान दिया जाता बहूत से ऐसे डाक्टर हैं जिनके जीवन का उद्देश्य ही कैंसर उन्मूलन है वह भी अपने विचार लिखने के लिए उत्सुक होते |कई अति सुंदर कविताये लिखते या लिखती है दैनिक जागरण में आने वाली कविताओ से भी खूबसूरत होती है मेरे जैसी कविता को ठीक से न समझ पाने की क्षमता रखने वाली भावुक हो जाती है |आपने बहूत अच्छे सुझाव दिए हैं सूझ कई बड़े अच्छे प्रश्न उठाये है दूसरे पाठक भी आपके सुझावों पर गौर करेगें| डॉ शोभा भारद्वाज

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री सद्गूरूजी आपने अपने एक वर्ष तक लगातार ब्लाग ही नहीं लिखा बल्कि अपनी समीक्षा भी दी है आपके लेख शायद सभी लोग पढ़ते और पसंद करते है मैं तो आपकी नियमित पाठक हूँ आपकी विषय पर पकड़ भी बहुत अच्छी है | आपने अपने अनुभव और सुझाव दोनों ही जागरण जंक्शन को दिए हैं में आपके एक-एक सुझाव से सहमत हूँ एक डाक्टर ने लेख लिखा’ महगाई जो सबको रास आई ‘ यह लेख तम्बाकू से होने वाले कैंसर को लेकर लिखा गया था यह एक ऐसा लेख हैं जिसे हाई लाईट करने की जरूरत थी परन्तु ध्यान ही नहीं दिया गया यदि ध्यान दिया जाता बहूत से ऐसे डाक्टर हैं जिनके जीवन का उद्देश्य ही कैंसर उन्मूलन है वह भी अपने विचार लिखने के लिए उत्सुक होते |कई अति सुंदर कविताये लिखते या लिखती है दैनिक जागरण में आने वाली कविताओ से भी खूबसूरत होती है मेरे जैसी कविता को ठीक से न समझ पाने की क्षमता रखने वाली भावुक हो जाती है |आपने बहूत अच्छे सुझाव दिए हैं सूझ कई बड़े अच्छे प्रश्न उठाये है दूसरे पाठक भी आपके सुझावों पर गौर करेगें| मैने कई बार कोशिश की अपने विचार आपके एक वर्ष पूरे होने वाले लेख और समीक्षा में डालने की कोशिश की मजबूर होकर इस लेख में डाल रहीं हूँ डॉ शोभा भारद्वाज

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श्री सद्गूरूजी आपने अपने एक वर्ष तक लगातार ब्लाग ही नहीं लिखा बल्कि अपनी समीक्षा भी दी है आपके लेख शायद सभी लोग पढ़ते और पसंद करते है मैं तो आपकी नियमित पाठक हूँ आपकी विषय पर पकड़ भी बहुत अच्छी है | आपने अपने अनुभव और सुझाव दोनों ही जागरण जंक्शन को दिए हैं में आपके एक-एक सुझाव से सहमत हूँ एक डाक्टर ने लेख लिखा’ महगाई जो सबको रास आई ‘ यह लेख तम्बाकू से होने वाले कैंसर को लेकर लिखा गया था यह एक ऐसा लेख हैं जिसे हाई लाईट करने की जरूरत थी परन्तु ध्यान ही नहीं दिया गया यदि ध्यान दिया जाता बहूत से ऐसे डाक्टर हैं जिनके जीवन का उद्देश्य ही कैंसर उन्मूलन है वह भी अपने विचार लिखने के लिए उत्सुक होते |कई अति सुंदर कविताये लिखते या लिखती है दैनिक जागरण में आने वाली कविताओ से भी खूबसूरत होती है मेरे जैसी कविता को ठीक से न समझ पाने की क्षमता रखने वाली भावुक हो जाती है |आपने बहूत अच्छे सुझाव दिए हैं सूझ कई बड़े अच्छे प्रश्न उठाये है दूसरे पाठक भी आपके सुझावों पर गौर करेगें| मैने कई बार कोशिश की अपने विचार आपके एक वर्ष पूरे होने वाले लेख और समीक्षा मैं डालने कई मजबूर होकर इस लेख में डाल रहीं हूँ डॉ शोभा भारद्वाज

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