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'टुकड़ा कागज़ का' को अभिव्यक्ति विश्वम् से 'नवांकुर पुरस्कार'

Posted On: 24 Nov, 2014 Others में

पूर्वाभास

Abnish Singh Chauhan

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लखनऊ : विभूति खण्ड स्थित ‘कालिन्दी विला’ के परिसर में दो दिवसीय ‘नवगीत महोत्सव – 2014’ का आयोजन15-16 नवम्बर कोहुआ। ‘अनुभूति’, ‘अभिव्यक्ति’ एवं ‘नवगीत की पाठशाला’ के माध्यम से वेब पर नवगीत का व्यापक प्रचार-प्रसार करने हेतु प्रतिबद्ध ‘अभिव्यक्ति विश्वम’ द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल अपनी रचनात्मकता एवं मौलिकता के लिए जाना जाता है, बल्कि नवगीत के शिल्प और कथ्य के विविध पहलुओं से अद्भुत परिचय कराता है। ख्यातिलब्ध सम्पादिका पूर्णिमा वर्मन जी एवं प्रवीण सक्सैना जी के सौजन्य से आयोजित यह कार्यक्रम पिछले चार वर्षों से लखनऊ में सम्पन्न हो रहा है।

04 जून, 1979 को चन्दपुरा (निहाल सिंह), इटावा (उत्तर प्रदेश) में जन्में चर्चित युवा कवि, अनुवादक, सम्पादक डॉ अवनीश सिंह चौहान को उनके नवगीत संग्रह ‘टुकड़ा कागज का’ (प्रकाशन वर्ष – 2013) पर अभिव्यक्ति विश्वम् की ओर से ‘नवांकुर पुरस्कार’ प्रदान किया गया। पुरस्कार स्वरुप आपको ११०००/- (ग्यारह हज़ार) रुपये, प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।  यह अंतर-राष्ट्रीय सम्मान वर्ष में एक युवा गीतकार को उसके गीत संग्रह की पाण्डुलिपि पर दिया जाता है, जिसकी जानकारी अभिव्यक्ति वेब पत्रिका पर उपलब्ध है।


डॉ चौहान के गीत-नवगीत, आलेख, समीक्षाएँ, साक्षात्कार, कहानियाँ एवं कविताएँ देश -विदेश की हिन्दी व अंग्रेजी की तमाम पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके गीत ‘शब्दायन’ एवं ‘गीत वसुधा’ आदि महत्वपूर्ण समवेत संकलनों में और अंग्रेजी कविताएँ   ‘ए स्ट्रिंग ऑफ़ वर्ड्स’ एवं  “एक्जाइल्ड अमंग नेटिव्स” आदि में संकलित। आपकी आधा दर्जन से अधिक अंग्रेजी भाषा की पुस्तकें कई विश्वविद्यालयों में पढ़ी-पढाई जा रही हैं। आप वेब पत्रिका ‘पूर्वाभास’ के सम्पादक और भोपाल से प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘साहित्य समीर दस्तक’ के सह- सम्पादक हैं। आपको ‘अंतर्राष्ट्रीय कविता कोश सम्मान’; मिशीगन, अमेरिका से ‘बुक ऑफ़ द ईयर अवार्ड’; राष्ट्रीय समाचार पत्र ‘राजस्थान पत्रिका’ का ‘सृजनात्मक साहित्य पुरस्कार’, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ से ‘हरिवंशराय बच्चन युवा गीतकार सम्मान’ आदि से विभूषित किया जा चुका है।


सम्मान समारोह देश-विदेश से पधारे नए-पुराने साहित्यकारों की उपस्थिति में हुआ, जिनमें सर्वश्री कुमार रवीन्द्र, राम सेंगर, धनन्जय सिंह, बुद्धिनाथ मिश्र, निर्मल शुक्ल, राम नारायण रमण, शीलेन्द्र सिंह चौहान, मधुकर अष्ठाना, बृजेश श्रीवास्तव, कमलेश भट्ट कमल जी, ब्रजेश श्रीवास्तव, डॉ. ज्देन्येक वग्नेर, निर्मल शुक्ल, वीरेन्द्र आस्तिक, ब्रजभूषण सिंह गौतम ‘अनुराग, शैलेन्द्र शर्मा, राकेश चक्र, अनिल वर्मा, पूर्णिमा वर्मन, मधु प्रधान, जगदीश व्योम, सौरभ पांडे, अवनीश सिंह चौहान, रामशंकर वर्मा, रोहित रूसिया, प्रदीप शुक्ला, संध्या सिंह, शरद सक्सेना, आभा खरे,  वीनस केसरी, डॉ. अनिल मिश्र, पवन प्रताप सिंह, सुवर्णा दीक्षित, विजेन्द्र विज, अमित कल्ला, प्रदीप शुक्ल, सीमा हरिशर्मा, हरिवल्लभ शर्मा, संजीव सलिल, पंकज परिमल तथा जयराम जय आदि रहे। सत्र का सफल संचालन जगदीश व्योम ने किया एवं आभार अभिव्यक्ति पूर्णिमा वर्मन ने की।

Read The Book: http://tukdakagazka.blogspot.in/


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