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अरे!प्राची से प्रकटी उषा ,अंक में शिशु सूरज बलवान

Posted On: 5 Jan, 2017 Others में

Achyutam keshvamहम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

achyutamkeshvam

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तमस की काली कारा तोड़ ,स्वर्णकण खचित नील परिधान .
धरे ,प्राची से प्रकटी उषा ,अंक में शिशु सूरज बलवान .

विहग उड़ चले नीड़ निज छोड़ ,
संग पाथेय आस-विश्वास .
समूची पृथ्वी पर अनुगूँज ,
कर्म से भाग्य बनेगा दास .
नभ में हो ऋतावरी खड़ी ,बताती ऋत के पन्थ तमाम .
अरे!प्राची से प्रकटी उषा ,अंक में शिशु सूरज बलवान .

अकर्मठता आलस्य प्रलाप ,
बुरे सपनों का होता शमन .
हुई जड़ पर चेतन की विजय ,
विभागण करते पश्चिम गमन .
सुनहले रथ पर हो आरूढ़ ,जगत का करती नित कल्याण .
अरे!प्राची से प्रकटी उषा ,अंक में शिशु सूरज बलवान .

विश्वारा ने फूँका शंख ,
जगा जग तंद्रित-निद्रित-सुप्त.
संग ले भीनी जीवन गंध ,
सुवासित पवन बहे उन्मुक्त.
अभय मुद्रा में ज्योतिष्नात ,वामकर अरुण केतु को थाम .
अरे!प्राची से प्रकटी उषा ,अंक में शिशु सूरज बलवान .

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