blogid : 12591 postid : 8

सरल उत्तर

Posted On: 16 Sep, 2012 Others में

darpanJust another weblog

adhyayanrat

8 Posts

5 Comments

क्यों सुबकती हैं कलपती हैं

थोड़ी सी गर्माहट को

आग की लपटें ?

क्यों तरसता है मचलता है

बूँद बूँद को अथाह सागर ?

क्यों घिग्गी बन्ध जाती है

अँधेरे के सामने

जेठ की चटख धूप की ?

क्यों गिडगिडाते हैं

रत्ती भर गुलाल को

पलाश और गुलमोहर ?

क्यों मैं ऐसे बनकर दिखाता हूँ

जैसे पता नहीं मुझे इन प्रश्नों के उत्तर ?

क्यों मौन हो तुम सब भी ?

बादलों में बनी आकृति की तरह

पिघल जाता है अतीत, वर्तमान भी

और फिर कुछ नए प्रश्न उभर आते हैं

सफ़ेद, ऑफ व्हाइट, मटमैले,

पीले, सलेटी और काले

हरे और सतरंगी भी

सब देते हैं फिर, कुछेक

पसंदीदा प्रश्नों के लुभावने , आनंददायक

उत्तर, व्याख्या सहित

लेकिन ,कुछ सरल प्रश्न

फिर से बाट जोहने लगते हैं

अपने सरल उत्तरों की

डॉ. विनोद भारद्वाज

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading...
  • Facebook
  • SocialTwist Tell-a-Friend

अन्य ब्लॉग