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सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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sadguruji


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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

श्री आदरणीय सद्गुरु जी हम चार बहने हैं हमारा शौक अजीब हैं एक बार रशियन कल्चर सेंटर से बुलावा आया एक कश्मीरी लडकी ने प्रोग्राम अरेंज किया है हम पहुंची बहन एक गुरुदेव शायद सरदार जी थे उन्होंने यहूदियों का चौंगा पहना हुआ था पूरेईसा बना हुआ साथ में रशियन चेली और देसी चेले उन्होंने कहा सब आँख बंद करो आपको भगवान के दर्शन होंगे आँखे बंद करने पर वः कोई हार्प जैसा बाजा बजा क्र गाने लगे ॐ शोनम - शोनम सारे हल्का सा अन्धेरा कर दिया जरा सा बलप जल रहा था काफी देर तक गाते रहे फिर पुचा आपको अपने अपने भगवान के देशं हुए हमने कहा हमें तो नहीं हुए उनको गुस्सा आ गया आपकी नहीं होंगे तुम सब दुनयावी हो बाकी सब को दर्शन हो रहे थे हम हंसते हुए घर आ गये | बस जो आप ने लिखा है वही है

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय रमेश अग्रवाल जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद ! लोकसभा चुनाव के समय पीएम मोदी ने कहा था कि काला धन वापस लायेंगे ! पीएम ने स्पष्ट रूप से कहा था कि देश के बाहर काला धन इतना है कि हर व्यक्ति के खाते में १५ से २० लाख रुपये दिये जा सकते हैं ! गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उस समय कहा था कि १०० दिन में काला धन वापस लायेंगे ! चुनाव जीतने के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इसे चुनावी जुमला करार दिया ! सरकार को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, नहीं तो यही मुद्दा अगले चुनाव में उसके गले की फांस बन जाएगा ! आपकी बात से सहमत हूँ कि पश्चिम बंगाल में कुछ राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर बड़ी विकट स्थिति है, केंद्र को इस पर पूरी नजर रखनी होगी ! प्रतिक्रया देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

जय श्री राम सद्गुरुजी चुनावो की समीक्षा के लिए साधुवाद.मोदिकी ने कभी भी नहीं कहा की १५ लाख रु हर एक के खाते में आयेंगे लेकिन उन्होंने ये कहा था की इतना धन है की हर व्यक्ति के खाते में १५ लाख आये.विरोधियो ने इसे दुष्प्रचार बनाया.जो लोग आसाम में बीजेपी की निंदा करते वे लोग कांग्रेस के वाम डको और बिहार में लालू नितीश के गटबंधन पर चुप रहते लगता बीजेपी को कोसना एक फैशन बन गया ममता जीत गयी क्योंकि १२७ सीटो पर मुस्लिम निर्णायक थे अब ५ साल बम बनेगे अफीम की खीती होगी और अवैध रूप से घुसपैठ.भर्तियो को मुफ्त की संस्कृति  अप रही जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक.जिस तरह ममता ने चुनाव आयोग को धमकी दी और चुनाव बाद बीजेपी और विरोधियो को हमला किया किसी ने निंदा नहीं की आज बीजेपी विरोध के आगे किसी को बाकी गलतिय अपराध दिखाई नहीं देते.ऍआप तो अच्छे लिखने में माहिर लेकिन उम्मीद थी आप हिंसा की निंदा करेंगे.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन बुद्ध मुस्कुराये शांति-अहिंसा के लिए - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

जय श्री राम सद्गुरुजी भगवानजी ने हम लोगो को इतना दिया ये हमारा कर्त्तव्य बनता की उनके प्रति कृतञता प्रगट करते उन्हें धन्यवाद दे.कमसे काम सोते वक़्त रात में और सुबह उठ कर उनके द्वारा दिए गए उपकारो के लिए धन्यवाद दे.लेकिन आज एक तरफ आध्यामिक कार्यक्रमों और मंदिरों में भीड़ लगी होती वही आधुनिकता में भगवान् जी के प्रति मानसिकता दुर्भाग्यपूर्ण है.वैसे भगवानजी की कृपा हर क्षण होती रहती लेकिन २ बार उनकी कृपा का आभास हुआ १९६५ में नाइजीरिया में एक साल पहुंचने के बाद हमारी कार एक गड्ढे में गिर गयी हमें ऐसा लगा जैसे किसी ने उठा लिया कार ख़राब हो गयी बगल में बैठे ड्राइवर को भी चोट आई.फॉर नवम्बर ९५ और जनवरी ९६ के बीच हमारे रिड की हड्डी के ३ ऑपरेशन हुए जिसमे २ कानपूर के प्रतिस्ठित डाक्टरों द्वारा बड़े अस्पतालों में गलत कर दिए गए १७ जन ९६ को दिल्ली में तीसरा ऑपरेशन सफल हुआ लेकिन पहले दोनों गलत होने की वजह से उठ नहीं सके और पिछले २० साल से बीएड में पड़े है ये हनुमानजी की कृपा की कष्ट सहन करने की शक्ति दे दी है नहीं तो २० साल प्रशांत पूर्वक समय कथन बहुत मुस्किल था.दिल्ली में ऑपरेशन के दिन रात को तोते के रूप में हनुमानजी के दर्शन हुए थे जिसे अपने पत्नी को भी बताया था.भगवान् के प्रति कृतज्ञता हमारा परम कर्त्तव्य और धर्म है इस सुन्दर लेख ले लिए आप बधाई स्वीकार करे.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

श्री सद्गुरु जी मेरे पति के अंडर में एक नर्स कम करती थी उनसे हमारे पारिवारिक सम्बन्ध थे उन्हें कैंसर हो गया परन्तु डायग्नोज देर से हुआ वह सिरियस थी उसके माता पिता ने अमृतसर हमें बुलाया मोहनी सीरियस है आपको याद क्र रही है हम गये उसने हमें देखा मैं रोने लगी मेरे पति ने उसके माथे पर हाथ रखा उसने कहा डाक्टर साहब बहुत दूर एक छोटे शहर में बाजे वाले बैठे हैं मेरे स्वागत की तैयारियां हो रहीं है में जा रही हूँ मैं डर गयी सच पूछा जाए एक देह छुटटी है दूसरे स्थान पर नई देह तैयार होती हैउसने सउदी अरब जा क्र काफी पैसा कमाया था मोह जा नहीं रहा था उसके भाई ने उसके हाथ में पांच सों का नोट रख कर कहा यह ले जा सकती है उसने ना में सर हिलाया उसी रात को वः विदा हो गयी

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री आदरणीय सद्गुरु जी जब जीवन हाथ से जाता महसूस होता है पता चलता है कितना अनमोल है बहुत ही सुंदर लेख बात काफी पुरानी है मेरी दादी अम्मा को जीवन से बहुत मोह था वह मरना नहीं चाहती थीं शरीर जबाब दे गया था परन्तु दिमाग वैसे का वैसा था हमें अपनी माँ से ज्यादा प्यारी थीं मेरठ में नया मेडिकल कालेज खुला था उनके हर कष्ट पर हम उन्हें वहाँ ले जाते एक दिन सीनियर डाक्टर कहने लगे इन्हें इतना कष्ट क्यों देते हो इनको शान्ति से जाने दो दादी के चेहरे पर ऐसा निराशा का भाव आया आज भी में उन आँखों को भूल नहीं सकी उन्होंने कहा डाक्टर साहब आगे कौन सा सुख है न जाने कौन सी योनी मिले अभी तो मनुष्य योनी है | लेख पढ़ क्र भूली बात याद आ गयी

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय संतोष कुमार जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! अपने को मूर्ख कहने या समझने वाले बुद्धिजीवी भी आत्ममुग्धता के शिकार होते हैं ! आपने चर्चा किया है कि किसी श्रेष्ठ का अपमान और दूसरों के विकार देखना आत्ममुग्धता है ! आप ब्लॉगर हैं, क्या आप किसी श्रेष्ठ के खिलाफ नहीं लिखते हैं ? आपके ब्लॉग मैंने पढ़े हैं, उसमे भी आलोचना समाहित होती है ! ब्लॉगर का कार्य सिर्फ दूसरों का गुणगान करना ही नहीं है, बल्कि जरुरत के अनुसार आलोचना करना भी है ! जो सर्वश्रेष्ठ है, उस ईश्वर की भी आलोचना होती है ! दूसरों का पता नहीं, किन्तु अपने भीतर ऐसा अहंकार और ईर्ष्या-द्वेष आदि नहीं रखता, जो किसी को क्षति पहुंचाएं ! आपसे सहमत हूँ कि किसी महान लक्ष्य के लिए नियमित संघर्ष साधना करना विशेष बात है, किन्तु मेरा महान लक्ष्य लोकसेवा और एकांत रूपी ईश्वरीय क्षणों का अधिकाधिक सेवन करना भर है ! आप बुद्धिजीवी हैं, आपकी बातों का कष्ट नहीं, क्योंकि अब इस तरह की बातों को सहन करने की आदत पड़ चुकी है, हाँ जबाब जरूर देता हूँ, ताकि किसी को ये न लगे कि उसके विचारों कि उपेक्षा कर रहा हूँ ! ब्लॉग पर समय देने के लिए धन्यवाद देते हुए अंत में बस यही कहूंगा कि मेरी बेलाग बातों से आपके मन को कोई ठेस पहुंची हो तो क्षमा कीजिएगा ! आपसे हुई अच्छी और विचारणीय चर्चा के लिए मेरा हार्दिक आभार स्वीकार कीजिएगा !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय मान्यवर ,.....सादर अभिवादन .... हम वास्तव में एक जैसे ही हैं ,.....वही अहंकार ,ईर्ष्या द्वेष आदि विकार कूट कूटकर भरे हैं ,.....हमारी बड़ी समस्या यही है कि दूसरों के विकार साफ़ देख सकते हैं ,..अपने देखने में पूर्णतः असफल हैं ,......वैसे मैं मूर्खत्वजीवी प्राणी हूँ ,...इसलिए गलती करना स्वभाव है ,..आपको कष्ट पहुंचा हो तो क्षमा चाहता हूँ ,..शायद साधुओं को किसी से कष्ट होता नहीं है ,..लेकिन आपको हुआ है तो ..ह्रदय से क्षमाप्रार्थी हूँ ,...मौज में मस्ती करना अच्छी बात है ,...लेकिन किसी महान लक्ष्य के लिए नियमित संघर्ष साधना करनी विशेषतम बात है ,...मात्र यही तर्क है जो आप जैसे विचारशील अध्येता बिना लिखे समझ सकते हैं !..और आत्ममुग्ध होना भी अच्छी बात हो सकती है ,.यदि उससे किसी श्रेष्ठ का अपमान न हो ,...हम दोनों ही गलत हो सकते हैं ,..इस पोस्ट और प्रतिक्रिया के सन्दर्भ में हम दोनों ही गलत हैं ....सादर आभार सहित पुनः अभिवादन

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

आदरणीय संतोष कुमार जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आप इस मंच के पुराने ब्लॉगर हैं और मैंने आपकी कई पोस्ट पढ़ी है ! आप एक बुद्धिजीवी हैं और अच्छा लिखते हैं ! किन्तु मुझे अफ़सोस है कि आप भी उन्ही बुद्धिजीवियों कि जमात में शामिल हैं, जो अपने को बहुत चतुर समझते हैं और कोई तर्क न सूझने पर ईर्ष्या-द्वेष भावना में बहकर व्यक्तिगत प्रहार करना शुरू कर देते हैं ! खैर, आपकी ग़लतफ़हमी दूर करने के लिए आपको बता दूँ कि ब्लॉग का नाम ‘सद्गुरुजी’ भगवान का एक नाम है ! मेरा नाम सभी जानते हैं ! आपने आत्ममुग्धता का शिकार होने की बात की है और साधना करने तथा सुबह तीन बजे से रात ग्यारह तक जागने का सुझाव दिया है ! महोदय क्या ये आपकी आत्ममुग्धता नहीं दर्शाती है ! साधू से ये नहीं पूछना चाहिए कि आप कितनी देर जागते हैं, बल्कि उनसे ये पूछना चाहिए कि आप सोते हैं या नहीं ? मौज में आने पर अक्सर मैं तो पूरे 24 घंटे जागता हूँ ! चुपचाप शांत चित्त से समय को अपने सामने गुजरते हुए देखता हूँ ! रही बात साधना की तो ये हर मनुष्य के लिए एक गोपनीय विषय है और उस पर कुछ कहने का अधिकार आपको नहीं है ! संक्षेप में उस विषय में बस यही कहूंगा कि दुनिया कि सभी साधनाओं से ऊपर भी कुछ है और वो है वेद का ह्रदय में प्रकट होना ! फिर न किसी धर्मग्रन्थ की जरुरत होगी और न ही कोई साधना करने की ! ब्लॉग पर आप आये और प्रतिक्रया दिए, इसके लिए हार्दिक आभार ! आदरणीय संतोष कुमार जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! ब्लॉगर किसी भी विषय पर लिख सकता है ! बाबा रामदेव जी कोई हिटलर नहीं, बल्कि हम और आप की तरह इंसान ही हैं ! उनपर भी लिखा जा सकता है ! यदि नियति को आप मानते है और ये भी मानते हैं कि नियति ने उनसे कुछ न कुछ सार्थक कार्य करवाया है ! फिर आपको ये भी मानना होगा कि नियति ने ये ब्लॉग लिखवाकर भी कुछ न कुछ सार्थक कार्य ही करवाया है ! उस दिन किसी और विषय पर लिखना चाह रहा था, किन्तु ये ब्लॉग लिखा गया ! व्यक्तिगत रूप से बाबा रामदेव का मैं विरोधी नहीं हूँ और न ही मैंने उनपर कोई व्यक्तिगत आरोप लगाए हैं ! जो देश के कई बुद्धिजीवी और अन्य लोग उनपर जो आरोप लगाते हैं, उसी की ही चर्चा लेख में की गई है ! बेशक समय ही उनके बारे में बहुत कुछ बताएगा, किन्तु चर्चा का अधिकार हमें भी है ! बाबा रामदेव के कई सामान अपने घर और आश्रम में हम प्रयोग करते हैं ! मेरा उनसे कोई लेना देना या बैर भाव नहीं है ! अपने समय की समाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक परिस्थितियों पर कबीर साहब से लेकर सभी संतों ने बहुत कुछ कहा है ! आज के साधू भी कह रहे हैं ! अंत में बस यही कहूंगा कि आपको कुछ बुरा लगे तो उसके लिए मुझे खेद है, किन्तु जबाब देना जरुरी था ! आपने दो बार वही प्रतिक्रिया दी है ! ब्लॉग पर इतना समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय संतोष कुमार जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! ब्लॉगर किसी भी विषय पर लिख सकता है ! बाबा रामदेव जी कोई हिटलर नहीं, बल्कि हम और आप की तरह इंसान ही हैं ! उनपर भी लिखा जा सकता है ! यदि नियति को आप मानते है और ये भी मानते हैं कि नियति ने उनसे कुछ न कुछ सार्थक कार्य करवाया है ! फिर आपको ये भी मानना होगा कि नियति ने ये ब्लॉग लिखवाकर भी कुछ न कुछ सार्थक कार्य ही करवाया है ! उस दिन किसी और विषय पर लिखना चाह रहा था, किन्तु ये ब्लॉग लिखा गया ! व्यक्तिगत रूप से बाबा रामदेव का मैं विरोधी नहीं हूँ और न ही मैंने उनपर कोई व्यक्तिगत आरोप लगाए हैं ! जो देश के कई बुद्धिजीवी और अन्य लोग उनपर जो आरोप लगाते हैं, उसी की ही चर्चा लेख में की गई है ! बेशक समय ही उनके बारे में बहुत कुछ बताएगा, किन्तु चर्चा का अधिकार हमें भी है ! बाबा रामदेव के कई सामान अपने घर और आश्रम में हम प्रयोग करते हैं ! मेरा उनसे कोई लेना देना या बैर भाव नहीं है ! अपने समय की समाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक परिस्थितियों पर कबीर साहब से लेकर सभी संतों ने बहुत कुछ कहा है ! आज के साधू भी कह रहे हैं ! अंत में बस यही कहूंगा कि आपको कुछ बुरा लगे तो उसके लिए मुझे खेद है, किन्तु जबाब देना जरुरी था ! आपने दो बार वही प्रतिक्रिया दी है ! ब्लॉग पर इतना समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !!

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय संतोष कुमार जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! ब्लॉगर किसी भी विषय पर लिख सकता है ! बाबा रामदेव जी कोई हिटलर नहीं, बल्कि हम और आप की तरह इंसान ही हैं ! उनपर भी लिखा जा सकता है ! यदि नियति को आप मानते है और ये भी मानते हैं कि नियति ने उनसे कुछ न कुछ सार्थक कार्य करवाया है ! फिर आपको ये भी मानना होगा कि नियति ने ये ब्लॉग लिखवाकर भी कुछ न कुछ सार्थक कार्य ही करवाया है ! उस दिन किसी और विषय पर लिखना चाह रहा था, किन्तु ये ब्लॉग लिखा गया ! व्यक्तिगत रूप से बाबा रामदेव का मैं विरोधी नहीं हूँ और न ही मैंने उनपर कोई व्यक्तिगत आरोप लगाए हैं ! जो देश के कई बुद्धिजीवी और अन्य लोग उनपर जो आरोप लगाते हैं, उसी की ही चर्चा लेख में की गई है ! बेशक समय ही उनके बारे में बहुत कुछ बताएगा, किन्तु चर्चा का अधिकार हमें भी है ! बाबा रामदेव के कई सामान अपने घर और आश्रम में हम प्रयोग करते हैं ! मेरा उनसे कोई लेना देना या बैर भाव नहीं है ! अपने समय की समाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक परिस्थितियों पर कबीर साहब से लेकर सभी संतों ने बहुत कुछ कहा है ! आज के साधू भी कह रहे हैं ! अंत में बस यही कहूंगा कि आपको कुछ बुरा लगे तो उसके लिए मुझे खेद है, किन्तु जबाब देना जरुरी था ! आपने दो बार वही प्रतिक्रिया दी है ! ब्लॉग पर इतना समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय संतोष कुमार जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आप इस मंच के पुराने ब्लॉगर हैं और मैंने आपकी कई पोस्ट पढ़ी है ! आप एक बुद्धिजीवी हैं और अच्छा लिखते हैं ! किन्तु मुझे अफ़सोस है कि आप भी उन्ही बुद्धिजीवियों कि जमात में शामिल हैं, जो अपने को बहुत चतुर समझते हैं और कोई तर्क न सूझने पर ईर्ष्या-द्वेष भावना में बहकर व्यक्तिगत प्रहार करना शुरू कर देते हैं ! खैर, आपकी ग़लतफ़हमी दूर करने के लिए आपको बता दूँ कि ब्लॉग का नाम 'सद्गुरुजी' भगवान का एक नाम है ! मेरा नाम सभी जानते हैं ! आपने आत्ममुग्धता का शिकार होने की बात की है और साधना करने तथा सुबह तीन बजे से रात ग्यारह तक जागने का सुझाव दिया है ! महोदय क्या ये आपकी आत्ममुग्धता नहीं दर्शाती है ! साधू से ये नहीं पूछना चाहिए कि आप कितनी देर जागते हैं, बल्कि उनसे ये पूछना चाहिए कि आप सोते हैं या नहीं ? मौज में आने पर अक्सर मैं तो पूरे 24 घंटे जागता हूँ ! चुपचाप शांत चित्त से समय को अपने सामने गुजरते हुए देखता हूँ ! रही बात साधना की तो ये हर मनुष्य के लिए एक गोपनीय विषय है और उस पर कुछ कहने का अधिकार आपको नहीं है ! संक्षेप में उस विषय में बस यही कहूंगा कि दुनिया कि सभी साधनाओं से ऊपर भी कुछ है और वो है वेद का ह्रदय में प्रकट होना ! फिर न किसी धर्मग्रन्थ की जरुरत होगी और न ही कोई साधना करने की ! ब्लॉग पर आप आये और प्रतिक्रया दिए, इसके लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

मान्यवर ,..सादर अभिवादन...... आपका लेख पढ़कर लगता है कि आप भी अपने जैसे ही हैं !...नाम कुछ और होने से क्या फर्क पड़ता है ,.......हा हा हा हा ..........मानव मन में तमाम भ्रम उत्पन्न होना स्वाभाविक लगता है !.......कभी कभी हमें भ्रम को उत्पन्न भी करना पड़ता है ,.......आप काफी मात्रा में आत्ममुग्धता के शिकार लगते हैं !.......आपका तो नाम ही सद्गुरुजी है ,...कुछ साधना वाधना भी कर लिया करो जी !......कृपया सलाह को अन्यथा मत लीजियेगा !...इस देश के पतन के पीछे हमारे और आपके जैसे लोग ही हैं !.जिन्होंने लालू जैसों को पावर दी है ,....और नियति ने उनसे भी कुछ न कुछ सार्थक काम करवाया है ,... कर्म के लिए शक्ति आवश्यक है !......बाबा रामदेव क्या हैं !..इसका सर्वमान्य उत्तर सिर्फ और सिर्फ समय ही दे सकता है !...तब तक हमें प्रतीक्षा करनी ही चाहिए !...वैसे तो शंकाएं पतनकारक होती हैं ,..लेकिन कभी कभी ये भी उत्थान का कारण बनती हैं !.....आप एक दिन सुबह तीन बजे से रात ग्यारह तक जाग कर देखिएगा !.......संसार में आकर कुछ कर सकते हो तो करना ही चाहिए ,...लेकिन अनावश्यक अनर्गल प्रलाप गलत है !...आपको यह बात किसी मीडिया ,जनता ,बुद्धिजीवी की तरफ से नहीं कही जा रही है ,...हा हा हा हा ..पुनः सादर अभिवादन

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

मान्यवर ,..सादर अभिवादन आपका लेख पढ़कर लगता है कि आप भी अपने जैसे ही हैं !...नाम कुछ और होने से क्या फर्क पड़ता है ,.......हा हा हा हा ..........मानव मन में तमाम भ्रम उत्पन्न होना स्वाभाविक लगता है !.......कभी कभी हमें भ्रम को उत्पन्न भी करना पड़ता है ,.......आप काफी मात्रा में आत्ममुग्धता के शिकार लगते हैं !.......आपका तो नाम ही सद्गुरुजी है ,...कुछ साधना वाधना भी कर लिया करो जी !......कृपया सलाह को अन्यथा मत लीजियेगा !...इस देश के पतन के पीछे हमारे और आपके जैसे लोग ही हैं !.जिन्होंने लालू जैसों को पावर दी है ,....और नियति ने उनसे भी कुछ न कुछ सार्थक काम करवाया है ,... कर्म के लिए शक्ति आवश्यक है !......बाबा रामदेव क्या हैं !..इसका सर्वमान्य उत्तर सिर्फ और सिर्फ समय ही दे सकता है !...तब तक हमें प्रतीक्षा करनी ही चाहिए !...वैसे तो शंकाएं पतनकारक होती हैं ,..लेकिन कभी कभी ये भी उत्थान का कारण बनती हैं !.....आप एक दिन सुबह तीन बजे से रात ग्यारह तक जाग कर देखिएगा !.......संसार में आकर कुछ कर सकते हो तो करना ही चाहिए ,...लेकिन अनावश्यक अनर्गल प्रलाप गलत है !...आपको यह बात किसी मीडिया ,जनता ,बुद्धिजीवी की तरफ से नहीं कही जा रही है ,...हा हा हा हा ..पुनः सादर अभिवादन

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

आदरणीय सिंह साहब ! सुप्रभात ! मैं तो उस समय इस मंच से जुड़ा ही नहीं था ! किन्तु उस समय के एक से बढ़कर एक अनगिनत विद्वानों की ढेरों प्रतिक्रिया पढ़कर यही लगता है कि साहित्यिक दृष्टि से वो इस मंच का स्वर्णिम युग था ! क्रिया-प्रतिक्रिया से दूर हो अब तो अधिकतर लोग सिर्फ लिखे जा रहे हैं ! यही वजह है कि बहुत सी अच्छी रचनाएँ एक प्रतिक्रिया पाने तक को तरस जा रही है ! उस समय यानि 2011 -12 में मंच पर ऐसी प्रतिभाशाली और सक्रीय विद्वत मंडली थी जो सबकी कलम को अच्छा से अच्छा लिखने को प्रोत्साहित रहती थी ! तब मंच पर काफी कम्पटीशन भी था, लेकिन यही कम्पटीशन ब्लॉगर को अच्छा से अच्छा लिखने को मजबूर भी कर देता था ! पुराने ब्लॉगरों कि रचनाओं तक किसी प्रतिक्रिया के जरिये ही फ़िलहाल पहुंचा जा सकता है ! उस समय के अधिकतर साहित्यकार मंच से आज गायब हैं, किन्तु उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक धरोहर मंच पर अब भी मौजूद है, जिसे न सिर्फ सम्भालकर रखने की जरुरत है, बल्कि उनतक सहजता से आज के ब्लॉगर पहुँच सकें, इसकी भी व्यवस्था करने की जरुरत है ! कुछ दिन पहले जागरण मंच को मैंने सुझाव दिया था कि पुराने ब्लॉगरों की रचनाओं तक आसानी से पहुँचने के लिए मंच न सिर्फ उनकी एक लिस्ट मुख्य पेज पर प्रकाशित करे, बल्कि सर्च करने की सुविधा भी प्रदान करे ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

रामदेव की महत्वाकांक्षा तो भारत का प्रधानमंत्री बनने की थी और कुछ वर्षों पूर्व दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली सहित उनकी विभिन्न आंदोलनकारी गतिविधियां अपने लिए राजनीतिक भूमि तैयार करने के उद्देश्य से ही प्रेरित थीं । आदरणीय जितेन्द्र जी एक बार फिर आपका विचार मुझसे मिल गया मैंने एक सपना देखा था और उसके आधार पर ब्लॉग लिखा था २०१४ का भारत - उसकी कुछ पंक्तियां यहाँ पोस्ट कर रहा हूँ- सपने में ही मुझे सन २०१४ का नजारा दिखने लगा. भारत स्वाभिमान पार्टी (बी एस पी) बहुत ही भारी बहुमत से जीती है. इन्हें दो तिहाई बहुमत मिल गया है. सभी राजनीतिक पार्टियों की जमानत जब्त हो गयी है. कुछ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में कुछ पत्रकार और साहित्यकार भी चुनाव जीत गए हैं. बाबा रामदेव को सर्वसम्मत्ति से प्रधानमंत्री बना दिया गया है और अन्ना हजारे राष्ट्रपति पद की शोभा बढ़ा रहे हैं. अन्ना जी अभी प्रधान मंत्री और उनके सदस्यों को शपथ दिलवाने की तैयारी कर रहे थे तभी उनके कक्ष में अरविन्द केजरीवाल का आगमन होता है.- “अन्ना, प्लीज बाबा से बात करो न! मुझे उप प्रधान मंत्री बना दें, नहीं तो उनको अकेले पीएमओ परेशान कर देगा. मैं उनके साथ साए की तरह रहूँगा. तो उनको कोई परेशानी न होने दूंगा”. अन्ना ने मोबाइल पर बाबा रामदेव से बात की और थोड़ी न नुकुर के बाद वे मान गए! अब शपथ ग्रहण समारोह शुरू हुआ प्रधान मंत्री के साथ उनके २० सदस्यीय मंत्री परिषद् ने शपथ ली. ब्लॉग का लिंक यहाँ दे रहा हूँ http://jlsingh.jagranjunction.com/2012/04/21/%E0%A5%A8%E0%A5%A6%E0%A5%A7%E0%A5%AA-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4/

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय जितेन्द्र माथुर जी, एक बार फिर आपका विचार मुझसे मेल खाया ... मैंने एक सपना देखा था और उसी पर आधारित एक ब्लॉग लिखा था २०१४ का भारत - उसकी कुछ पंक्तियां यहाँ उद्धृत कर रहा हूँ - सपने में ही मुझे सन २०१४ का नजारा दिखने लगा. भारत स्वाभिमान पार्टी (बी एस पी) बहुत ही भारी बहुमत से जीती है. इन्हें दो तिहाई बहुमत मिल गया है. सभी राजनीतिक पार्टियों की जमानत जब्त हो गयी है. कुछ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में कुछ पत्रकार और साहित्यकार भी चुनाव जीत गए हैं. बाबा रामदेव को सर्वसम्मत्ति से प्रधानमंत्री बना दिया गया है और अन्ना हजारे राष्ट्रपति पद की शोभा बढ़ा रहे हैं. अन्ना जी अभी प्रधान मंत्री और उनके सदस्यों को शपथ दिलवाने की तैयारी कर रहे थे तभी उनके कक्ष में अरविन्द केजरीवाल का आगमन होता है.- “अन्ना, प्लीज बाबा से बात करो न! मुझे उप प्रधान मंत्री बना दें, नहीं तो उनको अकेले पीएमओ परेशान कर देगा. मैं उनके साथ साए की तरह रहूँगा. तो उनको कोई परेशानी न होने दूंगा”. अन्ना ने मोबाइल पर बाबा रामदेव से बात की और थोड़ी न नुकुर के बाद वे मान गए! अब शपथ ग्रहण समारोह शुरू हुआ प्रधान मंत्री के साथ उनके २० सदस्यीय मंत्री परिषद् ने शपथ ली. पूरा ब्लॉग का लिंक भी दे रहा हूँ - http://jlsingh.jagranjunction.com/2012/04/21/%E0%A5%A8%E0%A5%A6%E0%A5%A7%E0%A5%AA-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4/

के द्वारा: jlsingh jlsingh

सटीक लेख है आपका आदरणीय सद्गुरु जी । व्यापार और राजनीति ही ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें कोई स्थायी शत्रु या मित्र नहीं होते तथा निजी हित को साधने के लिए अपनी सुविधानुसार सम्बन्धों को बनाया-बिगाड़ा जाता है । इस दृष्टि से योगगुरु रामदेव और लालू यादव दोनों एक ही श्रेणी में आते हैं । रामदेव की महत्वाकांक्षा तो भारत का प्रधानमंत्री बनने की थी और कुछ वर्षों पूर्व दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली सहित उनकी विभिन्न आंदोलनकारी गतिविधियां अपने लिए राजनीतिक भूमि तैयार करने के उद्देश्य से ही प्रेरित थीं । लेकिन शीघ्र ही वे इस सत्य को समझ गए कि प्रत्यक्ष रूप से राजनीति करना और भारतीय शासन व्यवस्था के शिखर पद तक पहुँच पाना उनके लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था । तब उन्होंने अपने व्यावसायिक हितों को साधने के लिए राजनीति में अप्रत्यक्ष भूमिका निभाना आरंभ कर दिया । मैं इस तथ्य की ओर ध्यानाकर्षण करना चाहता हूँ कि उनका वास्तविक नाम राम किशन यादव है और उन्होंने अपने लिए बाबा रामदेव का लोकप्रिय नाम इसलिए अपनाया क्योंकि बाबा रामदेव राजस्थान के एक अत्यंत लोकप्रिय एवं श्रद्धेय लोक देवता हैं जिनके राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में अनेक मंदिर हैं तथा जिनके ऊपर अनेक लोकगीतों एवं भजनों की रचना की गई है । बाबा रामदेव का निर्वाण स्थल रामदेवरा राजस्थान के जैसलमेर जनपद में है जहाँ प्रतिवर्ष भाद्रपद मास में मेला आयोजित होता है जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं । इस लोकदेवता के जनमानस में स्थापित नाम को अपने हित में भुनाने के लिए योगगुरु बनने के उपरांत राम किशन यादव ने अपना नामकरण बाबा रामदेव कर लिया और आज हाल यह है कि गूगल में 'बाबा रामदेव' शब्द लिखकर सर्च करने पर सारी सामग्री योगगुरु से संबंधित ही आती है और लोग भी 'बाबा रामदेव' के नाम से राजनीति और व्यापार में आकंठ डूबे योगगुरु को ही जानते हैं । आपने राजेंद्र कृष्ण द्वारा रचित 'गोपी' फ़िल्म के गीत का जो संदर्भ दिया है, वह सर्वथा उपयुक्त है । अब तो इस गीत के बोल चहुंओर चरितार्थ होते दिखाई देते हैं । रामचन्द्र ने इस गीत में जो सिया से कहा है, वही तो हो रहा है; वैसा ही कलयुग तो अब चल रहा है जिसमें रहने पर हम विवश हैं ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

श्री सद्गुरु जी रामदेव केवल ब्लैक मेलिंग कर रहे हैं पहले उन्होंने अखिलेश यादव से कहा था मैं बुंदेल खण्ड में कारखाना लगाना चाहता हूँ अपने क्षेत्र के लोगों को रोजगार देना किसे बुरा लगता है अब लालू जी से प्रेम करने पहुंच गए आपको शायद याद हो मोदी जी के चुनाव के दिनों में भी यह नाराज हो गए थे अपने कुछ भाई जियों को टिकट दिलवाना चाहते थे उन दिनों न्यूज नेशन में इन्हें बुलाया गया था मैं भी थी मैने इनसे पूछा था आप तो सन्यासी हैं योगी है कबीर दास जी का दोहा हैं यह तो घर है प्रेम का | खाला का घर नहीं | शीश कटाये भुहिं धरे तव पैठे इही माहि | आपके भाजपा के प्रेम में नाराजगी कैसी और डिमांड कैसी यहां तो बिना शर्त के समर्पण होता है इन्हें उत्तर नहीं सुझा थाअभी राज्य सभा के सदस्य मनोनीत किये गए हैं आप समझ गए होंगें इन्होने योग के क्षेत्र मैं बहुत काम किया इसमें कोइ दो राय नहीं है एक महा गठबंधन की कोशिश हो रही है इन्हें अपना काम बढ़ाना है जमीन चाहिए सस्ती लेबर चाहिए

के द्वारा: Shobha Shobha

जय श्री राम सद्गुरुजी आपके विचारो से हम बिलकुल सहमत नहीं हम भारतीयों में बीमारी है दुसरे की प्रसिष्ठा देख नहीं सकते विश्व भर में लाखो लोगो को योग और आयुर्वेद से फायेदा पहुँचाया पुरे विश्व में देश की प्रतिष्ट बढ़ाई बहुत तरह के सामन स्वदेश में तैयार करा कर विदेशी मुद्रा बची आपने शायद सुना नहीं उन्होंने आपतिकाल में अंग्रेज़ी दवा के लिए हमेश कहा यदि उनके योग से फायेदा नहीं होता तो इतने लोग उनके योग शिविरों और सुभाह टीवी में देख कर नहीं योग करते.बाबा पैसे देश के कार्यो में लगते कोइ दूसरा देश होता तो शायद उन्हें देश का सबसे ऊंचा सम्मान मिल जाता लेकिन भारत में काम कने वालो का विरोध होने लगता या आदि काल से आ रहा.राजीव दीक्षित की पुणे में संदिग्ध परिस्थित में मृत्यु हुई थी उसके लिए रामदेव जी को दोष नहीं दिया जाना चैये यहाँ तो लालू चारा घोटाले में फंसा अब नितीश कांग्रेस से मिल गया लोगो को जाति के नाम पर भड़का कर चुनाव जीता रामदेवजी योग दिवस के लिए गए कोइ निजी मामला नहीं रामदेव जी देश के महौरुष है और देशवाशियो को उनपर गर्व है.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर अभिवादन! आपने आरक्षण ब्यवस्था और गुजरात सरकार के वर्तमान नियम पर प्रकाश डाला है. मेरी जानकारी में बिहार में भी OBC में आर्थिक स्टार पर पिछड़े लोगों को आरक्षण का लाभ मिलता है जिनकी आमदनी ४ लाख सालाना है. इस हिसाब से ३३,३३३ रुपये मासिक आमदनी बैठती है. गुजरात सरकार का यह फैसला लोक लुभावन तो हो सकता है, सटीक नहीं. हाँ जिस घर में कोई नौकरी पेश नहीं है केवल कृषि आधारित आय है तो वह इसके परिधि में आ सकते हैं. आने दीजिये. सवर्ण बहुत दिनों से असंतुष्ट चल रहे हैं. उन्हें भी खुश हो लेने दीजिये. सरकार चलनी है या फिर से सत्ता में आनी है तो जाल तो फेंकने ही पड़ते हैं. हरियाण के जाट आंदोलन को हम सबने देखा है. कितना नुक्सान राष्ट्रीय संपत्ति का हुआ और महिलाओं के इज्जत को भी तार तार किया गया. हमारा समाज कहाँ जा रहा है. हम कभी देख भक्ति का राग अलापते हैं तो कभी धर्म और जातिके आडम्बर में फंस कर रह जाते हैं. होना तो यही चाहिए, 'सबका साथ सबका विकास' पर हो कहाँ रहा है?

के द्वारा: jlsingh jlsingh

उत्तराखण्ड मे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने हरीश रावत सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि राज्य में खनन और शराब में खुला भ्रष्ट्राचार किया गया है ! प्रदेश में खनन माफिया, शराब माफिया, भूमाफिया ने सरकार को जकडा हुआ था ! भय और भ्रष्ट्राचार का वातावरण पूरे प्रदेश में था ! 20-22 दिन के राष्ट्रपति शासन में एक सौ करोड़ से ज्यादा पेनाल्टी का पैसा हमारे प्रदेश के खजाने में आ गया है ! इस हिसाब से साढ़े चार साल में पांच हजार चार सौ करोड़ रुपए सरकार के लोगों के जेब में गया है, जबकि यह पैसा सरकार के खजाने में आना चाहिए था ! इसलिये कांग्रेस सरकार के उपर लगा भ्रष्ट्राचार का आरोप माफ नही हो सकता है. इसके खिलाफ भाजपा का संघर्ष जारी रहेगा ! भाजपा राज्य में सजग प्रहरी की तरह काम करेगी !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी उत्तम लेख आजकल इस कदर विज्ञापन द्वारा हर वस्तु बेचीं जाती है विज्ञापन को बूढ़े बच्चे हरेक के दिमाग में डाल देते हैं छोटे बच्चों को देखिये खाने में दाल सब्जी नहीं खाते कुरकुरे खाते हैं पानी की जगह पेप्सी या कोक पीते हैं गरीब भी यह सोच क्र बड़े लोगों के बच्चे जिन वस्तुओं का इस्तेमाल करते हैं व्ही अपने बच्चों को खिलाते पिलाते हैं एक बार एक काली लडकी मेरे पति के पास आई कहने लगी में गोरी होना चाहती हूँ फेयर एंड लवली खरीदना चाहती हूँ मेरी माँ नहीं मानती इन्होने जबाब दिया यदि फेयर एंड लवली से गोर होते तेरी आंटी सबसे पहले गोरी हो जाती | अच्छा स्वास्थ्य वर्धक भोजन न खाकर कृतिम प्रसाधनों के इस्लेमाल की रूचि बढ़ रही है सेलिब्रटी को देख कर उसी प्रोडक्ट का इस्तेमाल चाहते हैं ज्ञान कारी लेख

के द्वारा: Shobha Shobha

शत-प्रतिशत सहमत हूँ आपसे आदरणीय सद्गुरु जी । जनता के साथ होने वाली इस निर्मम ठगी में कोई भी अपनी सहभागिता से इनकार नहीं कर सकता और इसीलिए कानून को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसा कोई भी व्यक्ति या अभिकरण अपने उत्तरदायित्व से बचकर निकल न सके । प्रधानमंत्री के माध्यम से 'मेक इन इंडिया' का कोलाहल तो बहुत हो रहा है जिसमें विदेशी निवेशकों को भारत में न्यौता जा रहा है किन्तु ये अपने लाभ को ही सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले विदेशी निवेशक भारतीय जनता के प्रति अपने उत्तरदायित्व को ठीक से समझकर उसे भलीभाँति निभाएंगे, इस बात का ध्यान कौन रखेगा ? स्वदेशी आंदोलन चलाने वाले स्वर्गीय राजीव जी को मेरा नमन । आज ऐसे ही आंदोलन की आवश्यकता है । हमें विदेशियों के हितार्थ 'मेक इन इंडिया' नहीं वरन अपने देशवासियों के हितार्थ 'मेड इन इंडिया' चाहिए ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा:

श्री आदरणीय सद्गुरु जी श्री शंकराचार्य जी को लाइम लाइट में रहने की आदत है इसलिए वह साईं बाबा पर कमेंट कर देते हैं बूढ़े हैं शनी महाराज से डरते हैं शनि महाराज को आप जानते हैं क्रूर ग्रह मानते हैं मैं चैनलों पर जब भी शंकराचार्य जी और साईं भक्तों का विवाद हुआ है बुलाई गई हूँ मैने जम कर साईं बाबा का विरोध किया मेरा विरोध इस बात का है सनातन धर्म के मंदिरों में हमारे भगवान विराजते हैं वहां इनका क्या काम यह संत थे संत की तरह उनको माने यहां काफी मंदिरों मैं साईं की मूर्तियां लगा दी है जिसके लिए पैसा दिया जाता है यहाँ साईं भक्त प्रमुख हो गये | शंकराचार्य के सहायक भी चैनल में आते हैं उनसे हम कहते हैं आप उनको समझाएं ऐसे न बोलेन वः मुस्कराते हैं सब राजनीति हैं |

के द्वारा: Shobha Shobha

दृढ़-इच्छाशक्ति के बिना शठे शाठ्यम समाचरेत की नीति को कार्यान्वित करना संभव नहीं है सदगुरु जी । इसके लिए अपनी अंतर्राष्ट्रीय नेता की छवि बनाने का मोह त्यागकर राष्ट्रहित को ही सरोपरि मानना होगा । तब ही बात बनेगी । पाकिस्तान बदल नहीं सकता । वह भारत का विरोधी था, है और रहेगा । वहाँ की शासन-व्यवस्था और प्रशासन-तंत्र के सभी अंग ग़ैर-मुस्लिमों के विरोधी थे, हैं और रहेंगे । हमें अपनी पाकिस्तान संबंधी नीति बहुत सोच-समझकर बनानी होगी तथा उसकी सार्वजनिक अभिव्यक्ति तथा कार्यान्वयन में अतिशय सावधानी का परिचय देना होगा । हमें यह नहीं देखना चाहिए कि पाकिस्तान क्या चाहता है या संसार क्या चाहता है । हमें तो यह देखना चाहिए कि हम क्या चाहते हैं ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

आंतकवाद एवं परमाणु अप्रसार पर कांग्रेस की एक उपसमिति की अध्यक्षता करने वाले एक शीर्ष अमेरिकी सांसद पो ने एक साल पहले अपने एक पत्र में ओबामा से अपील की थी कि वह अमेरिका और पाकिस्तान के बीच असैन्य परमाणु समझौते के संबंध में किसी भी प्रकार की वार्ता नहीं करें ! उन्होंने पाकिस्तान के बारे में कहा था, "पाकिस्तान ने बार बार स्वयं को धूर्त और धोखेबाज साबित किया है !" पो ने आरोप भी लगाया था, "यह देश न केवल अफगानिस्तान में अमेरिकी बलों और उनके हितों पर हमला करने वाले आतंकवादी संगठनों को आश्रय देता है बल्कि उसने ईरान जैसे देशों के साथ पूर्व में किए गए परमाणु सौदों के मामले भी अपनी ईमानदारी साबित नहीं की हैै !"

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी आपके इस लेख को मैने कई बार पढ़ा मुझे एक बात याद आई एक पाकिस्तानी डाक़्टर हुनर गुल ने मुझे बताया जब हिन्दुओं ने इस्लाम ले लिया कैसे लिया यह नहीं लिखूंगी हा वह घंटो मंदिरों के बाहर खड़े होकर रोते थे भजन में गायी जाने वाली राम धुन पर सर पटकने लगते थे उनके लिए नाद और कव्वालियां लिखी गईं वह जब उनको गाते थे अपना कलेजा निकाल कर रख देते थे |वह भी सूफी म्यूजिक के साथ चलता है |वह बड़े दर्द से बताते थे मैं वहीं पहुंच गई उनका दर्द आज भी पंजाब के लोक संगीत मैं झलकता उस मूरत नूं मैं की आखाँ आँखा ते जाने जहांन आखां सच आंखन ते रब दी शान आखाँ किते मैहर अड़ी किते मेरी चन्ना इन्हें पाकिस्तान की सूफी संत आबिदा प्रवीन गाती हैं मुझे इतना ही याद है

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री आदरणीय सद्गुरुजी हमारे परिवार में एक शादी थी उस दिन भयानक ठंड थी सभी महिलाओं ने अपने स्वेटर शाल एक जगह पर ढेर लगा दिया और बरात के साथ चल दीं मेरे ननदोई सज्जनता में उनका जबाब नहीं वह स्वेटरों का ढेर उठा कर बरात में लेकर आये उन्होंने कहा अरे आप लोग स्वेटर और शाल पहन लो कितनी ठंड है सभी नाचती औरतें चिढ गईं आपसे किसने कहा था स्वेटर ले कर आओं बिचारे की समझ नहीं आ रहा था क्या करें उन्होंने रिश्तेदार भाबी जो बूढी थी से कहा आप तो पहन लो बुढ़ापे का शरीर है वह इतना चिढ़ी क्या तुम्हें मैं ही बूढी नजर आ रही हूँ मैने उनसे कहा आप स्वेटर व्ही रख आइए जहां से लाये थे आज उन्हें गर्म स्वेटर की बात कहना सबसे गाली लगेगा मेरी सुनिए मेरी कजन हैं वह मुझसे शायद कुछ ही बड़ी है वह एक परिवार के समारोह में अपने पोते पोतियां और नाती सम्भाल कर बैठी थी मैं उनकी बहुओं और बेटी और उनके हमउम्र की रिंग लीडर बन कर सबके साथ नाच रही थी अचानक मेरी बहन ने मुझसे पूछा शोभा तुम्हारी ाेज उम्र कितनी है मुझे इतना गुस्सा आया मैने कहा तुमने मेरा रिश्ता कराना है |औरत की उम्र तो रुकी ही अच्छी |

के द्वारा: Shobha Shobha

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विस्फोटक स्थिति के बीच हलकी-फुल्की ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

अंत में इस सारी चर्चा का सार ये है कि हमारा देश हिन्दुस्तान हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई हम सभी का है और हम सभी को सुख चैन से यहाँ पर रहने का अधिकार है, किन्तु हम सबको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि देश सबसे ऊपर है, अपने धर्म से भी ऊपर ! हमारा देश सुरक्षित, सम्पन्न और शांतिपूर्ण है, तभी हम सबका जीवन भी सुरक्षित, सम्पन्न और शंतिपूर्ण होगा ! देशप्रेम हम जापानियों से सीखें, जो कहते हैं कि बुद्ध हमारे भगवान हैं, लेकिन यदि वो हमारे देश पर आक्रमण करते हैं तो वो हमारे सबसे बड़े दुश्मन हैं ! हम उनसे युद्ध कर उन्हें हरा देंगे ! देश सबसे ऊपर है ! जापानियों की दृष्टि में देश धर्म से भी ऊपर है ! यही राष्ट प्रेम हममे भी होना चाहिए ! जयहिंद !!

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श‍िवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत माता के नारे पर फड़नवीस पके हुए केले की तरह नरम पड़ गए हैं ! शिवसेना के अनुसार ओवैसी पर देशद्रोह का मामला लगाकर जेल में बंद करना चाहिए था ! मंगलवार को उसके मुखपत्र सामना में लिखा गया, 'अखंड भारत के लिए आंदोलन करने वाले श‍िवसैनिक को डकैती का आरोप लगाकर जेल भेज दिया जाता है और अपने ही महाराष्ट्र में हैदराबाद का ओवैसी आता है और गला काटा तो भी भारत माता की जय नहीं बोलूंगा ऐसा थूक कर चला जाता है. उस ओवैसी पर देशद्रोह का मामला लगाकर उसे घसीटकर लाते हुए कसाब की कोठरी में धकेलने की मुख्य्मंत्री ने हिम्मत क्यों नहीं दिखाई?'

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सुप्रभात ! आपने बहुत अच्छे संस्मरण के साथ जो मैं कहना चाहता था वो कह दिया है ! हर छोटे बच्चे को चाहे कार्टून के द्वारा या फिर अन्य तरीके से ये सिखाना जरुरी है कि "play with me but don't tuch me stay there I dont like kissi and huggi" अर्थात "मेरे साथ खेलो पर मुझे छुओ मत ! दूर रहो ! मैं किसिंग और लिपटाना-चिपटाना पसंद नहीं करती !" आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! बहुत कारगर और सुन्दर वाक्य है ! छोटे बच्चों को जरूर रटाना पसंद करूंगा ! दरअसल मासूम बच्चों का शोषण देख खून खोलने लगता है ! कोई सुन्दर और सुगन्धित फूलों से हरा भरा गमला है तो वो दूर से देखने में ही अच्छा लगता है ! लेकिन कुछ लोंगो की प्रवृति ही मनोविकृत होती है ! जबतक दो चार फूल तोड़ न ले उन्हें चैन नहीं आता है ! मुझे अपने यहाँ गमले में खिले फूलों की भी रक्षा करनी पड़ती है ! बहुत से मेहमान नहा धोकर फूल तोड़ने पहुँच जाते हैं ! मैं साफ़ कहता हूँ कि देखो, फूल मत तोड़ना ! बस गमले के सामने खड़े हो अपने इष्ट को याद करो और उसे गमले समेत फूलों से लदा पौधा अपने मन ही मन समर्पित कर दो ! अधिकतर को ये बात नहीं भाती है ! सनकी साधू समझ हंसने लगते है ! ब्लॉग पर समय देंने के लिए सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री राजेन्द्र जी "किसी महिला या पुरुष ने उसके गाल पर किस किया नहीं कि रोते हुए आकर मुझसे लिपट जाती है. शांतिप्रिय स्वभाव का होते हुए भी उनकी इस अक्षम्य हरकत पर मुझे गुस्सा आ ही जाता है. मैं अपने सारे मेहमानों, परिचितों और आश्रम से जुड़े लोंगो को मना भी करता हूँ कि बच्ची को किस न करें. बहुत से अनपढ़, गंवार से लेकर अच्छे खासे पढ़े लिखे लोंगो के ऊपर भी प्यार जताने का ऐसा भूत सवार रहता है" हमारे यहाँ विदेशी मेहमान आईं उनकी केवल ढाई साल की बेबी थी सभी प्यार जताना चाहते बच्ची कड़कती आवाज में डांटती play with me but don't tuch me stay there I dont like kissi and huggi बच्ची की माँ से मैने पूछा यह क्या ?उसने बताया में एक कार्टून फिल्म लायी उसमें बच्चों को कैसे रहें शिक्षा दी जाती है मुझे जब कोइ कहता है मैं उनको कह देती हूँ कार्टून की भाषा बोलती है असल में मैने अपनी बेबी को यहां लाने से पहले तैयार कर दिया |आप भी बच्ची को बोल्ड बना दे खुदी डांट देगी यह आज के समय की जरूरत है

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपकी टिपण्णी अनुभव से परिपूर्ण होती है, इसलिए बहुत विचारणीय भी होती है ! आपने बिलकुल सही कहा है कि आतंकवाद से ग्रसित कई देशों में मुस्लिम अपना जीवन बचाने के लिए घरबार छोड़ के योरोप के सुरक्षित देशों की ओर भाग रहे हैं ! उन्हें ऊपर वाले पर इतना ही भरोसा है तो अपने ही देश में रहना चाहिए ! इससे ये साबित होता है कि अपने मुल्क को सबसे ऊपर रखना चाहिए, ऊपर वाले से भी ऊपर ! मुल्क सही सलामत है तभी हम सुख चैन से जीवन जीते हुए बिना किसी भय के ऊपर वाले की अच्छे ढंग से इबादत कर सकते हैं ! आपकी इस बात से पूर्णतः सहमत हूँ कि फतवे राजनीति करने के मकसद से जारी होते हैं और ये वोट बैंक की राजनीति करने वाले देशों में ही चलते भी हैं, जैसे भारत ! सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी नास्‍त्रेदमस के ग्रंथ ‘द प्रोफेसीज’ का गहराई से अध्ययन करने पर पता चलता है कि 2025 तक यह व्‍यक्ति भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की कायापलट कर देगा. नास्‍त्रेदमस ने इक्कीसवीं सदी में एंटीक्रिस्ट यानि ईसाई विरोधियों का जन्म होने और उनसे भीषण युद्ध यानि तृतीय विश्व युद्ध होने की बात कही है.एक मैगजीन हमारे यहाँ आती थी प्लेन ट्रुथ उसमें एक लेख था शायद समय भी दिया था मुझे याद नहीं मुख्य प्रसंग याद है एक दिन ईस्ट वेस्ट की सेनाये मिडिल ईस्ट में धर्म युद्ध करने जायेंगी इसमें दुनिया का हर देश भाग लेने के लिए मजबूर होगा | आप देख रहें हैं क्या हो रहा हैं अभी आप और देखेंगे | एक बात और मैने महम्मद शीर्षक से पढ़ी है १४०० वर्ष बाद दुनिया चाँद पर पहुंच चुकी होगी बहुत ऊंची- बिल्ग्डिंग होंगी एक युद्ध होगा आगे में लिख नहीं सकती कंट्रो वर्षल हो जाएगा बहुत अच्छा लेख

