blogid : 14295 postid : 1306860

स्वामी विवेकानंद सरस्वती जी की जन्म जयंती पर

Posted On: 12 Jan, 2017 Others में

Achyutam keshvamहम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

achyutamkeshvam

99 Posts

250 Comments

केसरी वेदांत के वे विवेकानंद स्वामी जी थे
दासता की नींद सोये देश को जगा गये
गर्व से कहो कि हम हिन्दु हैं उठा के शीश
मन्त्र ये अमोघ सारे देश को सिखा गये
दासता के दीनता के हीनता मलीनता के
ईधन में आग स्वाभिमान की लगा गये
मंच पर शिकागो के दहाड़े सिंह के समान
हिन्दुओं के चरणों में विश्व को झुका गये

बड़ी -बड़ी आँखों में थे सपने भविष्य के तो
उर में भरा हुआ था गौरव अतीत का
हिन्दु द्रोहियों के लिए पांचजन्य घोष था तो
हिन्दुओं के मीत को पुनीत वेणु गीत था
चिंतन में दीखता था पोषण प्राचीनता का
शब्द -शब्द आधुनिक चेतना प्रतीक था
था नरेन्द्र भुवनेश्वरी विश्वनाथ का सपूत
शिष्य राम कृष्ण जी का वीर था विनीत था

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (7 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग