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sach ka aaina

अपने किरदार को जब भी जिया मैंने, तो जहर तोहमतों का पिया मैंने, और भी तार-तार हो गया वजूद मेरा, जब भी चाक गिरेबां सिया मैंने…

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sunita dohare Management Editor


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आज अपने साए से लिपट के कोई रोया होगा…

Posted On: 12 Apr, 2014  
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जनरल डब्बा में

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ओ सांवरे ! मुझे तेरे ही रंग में रंगना है …

Posted On: 12 Mar, 2014  
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जनरल डब्बा में

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माँ तेरे द्वार एक दुखियारी आई है….

Posted On: 4 Mar, 2014  
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जनरल डब्बा में

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बन संवर के जब तुम आये, हजार आँखें जवां हुई थीं

Posted On: 27 Feb, 2014  
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जनरल डब्बा में

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अमरबेल का दर्द सुहाना ……..

Posted On: 13 Feb, 2014  
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जनरल डब्बा में

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(दूसरी किश्त) तेरे वादे पे करके भरोसा CONTEST…

Posted On: 7 Feb, 2014  
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जनरल डब्बा में

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तेरे वादे पे करके भरोसा {पहली किश्त} (contest)

Posted On: 30 Jan, 2014  
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जनरल डब्बा में

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मुझे इश्क है तुम्हीं से (contest)

Posted On: 26 Jan, 2014  
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जनरल डब्बा में

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लेकिन मैं कुर्बानी दूँ तो क्यों ? ( Contest )

Posted On: 19 Jan, 2014  
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जनरल डब्बा में

4 Comments

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji , सर , सबसे पहले तो आपको बहुत -बहुत धन्यवाद क्योंकि आपने मेरी रचनाओं को पढ़ा और सराहा ..... सद्गुरु जी , मुझे चयन मंडली से कोई शिकायत इसलिए नहीं है कि मैं ये सोचकर कभी नहीं लिखती हूँ कि मैं चयनित की जाऊं .... यहाँ पर एक से एक लेखक है जो मुझसे ज्यादा कहीं माहिर हैं और उनसे मुझे जो सीख मिल रही है वो मेरे लिए बहुत बड़ा गिफ्ट है ..... और मेरे लिए सबसे बड़ी बात ये भी है कि "जागरण जंक्शन ब्लॉग" पर मैं खुल कर लिख सकती हूँ ........ ऐसा भी नही कि मैं कभी चुनी नहीं गयी .... कई बार बेस्ट ब्लॉगर भी बन चुकी हूँ ..... मेरी पोस्ट टॉप पर कई बार रही है ...... मुझे ख़ुशी है कि इस मंच के जरिये मैं अपने विचारों से सभी को अवगत करा पा रही हूँ और साथ ही साथ समाज को कुछ दे प् रही हूँ ......... सादर नमन ....

के द्वारा: sunita dohare Management Editor sunita dohare Management Editor

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

वाह रे आम आदमी के “ख़ास” आदमी सरकारी बंगले को लेने से मना कर चुके दिल्ली के मुख्यचमंत्री अरविंद केजरीवाल को रहने के लिए मिला अपार्टमेंट कई सुप्रीम कोर्ट जजों के बंगलों और केंद्रीय मंत्रियों के बंगले से बड़ा है. केजरीवाल के परिवार ने अपार्टमेंट देख लिया है, अपार्टमेंट की चाभी दिल्ली सरकार को साफ सफाई के लिए दे दी गई है। ये फ्लैट आम आदमी के फ्लैट के जैसा न होकर सारी सुविधाओं से लैस है. केजरीवाल को एक दूसरे से सटे दो फ्लैट आबंटित हुए हैं। एक में उनका दफ्तर होगा और दूसरे में वो खुद रहेंगे. भगवानदास रोड पर बने ये दोनों फ्लैट ड्यूपले हैं शहरी विकास मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक 7/7 भगवानदास रोड में होगा केजरीवाल का दफ्तर, तो 7/6 भगवानदास रोड केजरीवाल का निवास होगा. दोनों अपार्टमेंट में 5-5 बेडरुम और एक-एक लॉन हैं। दोनों अपार्टमेंट का कुल एरिया है करीब 9 हजार वर्ग फीट और बिल्ट अप एरिया है करीब 6 हजार वर्ग फीट है.............. वैसे सुबह की बात शाम को और शाम की बात सुबह भूल जाना ही तो एक अच्छे नेता का लक्षण है......... सुनीता दोहरे .....

के द्वारा: sunita dohare sub editor sunita dohare sub editor

सुनीता जी, आपने तमाम देश के सच्चे देश प्रेमियों, भक्तों की छिपी आवाज को उजागर किया है ! हम कहते हैं कि भारत की जनता इन ६६ सालों में काफी शिक्षित हो गयी है ! अपने मतों की कीमत और इसका प्रयोग कैसे करना है, इसे अच्छी तरह जान गयी है, लेकिन हम गलत हैं ! कांग्रेस ६६ सालों से राज कर रही है, काले धन से विदेशी बैंकों को भर रही है, खुद लखपति से अरब पति बन रहे हैं, जनता के विकास के नाम पर नेताओं के महल बन रहे हैं ! अरविंद केजरीवाल आम आदमी की पार्टी के नाम पर काश्मीर से भी छूट कारा पाना चाहते हैं ! आतंकावाद फैलानेवालों को भी आम आदमी बता रहे हैं ! कल तक कांग्रेस को भ्रष्टचारी बता रहे थे आज सरकार उन्ही के सहयोग से बना रहे हैं ! आँखें बंद करके ऐसे राजनेताओं को ही मत देकर जीता रहे हैं ! असलियत बयान करने के लिए आप धन्यवाद के पात्र हैं ! हरेन्द्र जागते रहो

के द्वारा: harirawat harirawat

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

के द्वारा: abhishek shukla abhishek shukla

के द्वारा: Rajesh Kumar Srivastav Rajesh Kumar Srivastav

के द्वारा: anilkumar anilkumar

सुनीता जी सबसे पहले मैं आपकी कलम को सलूट करूंगा इतना सटीक सही तथ्यों को उजागर करते हुए आप ने जनता को जगा दिया है ! ये आपकी कलम से निकली जनता की आवाज है, आपने मशाल जला दी और अब इस मशाल से हजारों और फिर करोड़ों मिशाले जलेंगे, इन अखलेश-मुलायम के खिलाफ, गुंडे राज के खिलाफ ! वे दुर्गा हैं, दुर्गा शक्ती नागपाल, तीन शक्तियों का गठ बंधन, वे दुर्गा के साथ साथ शक्ती और नागों को पालती हैं तो फिर ये बरसाती मेढक, जनता की डाली घास चरने वाले क्या दुर्गा से टकरा पाएंगे ? नहीं ! मैं स्वयं दुर्गा जी को हमेशा याद करता हूँ तो रोज एक नई शक्ती मिलती है ! फिर ये अखिलेश यादव, मुलायमसिंह यादव इनके दिन नजदीक आगये, कहते हैं की मन्त्र तो नहीं आता बिच्छू का और हाथ डाल दिया सांप के बिल में ! अब देखते जाओ इलाहाबाद कोर्ट ने रेट माफिया वालों के खिलाफ रिपोर्ट माँगी है, जनता सारी दुर्गा जी के साथ है, हाँ चंद राक्षसी एस पी वाले कुछ शोर जरूर मचाएंगे लेकिन फिर अपनी मौत मारे जाएंगे ! बहु सारी बधाई ! हरेन्द्र (अमेरिका से) जागते रहो

के द्वारा: harirawat harirawat

एक प्रभावशाली लेख ! गुनाहगार मुख्य मंत्री और उसके सहयोगियों की काली करतूतों की दास्ताँ, दिल दहलाने वाला लेख ! जिस देश में आँख रहते अंधा कान रहते बहर प्रधान मंत्री हो सोनिया और राहुल सता शिखर पर हों उस देश में ऐसी ही बिपती आती रहेगी ! हिमांचल और उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार और दोनों प्रदेशों में प्रलय का तांडव ! अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए और बिपती में फंसे लोगों की बद दुवा तो लगेगी प्रदेश के मुख्य मंत्री राज्यपाल सता से चिपके मंत्रियों और नौकरशाहों को ! वे किये गए अपने पाप कर्मों की ज्वाला में जलेगें ! साथ में उनके सहयोगी चमचे भी इस इस कुण्ड से बच नहीं पाएंगे ! उत्तराखंड से शंकर भगवान् रूष्ट हो चुके हैं और इसका खमियाजा भुगतना पड़ेगा कांग्रेस मंत्रीमंडल को ! बहुगुणा मुख्यमंत्री को, प्रधान मंत्री , कांग्रेस की अध्यक्ष, गृह मंत्री और राहुल गांधी को ! एक जन जागरण लेख ! हरेन्द्र जागते रहो !

के द्वारा: harirawat harirawat

सुनीता जी आपने बी जे पी के बारे में विस्तार से लिख दिया है और भारतीय जनता पार्टी यु पी को ही अपना गढ़ मानते हुए यहाँ से अपने आज की तारिख के बीजेपी के भावी प्रधानमंत्री के उम्मीदवार श्री नरेन्द्र मोदी लखनऊ से चुनाव लड़ेंगे ऐसा पार्टी ने इसलिए एलान किया है की वे नरेन्द्र मोदी को आज का अटल बिहारी बाजपेयी समझते हुए जनता के बीच लाने का प्रस्ताव रखे हैं अब सोचने की बात है किसी नेता को इतना बड़ा कद देने से पहले यह तो विचार करना ही चाहिए की उस नेता में ऐसी कुछ बात भी है जिस नरेन्द्र मोदी को बाजपेयी जी ने २००२ के दंगे के दौरान यह कहा हो की मोदी ने अपना राज धर्म नहीं निभाया उसी मोदी को बाजपेयी के बराबर पेश करना क्या बी जे पी के नेता ही कबूल करेंगे हलाकि अब बाजपेयी जी का नाम बीजेपी वाले कम ही लेते हैं जब अडवाणी जी किनारे कर दिए गए फिर बाजपेयी जी तो कब के राजनीती छोड़ चुके हैं उनसे तो बी जे पी वाले अब सलाह मशविरा भी नहीं करते . खैर नरेन्द्र मोदी ने तीसरी बार गुजरात में जीत हासिल की है उनके खिलाफ कांग्रेस एडी छोटी का जोर लगाकर कुप्रचार किया लेकिन जीत नरेन्द्र मोदी की ही हुयी अतः इसको देखते हुए ही बीजेपी उनको आगे लेकर आई है लेकिन अमित शाह को यु पि चुनाव की कमान देने से पहले प्रदेश के नेताओं को भी विश्वास में लेना चाहिए था अगर ऐसा नहीं किया गया तो बीजेपी की अंदरूनी लडाई ही उनको हार का मुख दिखलाएगी निस्संदेह देश में कांग्रेस के प्रति असंतोष है और यूपी में समजवादी पार्टी के काम काज से भी वहां की जनता खुश नहीं वहां फिर से गुंडा राज स्थापित हो चूका है अतः इसका लाभ भी बीजेपी पार्टी को मिल सकता है लेकिन आज बीजे पी और जदयू दोनों अलग हो गये बिहार में इससे एन डी का एक घटक दल तो इनके हाथ से निकल गया है बी जे पी की सीटों का नुकसान इसके चलते तो नहीं होने वाला पर संख्या बल में तो कमी आएगी न अतः यह बड़ा दुर्भाग्य पूर्ण कहलायेगा दोनों दलों के लिए जदयू के लिए भी और बी जे पी के लिए भी खैर यह सब अभी दूर की बात है अभी लोकसभा चुनाव में एक साल की देरी है आपने एक अछि राजनितिक प्रस्तुति दी है

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

के द्वारा: Rajesh Kumar Srivastav Rajesh Kumar Srivastav

आदर्णीय सुनीता जी , वास्तव में प्रत्येक दंगा दुर्भाग्यपूर्ण होता है , परन्तु गुजरात और गोधरा के संदर्भ में  सबसे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण तीस्ता शीतलवाद जैसे तथाकथित सैकुलरवादी और मानवअधिकारवादियों की भूमिका है । वे गुजरात मे एक राष्ट्रवादी दल और उसके प्रखर राष्ट्रवादी नेता की चुनावी सफलता को स्वीकार  नहीं कर सके । उन्हो ने गोधरा उपरान्त गुजरात दंगों को , उस दल और उस नेता को पूर्णरूप से बदनाम करने के एक अवसर के रूप में प्रयोग किया । क्या इससे पहले गुजरात में दंगे नही हुए ,या  देश के किसी अन्य भाग में दंगे नही हुए । परन्तु जिस प्रकार यहां पर बिना किसी जांच सबूत के महज कुछ लोगों के आरोपों के आधार पर एक व्यक्ती को प्रारम्भ से ही इन समस्त दंगों का जिम्मेदार ठहरा दिया गया , ऐसा पहले तो कभी नहीं हुआ  था । यह तथाकथित सेकुलरवादी गत दस वर्षों इस व्यक्ती को बदनाम के एक सूत्रीय अभियान में लगे हुए हैं । परन्तु आज तक सफल नहीं हो पाए हैं । यह अपनी हठधर्मिता से दंगे के जख्मों को कुरेद कर बराबर हरा रखना चाहते हैं , जिससे गुजरात के विकास और उस नेता के सबको जोड कर चलने के प्रयासों को झुठलाया जा सके । परन्तु वे इसमें कभी सफल न हो पाए गें , क्यो कि वे न तो प्रजातंत्र का सम्मान करते है , और न ही न्यायालय  का ।    

के द्वारा: anilkumar anilkumar

के द्वारा: डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश ) डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश )

के द्वारा: sunita dohare (shanu) sunita dohare (shanu)

के द्वारा: Madan Mohan saxena Madan Mohan saxena

एक एक बात सही कही है आपने .आभार नवसंवत्सर आपको मंगलमय हो .नरेन्द्र से नारीन्द्र तक .महिला ब्लोगर्स के लिए एक नयी सौगात आज ही जुड़ें WOMAN ABOUT MANजाने संविधान में कैसे है संपत्ति का अधिकार-1

के द्वारा: shalinikaushik shalinikaushik

बहुत सही कहा है आपने .आभार मोदी संस्कृति:न भारतीय न भाजपाई . .महिला ब्लोगर्स के लिए एक नयी सौगात आज ही जुड़ें WOMAN ABOUT MAN

के द्वारा: shalinikaushik shalinikaushik

के द्वारा: विवेक मनचन्दा विवेक मनचन्दा

jlshing...ji .....सादर नमस्कार , आपके द्वारा ...........आपका विस्तृत और शोध परक आलेख पूरे धैर्य के साथ पढ़ा …. पर मुझे ऐसा लगा कि अंतिम पैराग्राफ में आपने सरेंडर कर दिया. पुन: परम्परा पर आ गयीं .....सर मेरे विचार मैंने ऊपर दिएऔर .. पर यहाँ पर ये जो भी मैंने लिखा है कि .....{दूसरी ओर परंपराओं और नैतिक सामाजिक मान्यताओं के पक्षधरों का मानना है कि अगर विवाह पूर्व शारीरिक संबंधों के क्षेत्र में समाज अपना दखल देना बंद कर देगा तो हालात बद से बदतर होते जाएंगे. वर्जिनिटी की अवधारणा को समाप्त करने का अर्थ है युवाओं को सेक्स की खुली छूट देते हुए किसी भी प्रकार की नैतिक जिम्मेदारियों से मुक्त कर देना. अगर हम ऐसा कुछ भी करते हैं तो यह सामाजिक और पारिवारिक ढांचे को पूरी तरह समाप्त कर देगा. कैजुअल सेक्स जैसे संबंध हमारे समाज के लिए कभी भी हितकर नहीं कहे जा सकते, इसीलिए अगर परंपराओं, नैतिकता और मूल्यों को सहेज कर रखना है तो वर्जिनिटी की अवधारणा को भले ही जोर-जबरदस्ती के साथ लेकिन कायम रखना ही होगा. लेकिन ये मुद्दा विचारणीय है कि कैजुअल सेक्स की बढ़ती पहुंच के बावजूद आधुनिक युग में लगभग ७० प्रतिशत पुरुष अपने लिए कुंवारी (वर्जिन) पत्नी की तलाश कर रहे हैं।” वह ऐसी महिला को अपनी जीवनसंगिनी नहीं बनाना चाहते जिसने विवाह से पहले किसी के साथ सेक्स किया हो. भारतीय युवाओं की मानसिकता और उनकी प्राथमिकताओं को मद्देनजर रखते हुए एक ओर जहां वन नाइट स्टैंड और कैजुअल सेक्स का प्रचलन जोरों पर है, वहां “वर्जिन पत्नी” की मांग थोड़ी अटपटी सी लगती है....... {{{दूसरी ओर परंपराओं और नैतिक सामाजिक मान्यताओं के पक्षधरों का मानना है}}}.....सादर नमन ,,,,,,

के द्वारा: sunita dohare (shanu) sunita dohare (shanu)

आदरणीय सुनीता जी, सादर अभिवादन! आपका विस्तृत और शोध परक आलेख पूरे धैर्य के साथ पढ़ा .... पर मुझे ऐसा लगा कि अंतिम पैराग्राफ में आपने सरेंडर कर दिया. पुन: परम्परा पर आ गयीं यथा - "कैजुअल सेक्स जैसे संबंध हमारे समाज के लिए कभी भी हितकर नहीं कहे जा सकते, इसीलिए अगर परंपराओं, नैतिकता और मूल्यों को सहेज कर रखना है तो वर्जिनिटी की अवधारणा को भले ही जोर-जबरदस्ती के साथ लेकिन कायम रखना ही होगा." काफी पहले पेशेवर महिलाओं, फिल्म अभिनेत्रियों जिनके बारे में यह मान्यता है कि उन्हें अपने पेशे में बहुत बार समझौते करने पड़ते हैं - उन्होंने भी यही कहा था - शादी से पहले शारीरिक सम्बन्ध !.... न बाबा न! आज परिस्थितियां बदली हैं शादी की उम्र बड़ी है थोड़ी आजादी बढ़ी है आधुनिकता के माहौल में बहुत कुछ बदला है ... अगर नहीं बदला है तो पुरुष की पाशविकता ... आज भी महिलाएं/लड़कियां सामूहिक दुष्कर्म के बाद आत्महत्या करती हैं, उनका कथित प्रेमी अपने मित्रों के साथ मिलकर बलात्कार करता है. अगर इन सबको रोकना है तो अमूल चूल परिवर्तन करने होंगे और कठोर दंड का प्रावधान करना होगा या बलात्कार जैसा शब्द को अर्थहीन जान वर्जिनिटी को भी शब्दकोष से हटाना होगा ... ऐसा मेरा विचार है आप बुद्धिजीवी और प्रगतिशील महिलाएं क्या सोंचती है और महिला प्रतारणा को कैसे न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके उसके लिए सामूहिक प्रयास होना चाहिए न कि स्त्री स्वच्छंदता के नाम पर विकृति को बढ़ावा देना......... साभार!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

सुनीता जी आपने आतंकवाद की अच्छी ब्याख्या की है और यह आतंकवाद कई वर्षों से देश और दुनिया में फल फूल रहा है पर एक देश अमेरिका भी है जिसने अपने देश पर एक आतंकी द्वारा हमला किये जाने के बाद अपनी सुरक्छा ब्यवस्था किस तरह चाक चौबंद कर दिया यह जग जाहिर है उस देश के हुक्मरानों ने ओसामा बिन लादेन को उसके छिपने के ठिकाने में घुस कर मारा और उसे समुद्र में दफ़न कर दिया केवल यही कारन है की वहां कोई दूसरा आतंकी हमला नहीं हुवा पर, अपने देश में क्या होता है ? अजमल कसब जो मुम्बई आतंकी हमले में शामिल था रंगे हाथों पकड़ा गया और उसे अपने देश के कानून ने फांसी की सजा सुनाई पर यहाँ के नेता उसे वर्षों जेल में बिरयानी खिलाते रहे जिस आतंकवादी ने इस देश की संसद पर हमला किया /करवाया उसको भी यहाँ की सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई उसको भी वर्षों पालते रहे और जब बहुत देर बाद फांसी हुयी भी तो डरते रहे की यहाँ का मुस्लिम समाज नाराज होकर कांग्रेस को वोट देना न बंद कर दे जब यहाँ के राजनीतिग्य इस तरह की राजनीती आतंकवाद के मसले पर करेंगे और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की जनता को आतंकवादियों द्वारा मरवाते रहेंगे हमला होने के बाद सुरक्षा ब्यवस्था को मजबूत करने में लगेंगे और जैसा की आपने लिखा है की जब तक देश में छिपे आतंकी समर्थकों का खात्मा नहीं होगा तब तक आतंवाद कैसे रुकेगा? क्यूंकि इसमें संदेह नहीं की कोई भी आतंकी हमला बिना देश के अन्दर के लोगों की मिली भगत के संभव है ही नहीं और यह सच्चाई सरकार में बैठे अधिकारीयों नेताओं सबको मालूम है पर नेताओं की मनसा ही नहीं की आतंकवाद को समूल ख़तम किया जाये और इसका कारन भी यही है की किसी आतंकी हमले में आज तक कोई नेता मारे नहीं गए अगर ऐसा होता तो जरुर ये नेता इस पर पाबंदी लगाने की सोचते अब आम जनता के मरने का क्या गम है इन नेताओं को वैसे भी हमारे देश की आबादी विश्व बहर की पूरी आबादी (चीन को छोड़कर ) ज्यादा ही है शायद इसको ध्यान में रखते हुए ही यह सब हो रहा होगा की कुछ तो आबादी कम हो रही है वरना क्या कारन हो सकता है? यह एक गंभीर प्रश्न है आतंकी हमले की सूचना होने के बाद यहाँ आतंकी हमला करके बाख के निकल जाते हैं यह इस देश की सुरक्षा ब्यवस्था की नाकामी नहीं तो और क्या है और नेता तो अपने आप को अति सुरक्छित रख रहे हैं उनकी सुरक्षा में ही तो इस देश की सुरक्षा एजेंसी और पुलिस लगायी गयी है आम जानत को तो भाग भरोसे जीने के लिए छोड़ा गया है अतः जब तक आतंकवाद पर राजनीती होती रहेगी तब तक आतंकवाद दिन दिन अपना पैर फैलता जायेगा और आम जनता यु ही मारी जाती रहेगी

के द्वारा: ashokkumardubey ashokkumardubey

दिमाग में ये प्रश्न बार उठता है कि आखिर एक प्रान्त का मुख्यमंत्री देश में इतना लोकप्रिय कैसे हो गया ? मोदी की छवि इस स्वतंत्र भारत के इतिहास में कहीं भी देखने को नहीं मिलती. और खासकर इन हालातों में जब देश के सभी नेताओं की विश्वसनीयता का ग्राफ गिरा हो, तो लगता है कि आखिर अचानक ऐसा क्या मोदी ने खेल खेला कि पूरा देश उनकी ओर आशा-भरी निगाहों से देख रहा है. उत्तर-प्रदेश के ७० फ़ीसदी आम आदमी को कहीं न कहीं ये विस्वास हो चला है कि यदि मोदी देश के प्रधानमंत्री बनते हैं तो देश की काया पलट जायेगी देश में रामराज्य आ सकता है. आपने ऊपर भी इस विषय में लिखा है और आपके लेखन से ये स्पष्ट सा लग रहा है जैसे मोदी अवश्य ही प्रधानमंत्री बनेंगे ! बिलकुल बनेंगे ! लेकिन आप ऐसा नहीं सोच सकते की मोदी के आ जाने से सब कुछ बदल जाएगा ! हाँ , एक असर जरुर दिख सकता है , बहुतज्यादा बदलाव के लिए भाजपा को या मोदी को १०-१५ साल राज सोम्पना होगा !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: विवेक मनचन्दा विवेक मनचन्दा

जीवन पीछे लौट जाना चाहता है, पर हजारों मींलों का फासला वापस तय करने के लिये उतनी हिम्मत जुटा पाना हर एक के बस में नहीं ! आज सुबह से आसमान बादलों से भरा है खिड़की, दरवाजों और परदों पर गीली-गीली हवा थपेड़े मार रही है माहौल में अजीब सा भारीपन तैर रहा है जब भी बादल आकाश को अपनी मुठ्ठियों में कैद कर लेते हैं तभी ना जाने क्यों मेरी आत्मा सुलगने व चटखने लगती है इन मेघ भरे बैंगनीं अंधेरे में दिल दहल जाता है और अक्सर ये सोचता है कि रिश्ते क्या होते हैं, ये क्यों पानी की तरह हाथ से छूट जाते हैं ये रिश्ते क्यों बर्फ की तरह जम जाते हैं, जिन्दगी की शीतलता समाप्त कर देते हैं ये बर्फ से रिश्ते निहारते हैं हमारी ओर, आँखों से एक मौन सवाल करते हैं कि जन्म क्या यूं ही बीतेगा. ये बर्फ जैसे सफेद स्याह चेहरे, हमारे जीवन की डोर से बंधकर , एक अनवरत बंधी सी जिन्दगी जीते हैं. टकटकी लगाये बर्फ रूपी रिश्तों के पिघलने का इन्तजार करते हैं बहुत खूबसूरत लेखन आदरणीय सुनीता जी !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार के पहले मंत्रिमण्डल विस्तार में 12 नए मंत्री शामिल किए गए । इन मंत्रियों में चार को पुलिस रिकार्ड में दागी माना गया है।सीएमओ हत्‍याकांड में फंसे विनोद सिंह उर्फ पंडित सिंह से पिछले दिनों सीएम अखिलेश ने ही मंत्री पद छीना था।मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की चौतरफा किरकिरी हुई थी और बाद में उन्होंने पंडित सिंह से इस्तीफा ले लिया था लेकिन सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाने वाले पंडित सिंह को आखिरकार एक बार फिर से मंत्री बना दिया गया। सूबे में जब से सपा सरकार आई तब से प्रदेश में क़ानून व्यवस्था खस्ताहाल होती जा रही है| इसका ताजा उदाहरण तब देखने को मिला जब अखिलेश सरकार ने बीते शुक्रवार को जानवरों की तस्करी करने वाले एक दागी शख्स को राज्य मंत्री का पद दे दिया| प्रदेश सरकार ने दो दिन पहले ही समाजवादी पार्टी के नेता के सी पाण्‍डेय को गन्‍ना अनुसंधान परिषद का उपाध्‍यक्ष बनाते हुए राज्‍यमंत्री का दर्जा दिया। अब तो यही लगता है कि उत्तर प्रदेश के लोगों ने गलत हाथों में प्रदेश कि सत्ता सौंप दी है । विवेक मनचन्दा,लखनऊ

के द्वारा: विवेक मनचन्दा विवेक मनचन्दा

प्रेम एक दृष्टिकोण है, प्रेम एक चारित्रिक रुझान है जो किसी मनुष्य के साथ-साथ पूरी दुनिया से हमारे संबंधों को अभिव्यक्त करता है. प्रेम केवल एक लक्ष्य और उसके साथ के संबंधों का नाम नहीं है. यदि एक मनुष्य केवल दूसरे एक मनुष्य से प्रेम करता है और उस दूसरे मनुष्य से जुड़े अन्य सभी व्यक्तियों में उसकी रुचि नहीं है, तो उसका प्रेम, प्रेम न होकर उसके अहं का विस्तार मात्र है. प्रेम, इश्क, चाहत, प्यार, मोहब्बत एक ऐसा अनमोल हसीं तोहफा है जिसकि गहराई आप कभी मांप नहीं सकते. किसी बाल्टी में या दरिया में जितना पानी है तो आप ये नहीं कह सकते कि मेरा प्रेम मेरा इश्क इतना ही भरा हुआ है सच तो ये है कि समुन्दर के जल स्तर को तो मांप सकते हैं पर प्रेम और इश्क को नहीं. एक बार जिससे दिल के, मन के और आत्मा के तार जुड़ कर गठबंधन कर लेते हैं फिर उसे अपने प्रेमी को देखने के लिए आँखों की आवश्यकता नहीं पड़ती. क्योंकि प्रेमी तो पूर्ण रूप से ह्रदय में बस चुका होता है. एक ‘प्रेमी’ या ‘प्रेमिका’ होने का अर्थ है ‘प्रेम’ को पा लेना. तो यह बिलकुल वैसी ही बात है, जैसे कोई व्यक्ति लेख लिखना चाहता है और समझे कि उसे केवल एक प्रेरक-विषय की आवश्यकता है, जिसके मिल जाने पर वह स्वत: ही बढ़िया लेख लिख लेगा…… किस लिए छोड़ा जाता है धर्म ? प्रेम के लिए ना, तो फिर प्रेम उंचा हुआ और ये सत्य भी है प्रेम एक ऐसा विस्वास है कि जो सब धर्मो से ऊँचा ह प्रेम एक ऐसा विषय है आदरणीय सुनीता दोहरे जी जिस पर न जाने कितना लिखा गया , कहा गया किन्तु आज तक शायद ही किसी की समझ में बहुत ज्यादा आया होगा !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

प्रश्न मात्र कपड़ों का नहीं है प्रश्न केवल आपकी दृष्टिकोण का है. जो नारी को केवल उपभोग और काम तृप्ति की भावना से देखते है. अगर महिलाओं के खुले अंगो को या कम वस्त्रों को देखकर पुरुषों के मन में काम वासना पैदा होती है तो फिर पुरूषों के ऊपर भी ड्रेस कोड लागू होना आवशयक है क्योंकि हो सकता है कि पुरुषों का खुला तन महिलाओं के मन में कामेच्छा पैदा करता हो ? बदले की भावना में तो बहुत कुछ कहा और सुना जा सकता है लेकिन इससे कोई हल नही निकलने वाला क्योंकि मूल समस्या उस दृष्टि और सोच की है. जब हर व्यक्ति स्वयं खुद अपने परिवार के नैतिक मूल्यों का रखवाला बने.............बहुत ही सुन्दर और सत्यता से ओत-प्रोत बात कही हैं आपने ...बहुत सार्थक और स्पष्ट लेखन है आपका ! बहुत सुन्दर और स्पष्टवादिता !.सादर प्रणाम ..

के द्वारा: ashok900 ashok900

भारतीय संस्कृति में लज्जा को नारी का श्रृंगार माना गया है. पश्चिमी सभ्यता की उड़ान में महिलाओं को ये भी याद नहीं रहता कि उनके शरीर की बनावट के अनुसार कौन से कपड़ों में वो सभ्य और शालीन दिख रहीं है. मैं ये नही कहती कि आप पश्चिमी सभ्यता के कपड़े न पहने आप जरुर पहनिए पर अपने शरीर की बनावट के अनुसार पहनिए जो आपको खुद लगे कि आप किसी सार्वजानिक स्थान पर जा रहीं है तो लोग आपके पहनावे को देखकर आप पर फब्तियां न कसें. बलात्कार जैसा घिनौना दुष्कर्म सामंती समाज की विकृति और देन है अगर बलात्कार की वजह वस्त्र अभाव होता तो आदिवासी समाज में बलात्कार होते. दरअसल बलात्कार की वजह वस्त्र अभाव नहीं बल्कि विवेक और संयम का अभाव है. बहुत सार्थक और स्पष्ट लेखन है आपका ! बहुत सुन्दर और स्पष्टवादिता !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

आदरणीय सुनीता जी, सादर ! ""लेकिन इन हालातों को देखते हुए तो ये लगता है कि सोनिया गाँधी, सुषमा स्वराज, शीला दीक्षित, जयललिता, मायावती, रेणुका चौधरी, अम्बिका सोनी, ममता बेनर्जी, राबड़ी देवी और अन्य तमाम महिला कल्याणकारी संस्थाओं में बैठी निर्लज्ज, बेहया, औरतें जो सिर्फ कुर्सी की भूख के लिए अपने कान बंद करके बैठी हैं. आज के समय में इस देश की माँ, बेटियों,और बहिनों को मुजरिमों से ज्यादा इन औरतों के बदलते रूप को लेकर आम-जन के दिलों में एक धारणा बन गई है जिनकी लापरवाही से महिलाओं को इन बलात्कारियों से ज्यादा खतरा है. """"""""""""" आपने बिलकुल सही जगह वार किया है ! देश की जनता सब समझ रही है ! यथार्थ तो यही है की ये उच्च पदों पर आसीन महिलायें ""चाहे तो"" क्या नहीं कर सकती हैं !

के द्वारा: shashibhushan1959 shashibhushan1959

आदरणीय सुनीता जी, नमस्कार! हो सकता है, आप सही कह रही हों!....किरण बेदी भी साहसिक महिला हैं! अन्ना हजारे की प्रिय भी हैं. अगर अन्ना, अरविन्द, किरण, रामदेव भाजपा के साथ हो जाते तो कांग्रेस को पटकनी देना आसान हो जाता! .... अब तो सभी अलग अलग बिखर चुके हैं!.... अब मोदी का करिश्मा देखना बाकी रह गया है, जो २० दिसंबर को पता चल जायेगा! हम सबका प्रयास यह होना चाहिए कि नया सवेरा के लिए जो भी प्रकाश पुंज बनकर आये उसका नैतिक समर्थन तो अवश्य करें ... मीन मेख निकालेंगे तो कोई भी ब्यक्ति अपने आप में सम्पूर्ण नहीं हो सकता ... अगर होता तो वह मानव से ऊपर परमात्मा हो जाता ... परमात्मा को भी उद्देश्य की पूर्ति के लिए सबको या बहुजन को साथ में लेकर चलना ही पड़ा है! काश कि यह सद्बुद्धि अभी भी इन लोगों में आ जाय तो देश का कल्याण हो जाय! आपके तार्किक आलेख सही हैं पर ... रास्ता ???

के द्वारा: jlsingh jlsingh

yogi sarswat जी .......महोदय ,आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ है कि बिना आग लगे धुँआ उठा हो . जहां तक आप बात अरविन्द के ईमानदारी की करते हैं तो एक बात मैं आपको स्पष्ट कर देना चाहती हूँ कि हमारे अरविन्द जी से कोई व्यक्तिगत सम्बन्ध और संपर्क नहीं हैं हम १२५ करोड़ की आम जनता की आबादी का एक हिस्सा हैं हम जो भी बात कहते है वो हमें अन्य श्रोतों द्वारा प्राप्त होती है श्रोत ये कहते हैं कि अरविन्द ने एक राष्ट्रीय स्तर के उस आंदोलन को अन्धकार के भविष्य में विलीन कर दिया है और श्रोत ये भी कहते हैं कि अरविन्द ने गांधी जी के बाद सबसे बुजुर्ग महा जन नायक अन्ना हजारे को बिना विश्वास में लिए अपनी किसी राजनीति महात्वाकांक्षा के लिए राजनीति दल का निर्माण किया . श्रोत ये भी कहते हैं कि अरविन्द ने राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त समाज सेविका तथा प्रथम महिला आई.पी.एस अधिकारी पर साजिश के तहत लगे आरोप पर चुप्पी साध कर विरोधियों की होंसला अफजाई की. श्रोत ये भी बताते हैं कि अरविन्द केजरीवाल जो अपने साथ में देश के १२५ करोड़ की आबादी साथ में होने का प्रचार करते थे और खुद को जनता का सेवक कहते थे लेकिन आम आदमी पार्टी के गठन के वक्त अन्य दलों की भांति ही उन्हें भी देश की १२५ करोड़ की आबादी में पार्टी के संयोजक पद हेतु सिर्फ अपना ही नाम याद रहा और वह आम जनता के सेवक से जनता के भाग्यविधाता बन गये .महोदय ,चर्चा तो कॉफी लंबी हो सकती है लेकिन मैं अपनी बात को विराम देते हुये सिर्फ एक बात कहना चाहती हूँ कि ये अन्य श्रोत जिनके माध्यम से हमें जानकारी प्राप्त होती है ये वही श्रोत हैं जो अरविन्द को देश के काले धन ,राबर्ट बढेरा ,नितिन गडकरी का भ्रष्टाचार इत्यादि की जानकारी मुहैया कराते हैं . जहा तक बात अरविन्द के साथ देश के अवाम की है तो आप याद कीजिये अन्ना और केजरीवाल का वो आखिरी धरना जिसे जनता ने पूरी तरह से नकार दिया था . इस धरने के बाद ही केजरीवाल ने एक राजनीति दल की घोषणा की मैं आपसे जानना चाहती हूँ कि जिस जनता के अभाव में धरना असफल हुआ था इन हालातों में वही जनता जिसके सामने आपकी कलई धुल चुकी है वह आपको वोट की राजनीति में कितना सहयोग प्रदान करेगी .........

के द्वारा: sunita dohare (shanu) sunita dohare (shanu)

यहाँ पर जनता को मैं अपने विचारों से अवगत कराना चाहूंगी कि वो इस देश में चहुमुंखी विकास कर एक नई क्रांति ला सकती हैं. क्योंकि उनमें क़ाबलियत है उनके होंसलों में उड़ान है वो देश को एक सुखद और सुनहरा भविष्य दे सकतीं हैं. क्योंकि वो निष्पक्ष कार्यप्रणाली को अपनाती है. किरण बेदी कहती हैं कि सोशल मीडिया एक नया माध्यम है, जिसके जरिए हम अपने विचार लोगों तक पहुंचा सकते हैं. यह पेपरलेस है. इस नए सिस्टम के लिए पॉलिसी बननी चाहिए, लोगों को जागरुक किया जाना चाहिए. इसकी बहुत जरूरत है. अगर भ्रष्टाचार मिटाना है तो उसकी जड़ तक जाना जरूरी है. उनके विचार जीतने निर्मल हैं उतने ही बफादार भी. मैं आपकी बात से सहमत हूँ लेकिन हम सिर्फ किरण बेदी को लेकर ही ये बात नहीं कह सकते ! अरविन्द में भी वाही जज्बा है जो किरण बेदी में है लेकिन क्यूंकि वो राजनीती में आ गए हैं इसलिए उन पर संदेह हो जाता है ! मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूँ की अगर अरविन्द पर शक किया जाता है तो फिर इस देश में कोई भी इमानदार व्यक्ति नहीं है !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

rohan 12121212 ....जी ...महोदय , जब केजरीवाल के समर्थक विस्वास जैसे भारी-भरकम शब्दों की बात करते हैं तो मेरे सामने जन लोकपाल के मुद्दे पर अन्ना हजारे और देश के १२५ करोड़ लोगों के टूटे हुये विस्वास से मुरझाया हुआ चेहरा द्दिखाई देता है अन्ना हजारे को लेकर आपके नेता अरविन्द केजरीवाल के बीच लोकप्रियता के प्रतिशत को लेकर प्रतिस्पर्धा जंग हो सकती है जिसका आम जनता से कोई लेना देना नहीं है लेकिन अरविन्द केजरीवाल को देश की १२५ करोड़ जनता को जवाब देना होगा कि आखिर किस राजनैतिक महत्वाकान्छा की पूर्ती के लिए हिन्दुस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा आन्दोलन स्वार्थ की भेंट चढ़ गया अन्ना को खराब कहकर आप केजरीवाल को अच्छा सिद्द नहीं कर सकते आम जनता को एक बेहतर और एक ईमानदार सरकार की आवश्यकता है आपसे मेरा व्यक्तिगत निवेदन है कि देश के भविष्य को अन्ना और अरविन्द केजरीवाल की लड़ाई के नाम पर स्वाहा ना करें .....सादर नमन ...

के द्वारा: sunita dohare (shanu) sunita dohare (shanu)

दुनिया विस्वास पे ही चलती है हमे किसी न किसी पे तो विस्वास करना हे होगा कोई तो परिवर्तन लायेगा , हमे न्याय दिलाएगा !! अगर आप अरविन्द केजरीवाल के तरीके को गलत करार दे रही हैं तो आप हे बताइए के इसके अलावा क्या विकल्प है आपके पास ?? जहा तक अन्ना की बात है तो इस देश में सिर्फ आन्दोलन करने से कुछ नहीं होने वाला है . भूखे रहने से सर्कार कोई कोई फरक नहीं परता है . आप भूखे रहे मर जाये कोई सुनने वाला नहीं है . और अगर अंत में सुन भी लेता है तो आपके मांगो को अपने हित में करके लागु कर देगी , जिससे के कोई फायेदा हनी वाला नहीं है और ये बात सायद आप भी खूब जानते हैं . इसलिए अच्छे कार्य में साथ दें और जो पारदशिता दिख रही है उसे अस्पस्ट रूप से देखने की चेष्टा करे | धन्यवाद् !!

