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हंगामा क्यूँ है बरपा........

Posted On: 16 Mar, 2012 Others में

Guru Jiहजारों मंजिलें होंगी, हजारों कारवां होंगे.... निगाहें हम को ढूंढेंगी, न जाने हम कहाँ होंगे.......

Ajay Kumar Dubey

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हंगामा क्यूँ है बरपा……..
हाँ भईया ई रेल बजट क्या पेश हुआ हंगामा ही मच गया. हमारे रेल मंत्री महोदय ने तो बहुत ही शायराना अंदाज में बजट पेश किया…. रेलवे के आधुनिकीकरण की बात की….. रोजगार देने की बात की….नई रेल-गाड़ियों के संचालन की बात की….यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं की बात की….रेलवे स्टेशनों पर साफ-सफाई की व्यवस्था की बात की….वैक्यूम टायलेट शुरू करने की बात की…स्टेशनों पर ‘घुमंतू सीढ़ी’(एस्केलेटर) लगवाने की बात की…अपने कर्मचारियों को बेहतर सुविधा देने की बात की…वेटिंग-लिस्ट के बोझ को कम करने के लिए अतिरिक्त रेल-गाड़ियों के संचालन की बात की… यानि कि सिर्फ और सिर्फ रेलवे के विकास की बात की… रेलवे की प्रगति की बात की….
अब ई बातों-बातों में कौन सी बात हो गयी कि हंगामा खड़ा हो गया… बहुतों ने कहा, बढ़िया रेल बजट… किसी ने कहा साहसिक बजट तो किसी ने कहा जांबाज बजट….किसी ने कहा गैर-राजनीतिक बजट…रेल-मंत्री जी को अनेकों बधाईयाँ मिलीं….तो फिर क्यों यह रेल की छुक-छुक, धुक-धुक में बदल गयी…. मंत्री जी की रेल ‘डिरेल’ हो गयी… हमारी दीदी बौखला क्यों गयीं….. क्या हो गया कि दीदी का गुस्सा सातवें आसमान पर चला गया….रेल-मंत्री महोदय को ‘धोखेबाज़’ तक कहलवा दिया…वर्षों पुरानी यारी ‘तकरार’ में बदल गयी…. बात यहाँ इस कदर बढ़ गयी कि ममता दीदी ने प्रधानमंत्री महोदय के पास ‘रेल मंत्री महोदय से इस्तीफा ले लेने की चिट्ठी’ तक लिख डाली. समाचारों में भी आ गया कि रेल-मंत्री महोदय का इस्तीफा…जबकि हमारे रेलमंत्री महोदय उन्ही की पार्टी से हैं…
हुआ यूँ… रेलमंत्री महोदय ने दीदी की अनुमति लिए बिना ही रेल किराये में वृद्धि कर दी…कहने लगे कि मैंने रेलवे को आइ सी यू से बहार निकला है. मैं रेलवे का विकास चाहता हूँ. रेलवे को प्रगति के पथ पर ले जाना मेरा उद्देश्य है.
बस यहीं चूक गए मंत्री महोदय…. दीदी के हिसाब से रेलवे सिर्फ पश्चिम-बंगाल का है. आप ने पश्चिम-बंगाल के लिए कुछ खास किया ही नहीं… पूरे देश को देखने की क्या जरुरत थी…यदि किराया बढ़ाना जरुरी ही था तो पश्चिम-बंगाल को छोड़ कर…
यदि सुविधा देना ही था तो दीदी और पूरे पश्चिम-बंगाल के साथ-साथ अन्य नेता-मंत्री जी लोगों के लिए देते…उनके रिश्तेदारों..उनके पट्टीदारों..उनके सगे-सम्बन्धियों..उनके दोस्त-मित्रों के लिए सुविधा प्रदान किया होता… फ्री का आना-जाना, फ्री का रहना खाना…. भूखे-नंगों को सुविधा देने की बात कह कर कौन सा बहादुरी का काम कर लिया…
रेलवे प्लेटफार्म को हवाई-अड्डा जैसा बना के क्या करेंगे… कौनो ट्रेन से नेता-अभिनेता चलता है क्या…. जब नेता-अभिनेता नहीं चलता तो ‘एस्केलेटर’ लगवाने की क्या जरुरत… पता नहीं कौन से ‘टायलेट’ की बात करते हैं…रेलवे लाइन के किनारे की खाली जमीन किस काम आएगी…..
जनता तो पहले से पायदान पर और ट्रेन की छत पर बैठ कर चलने की आदी है,नयी ट्रेन चलाने की क्या जरुरत थी…. सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान देने की ‘कौनो’ जरुरत नहीं थी… ट्रेनें लड़तीं हैं तो लड़ने देते..हमारे ‘पाकेटमार’ बंधुओं का क्या होगा… ‘जहरखुरान’ बंधुओं का क्या होगा…‘डकैत’ बंधू तो बर्बाद हो जायेंगे…यहाँ तो ऐसे ही हजारों रोज मरते हैं… हज़ार-दो हज़ार और सही…. . आपके इस कदम से कितनी बेरोजगारी बढ जाएगी आप को नहीं पता…बड़े आये रोजगार देने वाले…..
अरे.. रेलवे गरीबों की सवारी है….यहाँ ‘माननीयों’ की व्यवस्था करेंगे तो ऐसा ही होगा….
हो गयी न ‘हेकड़ी’ ख़तम…पड़ गए न लेने के देने…अपनी तो किरकिरी कराये ही,पूरी सरकार की ही किरकिरी करा बैठे…. चले थे रेलवे को आइ सी यू से निकालने…खुद की नेतागिरी ही आइ सी यू में जाते हुए दिखाई दे रही है…
कौन जरुरत थी किराया बढ़ाने की…. दीदी से सलाह-मशविरा किया होता…,दीदी की बात मानी होती….दीदी-दीदी रट लगये होते……
आपकी ‘एमबीए’ डिग्री बेकार…जाईये इस देश के ‘स्कूल ऑफ़ नेतागिरी से ‘नेतागिरी’ की डिग्री ले कर आईये……

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