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कल श्राद्ध था ....

Posted On: 1 Oct, 2015 Others में

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Alka

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कल श्राद्ध था ,
खुशबुएँ पकवानों की महका रही थी मन
यू जैसे किसी त्यौहार के
होने का अहसास था .
वो जिन्हे गुजरे कई वर्ष हो गए
उनकी याद ,में कल श्राद्ध था ||

मान्यवर आमंत्रित थे भोजन के लिए
पंडित जी के लिए भी बनाया गया
एक आसान खास था
कल श्राद्ध था ||

भोजनोपरांत दे दक्षिणा
सबको विदा करके
गौरवान्वित हर आम और खास था
कल श्राद्ध था ||

मन मेरा विचलित था
न जाने क्यों ये सब देखकर
शायद मेरे मन में विचारों का एक झंझावात था
कल श्राद्ध था ||

है नहीं वो जो इसे
देखते व् महसूस करते
उनके नाम पर आज ये
आयोजन खास था
कल श्राद्ध था ||

है हमारे आसपास
कितने ही बेबस और लाचार
खाने को न एक दाना भी जिनके पास था
कल श्राद्ध था ||

जो भरे पेट हैं वो
बांध कर ही ले जायेंगे
भूखों का जो पेट भरता
वो होता एक मधुर अहसास था
कल श्राद्ध था ||

जो न होक भी हमारे
साथ हर पल है सदा
उनके आदर्शों से ये जीवन
कुछ प्रकाशित होता तो
हाँ सही अर्थों में होता

वही सच्चा श्राद्ध था
हाँ वही सच्चा श्राद्ध था||

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