blogid : 14295 postid : 1143571

सूरज की मकडी ने किरणों का जाल बुना

Posted On: 4 Mar, 2016 Others में

Achyutam keshvamहम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

achyutamkeshvam

104 Posts

250 Comments

सूरज की मकडी ने
किरणों का जाल बुना .

हम शहरी सोये थे .
सपनों में खोये थे.
कपटी ने जानबूझ
बेढब सा समय चुना .
सूरज की मकडी ने
किरणों का जाल बुना .

हरी-श्रंगार झड़ते थे.
इन्दीवर बढ़ते थे .
हम जागे टी.वी.पर
मौसम का हाल सुना .
सूरज की मकडी ने
किरणों का जाल बुना .

हम ठहरे विज्ञानी .
नवयुग के नवज्ञानी ,
खाते हैं बस भेजा
फ्राई हो किंवा भुना .
सूरज की मकडी ने
किरणों का जाल बुना .

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (13 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग