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अब हम भी अमीर हो गए हैं......

Posted On: 28 Mar, 2012 Others में

Guru Jiहजारों मंजिलें होंगी, हजारों कारवां होंगे.... निगाहें हम को ढूंढेंगी, न जाने हम कहाँ होंगे.......

Ajay Kumar Dubey

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अब हम भी अमीर हो गए हैं…….. चौंकिए मत सही कह रहे हैं….. आप सब सोच रहे होंगे कि सौ- दो सौ की दिहाड़ी करने वाला अचानक से अपने आप को अमीर कैसे कहने लगा. लगता है जरुर इसे कोई सपना आया है या फिर गरीबी से तंग आ कर ‘सनक’ गया है…. तो भईया न ही हमको कोई सपना आया है और न ही हम सनके हैं….. जब पहली बार यह दिव्य अहसास हमको हुआ था, तो हम भी आप की तरह ही चौंके थे.
कहाँ हम अपनी गरीबी का रोना रोया करते हैं…… दो वक्त के खाने की व्यवस्था जैसे-तैसे कर पाते हैं….. कपड़ों के बारे में तो सोचना ही मुनासिब नहीं है…. शादी-गौना में नए कपडे बन जाएँ यही बहुत है….तीज-त्यौहार की बात ही छोडिये….. बाबू लोगों के दान से ही अपना काम चलता रहा है…. वैसे भी गरीब आदमी को, शादी-गौना या फिर मरने पर ही नया कपड़ा नसीब होता है….. यह तो ‘परधान’ जी की कृपा रही कि इंदिरा-आवास के रूप में एक छत नसीब हो गयी…. नहीं तो छप्पर में ही जीवन गुजरता रहा है…. घर में कोई ज्यादे बीमार पड़ जाये तो ‘खेत’ या ‘मेहरिया’ के गहने गिरवी रख कर या बाबू लोगों से ‘ब्याज’ पर पैसे ले कर ही ‘दावा-दारू’ का इंतजाम हो पाता है…. बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने की औकात ही नहीं.. पढ़ाने का शौक है तो सरकारी स्कूल में भेज दिया करते हैं…. दूसरा अपना स्वार्थ भी है… चलो इसी बहाने बच्चों को एक वक्त का खाना मिल जाता है. थोडा बहुत बजीफा भी मिल जाता है…कभी सरकार मेहरबान हुयी तो एक-आध कपड़ा-लत्ता भी मिल जाया करता है.. वहां फ़ीस-फास का भी कौनो झंझट नहीं है… हाँ कभी-कभार गुरु जी को दहीतरकारी जरुर से भेज दिया करते हैं….
जीवन तो चल ही रहा है. फिर भी हम अपनी गरीबी से तंग आ ही गए थे. अपने आप को कोसा करते थे. भगवान को भी ‘गरियाते’ थे, काहें हमें गरीब घर में पैदा किये. हम कौन सा बुरा कर्म किये थे……काहें नहीं हमारे पास वह सब कुछ है जो एक सुखी इन्सान को चाहिए….
लेकिन कल हमारी सारी भ्रान्ति टूट गयी…. और इस दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई कि हम भी अमीर हैं…. यह दिव्य ज्ञान हमको मिला हमारे खूबलाल काका से….
हुआ यह कि कल काका बहुत ही प्रसन्नचित्त, हाथ में मिठाई का डिब्बा लिए, जोर-जोर से सबको बुलाते हुए गाँव के बगीचे में पहुंचे… हरे रामेशवा… हे सुगंधिया…… हियाँ आऊ…. सब लोग मिठाई खाओ…हम भी पहुंचे उनके पास… पूछ बैठे काहें काका का बात है कि मिठाई बाँट रहे हो…. नाती हुआ है का….. काका गुर्राए धत ससुरा…. लरिका की मेहरिये नाहीं है और तुम को नाती कि सूझी है…… खली-पीली मजाक किया करते हो….
हम कहे तब काहें मिठाई बाँट रहे हो… कहने लगे, हम अमीर हो गए हैं….. इसी ख़ुशी में मिठाई बाँट रहे हैं…. हम भी सोचने पर मजबूर हो गए कि जो आदमी जीवन भर ‘हथौड़ा‘ चलाता रहा है और लोहा पीटता रहा है वह अचानक से अमीर कैसे हो गया… हम फिर से पूछ बैठे…. का कौनो लाटरी लगी है या फिर कौनो खजाना पाय गए हो… या फिर तुम भी इंटरनॅशनल भिखारियों की ‘जमात’ में शामिल हो गए हो…..
काका फायर….. कहने लगे तुम लोग जीवन भर मूरख के मूरख ही रहोगे….. देश-दुनिया की खबर तो रहती ही नहीं है…. थोडा बहुत पढ़े-लिखे हो, वशिष्ठवा की चाय की दुकान पर जा कर, कभी-कभार अखबार वगैरह पढ़ लिया करो… टी.वी.-रेडिओ पर समाचार देखा-सुना करो……
हम फिर से पूछ बैठे ‘ई समाचार और तुम्हारी अमीरी में’ का सम्बन्ध है…. काका झल्ला के बोले अरे मूरख….. समाचार में आया है कि हमारे दिल्ली वाले बाबू लोग तय किये हैं, “शहर में रहने वाले लोग जिनकी रोज़ की कमाई 29 रुपये है, वे अब गरीबी रेखा पार कर चुके हैं और गाँव में जिनकी रोज़ की कमाई 22 रुपये है, वे अब गरीब नहीं माने जाएंगे.”। तो बताओ हम अमीर हुए कि नहीं... हम तो इसके दुगुना-तिगुना कमाते है.. यह अलग बात है कि हम हमेशा रोते रहते हैं…..
हम भी अपना गुणा-गणित लगाये. लेकिन यह गणित हमारे पल्ले नहीं पड़ा. यह सोच कर संतोष कर लिए कि दिल्ली वाले बाबू लोग हैं, विद्वान-ज्ञानी हैं कुछ सोच कर ही हिसाब बैठाये होंगे….
हमारे हिसाब से तो एक वक्त की सब्जी भी इतने में नहीं हो पाती……
चलते-चलते…….. यह कहानी आप सबकी सुनी हुई है मैं फिर से दुहरा दे रहा हूँ……
एक दिन, एक आदमी, एक चिड़िया-घर को देखने के लिए गया. वहां उसने देखा कि सिर्फ एक गधे को छोड़ कर चिड़िया घर के सभी जानवर बहुत ही प्रसन्न हैं और अपने-अपने अंदाज़ में हंस रहे रहें. उसने वहां के कर्मचारी से पूछा, क्या बात है? कि सारे जानवर हंस रहे है. कर्मचारी ने बताया कि उनके बीच में कोई ऐसी मजेदार बात हुयी है जिससे सभी जानवर हंस रहे है. वह आदमी फिर दूसरे दिन चिड़िया-घर जाता है और देखता है कि सभी जानवर अपने-अपने काम में व्यस्त हैं लेकिन आज गधा जोर-जोर से हंस रहा है. पुनः कर्मचारी से पूछता है कि क्या बात है? आज सारे जानवर शांत हैं लेकिन गधा हंस रहा है. कर्मचारी बताता है, कल जिस घटना पर सारे जानवर हंस रहे थे, वह बात गधे को आज समझ में आयी है. इसीलिए वह आज हंस रहा है…..

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