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सोम सुधा जगभर में बांटी

Posted On: 23 Apr, 2016 Others में

Achyutam keshvamहम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

achyutamkeshvam

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सपने का क्या है जो टूट गया .
सपना तो फिर भी सपना है.

समय दिखाता रहा अँगूठे .
राम गुसैंयाँ तुम भी झूँठे .
पाप हो गये दया से भारी ,
फिर तो नाम वृथा जपना है .

तज उपहास उपेक्षा दूजी .
मेरे पास रही क्या पूँजी .
कैसे कहूँ शत्रु मैं पर को ,
अपना कौन हुआ अपना है .

सोम सुधा जगभर में बांटी .
धरती की जंजीरें काटी.
फिर भी रहा अकिंचन मैं ही .
कंपना कभी कभी तपना है .
अच्युतं केशवम की कविता

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