blogid : 14295 postid : 1320819

बसता सुख अर्जन में अथवा परिवर्जन में

Posted On: 25 Mar, 2017 Others में

Achyutam keshvamहम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

achyutamkeshvam

99 Posts

250 Comments

हर मन सुख अभिलाषा
प्रथक -प्रथक परिभाषा

बसता सुख अर्जन में
अथवा परिवर्जन में
घर में जन-जीवन में
गिरि में कंदर वन में
कहाँ करे सुख वासा (१)

भीड़ भरे देवालय
भीड़ भरे वैश्यालय
भीड़ भरे विद्यालय
भीड़ भरे मदिरालय
किसकी पूरित आशा(२)

वृद्ध प्रिया संस्मृतियाँ
स्वप्न प्रिया युव अँखियाँ
महिला मन सुत-सखियाँ
लघु-पाँखी नव-पंखियाँ
जन-जन-मन मधु आशा (३)

कवि मन भाये ताली
दुर्मुख शोभित गाली
हंस हृदय रवि लाली
उर-उलूक निशि काली
जग भर मन कर दासा (४)

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (15 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग