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निशब्द में शब्द खोजने की जरुरत

Posted On: 15 Jun, 2020 Common Man Issues में

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बहुत ही दुखी हूं एक ऐसे शख्स जो ना सिर्फ एक अच्छा अभिनेता बल्कि एक अच्छा इंसान भी था, क्या दुःख या कमी रही होगी जो सुसाइड किया होगा…..कोई नहीं बता सकता , सब काल के गाल में समा गया। यही कह सकता हूं भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।  निशब्द हूं एकदम से….।

 

 

कुछ सालो से मर्द जो साधारण जिंदगी में हो, सेलिब्रिटी हो या जॉब करने वाले सुसाइड करते पाए गए हैं, ये में नहीं आंकड़े है कुछ सर्वे का जो अक्सर न्यूज में आते है और चले जाते हैं। क्या वजह हो सकती है…..ये सोचने का विषय है। क्या हमारे आस पास भी ऐसे तो नहीं है जो दिखते है बोलते है, हसंते है,, ऊपर से बहुत खुश होते है, और अंदर से खोखले होते जा रहे है, किसी ना किसी दबाव में और एक दिन फिर।

 

 

बाद में फिर हमलोग सोचते रह जाते है क्या हुआ होगा किस चीज की कमी थी, किसने क्या किया, पैसे की कमी थी क्या, वगैरह वगैरह…हज़ारो प्रश्न मन में कौंधने लगते हैं। एक कारण जो समाज में दिखता है बोल नहीं पाने का या तो समाज, परिवार, ऑफिस, सोशल फ्रेंड, अपना स्टेटस या फिनेशियल दिक्कतें और ये कारण फिर अनचाहे चीजों को जन्म देने लगी है, जिससे बाद लोग सिर्फ सोचते रह जाते है कि ऐसा क्यों।

 

 

ऐसा आदमी जो सब कुछ ठीक चलते- चलाते हुए कुछ कर बैठता है, पैसा, शोहरत, इज्जत, आगे पीछे हर समय लोग फिर भी। या इनके जैसे और भी लोग। या फिर एक साधारण इंसान ही जो अपनी लाइफ को परिवार के साथ चला रहा होता है या आईएएस या आईपीएस ही क्यों ना हो ऐसा घटना देखा गया है, और ये जारी भी है। क्यों समझने में एक पहाड़ कि तरह खड़ा रहने वाले मर्द को समझने में चूक हो जाती है। परिवार को दोस्त को या समाज को। या आसपास काम करने वाले को भी समझ में नहीं पाता है कि क्या चल रहा है।

 

 

मेरी मंशा कतई नहीं है मर्द और औरत में अंतर करने कि लेकिन कहा जाता है मर्द को दर्द नहीं होता है। फिर इतना हिम्मत होने के बाद  फिर ये भी। एक पिता एक भाई एक दोस्त और भी जो कि बरगद के पेड़ की तरह अपने परिवार उसके छाँव में चलाते रहते है अपना काम करते रहते है,, फिर अचानक से ऐसा क्या हो जाता है। कही अनचाहा दबाव, सामाज और परिवार का उम्मीद से ज्यादा कि चाहत, या सोशल साइट पर किस का किसी का नस्लीय या काम को लेकर मजाक , दवाब या और बहुत कुछ जिसे लोग आसानी से समझ सकते हैं…..फिर भी नहीं समझते है कि ऐसा तो होता ही है

सोचने का विषय हमेशा से था आज बहुत ज्यादा है
ताकि एक लोग से जुड़ी बहुत सारी जिंदगी को सुरक्षित रखा जा सके, और उस बरगद के पेड़ को भी

 

 

 

 

डिस्क्लेमर : उपरोक्त विचारों के लिए लेखक स्वयं उत्तरदायी हैं। जागरण जंक्शन किसी भी दावे या आंकड़े का समर्थन नहीं करता है।

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