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अबकी बार मोहल्ले में सरकार

Posted On: 7 Nov, 2017 Others में

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Abhinay Aakash

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अभिनय आकाश
जनसंख्या के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर-प्रदेश के बारे में माना जाता है कि यह देश की राजनीति की दिशा तय करता है. चुनावी घमासान के लिहाज से सूबे में चाहे संसदीय या विधानसभा चुनाव हो या फिर निकाय चुनाव बेहद दिलचस्पस होते हैं. हालांकि इसकी एक वजह यह भी है भारतीय राजनीति के इतिहास में देश के केंद्रीय सत्ता का रास्ता यूपी से होकर ही गुजरता है. ऐसे में उत्तर प्रदेश में एक बार फिर चुनावी बिगुल बज गया है और इस बार तीन चरणों में स्थानीय निकाय 22 नवंबर से होने वाले हैं. दिसंबर की पहली तारीख को इसके नतीजे घोषित किये जायेंगे. बड़ी बात यह है कि योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद यूपी में यह पहला चुनाव है. इसके साथ ही नए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय के लिए भी यह चुनाव परीक्षा से कम नहीं.
सीएम बनने के बाद योगी के सामने पहले इम्तिहान में लोगों की पसंद-नापसंद और सरकार के कामकाज से जनता कितनी खुश कितनी नाखुश है, इसका अंदाज़ा नतीजों के रूप में पता चलने की उम्मीद है. यूपी में कुल 75 जिले हैं जिसमें 16 नगर निगम, 198 नगर पालिका और 439 नगर पंचायत हैं. वहीँ अगर 2012 के नतीजों पर गौर करें तो भाजपा को 10 सीटें मिली थी, बसपा को 1, सपा को 0 और निर्दलीय के हाथ 1 सीट लगा था. इस निकाय चुनाव में पहली बार सियासी दल सिंबल पर चुनाव लड़ते नज़र आएंगे.
उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव के शंखनाद के साथ ही सत्तारूढ़ बीजेपी अपने स्टार प्रचारकों के लश्कर के साथ लोगों से वोट मांगती नजर आएगी. पार्टी की रणनीति सीएम योगी आदित्यनाथ के चर्चित चेहरे के साथ ही सूबे के दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य व डॉ दिनेश शर्मा, केंद्रीय मंत्री और यूपी के मंत्रियों के सहारे नगर निगमों में कमल खिलाने की है. सूत्रों के मुताबिक केंद्र से गृह मंत्री राजनाथ सिंह, स्मृति ईरानी, डॉ महेश शर्मा और संजीव बालियान भी निकाय चुनावों में प्रचार करने की भी पूरी संभावना है. प्रदेश के सबसे बड़े नगर निगम कानपुर की जिम्मेदारी डिप्टी सीएम केशव मौर्य के हाथों है. मौर्य कानपुर में कैंप कर पार्टी की जीत सुनिश्चित करेंगे. वहीं डिप्टी सीएम डॉ दिनेश शर्मा आगरा में कैंप करेंगे. कहा जा रहा है कि नोटबंदी और जीएसटी की वजह से व्यापारी वर्ग, खासकर वैश्य समाज नाराज है. लिहाजा वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल को उनकी यह नाराजगी दूर करने की जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा पार्टी ने अयोध्या, वाराणसी और गोरखपुर के लिए खास रणनीति बनाई है. चर्चा है कि यहां मोर्चा संभालने के लिए किसी प्रमुख व्यक्ति को भेजा जाएगा. कहा जा रहा है कि सीएम योगी इन तीनों जगह प्रचार कर सकते हैं.
भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी दांव खेलते हुए निकाय चुनावों के पहले चरण में कुल 25 मुसलमानों को उम्मीदवार बनाया है. दूसरे और तीसरे चरण तक मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या में और इजाफा होने की संभावना है क्योंकि इस चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनाव होंगे, जहां मुस्लिमों की आबादी ज्यादा है. वहीँ दूसरी तरफ अखिलेश यादव के सामने निकाय के सहारे नाक बचाने की चुनौती और पार्टी को सियासी संजीवनी प्रदान करने का चैलेंज होगा. सपा इस चुनाव के सहारे अपने संगठन को धार देने की पूरी कोशिश करेगी जिसकी बानगी भी दिखी. जो काम सरकार में रहते नहीं किया वह काम करने का निर्णय यानि पहली बार अपने सिंबल पर चुनाव लड़ने का ऐलान. ऐसे में अबकी बार उत्तर प्रदेश के मोहल्लों पर किसका राज होता है इसके लिए 1 दिसंबर यानि परिणाम की घोषणा तक इंतजार करना होगा.

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