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विभाग के भीतर विधायिका और न्यायपालिका होना चाहिए|

Posted On: 5 Jul, 2013 Others में

VISION FOR ALLRahul Kumar

648rahul

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शक्ति का पृथक्करण,मतलब सरकार को विधायिका,कार्यपालिका और न्यायपालिका में बांटना-इस सिध्दांत का प्रतिपादन मांटेस्क्यू ने फ्रांसीसी क्रांति के पूर्व राजा के निरंकुशता को रोकने के लिए किया था|लेकिन क्या ये सही नहीं है कि आज इस लोकतंत्र में एक से ज्यादा राजा हो गए?बात कीजिए किसी विभाग की|सैध्दांतिक रुप से वह सिर्फ एक कार्यपालिका है,लेकिन वह विधायिका और न्यायपालिका की तरह भी काम करती है|जिलाधिकारी एक कार्यपालिका है,लेकिन जिला स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए नियम भी तो यही बनाते हैं-मतलब विधायिका की तरह भी कार्य करते हैं और किसी योजना से संबंधित आखिरी निर्णय भी यही लेंगे-मतलब न्यायपालिका का काम भी करती है|लेकिन इनके पास सिर्फ शासन देखने का अधिकार होना चाहिए|एक प्रिंसिपल में विधायिका,कार्यपालिका और न्यायपालिका-तीनों शक्ति निहित होती है|एक प्रिंसिपल ने मुझे फंसाकर बाहर कर दिया|इस तरह के केस में निर्णय लेने के लिए स्कूल स्तर पर अलग से न्यायपालिका होना चाहिए|वह करोड़ों का गड़बड़ी करता है|यदि वहाँ विधायिका होती तो योजना पारित करने और निगरानी का काम विधायिका करती|इसलिए विभाग के भीतर विधायिका और न्यायपालिका होना चाहिए|

भले ही आपके लिए प्रत्यक्ष लोकतंत्र का मतलब हरेक व्यक्ति द्वारा शासन चलाने में भूमिका से हो लेकिन मेरे लिए प्रत्यक्ष लोकतंत्र का मतलब लोकतांत्रिक संस्थाओं तक हरेक लोगों के पहुँच से है|यदि हम हरेक विभाग को एक एक स्तर पर यानि हरेक कार्यपालिका को एक एक स्तर पर विभागीय न्यायपालिका और विधायिका में भी पृथक कर दे,तो कार्यपालिका के रुप में बैठा भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओं पर उसके स्तर या विभाग के न्यायपालिका और विधायिका का दवाब रहेगा|आम लोगों में जागृति आएगी और उसकी राजनीतिक व सामाजिक भागीदारी बढ़ेगी|संस्थाओं का विस्तारीकरण होने से संस्था तक लोगों की पहुँच को देखकर भ्रष्टाचारी लूटना भूल जाएगें और कोई भी व्यक्ति अपराध करना भूल जाएगा|कैसा रहता यदि प्रखंड में BDO,CO,BEO के निरंकुशता और जनप्रतिनिधियों के साथ इनके मिलीभगत को रोकने के लिए आम लोगों की विधायिका वहाँ मौजूद रहती और उस स्तर के न्यायपालिका में लोग भ्रष्ट कारनामों के खिलाफ केस कर पाते या कोई कार्य करवाने के लिए आदेश जारी करवा पाते|
अब इस बदलाव का समय आ गया है|अन्यथा विनाश का समय भी नजदीक है|अपने व्यक्तिगत उपभोग,संभोग को छोड़कर परिवर्तन के लिए भावना को जागृत कीजिए|

एक विचित्र सामाचार सामने आ रही है|डेविड हेडली ने FBI के सामने स्वीकार किया था कि इशरत जहां और तीन अन्य आतंकवादी थे|आज अमेरिका अपने आर्थिक हित को साधने के लिए मोदी का पक्ष ले रही है|क्या ऐसा नहीं हो सकता कि डेविड हेडली को दवाब या सजा में छूट का लालच देकर FBI ऐसा बोलवाया है या FBI अपने मन से कह रही है कि हेडली ऐसा बोला है?
जब हेडली ने ऐसा तीन साल पहले ही बोला था तो फिर इतने दिन से ये खबर दबी क्यों थी?मोदी को बचाने के लिए चलाया गया सुनियोजित प्रोपेगैंडा के सिवाय ये और कुछ नहीं है|मीडिया कारपोरेट जगत के पैसे पर चलती है और कारपोरेट जगत अपने फायदे के लिए मोदी को प्रोजेक्ट कर रही है|जाहिर है कि चाहे 15 हजार लोगों को उत्तराखंड से एक ही दिन में निकालने का खबर हो या अब हेडली के माध्यम से इशरत को आतंकवादी करार देने की,सब मोदी और पूँजीपतियों के बीच फिक्सिंग के कारण हो रहा है|
CBI ने खुद कहा कि इशरत और तीन अन्य को चार अलग अलग जगह से उठाया गया और अलग अलग जगह पर हिरासत में रखा गया|तो क्या इन सबों ने पुलिस हिरासत में मोदी को मारने का प्लानिंग बनाया|हिरासत में रहने पर मोदी को मारने कैसे आ गए?फिर वो सब आतंकवादी कैसे?

झूठ पकड़ने का सबसे बड़ा उपाय बदल बदल कर दिए गए बयान को पकड़ना है।डेविड हेडली ने कहा कि इशरत जहां आतंकी थी।
इस संदर्भ में कई विरोधाभासी बयान आया है।
1.डेविड हेडली ने किसे कहा-FBI या NIA को,ये स्पष्ट नहीं है।
2.IB को इस संदर्भ में किसने पत्र लिखा-FBI ने या NIA ने क्योंकि दोनों का नाम कहा गया है।
3.जब डेविड को लखवी ने ये बताया कि उसने इशरत और तीन अन्य को अक्षरधाम और अन्य मंदिरों पर हमला करने भेजा था फिर ये चार मोदी को मारने कैसे चले आए?
4.तीन साल बाद यह खबर क्यों आ रही है?पहले क्यों दबी हुई थी।

वह आतंकी नहीं थी|CBI ने कहा कि उसने पुलिस द्वारा एक को,जिसका भी फर्जी मुठभेड़ हुआ है,अपहरण करते देख लिया।इसलिए इशरत को भी उठा लिया गया।CBI ने कहा कि चारों को चार अलग जगह से उठाया गया और अलग जगह पर हिरासत में रखा गया|जब चारों पहले से ही हिरासत में थे तो क्या फर्जी मुठभेड़ वाला स्थल पर हिरासत से भागकर मोदी को मारने के लिए पहुँचे थे?पुलिस इन सभी को हिरासत से उठाकर मारने के लिए उस स्थल पर ले गई और सभी के खिलाफ एक दिन पहले ही FIR दर्ज कर ली गई थी।चूँकि कहा गया है कि मोदी को मारने ये लोग गए थे इसलिए मोदी से पूँछकर ही ये आरोप बनाया गया होगा!जाहिर है कि मोदी भी शामिल है।भले ही CBI ने राजनीतिक दवाब में नहीं बोला कि वह आतंकी थी या नहीं।लेकिन CBI द्वारा प्रस्तुत किया गया तथ्य साबित करता है कि वह आतंकी नहीं थी बल्कि पहले FIR करके,फिर उस स्थल पर ले जाकर ये कहकर मारकर कि चारों मोदी को मारने आए थे,आतंकी के रुप में जबरन प्रस्तुत किया गया।

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