के द्वारा: rohan12121212 rohan12121212

rohan 12121212..जी स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जो भी राजनेता आये सबने हमें इसी प्रकार के मनभावन ( भ्रमित ) करने वाले नारे और वादों से हमारे विस्वास को सदैव ही छलने का काम किया है महोदय . हम इस विस्वास के चलते ही वर्षों फिरंगियों के गुलाम रहे और इस विस्वास के चलते ही अन्ना और अरविन्द के बुलावे पर हजारों की संख्या में अपने बच्चों और रोजगार को छोड़कर कभी जंतर-मंतर कभी इण्डिया गेट तो कभी राम लीला मैदान पर भूखे पेट तपती दोपहर में इस आस से आये थे कि अन्ना जी का अनुभव और अरविन्द केजरीवाल का जोश हमें संघर्ष की एक नई राह प्रदान कर हमारे देश के भविष्य का नव निर्माण करने का अवसर प्रदान करेगा और बदले में हमें मिला वो ६५ साल पुराना नेताओं का झूठा अस्वासन और एक और नई पार्टी का बिल्ला ......... आप विस्वास टूटने की बात करते हैं आज तो अन्ना जी भी चीख-चीख कर कहते हैं कि अरविन्द केजरीवाल ने मेरा विस्वास तोड़ा है बल्कि एक ऐतिहासिक आन्दोलन को जड़ से उखाड़ फैंका है ....सादर नमन ....

के द्वारा: sunita dohare (shanu) sunita dohare (shanu)

सुश्री सुनीता जी क्षमा करें, अरविन्द केजरीवाल पर संदेह की कीचड उछाल कर पता नहीं आप कौन से पक्ष का समर्थन कर रही है. अफ़सोस होता है जब सर्व सुलभ सुविधाओं को त्याग कर कोई समाज की कुरीतिओं को दूर करने की हिम्मत जुटाता है तो आप जैसे बुद्धिजीवी उसके जज्वे और हौसले को सलाम करने के बजाय उसकी मंजिल की दूरी नापने में लग जाते है. उसकी सफलता-असफलता पर दांव लगाने लगते है.आज जब हम वोट देने जाते है तो इस आधार पर वोट दे देते हैं कि किस पार्टी ने हमारा कम खून चूसा है. एक शख्स जो हमें कुछ बेहतर विकल्प उपलब्ध करा रहा है, तो उसके भविष्य को लेकर हम अभी से भविष्यवाडियां कर रहे हैं. कुरीतियाँ रातोरात दूर नहीं होती, कुछ वक्त तो दीजिये फिर अपनी धारणा को साकार कीजिये. खैर, बेस्ट ब्लोगर बनने की बधाई स्वीकार करे.

के द्वारा: anilsaxena anilsaxena

jlsing जी ....आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ......आपके विचार सही हैं पर पिछला रिकॉर्ड अगर देखा जाये जैसे जनता को अरविन्द केजरीवाल से राईट तो रिकॉल का कानूनी ड्राफ्ट दिलवा दे या फिर मेरे उन पर्श्नों के जवाब दे दें जो जनता के हित से जुड़े हैं तो मै अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ पोस्टिंग या शेयर बंद कर दूंगी ! जैसे उन्होंने जनलोकपाल ड्राफ्ट को प्रमोट किया है वैसे ही राईट टू रिकाल को प्रमोट करें l ,,,,,,,आपको याद दिला देती हूँ की अरविन्द से पहले जनता पार्टी के भी मेनिफेस्टो में राईट तो रिकॉल था पर सत्ता में आने के बाद लालू ,,मुलायम जैसे लोगो ने इसका विरोध कर दिया ,,,,जय प्रकाश नारायण जी का सपना था भारत में राईट तो रिकॉल,,,,, बाद में उन्हें स्लो पोइसन दे दिया गया ,,,,1977 में राईट तो रिकॉल न आने का एक मात्र कारण था की आम जनता के पास ड्राफ्ट नहीं था l उस समय के जो कार्यकर्ता थे सरकार बनने के बाद बहुत परेशान हुए ,,,बहुत दौड़ाया गया उन कार्यकर्ताओं को इस तरह के कई वाकये हैं जो इन चाटुकार नेताओं के खिउलाफ हैं और केजरीवाल भी यही भाषा पढ़ने लगे है मैं एक नहीं कई कारण बता सकती हूँ कि उनको राजनीति में कुर्सी की कितनी लालसा है ...खैर कुछ समय की बात है सब सामने आ जायेगा पक्ष भी विपक्ष भी .....सादर नमन ...

के द्वारा: sunita dohare (shanu) sunita dohare (shanu)

के द्वारा: Acharya Vijay Gunjan Acharya Vijay Gunjan

के द्वारा: tejwanig tejwanig

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

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के द्वारा: Sumit Sumit

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सुनीता जी, हमारे मन की अनुभूतियां असंख्य रंगों से रंगी हैं तभी तो यह जीवन कभी एक सा नहीं रहता.. यदि रहता तो किसी एक जगह ठहरे हुये पानी की तरह सडांध मारने लगता. जीवन का सत्य है कि एक दिन हमारी सभी उपलब्धियां हमारे लिये मिट्टी हो जायेंगी परन्तु न जाने कितने औरों के लिये यही उपलब्धियां काम की होंगी जो इन्हें आगे आने वाली पीढियों तक पहुंचायेंगे. मन के भावो को साझा करने के लिये आभार. एक बात और.. आप लगता है बहुत जल्दी में हैं जो एक साथ एक ही दिन इतनी सारी रचनायें पोस्ट कर दी...पाठक शायद इतना पचा न पायें और आप को प्रत्येक पर उनकी मन्शा भी पता न चले...मेरा सुझाव है आप रचनायें कुछ अन्तराल में पोस्ट करें ताकि पाठक उनका स्वाद ले सकें और अपनी राय आप तक पहुंचा सकें. लिखते रहिये.

के द्वारा: Mohinder Kumar Mohinder Kumar

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