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एक मुलाकात बेरोजगारी बहन से (कविता/हास्य-व्यंग्य)

Posted On: 29 May, 2010 Others में

मुझे भी कुछ कहना हैविचारों की अभिव्यक्ति

Dr. Aditi Kailash

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राह चलते एक दिन मिल गई हमे बेरोज़गारी बहन
सामने आते ही उनसे मिले हमारे ये दो नयन

नयन मिले तो बात करनी ही पड़ी
हमने पूछा, कैसी हो बड़ी बी?

हमारी बातें सुनकर पहले तो वो शरमाई
थोडा सा इठलाते हुए फिर हमसे फरमाई

क्या बताये बेगम तुम्हें अब अपने दिल का हाल
फैल चूका है चारों तरफ मेरा ही माया जाल

गली गली में होने लगे अब तो मेरे ही चर्चे हैं
रोज ही देखो छपने लगे मेरे नाम के पर्चे हैं

साथ दे रही है आज की शिक्षा और सरकार
मिल रहा है दोनों से ही मुझे ढेर सा प्यार

बन गई हूँ अब तो मैं हर युवा के दिल की धड़कन
फिर भी छुड़ाना चाहते हैं सब मुझसे अपना दामन

कहे देती हूँ……..इतनी जल्दी मैं उनका साथ नहीं छोडूंगी
अभी-अभी तो पकड़ा है…………… ये हाथ नहीं छोडूंगी

इतनी जल्दी साथ नहीं छोडूंगी…….

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