blogid : 14295 postid : 1184639

रजनी के तिमिरान्ध गर्भ में,एक नया सूरज पलता है

Posted On: 1 Jun, 2016 Others में

Achyutam keshvamहम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

achyutamkeshvam

104 Posts

250 Comments

रश्मिरथी को लिए अरुण जब,
अस्तांचल में जा सो जाते .
सत्य-साध्य सब कर्म-विरत,
मानव मन के सपने हो जाते .
तब विशवास लिए मन में ,
नभ में नन्हां दीपक जलता है .
रजनी के तिमिरान्ध गर्भ में ,
एक नया सूरज पलता है .(१)

क्रान्ति बिगुल को बजा तिमिर से ,
जब वह महासमर कर जाता .
एक-एक कर हो अनेक ,नभ
नन्हें दीपों से भर जाता .
ज्योति-अस्त्र कर धरे तिमिर को ,
दलता है बढ़ता चलता है .
रजनी के तिमिरान्ध गर्भ में ,
एक नया सूरज पलता है .(२)

मैंने लाखों को हत होकर ,
अवनी पर गिरते देखा है .
किन्तु भोर से पूर्व समर से ,
पींठ नहीं फिरते देखा है .
विजय धर्म की ही होती है ,
पाप सदा कर ही मलता है .
रजनी के तिमिरान्ध गर्भ में ,
एक नया सूरज पलता है .(२)
अच्युतं केशवम

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (15 votes, average: 4.93 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग