blogid : 14295 postid : 1111644

शब्द पथ पर अर्थ का पाथेय

Posted On: 30 Oct, 2015 Others में

Achyutam keshvamहम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

achyutamkeshvam

104 Posts

250 Comments

शब्द पथ पर अर्थ का पाथेय .
किन्तु कितनी दूर फिर भी ध्येय .

सरल वर्तुल अक्षरों की लीक .
मनचले पग कब चले हैं ठीक .
ये सितारों का दिया है श्रेय .
शब्द पथ पर अर्थ का पाथेय .
किन्तु कितनी दूर फिर भी ध्येय .(१)

प्यास है लेकिन कहाँ है कूप .
उन पगों में चुभ रही है दूब .
कंटकों को मानते थे हेय.
शब्द पथ पर अर्थ का पाथेय .
किन्तु कितनी दूर फिर भी ध्येय .(२)

कंठ में जो गीत रुपी हार .
संस्कारों का सहज विस्तार .
अन्यथा भाषा रही कब गेय .
शब्द पथ पर अर्थ का पाथेय .
किन्तु कितनी दूर फिर भी ध्येय .(३)

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (15 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग