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सद्गुरुजी

आदमी चाहे तो तक़दीर बदल सकता है, पूरी दुनिया की वो तस्वीर बदल सकता है, आदमी सोच तो ले उसका इरादा क्या है?

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sadguruji


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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! ब्लॉगरों की समस्याओं को मच पर उठाने के लिए सभी ब्लॉगर मित्र आपके आभारी हैं ! इस मुद्दे पर आदरणीया यमुना पाठक जी का सहयोग और समर्थन बहुत महत्व रखता है ! मैं उनका ह्रदय से आभारी हूँ ! आदरणीय संतलाल करुण जी ने 'विरह-हंसिनी' नामक लाजबाब कविता लिखी है ! इस कविता पर कमेंट भी भेजा था, पर उसका पता नहीं ! कमेंट नहीं जाने से ब्लॉगरों की हार्दिक भावनाओं को ठेस पहुँचती है, मन खिन्न होता है और नए लेखकों की कलम प्रोत्साहन के अभाव में निराश हो दम तोड़ देती है, इसलिए प्रतिक्रिया बहुत महत्व रखती है ! सबको उम्मीद है कि जल्द ही कोई रास्ता निकलेगा ! सुधार और नवीनता लिए वो सुबह कभी तो आएगी.. वो सुबह कभी तो आएगी

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री सद्गुरु जी "सद्गुरू जी का बड़प्पन है कि उन्होंने मेरा नाम लिखा मैं उनकी आभारी हूँ .और इस ब्लॉग के लिए आपकी बहुत आभारी हूँ ….प्रतिक्रियाएं ना जाने से मैं भी अपनी बात किसी भी ब्लॉग पर नहीं पोस्ट कर प् रही थी फिर सोचा क्या पता स्पैम में जाने पर ही ब्लॉगर साथी पढ़ सकें अतः कोशिश करती रही . यह सच है कि इस प्रतिष्ठित मंच ने हम सब को वैचारिक दुनिया के माध्यम से एक दूसरे से जोड़ दिया है तभी तो यह मंच अनुपम है .मुझे आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि जागरण मंच की टीम इस समस्या को ज़रूर हल करेंगे ताकि हमें नए विचार ,नए हल सदा पढने को मिलते रहे . आपको और सद्गुरू जी को बहुत बहुत धन्यवाद यमुना पाठक"

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: rajuahuja rajuahuja

के द्वारा: rajuahuja rajuahuja

के द्वारा: rajuahuja rajuahuja

देशभर के अनेक पुलिस थानों में बलात्कार की शिकार महिलाओं की शिकायत जल्दी सुनी ही नहीं जाती है और कई स्थानो पर तो पीड़ित महिला को ही उल्टे खरी-खोटी सुना उनसे दुर्व्यहार करते हुए थाने से दुत्कार कर भगा दिया जाता है। पुलिस जनता की रक्षक कही जाती है, परन्तु यह दुखद है कि कई राज्यों में अनेक पुलिस वालों पर ही बलात्कार के गंभीर आरोप लगे हुए हैं। जाँच के बाद बहुत से आरोप सच साबित होते हैै। ये खाकी वर्दी पर लगने वाले अविश्वास के दाग सिद्ध हो रहे हैं। ये दाग ईमानदार नेताओं और कर्तव्यपरायण पुलिस वालों का सिर भी शर्म से झुका दे रहे हैं। पुलिस द्वारा बलात्कार, ह्त्या व कई तरह के अन्य अपराधों की न जाने कितनी घटनाएँ पूरे देशभर में प्रतिदिन घट रही हैं। सरकार के लिए यह बहुत चिंता करने वाली और खतरे की बात है कि जनता का विश्वास पुलिस पर से दिनोदिन उठता चला जा रहा है।

के द्वारा: sadguruji sadguruji

भारत में ब्रिटिश अंग्रेजों की राजधानी कलकत्ता में, पुछल्ले कांग्रेसी मेम्बरों के द्वारा, कांग्रेस पार्टी के महा अधिवेशन ने १९११ में, जमींदार घराने से ताल्लुक रखने बाले ठाकुर रविन्द्र नाथ ने, वैरिस्टर मोहन दास करम चंद गांधी के साथ सार्वजनिक रूप में, जार्ज पंचम के स्वागत का स्तुति गान सुनाया था..!! उनके इस गीत को संगीत के स्वरों में कैप्टन ठाकुर राम सिंह ने संबारा था. और, नेता जी सुभाष चंद बोष भी, उस समय वहां पर पंकित में खड़े थे..!! यह कहना कि गांधी जी अंग्रेजों के स्तुति गान से प्रसन्न नहीं थे, यह एक मन गढंत व्यक्तव्य है. इस चरित्र ने जिंदगी में कभी कहीं बंदेमातरम का उद्घोष ही नहीं किया था..? फिर भी, अद्भुत और कथित राष्ट्र के पिता का सम्मान दे दिया गया था..?

के द्वारा:

आदरणीय विष्ट जी ! नई सुबह सबके लिए मंगलमय हो ! पोस्ट के प्रति आपके द्वारा व्यक्त किये गए अनमोल सहयोग और समर्थन के लिए आपका ह्रदय से आभारी हूँ ! सदियों तक विधर्मियों की गुलामी झेलने के बाद अब तो हिन्दुओं में सकारात्मक सोच और एकजुटता आये, इस लेख को लिखने का यही मकसद था ! आपके प्रोत्साहन देने वाले समर्थन के लिए हार्दिक आभार ! मंच पर तकनीकी समस्या बराबर आ रही है, जिससे ब्लॉगरों के बीच संवादहीनता की स्थिति उतपन्न हो जा रही है ! सम्मानित मंच को इस ओर ध्यान देना चाहिए ! कभी कभी तो ऐसा लगता है कि जैसे ये मंच उचित देखभाल के बिना अनाथ ओर बेसहारा हो गया हो ! कॉमेंट अभी भी सीधे न आकर स्पैम में जा रहे हैं ! तकनीकी दिक्कत अभी भी है ! इस मंच पर दिनभर वशीकरण ओर काला जादू के ब्लॉग पोस्ट होते रहते हैं ! पता नहीं ये विज्ञापन हैं या अनुमति प्राप्त पोस्ट ! यदि ये अवैध हैं तो मंच को चलाने वाले तकनीशियन ओर आदरणीय संपादक महोदय इसके खिलाफ कोई एक्शन क्यों नहीं लेते हैं ? आश्चर्य की बात है कि भोले भले लोंगो को ठगने वाले और समाज में अन्धविश्वास फ़ैलाने वाले इन ब्लॉगों का रजिस्ट्रेशन कैसे हो जा रहा है ? यह मंच की गरिमा को नष्ट कर रहा है ओर समाज में सकारात्मक सोच व बदलाव लाने में जुटे माननीय बुद्धिजीवी ब्लॉगरों का भी उपहास उड़ा रहा है ! आदरणीय संपादक महोदय और मंच के सम्मानित तकनीशियन कृपया इस और ध्यान दें और तुरंत कार्यवाही करें ! हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी बहुत अच्छा लेख परन्तु में आराम से अब पढ़ सकी हूँ सद्गुरु जी मेरे कुछ रिश्तेदार विदेश में रहते है वह बैंकाक के रास्ते भारत आ रहे थे इस क्षेत्र के लोग ज्यादातर बुद्ध धर्म को मानते हैं वह होटल की खडकी पर बैठे थे उन्होंने देखा होटल से कुछ दुरी पर बुद्ध भगवान की बहुत बड़ी मूर्ति हैं एक महिला आई वह बतख ले कर आई उसने उसको काटा कुछ देर तक वहाँ आँख बंद कर बैठी रही फिर प्रशाद की तरह घर ले गई वह बड़े हैरान हुए बुद्ध धर्म में अहिंसा प्रमुख हैं उन्होंने भारत आ कर सबसे कहा किसी के समझ नहीं आया हमारे एक भाई सन्यासी भी थे वः अब दुनिया में नहीं रहे उन्होंने बताया धर्म का मूल रूप जहाँ से उसका उद्गम होता है वहाँ रहता है अन्य स्थानों पर वह जरूरत के अनुसार बदल जाता है |

के द्वारा: Shobha Shobha

कपालभांति प्राणायाम करके तुरंत अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने से ज्यादा लाभ होता है और अनुलोम-विलोम प्राणायाम बहुत असरकारक ढंग से और सहज रूप से स्वांस की गहराई से होता है, जो जल्दी और ज्यादा फायदा करता है ! कपाल भाति से पहले भस्त्रिका प्राणायाम करना चाहिए और अनुलोम-विलोम प्राणायाम के बाद भ्रामरी प्राणायाम और अंत में उद्गीत प्राणायाम करना चाहिए ! भस्त्रिका प्राणायाम करने से सम्पूर्ण शरीर को ऑक्सीजन प्रचुर मात्रा में मिल जाती है ! कपालभाति प्राणायाम उसे संतुलित और सारे शरीर में प्रसारित करता है ! इन दोनों प्राणायामों को करने के वावजूद भी जो कमी रह गई हो उसे अनुलोम-विलोम प्राणायाम पूरा करता है ! इन तीनों तरह के प्राणायामों को करने के उपरांत भ्रामरी प्राणायाम और अंत में उद्गीत प्राणायाम करना चाहिए !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

भ्रामरी प्राणायाम को करते समय भ्रमर अर्थात भंवरे जैसी गुंजन होती है, इसी कारण इसे भ्रामरी प्राणायाम कहते हैं ! इस प्राणायाम मे जोर से पूरक करते समय यानी श्वास अंदर लेते समय भंवरी जैसी आवाज और फिर रेचक करते समय यानी श्वास बाहर छोड़ते समय भी भंवरी जैसी आवाज उत्पन्न होती है ! सुखासन, सिद्धासन या पद्मासन में बैठकर सर्वप्रथम दोनों होथों की अनामिका अंगुली से नाक के दोनों छिद्रों को हल्का सा दबाकर रखते हैं ! दोनों होथों की तर्जनी को कपाल पर, मध्यमा को आंखों पर, सबसे छोटी अंगुली को होठ पर रख अंगुठे से दोनों कानों के छिद्रों का बंद कर देते हैं ! फिर श्वास को धीमी गति से गहरा खींचकर अंदर कुछ देर रोककर रखते हैं और फिर उसे धीरे-धीरे आवाज करते हुए नाक के दोनों छिद्रों से बाहर निकाल देते हैं ! ‍श्वास छोड़ते वक्त अनामिका अंगुली से नाक के छिद्रों को हल्का सा दबाने पर कंपन उत्पन्न होती है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

जय श्री राम सद्गुरुजी अपने देश की हालत पर बहुत सटीक लेख लिखा.ऍम पच्छिमी देशो और अमेरिका की तरह नातिकता वाली राजनीती क्यों नहीं करते और क्यों अदालते जल्दी और कठोद फैसला नहीं लेती.लाल्प्प ऐसा बेशर्म को जमानत नहीं मिलनी चैये न ही रहनीति करने की इज़ाज़त,वैसे मुलायम,मायावती,ऐसे नेताओ को बहार रहना गंदी राजनीती हो सबसे ज्यादा देश को सोनिया ने लूटा पर अभी भी रानी बनी है.देश में मोदी के खिलाफ सेकुलरिज्म ले नाम पर मोर्चा बन रहा जिसका एक उद्देश मोदीजी को हरो.देखना बिहार की जनता कैसे वोट करती है.नितीश निम्न स्तर की राजनीती कर रहा है.तीस ऐसी राष्ट्रोही नेता मौज कर रही है.देश कब सुधारेगा मोदीजी से बहुत उम्मीद है.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

श्री राजेन्द्र जी मुझे एक प्रसंग याद आया हम विदेश मैं थे मेरे पति के पास एक बूढी महिला लाई गई उसने कहा मैं मरना नही चाहती उसका पोता खुद ७५ का था उसने कहा डाक्टर तीन दिन से कब्र खोदी हुई है बर्फ मैं कब्र खोदना आसान नहीं है मम्मा पीरा जाने को तैयार ही नहीं है डाक्टर का धर्म था वह वृद्धा बच गई और काफी समय तक ज़िंदा रही हम हिन्द औए जब वापिस गए वह मर गई थी उसकी फातेहा खानी थी उसमें उससे भी ज्यादा बूढी रिश्तेदार आई थी कहते हैं वह मरते समय केवल डाक्टर - जान कह रही थी इन्सान भी क्या है पांचों वक्त की नमाजी भी मौत से भयभीत थी जीना सबको अच्छा लगता है मेरी खुद की दादी माँ मौत से इतना डरती थी जब भी कुछ तकलीफ होती हम सब उनको घेर लेते जैसे उन्हें बचा लेंगे अचे लेख के लिए धन्यवाद

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री आदरणीय सद्गुरु जी आपका लेख पढ़ा मुझे ज्यादातर रात को समय मिलता है तभी मैं लगभग हर लेख पढ़ती हैं आपके लेख इत्मीनान से पढ़ती हूँ रात को बारह बजे का समय था कभी मौत के बारे मैं सोचा ही नहीं जबकि परिवार में बहुत से लोगों को मौत से लड़ते देखा डाक्टरों को उनको बचाते देखा मैने जैसे ही लेख पढ़ना शुरू किया में ड़र गई 'मन पंछी उडि जइहें, जा दिन मन पंछी उडि जइहें।"मैं कांपने लगी मौत एक ऐसा सत्य है जिसे भूला नहीं जा सकता मुझे कभी याद ही नहीं आया दूर भविष्य के सपने बुनती रही इतना आशा वाद की पता नहीं कल क्या हो जाए निदान भी आपके ही लेख में था “तत्वज्ञान को तू तत्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ। उनको भली-भांति दंडवत-प्रणाम करने से, उनकी सेवा करने से और कपट छोड़कर सरलतापूर्वक प्रश्न करने से वे परमात्मतत्व को भली-भांति जानने वाले ज्ञानी महात्मा तुझे उस तत्वज्ञान का उपदेश करेंगे।” तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया । उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्वदर्शिनः आप घर बैठे हम सब को सतसंग करा देते हैं मुझे अब सोचने पर विवश होना पड़ा की मौत की भी प्लानिंग की जाए मैं सदैव देह दान की इच्छुक रही हूँ चाहती हु जब भी देह रह जाए वह मेडिकल कालेज को दे दी जाए यदि कोई अंग किसी के काम आता है वह इस्तेमाल हो जाए नहीं तो बच्चों के एनाटॉमी सीखने के काम आ जाए जीवन के सत्य से परिचय कराने का शुक्रिया शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री आदरणीय सद्गुरु जी अब अलग विषय --मेरा जब विवाह हुआ था मेरे पति के टीचर थे उन्होंने सन्यास ले लिया था वह अक्सर घर आते थे मुझे उनसे बात करने का अवसर मिलता था मैं उनसे अक्सर प्रश्न पूछती थी ख़ास कर पुनर्जन्म के विषय में उनका हरदा में आश्रम था स्पेन में उनकी कार एक्सीडैंट में मृत्यु हो गई लेकिन वह सदा हमारे भाई साहब रहे गुरु कहते ही वह हमसे दूर हो जाते मेरी बेटी के एक नन्हीं बेटी है उसका अन्नप्राशन करना था वह डेढ़ वर्ष की हो कर हाल ही में देश आई विधि के अनुसार बहुत बड़े थाल में कई वस्तुए रखी उनमें किताबें मेडिकल का आला एक छोटा सा गुटका गीता का और एक कलम भाई साहब की दी हुई शायद लेखक बने एक सजावटी कमंडल हमारे घर में था बच्ची को जब उठाने को कहा उसने पहले गीता उठाई मैने फिर उठाने को कहा उसने भाई साहब का पैन उठाया और कमंडल ले कर बगल में गीता और कलम हाथ में कमंडल ले कर चल दी मेरे पति हैरान हो गए ऐसा लगा जैसे भाई साहब आपका काफी समय ले लिया क्षमा करें

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री आदरणीय सद्गुरु जी कल मैने आपके लेख पर अपनी समझ के अनुसार प्रतिक्रिया दी पता नहीं क्यों व्ही पुराना राग आप तक मेरे विचार नहीं पहुंचे इस लेख में और भी विस्तार है और बहुत अच्छी व्याख्या है संसार में भक्त रूपी छत तैयार होता है ओर शाश्वत धाम में दीवार खड़ी होने लगती है ,कबीर साहिब कहते हैं कि इस संसार में पंडित यानि विद्वान व्यक्ति वो है जो अमृतवाणी यानि जीवन-मरण के बंधन से मोक्ष दिलाने वाणी की खोज में रहता है। ऐसी वाणियों पर गहराई से समझने-बूझने की जरुरत होती है, तभी वो हमें कोई लाभ दे सकती है।,वो इस भजन को जब गाते थे तो इतने भाव-विभोर हो जाते थे कि फूट-फूट कर रोने लगते थे।और भी बहुत कुछ है आपने अपने गुरु के बारे में लिखा वह भाव बिभोर हो कर फुट-फुट कर रट थे मेरे ख्याल से परमात्मा के पास पहुंचने की स्थिति है बहुत अच्छा व्याख्यान आप अपने व्याख्यानों को लिख कर हम तक पहुंचाते हैं उसे पढ़ना हमारा सौभाग्य है शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय हरीश चंद्र शर्मा जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! इतने दिनो तक कहा थे प्रभु आप ! मंच आपकी व्यन्ग्य रचनाओ के बिना सुना था ! कही राहुल जी की तरह साधना मे तो नही लींन थे ! उम्म्द है अब आप अपने नये व्यन्ग्य बानो से मंच को सुशोभित करेंगे ! मेरी शुभकामनाये स्वीकार कीजिये ! मोदीजी या मायावतीजी की फिलॉसफी से दूर मानवता ही मेरी फिलॉसफी है ! आपने विकास और गीता की बात की है ! आज के समय मे गीता पढने वालों को आपने मूर्खों की संग्या दी है ! प्रभु ऐसी बात नही है ! विकास का चरम लक्ष्य क्या है ? आध्यात्म ही तो है ! कितने ही बड़े बड़े उद्योगपत्ियो और व्यापारियों को गीता पढ़ते हुए पाता हूँ ! आप जैसे ग्यानी यह अगर कहते हैं की महाभारत कृष्ण ने कराई थी, तो आश्चर्य होता है ! गीता कर्म को और बेहतर ढन्ग से करने तथा अपने अधिकारों के लिये लड़ने की प्रेरणा देती है ! गीता मे ब्राह्मण्, क्षत्रीय, वैश्य और शूद्र जाती नही साधना से जुड़े तथ्य हैं ! वस्तुत: साधना नही करने वाला शूद्र, केवल माया मे फंसा हुआ वैश्य, साधना करने वाला क्षत्रीय और भगवान की अनुभूति पा लेने वाला ब्राह्मण् है ! प्रतिक्रिया देने के लिये हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

सद्गुरु जी अभिवादन ,व्यंगकार आलोचक हूँ इसलिए टिप्पणी देने से नहीं रहा गया कृपया अन्यथा न लें | आपका लेख मोदी भक्ति मय विरोधाभाषी बन गया है | लगता है मायावती का मनु विरोधी भाषण है | दूसरी ओर श्रीमद्भगवत गीता को महान ग्रंथ माना । गीता वास्तव मैं मनु वाद और शास्त्रों का ही निचोड है । ब्राह्मण ,क्षत्रिय ,वैष्य शुद्र को अपने स्वभाविक स्वधर्म कर्म करना ही धर्म माना है । एक ओर आप हिंदु आडंबरों पर कटाक्ष कर रहे हैं तो दूसरी ओर गीता की महानता मान रहे हैं । गीता मैं त्याग को शांतिकारक माना है । किंतु विश्व गुरु बनने के लिए महत्वाकांक्षी होना आवश्यक होता है । जैसे मोदी की मीमाशा है गीता सर्वोपरी ऱाष्ट्रीय धर्म ग्रंथ बने । किंतु विरोधाभाषी विचार भौतिक विकास ,जिसमैं त्याग तो केवल गरीबों को ही करना होगा । गीता का अनुसरण करना तो सिर्फ महाभारत युदध करना ही हो सकता है । कुल की स्त्रियाॅ दूषित हो वर्ण शंकर संतानों से प्रथिवी को पाप मय करें । ईसकी चिंता करने की आवश्यता भगवान क्रष्ण को भी नहीं थी ,ना ही मोदी जी को है । क्रष्ण का लक्ष्य युद्रध था मोदी का लक्य़ विकास । गीता और विकास विरोधाभाषी हैं एक विचारधारा का ही परचम लहरा सकता है । अब युग पडे लिखों का है ,मुर्खों का नही । .......ओम शांति शांति शांति

के द्वारा: PAPI HARISHCHANDRA PAPI HARISHCHANDRA

श्री आदरणीयय सद्गुरु जी मेरे एक जान कार जी का देहांत हुआ है वह बेहद विद्वान उन्हें गीता के पुरे श्लोक कंठस्थ थे मैने उनसे चार वर्ष पूर्व संस्कृत पढ़ी और उनसे बहुत डांट खायी मैं संस्कृत ग्रामर को सिरे से समझना चाहती थी जो वर्षों के बाद समझ आती है ख़ैर उनकी मृत्यु के समय उनके परिवार ने चार दिन मैं ही उनकी तेरही वह भी गुरूद्वारे मैं सिख रीती से की मुझे क्या पुरे समाज को बहुत दुःख हुआ यहां तक उनको श्रद्धांजलि भी गुरूद्वारे वालो के नियम के विरुद्ध थी फिर भी उनको एक शर्मा जी हैं उन्होंने संस्कृत के श्लोकों के साथ भाषण दिया शान्ति पाठ पढ़ा सही था या गलत परन्तु एक कुलीन ब्राह्मण का इस तरह संस्कार कर देना अच्छा नहीं लगा जबकि उन्होंने अपने माता पिता का श्राद्ध सदैव बड़े ही विधि विधान से किया था अपनी संतान को संस्कार भी दिए होंगे मैं अपनी आदत के अनुसार उनसे कोई भी चर्चा करती थी वह हर जिज्ञासा का जबाब देते थे क्या यह बेटों का व्यवहार उचित था शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

सद्गुरु जी सादर नमस्कार! आपके उत्कृष्ट लेख स में सहमत हूँ..और धर्मगुरुओं के दोहरे आचरण से खिन्नता होती है ....निश्चित रूप से किसी भी पद की योग्यता वंशानुगत या परम्परागत नहीं होनी चाहिए योगता का आधार ही सर्वोपरि होना चाहिए..हम भारतवासी सदैव अपनी संस्कृति को लेकर समस्त विश्व समुदाय के बीच गोरवान्वित महसूस करते रहे हैं..परन्तु जब कभी कभी भी अपने देश में जाती प्रथा की प्रचंड शक्ति और उससे समाज में फैली अनेक कुरुतिओं की ओर नजर जाती है तब लगता है की शायद इस संस्कृति में गर्व करने जैसा कुछ नहीं है..मगर मन ये मानने के लिए कभी तैयार नहीं होता और ये सवाल हमें अपनी संस्कृति और समाज की संरचना विषयक मंथन करने की ओर ले जाते है...और फिर मनुस्मृति जैसी पुस्तकों में तिरस्कार के गुण मिलते है जिसके कारण यह समाज में जाती, धर्म, न्याय, शासन जैसी बातों में प्रमुख रूप से चर्चा में रहती है...तो श्रीमद्भागवत गीता जैसी पुस्तकें भी मिलती है जो ज्ञान की पराकाष्ठा का उधाहरण है...परन्तु गुरु जी मुझे लगता है कि साहित्य में अधिकांशत: वर्तमान की प्रक्टिक्ल सोच दिखाई पड़ती है और साहित्य की प्रसिद्धी और प्रचलन उस समय के व्याख्यायित करने वाले लोगो पर बहुत अधिक निर्भर करता है..और ये काम शायद राजा महाराजा तथा धर्मगुरु ठीक प्रकार से नहीं कर पाए...वो कहीं पर चूक गए या अपना प्रभुत्व बनाये रखने के लिए उन्होंने जान्भूज कर ऐसा किया हो...जो भी कारण रहा हो मगर वो इस सब में भविष्य की दूरदर्शिता को नहीं देख पाए की जब ये परस्थितिया और विचार बदलेंगे तब उन्हें शायद इतिहास अच्छी नजर से न देखे...खैर परिवर्तन संसार का नियम है और जैसे ज्ञान बढ़ता गया और साधन जुटते गए लोगों की सोच धीरे धीरे बदलती गई और ज्ञान से वंचित रह गए लोगो की भी ज्ञान प्राप्ति के अवसर मिलने लगे. हाँ ये सत्य है कि एक दिन में सबकुछ नही बदलता है इन अवसरों में भी कई सदियाँ लगी है...मगर पूरी तरह से न सही कुछ बदलाव तो आने लगा ही है...और बाकी बदलाव जो रह गया है एक वह भी अवश्य आएगा इसमें कोई शक नहीं है...सभी लोग एक दिन बराबर होंगे और सभी लोगो सभी तरह के अवसर प्राप्त होंगे...मगर मैं कहना ये चाहता हूँ गुरु जी..की इस बदलाव में निश्चय ही जज राम मोहन राय आंबेडकर और संत रेदास जैसे अनेक समाज सुधारको का योगदान रहा है, इन लोगो ने अपने अपने तरीकों से आवाज उठाई आन्दोलन किये मगर इसके साथ जिन जातियों का ज्ञान प्रप्त करने मंदिर जाने में वर्चस्व था और जो लोग छुआ छूत के अनुयायी थे वो वो लोग भी बदले हैं सभी लोग न भी बदले हो परन्तु एक बड़ा परिवर्तन तो हुआ ही है...और अब जबकि ये परिवर्तन सतत है तब इसी प्रकार का साहित्य भी लिखा जा रहा है और पढ़ा भी जा रहा है और अपनाया भी जा रहा है.....जहाँ तक बात धर्म गुरुओं की है उनका वर्चस्व भी हमारे समाज में क्षीण तो हुआ ही है यद्यपि समाप्त नहीं हुआ है...मगर आप जैसे साहित्यकार और ज्ञान वितरण करने वाले झरने जब तक बहते रहेंगे निश्चित रूप से वो दिन भी आएगा जब अपने समाज में फैली कुरूतियों को जड़ से समाप्त कर..सच में विश्वगुरु बन जायेंगे..एक बार फिर आपको धन्यवाद...आपने एक गंभीर प्रान्ती विकराल मुद्दे पर अपने विचार प्रकट किये. और यदि नादानी में कुछ गलत लिख गया हूँ तो क्षमाप्रार्थी...धन्यवाद. ....................पुनीत शर्मा !

के द्वारा: advpuneet advpuneet

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीया सोनम सैनीजी ! ब्लॉग पर स्वागत है ! आपको संस्मरण अच्छा लगा, इसे लिखने की सार्थकता सफल हुई ! आपने सही लिखा है कि गोर लोग सांवले लोंगो को घूर घूर के यूँ देखते हैं, जैसे सांवला होना कोई अपराध हो ! ये एक हीन भावना है और ये सांवले लोंगो में भी होती है, जो अपने से ज्यादा काले लोंगो के प्रति दुर्भावना रखते हैं ! बहुत से लोग दिल मिलाने और रिस्ता बनाने से पहले चमड़ी मिलते हैं ! मेरे यहाँ आने वाली एक महिला बिसन रिश्ते नापसंद करने के बाद एक गोरी सुन्दर बहू ढूंढ के लाई ! उसके अहंकार और बुरे आचरण से घर में वो कलह मची है कि शादी को महज एक साल बीतते बीतते ही घर में बंटवारें कि नौबत आ गई है ! सार्थक प्रतिक्रिया के लिए सादर आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर डॉ0 कुमारेन्द्र सिंह सेंगर

के द्वारा:

आदरणीय हरिप्रकाश गर्ग जी ! ब्लॉग पर आपका स्वागत है ! आपने बुद्धिजीवी की तरह लेख को पढ़ा और अपनी प्रतिक्रिया दी, इसके लिए हार्दिक आभार ! "सद्गुरु" शब्द को लेकर मन में कोई हीन ग्रंथि न पालें, ये भगवान का नाम है, जो मैंने अपने नाम "राजेंद्र ऋषि" के साथ जोड़ रखा है ! ब्लॉग का नाम भी "सद्गुरुजी" है, जो भगवान का एक नाम है ! आप मुझे सद्गुरुजी कहें, ऐसा मैं कहाँ कह रहा हूँ ! लेख को आपने अप्रमाणित कहा है ! ये बताइये कि क्या आत्मा परमात्मा प्रमाणित है, जो उसपर हर क्षण कुछ न कुछ लिखा जाता है ! रही बात आधी अधूरी जानकारी की तो ते आपका विचार है ! लेख आम जनता को सरलता से समझने के लिए सरल भाषा में लिखा गया है ! रही बात गांधी जी की तो उस विषय में काफी कुछ पढ़ने के बाद ही लिखा गया है ! संक्षेप में ये जानकारी इस लिंक प्राप्त कर सकते हैं ! "गांधीजी की सेक्स लाइफ, विचारकों की नजर में" http://hindi.webdunia.com/current-affairs/82-113061700002_1.htm

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आत्मा शरीर के भीतर अनुमन्ता के रूप में है. इसका अर्थ है कि साधना की ऊँची अवस्था में आत्मा साधक का मार्गदर्शन करने लगती है. आत्मा बतियाती है, बशर्ते हम साधना करके उस लायक बनें. आत्मा देह के भीतर भर्ता के रूप में है, वो पूरे शरीर और हर अंग का पालन-पोषण करती है. आत्मा यदि देह से बाहर निकल जाये तो शरीर कार्य करना बंद कर देता है. इसी को मृत्यु कहा जाता है. परमात्मा सभी प्राणियों के शरीर के भीतर ह्रदय में रहते हैं. शरीर में स्थित परमात्मा अपनी माया यानि तीन गुणो के द्वारा सबको उनके कर्मानुसार एक शरीर से दूसरे शरीर में भ्रमण करातें है, जब तक की कोई प्राणी साधना करके मोक्ष न पा ले आत्मा मार्ग दर्शन करने लगती हैं क्या यह इनट्यूशन हैं ? गीता में क्या नहीं हैं डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय सद्गुरु जी, सादर अभिवादन! आपने भारतीय समाज की एक कटु सत्य को लिखा है. हालाँकि अब यह धीरे काम हो रहा है क्योंकि दलित वर्ग भी अब सर उठाने लगे हैं. हमारे हिन्दू धर्म के दलित वर्ग ही ज्यादातर मुस्लमान या ईसाई बने हैं. हमें आत्म मंथन करना होगा और सबको बराबरी का दर्जा देना होगा. सफाई कर्मचारी को बहुत से लोग अभी भी पानी भी नहीं पिलाना चाहते हैं, जबकि मेरे यहाँ कोई भी आकर पानी मांगता है, पीता है . मैं तो कभी कभी उन लोगों के साथ ही चाय पीता हूँ अगर वे मेरा घर में या आस पास सफाई का काम कर रहे हों तो.आखिर उनके द्वारा सफाई किये जाने के कारण ही हम साफ़ सुथरे जगह में रहते हैं. आपने उत्कृष्ट आलेख लिखा है और जागरण ने सही आलेख को सम्मानित किया है आपको शुभकामनाएं!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

श्री सद्गुरु जी एक बार मने एक मृत्यू मैं पगड़ी के टाइम गई मुझे उस मृत्यु का बहुत कष्ट था जवान मौत थी वहा एक प्रवचन देने आये थे उन्होंने बिना कारण मुझे डांटना शुरू कर दिया उन्हें लगा में बाते कर रही हूँ उन्होंने कहाँ क्या तुम्हे मृत्यु नहीं आनी है मैने कहा नहीं तुम कभी यह चोला नही छोडोगी मैने कहाँ मैं केवल वस्त्र बदलूंगी आप मोक्ष को प्राप्त होंगे आप परमात्मा से मिलेंगे में तो बार-बार यहाँ आउगी| मेरे समझ में गीता की गूढ़ता कभी समझ नहीं आई कर्मवाद में कर्म तुम करो फल मेरे हाथ में है में ऐसा सोचती हूँ दोनों सेनाये जब युद्ध करती हैं तुम सामने वाले को मार दो नहीं तो वः तुम्हे मार देगा कौन बचेगा इसका फैसला वक्त करता है अत: सब कुछ भगवान के हाथ में अर्पित कर दो एक बार एक जर्मन हमें मिले उनसे मेरे शौहर ने पूछा आप घूमनेआये हैं उन्होंने कहा नही थिओलोजी समझने आया हूँ आप की रेस बहुत बिकसित भी हैं धर्म भी हें आप यहाँ क्या समझ सकते हैं उन्होंने कहा आपकी गीता में मनुष्य के मन में उठने वाले हर सवाल का जबाब है | आपने बड़े सरल रूप में समझाने का प्रयत्न किया है मेरी अटपटी बातों पर आप हंसियेगा नहीं शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

जय श्री राम सद्गुरुजी बहुत ही दिल को छूने वाला और दुखदायी हमारे प्राचीन भारत में ऐसी वर्ना व्यवस्था कभी नहीं थी ये बीच में आ गयी.हमारी माँ जब हम ट्रेन से सफ़र करके आते तो हमें सब कपडे धोने और नहाने को कहती क्योंकि जमादार भी उसमे चलते है याह्तक जब हम नाइजीरिया से जहां हमने २१ साल कार्य किया आते तो भी कपडे धोने को कहती और कायस्थों को भी मुसलमानों की तरह समझते थे.हम तो कुछ नहीं कर सके क्योंकि माँ जिस तरह बरसती थी सहन नहीं होता था.ये सब अशिक्षा का परिणाम है और गाँव में ज्यादा है.देश की गुलामी का एककरण यही है.हम आको हृदय से आपकी इंसानियत के बारे में साधुवाद कहते और आपने तो अपने कार्य से हमारा दिल जीत लिए.सुन्दर लेख के लिए बहुत बधाई

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

श्री आदरणीय सद्गुरु जी बहुत अच्छा लेख यदि देश जातियों उपजातियों में बटा नहीं होता देश की तस्वीर अलग होती परन्तु दिल्ली में अब जाती सोच लगभग खत्म हो गई हैं मेरे घर में एक महिला काम करती थी वह बाल्मीकि हैं वह मेरे ही घर में ही नहीं कई पढ़े लिखे घर में काम करती है इतनी सभ्य और सुसंकृत है आप सोच नहीं सकते उसके दो लड़के हैं उनको पढ़ाना स्कूल में एडमिशन कराना सब मैने ही किया जिन घरों से संबंधित है सब उसकी मदद करते हैं बच्चों की साइंस की ट्यूशन एक अन्य परिवार नें अरेंज की है हाँ विवाह संबंध में हम अपनी ही जाती में करते हैं ब्राह्मण हैं ब्राह्मण कोई भी स्वीकार्य है | अब कोई पूछता भी नहीं हैं मेरी बचपन से साथ पढ़ी लड़की के पिता को सब भगत जी कहते थे उनकी बेटी प्रिंसिपल हैं और उसने अपने पिता से ज्योतिष सीखा अब पूरी पंडित है हाँ शुरू में परेशानी होती हैं कुछ स्ट्रगल के बाद जब यह आगे बढ़ जाते हैं कोई नहीं पूछता आपकी जाती क्या है | डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: jlsingh jlsingh

श्री सद्गुरु जी सबसे पहले भारत नए सहायता भेजी है ट्विटर पर मोदी जी ने सुचना दी श्री कोईराला थाईलैंड की यात्रा पर थे हमारी सेना दिन रात मलवे से जिन्दों और लाशें निकाल रहे हैं इस वक्त जिन्दों के लिए पानी खाना दोनों का इंतजाम करना है विश्व में भारत की ततपरता की सराहना हुई हैं इस वक्त जरूरत है मैनेजमेंट की वह उन्हीं की सरकार को करना है पर्वतीय क्षेत्र है लकड़ी की कमी नहीं होगी परन्तु सरकार दिखाई नहीं दे रही यदि कोई भी देश सरकारी काम को हाथ में लेगा संप्रभुता की बात कही जायेगी कहते हैं एयर पोर्ट पर किसी चीज की कमी नहीं है उनके अपने वालंटियर आगे आएं परन्तु जिन्दे निकालना जरूरी है ऊपर से बरसात चीन अलग से नाराज लग रहा है उसकी नेपाल पर आँख है |

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: drashok drashok

आदरणीय सदगुरु जी, सादर अभिवादन! काफी दिनों बाद आपकी ब्यथा को पढ रहा हून. वैसे आप तो खुद एक खुली किताब हैं अपना दुख सुख साझा करते ही रहते हैं दूसरों को भी यथासंभव मदद करते हैं. कुछ दिन पहले ब्रज किशोर सिंह ने जागरण जनकसन पर अपनी ब्यथा बताई थी. आज भी वी अपने माता पिता के लिये व्यग्र हैं पर उनके माता पिता अपने बेटी दामाद के साथ हैं. शोभा जी ने भी अपने मन की बात बता ही डी. हम सबके बीच एक आत्मीय सम्बंध सा हो ही गया है. अपने मन की बात साझा कर लेने से मन हल्का होता है. पहले भी लोग डायरी लिखते थे आज ब्लॉग एक माध्यम है. ...यह संसार ऐसा ही है और हम सब कठपुतलियाँ यथासम्भव सत्कार और प्रतिकार जरूरी है. बस और क्या कहूँ आप सभी अनुभवी हैं सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! क्षमा मांगने की आवश्यकता नहीं है ! आपने मेरे लेखन का उद्देश्य समझा, मेरे लिए यही बहुत है ! आपने सही कहा है कि जीवन की फिलॉसफी इस लेख में है, जिसके बिना ये लेख अधूरा और महत्वहीन रह जाता ! हर लेख में समाज को कुछ विचारणीय दर्शन देना मेरे लिखने का मूल उद्देश्य रहना है ! इस मंच पर आपकी सक्रियता और पढ़ने लिखने की रूचि को मैं सलाम करता हूँ ! कृपालु पाठकों और ब्लॉगर मित्रों से आत्मीय संबंध बनाये बिना सिर्फ इस मंच पर या किसी भी मंच पर यंत्रवत लिखते जाना मुझे तो एक तरह का अहंकार और मानसिक रोग लगता है ! सौभाग्य से हममे से अधिकतर ब्लॉगर मित्र इस खतरनाक बिमारी से दूर हैं ! किसी का भी विचार पूरी दुनिया के लोगों की विचारधारा को नहीं बदल सकता है, परन्तु कुछ लोगों की भी विचारधारा बदलती है तो यह लिखने वाले लेखक का अहोभाग्य है ! आपका सहयोग, समर्थन और सुझाव सदैव मिलता रहे, बस यही आकांक्षा है ! बहुत बहुत हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

श्री आदरणीय सद्गुरु जी मैने एक स्पैशलिस्ट डॉ ० से पूछा क्या पहले आज की प्रचलित बीमारिया डाइबटीज , ब्लड प्रेशर यूरिक एसिड पहले नहीं होते थे क्या उन्होंने कहा बहुत कम पहले लोग जैसे मिल बाँट कर खाते हैं ऐसे थे ऐसे ही अपनी समस्या भी दूसरों से कहते थे और लोग सुझाव देते थे अब हम अपने मन मैं घुटते हैं पर कहते नहीं आपका लेखन कम हो गया आप समाज सेवा से जुड़े हैं आप किसी एक परिवार के नहीं है समाज के हैं सबके हैं जिस दिन इस सत्य को आप समझ लेंगे फिर से लिखेंगे आप बहुत अच्छे इन्सान हैं इसी लिए परेशान हैं आप का धर्म माँ की सेवा करना है वह आप आपकी पत्नी बहुत अच्छी तरह कर रहें हैं जाता इन्सान होश मैं नहीं रहता उसके सामने पुरे जीवन की रील चलती है इसी लिए शायद गीता सुनाई जाती है डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरनीय श्री सद्गुरु जी काफी समय बाद आपका लेख पढने के लिए मिला बहुत सुंदर लेख आपने अपनी माता जी की तबियत के बारे लिखा सबसे प्यारी बात आपकी बच्ची की शरारतें आपकी बात पर मुझे अपनी बेटी याद आ गयी बहुत छोटी थी उसे पढना बिलकुल अच्छा नही लगता था हम लोग मथुरा को बिलोंग करते हैं एक बार हम विदेश से ऐसे अवसर पर आये जब नवरात्र के दिन थे मेरी लडकी को भी दो दिन तक अष्टमी नवमी कनया पूजन के लिए बुलाया वह बड़ी खुश उसने अपने फादर से कहा हम यही मथुरा में रहेंगे हम विदेश नहीं जायेंगे हम वहाँ क्यों रहते हैं इन्होने कहा बेटा मेरी जाब हैं पैसे के लिए हम वहां रहते हैं अरे पापा आप चिंता न करो यहाँ लोग घर में बुला कर पैर धोते हैं प्लेट में देखो खाने की डिश देते हैं रूपये भी देते हैं हम यहीं रहेंगे रूपये में आप को दे दूंगी हो गये न पैसे सब बहुत हंसे यह अब मथुरा में रह कर अपना खानदानी काम पंडिताई करेगी | आज बहुत पढ़ लिख गई हैं याद दिलाओ तो शर्माती हैं आपकी बच्ची की शैतानिया चंचलता को दर्शाती हैं बहुत अच्छा लेख डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीय श्री सद्गुरु जी मेरे पति ने आपके लेख पर प्रतिक्रिया देने के लिए कहा मैने उनके ब्लॉग पर प्रतिक्रिया अपने नाम से दे दी उन्होंने आपके लेख को पढ़ कर अपने घर को अपने परिवार को याद किया आपके लेख में उन्हें अपने मथुरा की मिट्टी की सुगन्ध आई | आपने बहुत सुंदर होली जैसा ही प्रिय लेख लिखा हैं यह मेरी प्रतिक्रिया है |साथ ही आपने होली जैसे त्यौहार को खराब करने पर दुःख जताया है वाकई हम मजबूर हो कर अपने परिचितों के आने पर होली खेलते हैं नहीं तो दरवाजा बंद रखते हैं हमारे घर मेरे बच्चों के विदेशी मित्र भी कभी कभी होली देखने आते हैं हम उन्हें छत पर बिठा देते हैं | या मन्दिरों में होने वाली शाम को फूलों की होली दिखाने ले जाते हैं डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

श्री आदरणीय सद्गुरु जी होली मुबारक हो होली के शुभ अवसर पर बेहद खूबसूरत लेख| लेख पढ़ कर मुझे अपनी सुसराल मथुरा की होली याद आ गई होली के शुभ अवसर पर हम सब मथुरा जाते थे बिलकुल साफ़ सुथरी होली होती थी हमारा घर कंस किले के पास यमुना जी के किनारे था होली खत्म होने पर पूरा परिवार यमुना किनारे जाते थे वह सब दिन अम्मा जी के साथ खत्म हो गये | आपके द्वारा लिखे होली के गीतों में वहां गाये जाने वाले गीत याद आ गये शाम को हम सब बांके बिहारी जी के मन्दिर जाते थे उनसे होली खेलने वहां लोग यह गीत गाते थे बहुत आकर्षक लेख कई जगह मैने जोगीरा वाला गाना सूना है मै उसे प्रिंट करा कर अपनी बहनों को दूंगी उन्हें गाने का बहुत शौक है डॉ शोभा

के द्वारा: drashok drashok

आदरणीय श्री राजेन्द्र ऋषि जी , सादर ! आदमी जब हार जाता है तो उसकी साड़ी कमियां दिखाई देने लगती हैं लेकिन जब वो ही आदमी जीत हासिल कर लेता है तो उसकी सर्री कमियां उसकी योग्यताओं में बदल जाती हैं ! बेहतरीन आलेख ! बेहतर है ! लेकिन अब जिम्मेदारी ज्यादा है , विपक्ष में रहकर या सत्ता से दूर रहकर किसी को भी गाली दी जा सकती है लेकिन जब जिम्मेदारियों की बात आती है तो असल टैलेंट पता लगता है ! भावनाएं अच्छी हैं कजरी की , उम्मीद करनी चाहिए काम भी अच्छे ही करेंगे ! हर भारतवासी उनसे उम्मीद कर सकता है किउनके चुने जाने पर आगे से पाकिस्तान और अरब देशों में मिठाई बटे न बटे हिंदुस्तान में जरूर बंटेगी ! आशा कर सकते हैं कि उन्हें आगे से चन्दा भारत के खून पसीने कि कमाई से मिलेगा और उसी से वो चुनाव लड़ेंगे , आशा कर सकते हैं कि उन्हें अब चुनाव लड़ने के लिए देश के दुश्मनों से चन्दा नहीं लेना पड़ेगा !बहुत बढ़िया http://yogi-saraswat.blogspot.in/2015/02/blog-post_9.html

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आदरणीय श्री राजेन्द्र ऋषि जी , सादर ! आदमी जब हार जाता है तो उसकी साड़ी कमियां दिखाई देने लगती हैं लेकिन जब वो ही आदमी जीत हासिल कर लेता है तो उसकी सर्री कमियां उसकी योग्यताओं में बदल जाती हैं ! बेहतरीन आलेख ! बेहतर है ! लेकिन अब जिम्मेदारी ज्यादा है , विपक्ष में रहकर या सत्ता से दूर रहकर किसी को भी गाली दी जा सकती है लेकिन जब जिम्मेदारियों की बात आती है तो असल टैलेंट पता लगता है ! भावनाएं अच्छी हैं कजरी की , उम्मीद करनी चाहिए काम भी अच्छे ही करेंगे ! हर भारतवासी उनसे उम्मीद कर सकता है किउनके चुने जाने पर आगे से पाकिस्तान और अरब देशों में मिठाई बटे न बटे हिंदुस्तान में जरूर बंटेगी ! आशा कर सकते हैं कि उन्हें आगे से चन्दा भारत के खून पसीने कि कमाई से मिलेगा और उसी से वो चुनाव लड़ेंगे , आशा कर सकते हैं कि उन्हें अब चुनाव लड़ने के लिए देश के दुश्मनों से चन्दा नहीं लेना पड़ेगा ! http://yogi-saraswat.blogspot.in/2015/02/blog-post_9.html