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! जागरण जंक्शन मंच के संचालकों की लापरवाही और सुस्ती के कारण बहुत सी रचनाएँ फीचर नहीं हो पाती हैं ! रोज वो लोग फीचर पोर्टल चेन्ज करेंगे, तभी अधिकतर रचनाएँ फिचर हो पाएंगी, क्योंकि रोज लगभग सौ रचनाएँ लोग पोस्ट करते होंगे ! मुझे लगता है कि मंच की देखरेख करने वाले कर्मियों की कमी है ! अब तो इस मंच पर पुराने ब्लॉगरों को ढूंढना भी आसान नहीं है, क्योंकि सर्च करने वाला ऑप्शन ही ख़त्म कर दिया गया है ! लिखना बंद करने के बाद आप अपने ब्लॉग को तो यूजर नेम और पासवर्ड के जरिये ढूंढ लेंगे, किन्तु दूसरे लोग आपके ब्लॉग तक नहीं पहुँच पाएंगे ! ये इस मंच की सबसे बड़ी कमी है ! पोस्ट पसंद करने के लिए और होली की बधाई देने के लिए धन्यवाद !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

श्री आदरणीय सद्गुरु जी, पंजाब के प्रसिद्ध लोक गीत के साथ आपने विवाह का अति सुंदर वर्णन किया है. मैं आगे थोड़ा लिख दूँ. बेटी की डोली जब घर के मुख्य द्वार पर पहुंचती है, बेटी फिर बाबा से गुहार लगाती हुई कहती है- "बाबा मेरा डोला दरवाजे से नहीं निकल पा रहा है." बाबा कहता है- "मैं एक-एक ईंट हटा दूंगा. बेटी अपने घर जाओ." डोला घर की चोखट से निकल कर गलियाँ पार करता हुआ खेतों की पगदंडी से गुजर रहा है. बेटी का अब मोह भंग हो गया है. उसने जौ की बाल तोड़ी और जौ निकाल कर बिना पीछे देखे सर से ऊपर से पीछे डालते हुए कहा- "मेरे जन्म दाता, माँ बाबा, मेरे भाईयो और मेरे परिजनों! तुम खुश रहो. खूब फलो फूलो. मैं तो परदेस जा रही हूँ. वहाँ जा रही हूँ जहाँ मेरा भाग्य ले जा रहा है. डोली एक दरवाजे पर रुकी. दुल्हन के स्वागत के लिए दुल्हे के परिजन खड़े थे. डोली रुक गयी. अब यही उसका घर आंगन था. डॉक्टर शोभा भारद्वाज.

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श्री आदरणीय सद्गुरु जी पूरे विवाह का वर्णन पढ़ा बहुत हंसी आई अपनी शादी याद आ गयी डॉ साहब ने मेरे पिता जी से कहा मेरे चाचा और भाईउनको बरात में जा कर क्लेश करने की आदत है मेरे पिताजी ने कहा आप चिंता न करें मेरठ के अस्पताल के इंचार्ज और एक बिजनेस मैंन थे दोनों फाइन पर्सनैलिटी उनको मेरे पिता जी ने इन दो महानुभावों की सेवा में लगा दिया| बस पूछिए मत उन्होंने जब वह गुस्से का मूड़ बनाते दोनों उन्हें कहते गुस्सा नहीं करना अरे आप दोनों कितने सुंदर हैं गुस्सा करते ही अजीब लगते हैं पूरी शादी शांति से निपट गयी | मेरे सुसराल की बिरादरी की पहली शादी थी जो उन क्लेशी लालों के होते हुए शान्ति से निपट गयी थी| परन्तु जब भी उन्हें गुस्सा आता मुझे आवाज लगाते मैं भाग कर आती भाग कर कहती आती हांजी जी चाचा जी वः कहते अरे तेरी साँस चढ़ रही हए आराम से आराम से

के द्वारा: Shobha Shobha

मीडिया मे छपे समाचार के अनुसार जेएनयू की एक उच्चस्तरीय समिति ने कथित रूप से राष्ट्रविरोधी नारेबाजी मामले में छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत चार अन्य को निकालने की सिफारिश की है. समिति ने पिछले महीने आतंकी अफजल गुरु को लेकर आयोजित कार्यक्रम में कथित भूमिका को लेकर कन्हैया कुमार, उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और दो अन्य को निकालने बात कही है. ये सभी छात्र विश्वविद्यालय नियम एवं अनुशासन के उल्लंघन के दोषी पाए गए थे. उच्चस्तरीय समिति ने एक महीने से अधिक समय की जांच के बाद पांच छात्रों को निकालने की सिफारिश की है. हालांकि इस संबंध में अंतिम फैसला कुलपति और प्राक्टर कार्यालय द्वारा किया जाएगा.

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के द्वारा: nishamittal nishamittal

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन मिट जायेंगे मिटाने वाले, ये हिन्दुस्तान है - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन देश की पहली मिसाइल 'पृथ्वी' और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

आदरणीय डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आज से दो साल पहले इस प्रेम व्यथा ने मुझे काफी प्रभावित किया था ! पांडे जी ने जब ये व्यथा मुझे सुनाई थी तो मेरी आँखों में आंसू छलक आये थे ! उस समय भी संक्षेप में चर्चा मैंने की थी ! वास्तविक और निःस्वार्थ भाव वाली कुछ प्रेम कहानियों को लिखना शुरू किया तो इस पूरी वाकये को विस्तार से मंच पर रखने की इच्छा हुई ! वो प्रेमी जोड़े तो अब इस दुनिया में नहीं हैं, किन्तु उनकी यादें संजोकर रखने वाली हैं ! बसंत के मौसम में आज कल की घटिया राजनीति से मन उबा तो सोचा हमारे समाज की कुछ उन वास्तविक और आदर्शमय प्रेम कहानियों को मंच पर प्रस्तुत करूँ, जो मैंने देखी या फिर सुनी हैं ! मंच पर समय देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आपका लेख पढ़कर जगदीश गुप्त जी के अमर गीत - 'सच हम नहीं, सच तुम नहीं, सच है सतत संघर्ष ही' की पंक्तियाँ याद आ गईं - 'हमने रचा, आओ हमीं अब तोड़ दें इस प्यार को, यह क्या मिलन, मिलना वही जो मोड़ दे मझधार को, जो साथ कूलों के चले, जो ढाल पाते ही ढले, वह ज़िंदगी क्या ज़िंदगी जो सिर्फ़ पानी सी बही' । अनुकरणीय और स्तुत्य विचार हैं आपके सद्गुरु जी । अभिनंदन । सच्चा प्रेम तो वही है जो आगे बढ़ने की प्रेरणा दे और किसी लक्ष्य तक पहुँचाए । और प्यार दिल में सदा ही रहता है चाहे उसे शादी की मंज़िल नसीब न हो सके । सामाजिक रूप से किसी और से बंध जाने पर भी उसे विस्मृत नहीं किया जा सकता जो कभी प्राणप्रिय रहा हो क्योंकि जिन्हें हम भूलना चाहें, वो अकसर याद आते हैं ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

के द्वारा: nishamittal nishamittal

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! आपने मेरी बात का समर्थन किया, इसके लिए हार्दिक आभार ! कृतिका का प्रसंग बहुत जटिल था ! अपने घर में उसने किसी की बात ही नहीं मानी ! किन्तु ईश्वर की कृपा से मेरा समझाना काम कर गया ! जो कभी मरने मारने पर उतारू थी, आज वो बहुत सुखी जिंदगी बसर कर रही है ! मेरी राय में कोई भी गुरु शरीर रूप से उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना कि उसका गुरुत्व ! उसे सदैव आगे आगे रहना चाहिए, क्योंकि शिष्यों और सांसरिकों के लिए वो बड़े काम का है ! आज हो उल्टा रहा है ! गुरुओं का शरीर आगे आगे चल रहा है और गुरुत्व या तो पीछे है या फिर गायब ? ब्लॉग पर आने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: sadguruji sadguruji