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राजनीति का अटल पथिक अटल बिहारी वाजपेयी

Posted On: 25 Sep, 2019 Others,Politics में

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ashu

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समय एक है नदी की बाढ़, जिसमे सब बह जाया करते हैं
समय एक तूफान प्रबल जिसमे, पर्वत तक झुक जाया करते हैं
अक्सर कई लोग इस दुनिया में, आया और जाया करते हैं
लेकिन कुछ ऐसे होते हैं, जो इतिहास बनाया करते हैं.

 

यह उसी अजातशत्रु की अनुपम अमर कहानी है
जिसके शासन में दुनिया ने, भारत की शक्ति पहचानी है
था वो 25 दिसम्बर 1924 का दिन जब ब्रह्ममुहूर्त का समय हुआ
मांं कृष्णा और पिता कृष्ण बिहारी के यहांं अटल बिहारी का जन्म हुआ

 

पिता कृष्ण एक अध्यापक थे और थे एक सिद्धहस्त कवि
अटल बिहारी के व्यक्तित्व पर भी, पड़ी पिता की पूर्ण छवि
ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज से, स्नातक की शिक्षा को प्राप्त किया
छात्र जीवन से ही इन्होंने, आर.एस.एस. का दामन थाम लिया

 

राजनीति शास्त्र में एमए की शिक्षा को कानपुर से प्राप्त किया,

आजीवन विवाह बंधन में नहीं बंधुंगा, अपने मन में ठान लिया

श्यामा प्रसाद और दीनदयाल, जैसे गुरुओ का जब सानिध्य मिला,

कह सकते हैं उस दिन से ही, राजनीतिक जीवन का कमल खिला

 

 

वर्ष 1951 का समय था, जब वे भारतीय जन संघ से जुड़ गए

राजनीतिक वर्ष 1957 की लोकसभा में वे मथुरा से चुनाव लड़ गये

माना उन्हें इस चुनाव में राजा महेंद्र प्रताप से हार मिली,

किन्तु जनता के अटल समर्थन से बलरामपुर की सीट उन्हें मिली

 

 

उनकी वाक्पटुता और राजनैतिक गुणों का पंडित जवाहर को था एहसास,

बाजपाई जी बनेंगे प्रधान सेवक हो गया थाा उन्हें पूर्व ही आभास.

दीनदयाल जी के जीवन का सूर्य जब था अस्त हुआ,

जन संघ में नए नेतृत्व का उदय अटल जी जैसे सिद्धहस्त से हुआ.

 

 

वर्ष 1977 के आपातकाल का दंश भी उन्होंने झेला था,

विरोध के स्वर मुखरित करने पर विरोधियों ने उन्हें भी जेल में ठेला था

वर्ष 1977 के आम चुनाव में गठबंधन की जब बनी सरकार,

मोरारजी के नेतृत्व में अटल जी ने सम्भाला विदेश मंत्री का पदभार

 

 

वर्ष 1979 में जब गठबंधन की सरकार गिरी

अटल जी के कुशल नेतृत्व में बीजेपी की नीव पड़ी

आगे के वर्षों के आम चुनाव में

बीजेपी को जनता का पर्याप्त समर्थन नहीं मिला

विरोधियों का कहना था की

बनने से पहले ही ढह जाएगा बीजेपी का राजनीतिक किला।

 

 

आखिरकार उन्हे अपने कुशल नेतृत्व का एक अनोखा उपहार मिला।

वर्ष 1996 मे लोकतन्त्र के इस सजग प्रहरी को,

प्रधानमंत्री पदभार ग्रहण करने का सौभाग्य मिला।

किन्तु भीतरघातियों के षड्यंत्र से पूर्ण बहुमत नहीं मिला,

अंत में 16 वें दिन ही बीजेपी की सरकार गिरी।

किन्तु इस षड्यंत्र से भी नहीं हिला ये अटल गिरि।

 

 

वर्ष 1998 मे गठबंधन की फिर सरकार बनी

प्रधानमंत्री अटल ही होंगे, सब दलों की एक राय बनी

यह वही वर्ष था जब भारत मे एक नए युग का प्रारम्भ हुआ

इन्ही 5 वर्षों मे, भारत ने विकास की नयी ऊंचाइयों को छुआ।

 

 

पदभार ग्रहण करने के कुछ ही दिनों मेंं

पोखरण मे परमाणु परीक्षण कर डाला।

दुनिया की आंंखों मे न आकर भी,

भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बना डाला।

 

 

पड़ोसियों से खत्म करने बरसों की अपनी पुरानी बैर,

निकाल पड़ा ये सजग प्रहरी, दिल्ली से लाहौर तक करने सैर।

वर्ष 1999 मे सदा-ए-सरहद बस सेवा आरंभ हुई,

पाकिस्तान से रिश्तों को मधुर बनाने की फिर एक सफल शुरुआत हुई।

 

 

लेकिन पाकिस्तानियों ने फिर अपना गिरगिट रंग दिखाया था,

दोस्ती के नाम पर उसने फिर से पीठ पीछे छुरा घुसाया था।

सरहद पार करके दुष्टों ने कारगिल मे घुसपैठ किया,

न चाहते हुए भी हमने भारत के वीर सपूतों को खो दिया।

 

 

वर्ष 1998 की अटल सरकार ने चहुंओर नित नव विकास किया,

इसी पंचवर्षीय सरकार मे ही कावेरी जल विवाद सुलझाया गया,

स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना ने राष्ट्र के चारों छोरों को स्पर्श किया।

सर्व शिक्षा अभियान की शुरुआत भी इन्ही के कार्यकाल मेंं हुआ,

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से भी ग्रामीणों को लाभ हुआ।

 

 

 

वर्ष 2004 के लोकसभा चुनावों मे बीजेपी को हार मिली,

विकास पुरुष के नेतृत्व में केवल 185 सीट मिली

यही वर्ष था जब राजनीति का अटल सूर्य अस्त हुआ,

लेकर सन्यास यह अटल पथिक, अपने जीवन मे मस्त हुआ।

राजनीति से बढ़ गयी दूरी, स्वास्थ्य भी अब बिगड़ने लगी,

राजनीति का अटल पथिक अब व्हील चेयर पर निढाल हुआ,

 

 

आखिर एक दिन ऐसा आया, जब वो हम सबको छोड़ गए,

16 अगस्त का वो ऐसा दिन जब वो हम सबसे रिश्ता तोड़ गए।

कहते सुनते हैं हम सब यही की सूर्य कभी अस्त होता नहीं,

हे अटल बिहारी आप ध्रुव तारे हैं, जो अपनी चमक खोता नहीं।

 

 

आपकी वाक्पटुता और राजनैतिक गुणों का परचम सदा लहराएगा,

आप द्वारा किए गए कार्यों और प्रयासों को यह देश नहीं भूल पाएगा।

हे मातृभूमि के अजातशत्रु देश की ओर से मैं आपको प्रणाम करता हूंं,

अपना ये कविता रूपी उपहार, मैं आज आपको समर्पित करता हूंं।

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