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रोज डे : लो यह सुर्ख गुलाब

Posted On: 7 Feb, 2020 Others में

Achyutam keshvamहम समय शम्भु के चाप चढ़े सायक हैं. हम पीड़ित मानवता के नव नायक हैं हम मृतकों को संजीवन मन्त्र सुनाते हम गीत नहीं युग गीता के गायक हैं

achyutamkeshvam

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सुख दुख का है पालना, जीवन जी भर झूल।
कांटे भी हैं पुष्प भी, ज्यों गुलाब का फूल।

 

ज्यों गुलाब का फूल, महकता बाग रहेगा।
और गूंजता सदा, प्रेम का राग रहेगा।

 

 

लो यह सुर्ख गुलाब, तुम्हारे सुस्मित मुख सा।
तेरा मेरा साथ, साथिया है सुख दुख का।

 

 

 

नोट : यह लेखक के निजी विचार हैं, इसके लिए वह स्‍वयं उत्‍तरदायी है। संस्‍थान का कोई लेना-देना नहीं है।

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