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कोरोना के साथ जीने की डालनी होगी आदत

Posted On: 4 Jun, 2020 Common Man Issues में

अभिनव त्रिपाठीAnalysis Detailed

Abhinav Tripathi

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अभिनव त्रिपाठी

 

 

अब तो विश्व स्वस्थ्य संगठन WHO ने एक बात साफ़ कर दी है कि कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाना कठिन है. संगठन ने साफ तौर पर कहा है की इस वायरस का एंटीडोज खोजना मुश्किल है,और जल्दी दवा मिलना असंभव सा है. WHO ने सांकेतिक तौर पर स्पष्ट कर दिया है की अब आने वाले समय में हमे इसी के साथ जीवन बिताना है.गौरतलब है कि कुछ दिनों पूर्व ही इजरायल और इटली ने इस बात की पुष्टि की थी कि कोरोना वायरस के एंटीडोज़ को ढूढ लिया है और दवा को पेटेंट के लिए भेजा गया है लेकिन अब तक उधर से भी कोई खास जानकारी नही प्राप्त हो सकी है.

 

 

 

दुनिया के सारे देश करीब कोरोना के चपेट में हैं और इस वायरस से बचने के उपाय में रामबाण साबित हो रहा है सोशल डिसटेंसिंग जिससे संक्रमण से बचा जा सकता है.लगभग सभी देश आज लॉकडाउन की स्थिति में है और अब उनपर आर्थिक क्षति का खतरा मंडरा रहा है.इन बातों को ध्यान में रखते हुए अब लॉकडाउन में थोड़ी ढील दी जाने लगी है,लेकिन इससे संक्रमण के खतरे भी बढ़ रहें हैं. फिर भी परिस्थितियों को नियंत्रण करने के लिए तमाम सावधानियो के साथ थोड़ी थोड़ी आर्थिक गतिविधियाँ शुरू की जा रही हैं जिससे सामने खड़े आर्थिक संकट को सँभालने में मदद मिले.

 

 

 

सभी बातों को ध्यान में लेने के बाद अब आवश्यकता है आगे बढ़ने की.समय के साथ अब इस कोविड महामारी ने जीने की नई परिभाषा दी है जिसके अनुरूप ही अब चलना होगा,पहले की भांति अब सबके साथ मिलने जुलने से पहले खुद को सुरक्षित रखने पर बल देना होगा,आदतों में अब परिवर्तन लाना पड़ेगा जिससे हम अपने काम धाम में योगदान देने के साथ साथ कोरोंना के साथ ही जीना सीख जाएँ.

 

 

 

कुछ परिवर्तनों से ही बचाव संभव……..

 

1.सामाजिक दुरी बहुत जरुरी. कोविड बचाव का एक मात्र उपाय है सोशल डिसटेंसीग,आने वाले समय में हमें इस बात का हमेशा ध्यान रखना है कि जहाँ भी जाए,जहाँ भी रहें सामजिक दुरी का पालन जरुर हो.एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति के बीच कम से कम 2 मीटर की दुरी हो.भीड़ भाड़ वाले इलाको में यदि काम न हो तो जाने से बचे.चुकि ये संक्रमण एक व्यक्ति से दुसरे में फैलता है इसलिए आने वाले समय में हमें अपने मुंह पर मास्क भी लगाना पड़ेगा.

 

 

2.सार्वजनिक वस्तुओ के उपयोग में सावधानी.नैतिक जीवन में हम हमेशा सार्वजनिक वस्तुओ का उपयोग करतें है इसमें सार्वजनिक साधनों का उपयोग,सार्वजनिक जगहों पर घूमना,सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेना शामिल है.इन जगहों पर जाने से पहले सुरक्षा की पूरी तयारी जरुर करनी होगी जिससे कि संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके.इससे एक फायेदा ये होगा कि भीड़ थोड़ी कम जरुर होगी.

 

 

3.पढाई का भी बदलेगा तरीका.महामारी के चलते देश में लॉक डाउन है लेकिन जब स्कूल,कॉलेज,यूनिवर्सिटीयां खुलेंगी उस वक्त एक परिवर्तन जरुर दिखेगा,आने वाले कुछ वर्षो तक शायद हमें एक बेंच पर बैठ कर पढना थोड़ा सा कठिन होगा,कक्षाओ में सामाजिक दुरी दिखेगी,e-learning पर जोर दिया जाएगा.बच्चो द्वारा बनाये जाने वाले असाइनमेंट्स भी अब ऑनलाइन ही जमा हों.

 

 

4.खरीदारी का बदलेगा स्वरूप. लॉक डाउन के बाद अब पूरी तरह से खरीदारी का स्वरुप बदल जाएगा क्यों कि अब सावधानियां ज्यादे बरती जाएँगी जिससे ये भी संभव है कि आने वाले कुछ समय तक शोपिंग माल्स,शोरूम में पहले की तरह भीड़ ना दिखे,लोग ज्यादे तर इ शापिंग पर ज्यादे जोर देंगे.

 

 

 

5.राजनीति पर भी पड़ेगा असर.आने वाले समय में इस बात की अधिक आशंका है कि बड़ी बड़ी चुनावी रैली,सभाएं पुरानी बात हो जाये क्यों की सामाजिक दुरी इन सभाओ में लागु करा पाना संभव नहीं होगा,यदि प्रशासन द्वारा इसे अपना भी लिया गया तो जो हुजूम संवाद के बाद सड़कों पर और शहरों में उमडेगा उसे नियंत्रण कर पाना बहुत ही मुस्किल होगा.इस परिस्थिति में आने वाले समय में चुनावी सभाए शायद ही हों.अब राजनितिक प्रचार प्रचार भी e-based होने की पूरी सम्भावना है अब हो सकता है की राजनेता मोबाइल टेलीविजन और अखबार के पन्नो पर ज्यादे नज़र आयें.आने वाले वर्षो में चुनावी सभाए अगली पीढ़ी के लिए शायद आश्चर्य का विषय हो.

 

 

6.तकनीक पर होगी निर्भरता.आने वाले वर्षो में संक्रमण से बचाव के लिए टेक्नोलॉजी पर निर्भरता बढ़ेगी जिससे कि सार्वजनिक जगहों पर जाने से आज़ादी मिलेगी,घर बैठे काम करना हम पसंद करेंगे और तकनिकी की उपयोगिता बढ़ेगी.

इन सभी बातों के साथ आने वाले समय में एक नया परिवर्तन देखने को मिलेगा,मिलने का तरीका,रहने का तरीका बदल जाएगा और ये सब कुछ थोड़ा थोड़ा परिवर्तित होता नज़र भी आ रहा है.

 

 

 

नोट : इन विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं।

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