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वह नदी माँ है

Posted On: 13 May, 2018 Common Man Issues,Others,Spiritual में

Achyutam keshvamहम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

achyutamkeshvam

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पदाघातों से शिलाएं तोड़ती है.

जो हिमालय को उदधि से जोड़ती है .

स्वयं ही स्वछन्द अपना पथ बनाती है.

और अपने आप अपने तट बनाती है.

वह नदी माँ है ,

उस अमित विक्रम नदी की धार मैं हूँ.

वह नदी जो उच्च शिखरों पर पली है .

पर धरा की प्यास पीने को चली है .

जो भगीरथ यत्न को देती सदा वर है

कल्यानमय शिव की जटाओं में किये घर है .

वह नदी माँ है ,

उस अमित बोधा नदी की धार मैं हूँ.

वह नदी मृदु सिन्धु निज उर में समेटे .

जो अटल आशीष दे विधिलेख मैटे.

है उसी का ऋण कभी जो चुक नहीं सकता .

वह दुखी होगी अगर सुख रुक नहीं सकता.

वह नदी माँ है,

उस अमित प्रेमिल नदी की धार मैं हूँ.

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