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सुकून मिलता है दो लफ़्ज कागज पर उतार कर, कह भी देता हूँ और ....आवाज भी नहीं होती ||

शायद एक दिन ऐसा भी होगा | “वियोग सृंगार”

अनिकेत मिश्रा के द्वारा: Special Days में

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