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आदरणीय सिंह साहब ! सादर अभिनन्दन ! प्रतिक्रिया व्यक्त करने ले लिए हार्दिक आभार ! मुझे अफ़सोस है कि मेरी किसी बात से आपको दुःख पहुंचा ! "जनता किरण बेदीजी को दिल्ली का भावी मुख्यमंत्री बनाये" उस लेख का शायद आप जिक्र कर रहे हैं ! उस लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए आपने भी कहा था, "आदरणीय सद्गुरु जी, सादर अभिवादन! आपने सुना होगा केजरीवाल ने एक नयी कहानी बनाई है एक भिखारी ने उसे ५ रुपये का चंदा दिया …लगता है आपका शाप लगने ही वाला है केजरीवाल को, उसकी औकात अब पांच रुपये वाली होनेवाली है … चले थे देश को सुधारने कीचड साफ़ करने ..खुद कीचड से लथपथ हो गए! किरण बेदी जी तो मोदी रूपी सूर्य भाया अमित शाह तीक्ष्ण किरण के रूप में सब पर भारी पड़ने वाली हैं …ऐसी दमदार महिला को आखिर पहचाना तो मोदी जी और अमित शाह ने ही …अन्ना भी नहीं पहचान सके." मुझे इस सच को स्वीकारने में कोई संकोच नहीं है कि मेरे जैसे न जाने कितने लोंगो ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा और किरण बेदी जी को अपना सर्वश्रेष्ठ समर्थन दिया ! मैं आज भी अरविन्द केजरीवाल जी का समर्थक नहीं हूँ और मेरा दृढ विश्वास है कि उन्होंने लोकलुभावने सपने दिखाकर सत्ता तो हासिल कर लिया है, परन्तु आम जनता को संतुष्ट कर पाना उनके वश की बात भी नहीं है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी, यह वर्तमान राजनीति, विसंगति और भावी संकेत को लेकर लिखा गया अत्यंत गंभीर आलेख है -- " ‘पॉप्युलिस्ट ऐनर्की’ यानी लोकलुभावन अराजकता में पूरा यकीन रखने वाली आम आदमी पार्टी से आज अर्थशास्त्री, विदेशी निवेशक और यहाँ तक कि भारतीय शेयर बाजार यानि दलाल स्ट्रीट भी चिंतित है. सबको यही चिंता है कि आम आदमी पार्टी यदि सत्ता में आती है तो ‘पॉप्युलिस्ट पॉलिसीज’ यानि लोकलुभावनी योजनाएं चलाकर वो दिल्ली ही नहीं बल्कि पुरे देश की तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था को अवरुद्ध कर सकती है. वो चाहे दिल्ली में निवेश करने वाले देशी-विदेशी निवेशक हों या भारतीय पूंजी बाजार में बड़े निवेश करने का मन बना रहे देशी विदेशी उद्योगपति हों, उन सबकी निगाहें इस समय दिल्ली के चुनाव पर है." ... हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

आदरणीय सद्गुरु जी, वर्तमान आतंकवादी परिस्थितियों को लेकर घटना विशेष के माध्यम से आप ने अत्यंत प्रभावपूर्ण आलेख प्रस्तुत किया है – “मेरे विचार से तो ये इस बात का पुख्ता सबूत भी है कि आने वाले समय में सारे विश्व को एकजुट होकर चौथा विश्वयुद्ध मुस्लिम आतंकवादियों के खिलाफ ही लड़ना होगा. सारी दुनिया के नौजवान, जो चाहे किसी भी धर्म को मानते हों, परन्तु जो तरक्की और अमनपसंद हैं, उन्हें आने वाले उस खतरे से आगाह करते हुए जनाब कैफ़ी आज़मी साहब के शब्दों में बस यही सन्देश दूंगा कि वो पूरे विश्व में तेजी से फ़ैल रहे आतंकवाद से शारीरिक, मानसिक और वैचारिक रूप से जूझने के लिए और एक लम्बी लड़ाई के लिए तैयार हो जाएँ, यही पूरे विश्वभर में जगह जगह पर आतंकवाद से जूझते हुए शहीद होने वालों का का आखिरी सन्देश है.” ... हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ !

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

इस घटना से अब यह बात साफ़ हो गई है कि आंतकियों के साथ उनके परिजन भी मिले हुए हैं और वो कत्तई विश्वास के काबिल नहीं है. इस तरह से यदि मुस्लिम अपने परिवार से संबंधित आतंकवादियों का खुलकर साथ और समर्थन देंगे तब तो ये तय है कि आने वाले समय में कश्मीर सहित पूरे देशभर में आतंकवाद से सावधान रहने और जूझने की हमारी लड़ाई और भी जटिल और घातक हो जाएगी. कर्नल राय आतंकियों को समर्पण कराकर उन्हें सुधरने और देश की मुख्यधारा से जुड़ने का मौका देना चाहते थे, परन्तु उन्होंने धोखा दिया. कर्नल राय दो वर्षों से लगातार दक्षिण कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई में शामिल थे. वो दक्षिणी कश्मीर में आतंकियों को खोजने, मुठभेड़ की योजना बनाने और उसे क्रियान्वित करने में पूरी तरह से माहिर थे. इसी विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर युद्घ सेवा पदक देने की घोषणा की गई थी.वो विश्वास करने लायक कभी रहे ही नहीं !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! ब्लॉग पर आपका सादर अभिनन्दन है ! कुछ व्यस्तताओं के कारण मंच पर मैं समय नहीं दे पाया ! आप सही कह रही हैं कि वोट मोदीजी के नाम पर ही आने हैं ! किरण बेदीजी को छह माह पूर्व ही भाजपा में शामिल हो जाना चाहिए था ! उन्हें मुख्यमंत्री का उम्मीदवार भी और पहले घोषित कर देना चाहिए था ! खैर, देर से सही पर पार्टी का अच्छा निर्णय है ! उम्मीद है कि भाजपा के झगडे भी जल्द ही बंद हो जायेंगे ! दिल्ली की जनता, भाजपा और किरण बेदीजी मिल के ईमानदारी का वो पुराना समय वापस लाएं, जिसकी चर्चा आपने की है ! आपके कमेंट हृदय को छूते हैं, क्योंकि ह्रदय से निकलते हैं ! आप किरण बेदीजी से जुड़े, डॉ भरत सिहं जी से जुड़े ईमानदारी वाले पुराने दिनों पर कोई लेख जरूर लिखिए, मुझे बहुत उत्सुकता से उसकी प्रतीक्षा रहेगी ! सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय सद्गुरु जी बहुत अच्छा लेख दिल्ली वाले किरन बेदी जी को बहुत अच्छी तरह जानते हैं कभी उनका दिल्ली फिर तिहाड़ जेल की व्यवस्था में उनका दबदबा था किरन जी बेहद लगनी हैं हम महिलाये उनके आगमन से गौरव महसूस कर रहीं हैं जब मैं पी एच डी कर रही थी वह दिल्ली में पुलिस विभाग में नियुक्त हुई थी उनके जबर्दस्त चर्चे थे आईटीओ पर वह जीप में अक्सर नजर आती थी क्या रुआब था हम लडकियां उन्हें एडमायर करती थी मेरा विवाह हुआ मेरे पति पुलिस में डाक्टर थे वह समय बहुत ईमानदारी का था पुलिस अस्पताल के सर्जन डॉ भरत सिहं की ईमान दारी की लोग कसमें खाते थे मैं उस समय कई बार उनसे मुखातिब हुई थी आज आप के लेख द्वारा बहुत सी बातें ताजा हो गई यदि भाजपा में झगड़े होते रहे तो किरन जी क्या करेंगी ऐसे लड़ रहें हैं क्या कहू जबकि वोट मोदी जी के नाम पर आने हैं शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

आदरणीय इमाम हुसैन कादरी जी ! सादर अभिनन्दन ! पूरे लेख को यदि ध्यान से आपने पढ़ा होगा तो पाया होगा कि इस धर्मान्तरण का मैंने स्पष्ट रूप से विरोध किया है ! ऐसे धर्मान्तरण से हिन्दू धर्म को न तो कोई फायदा है और न ही ऐसे धर्मान्तरण की कोई आवश्यकता है ! जो लोग जाति और छुआछूत के आधार पर हिन्दू धर्म में पहले से ही भेदभाव करते चले आ रहे हैं, वो लोग धर्मान्तरण करके आने वालों की क्या सेवा करेंगे ! केवल राजनीति और दिखावे के लिए धर्मान्तरण का कार्यक्रम आयोजित करने वालों से मैं पूछता हूँ कि क्या धर्म परिवर्तन करके हिन्दू धर्म में आने वाले लोंगो को वे "ब्राह्मण" घोषित करने कि हिम्मत जुटा सकते हैं ? कभी नहीं..यही कड़वा सत्य है ! आदरणीय इमाम हुसैन कादरी जी, प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत बहुत आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीया डॉक्टर रंजना गुप्ता जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! ब्लॉग पर आकर पोस्ट की सराहना करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! व्यस्तता के कारण फेसबुक पर दिन में एक बार ही आ पाता हूँ ! दोपहर को कुछ समय मिलता है ! आपका सन्देश मैंने पढ़ा ! फेसबुक पर आपकी रचनाएँ भी पढ़ीं ! आपसे आग्रह है कि इस मंच पर भी आप लिखतीं रहें ! आप अपने पाठकों और हम लोगों के लिए लिखतीं रहें ! आप विदुषी हैं ! बस इतना ही कहूँगा कि अच्छा लेखक वही है,जिसके लिखने कि प्यास कभी न बुझे ! हमें स्वयं प्यासे रहकर पाठकों की प्यास बुझानी चाहिए ! दूसरी जगह पर भी अब एडजस्ट हो गया हूँ ! मुझे एक ही रास्ता नजर आया कि अपनी सारी प्रतिभा और अपना सर्वोत्तम प्रयास रचना में आप उड़ेल दीजिये ! बस आप गुड बन जाइये ! प्रेमीजन स्वतः ही खींचे चले आएंगे ! आप सुनकर शायद हँसेगी कि मैं दूसरों को यदाकदा व कम से कम और अपने मन को निरंतर व अधिक से अधिक समझाता बुझाता रहता हूँ ! कोई नहीं है पास में तो मौन रहना बहुत भाता है ! प्रतिक्रिया देने के लिए के लिए अतिशय हार्दिक आभार और शुभरात्रि ! जगत के लिए फिर एक नई और हम सबके लिए बहुत बहुत मंगलमय सुबह हो !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

आदरणीय इमाम हुसैन कादरी जी ! ब्लॉग पर आपका स्वागत है ! काफी दिनों के बाद आप मंच पर उपस्थित हुए हैं ! आपकी प्रतिक्रिया में सहजता नहीं है ! मोदीजी तो शेर हैं ही ! उन्हें चूहा कौन बना रहा है ! मैं निराश भी नहीं हूँ ! मैं हमेशा ये कहूँगा कि मोदीजी के जैसा काबिल अब तक कोई प्रधानमंत्री नहीं हुआ है ! लेखक का धर्म मैंने निभाया है ! आपने लिखा है हिन्द को कोई तोड़ नहीं सकता है ! अच्छी बात है ! परन्तु हिन्द को तोड़ने की कोशिश करने वाले हैं कौन ! पाकिस्तान और उसके यहाँ डेरा डाले आतंकवादी ! वो दिन जरूर आएगा,जब भारत अमेरिका का साथ लेकर इन आतंकी डेरों का सफाया करेगा ! उपरवाले से दुआ है कि वो दिन जल्द आये ! प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

बहुत से बस यात्री इस घटना को छेड़छाड़ नहीं बल्कि सीट के लिए हुआ झगड़ा बता हैं.हरियाणा सरकार ने इस घटना की निष्पक्ष जाँच के आदेश दे दिए हैं.लड़कियों को पुरस्कृत करने पर भी रोक लगा दी गई है.हरियाणा सरकार का यह निर्णय सही है.किसी के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए.लडकियों के बारे में ये भी पता चला है कि लड़कों से मारपीट करना और उसका वीडियो बनाकर सोशल मिडिया पर प्रदर्शित करना इनकी पुरानी आदत है.जाँच में यदि ये सही पाया जाता है तो इन लड़कियों को भारतीय कानून के अनुसार दण्डित किया जाना चाहिए.ये दोनों बहने लड़कियों को लड़कों से झगड़ा करने का न सिर्फ गलत सन्देश दे रही हैं,बल्कि इसके साथ ही उन लड़कियों का भी मखौल उड़ा रही हैं,जो वास्तव में ही छेड़छाड़ का शिकार हो रही हैं.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: DEEPTI SAXENA DEEPTI SAXENA

श्री सद्गुरु जी यह आश्रम नईं हैं क्लब हैं जो लोग यहां जाते हैं वह भी जानते हैं वह कहां जा रहे हैं जी रहें है औरतों के बारे में खास कर कह रहीं हूँ यदि वह घर से कहि जाना चाहे उन पर कई बंधन हैं यदि वह सतसंग का नाम लेती हैं कोई परेशानी नहीं हैं मेरी काम वाली ने मुझे श्राद्ध के दिनों में बहुत व्यस्त देखा उसने मुझे कहा गुरु धारण कर लो सब प्रपंचों से छुटकारा मिल जाता है कुछ करने की जरूरत नहीं हैं | यह तो कुछ बाबा है जिन्होंने धर्म के नाम पर पखण्ड शुरू कर दिया मुझे राजा राम मोहन राय याद हैं जो हमे चिता से उठा करj लाये थे दयानंद सरस्वती ने nya रास्ता दिखाया था विवेकानंद और कितने महापुरुष परन्तु उन्होंने कभी अपने को भगवान नही कहा था यह भगवान का नया फैशन चला है हम भी उतने ही दोषी हैं आध्यात्म को कुछ पाने से जोड़ लिया साईं बाबा के जाओ जो चढ़ाओगे दुगना मिलेगा यह दुनिया हैं यहाँ कोई किसी को क्या ठगेगा हम खुद ही ठगे जाना चाहते हैं नहीं तो अच्छे मार्ग दर्शकों की कमी नहीं है मेरे पति को लोग कई बार कहते हैं चलिए अमुक जगह बहुत अच्छे सन्यासी हैं बड़ा सुंदर प्रवचन हैं या साक्षात भगवान मिल जायेंगे वह कहते हैं अरे भाई मैं मथुरा का हूँ यह तो डाक्टर बन गया नही तो मैं भी पंडिताई कर रहा होता | सद्गुरु जी क्या आप नवभारत टाइम्स ब्लॉग मे लिखते हैं आप बहुत अच्छा लिखते है अत : वहां भी लिखिए दैनिक जागरण की तरह ब्लॉग बनता है डॉ शोभा

के द्वारा: Shobha Shobha

के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

के द्वारा: Shobha Shobha

आदरणीया डॉ शोभा जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! काफी दिनों के बाद मंच पर उपस्थित होकर आपने मंच का सूनापन दूर किया है ! मंच पर पुनः वैचारिक रूप से उपस्थित होने के लिए आपको अतिशय धन्यवाद ! कई ब्लॉगों पर किये गए आपके कमेंट से पता चला कि आपका टेकीफोन ख़राब था ! यही परेशानी मेरे यहाँ थी ! मैंने बीएसएनएल का ब्रॉडबैंड हटवाकर रिलायंस का थ्री जी मोडम ले लिया,जिसकी स्पीड और कार्यप्रणाली बहुत अच्छी है ! प्रस्तुत कविता वास्तव में ही कोई कविता न होकर मेरे दिल की आवाज है ! आपने सही कहा है कि काला धन आना बहुत ही मुश्किल है ! उसका पुरानी सरकारों ने पहले ही इंतजाम कर लिया हैं ! बोफोर्स के समान यह चुनाव में भुनाने का सिक्का बनेगा ! सार्थक और विचारणीय प्रतिक्रिया के लिए तथा मंच पर अपनी खुशनुमा बौद्धिक उपस्थिति देने के लिए अतिशय हार्दिक आभार !

के द्वारा: sadguruji sadguruji